देर रात की शिफ्ट के बाद घर लौटते हुए, पत्नी यह देखकर हैरान रह गई कि उसका पति अपनी मालकिन के बगल में गहरी नींद में सो रहा है। वह चुपचाप बैठी रही, किसी संतोषजनक नतीजे का इंतज़ार कर रही थी…
देर रात की शिफ्ट के बाद जब मारिया अपने घर लौटी, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच उसी घर के अंदर उसका इंतज़ार कर रहा है।
नई दिल्ली के लुटियंस इलाके में बने उनके बड़े और खूबसूरत घर के बाहर सब कुछ हमेशा की तरह शांत था। रात के लगभग दस बज रहे थे। सर्द हवा में पेड़ों की पत्तियाँ हल्के-हल्के सरसराती थीं। मारिया ने कार पार्क की, अपने कंधे पर बैग ठीक किया और धीरे-धीरे मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ी।
आज का दिन उसके लिए खास था।
AIIMS अस्पताल में लगातार कई घंटे की नाइट शिफ्ट करने के बाद भी उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। थकान थी, लेकिन दिल में एक छोटी-सी खुशी भी थी। आखिर आज उसकी और अर्जुन की शादी की दसवीं सालगिरह थी।
उसने अपने बैग में रखा छोटा सा गिफ्ट बॉक्स हल्के से छुआ।
उस बॉक्स में एक बेहद महँगी पाटेक फिलिप घड़ी थी—जिसके पीछे खुदा हुआ था:
“Maria & Arjun – Forever.”
मारिया ने सोचा था कि वह घर जाकर अर्जुन को सरप्राइज़ देगी। शायद वह जाग रहा होगा… शायद उसने भी कुछ प्लान किया होगा।
लेकिन जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसे कुछ अजीब लगा।
घर में असामान्य सन्नाटा था।
ना टीवी चल रहा था।
ना किचन से कोई आवाज़।
ना अर्जुन की हँसी।
बस दीवार पर लगी पेंडुलम घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक…
मारिया ने जूते उतारे, अपना बैग सोफे पर रखा और धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगी।
हर कदम के साथ उसके दिल में एक अनजानी बेचैनी बढ़ रही थी।
ऊपर पहुँचकर उसने देखा—बेडरूम का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं था। हल्की पीली रोशनी बाहर आ रही थी।
मारिया ने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया।
और उसी पल उसकी दुनिया रुक गई।
बिस्तर पर अर्जुन सो रहा था।
लेकिन वह अकेला नहीं था।
उसकी बाँहों में एक औरत थी—जिसे मारिया ने पहले कभी नहीं देखा था।
दोनों गहरी नींद में थे।
पतली चादर नीचे खिसक चुकी थी, जिससे उस औरत का कंधा साफ दिखाई दे रहा था। कमरे में दो लोगों की शांत साँसों की आवाज़ थी—जैसे वे किसी मीठे सपने में खोए हों।
कुछ सेकंड तक मारिया दरवाज़े पर ही खड़ी रह गई।
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
किसी औरत के लिए यह पल शायद तूफ़ान बन जाता—चीख, आँसू, गुस्सा।
लेकिन मारिया ने कुछ भी नहीं किया।
उसकी आँखों में अचानक एक अजीब सी ठंडक उतर आई।
वह बिना आवाज़ किए मुड़ी… और नीचे लिविंग रूम में चली गई।
वहाँ से उसने एक भारी नक्काशीदार कुर्सी उठाई।
धीरे-धीरे वापस बेडरूम में आई।
और वह कुर्सी बिस्तर के सामने रख दी।
फिर वह चुपचाप उस पर बैठ गई।
उसकी बाहें सीने पर क्रॉस थीं। आँखें सीधे बिस्तर पर टिकी थीं।
कमरे में सिर्फ पेंडुलम घड़ी की आवाज़ गूँज रही थी।
टिक… टिक… टिक…
समय गुजरता रहा।
एक घंटा।
दो लोग अब भी सो रहे थे।
और उनके सामने बैठी एक औरत—अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फैसला सोच रही थी।
लेकिन उन्हें अभी तक इसका अंदाज़ा भी नहीं था।
और जब अर्जुन की आँख खुलने वाली थी…
तो वह दृश्य ऐसा था जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा।
👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu