ए ज़िंदगी....
ए ज़िंदगी, क्या रंग दिखाए तूने,
हर कदम नए रंगों से खेलना सिखाया तूने।
हर मोड़ पर नई मुश्किलों से मिलाया तूने,
पर साथ ही सच्चाई का आईना भी दिखाया तूने।
मुझे पता है, तू हर रोज़ मुझे आज़माएगी,
पर मैं भी कहाँ हार मान कर रुक जाऊँगी?
बस एक बात तू भी याद रखना ऐ ज़िंदगी,
एक दिन ऐसा आएगा, जब मैं भी मुस्कुरा कर कहूँगी—
"ए ज़िंदगी, क्या रंग दिखाए तूने!"