कुछ रातें इंसान की जिंदगी बदल देती हैं…
और एक रात ऐसी भी थी
जिसने मुझे अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था। 🌙
आज भी उस हादसे से जुड़ी हर आवाज़, हर एहसास, हर याद
दिल को काँपने पर मजबूर कर देती है।
लोग कहते हैं वक्त सब ठीक कर देता है…
पर कुछ दर्द वक्त के साथ बस चुप हो जाते हैं, खत्म नहीं। 💔
उस रात शायद मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होना था…
मैं खुद भी हार चुकी थी।
थक गई थी खुद से लड़ते-लड़ते।
लोग दुनिया से लड़ते हैं,
और मैं आज तक अपने ही मन से लड़ रही हूँ।
मुझे आज भी याद है—
मेरे काँपते हुए वो शब्द…
“पापा… कान्हा…” 🥀
और पापा की टूटती हुई आवाज़—
“बेटा, अगर तेरा कान्हा सच में होता…
तो तुझे इस हाल में कभी नहीं छोड़ता…”
माँ की आँखों से आँसू ऐसे गिर रहे थे
जैसे बारिश अपना दर्द ज़मीन पर उतार रही हो…
और मेरा भाई मेरा हाथ ऐसे पकड़े बैठा था
जैसे डर रहा हो कि कहीं मैं उसे छोड़ ना दूँ।
लेकिन पता नहीं क्यों…
उस टूटते हुए पल में भी
मेरे अंदर कहीं एक विश्वास जिंदा था। ✨
मैंने बस इतना कहा था—
“वो आएगा पापा…
मैं टूट नहीं सकती…
मुझे कुछ नहीं होगा…” 💙
शायद उसी विश्वास ने मुझे वापस लौटा दिया।
आज भी बिखरती हूँ…
डरती हूँ…
रोती हूँ…
लेकिन फिर भी हर बार खुद को समेटने की कोशिश करती हूँ।
क्योंकि शायद मेरा कान्हा अभी भी चाहता है
कि मैं हार ना मानूँ… 🌙