दृश्य के साथ गजल
बारिश के दिन चांदनी अंधेरी रात
और सड़कों के किनारे दौड़ते हुए लाइट
कुछ घरों से दूर एक घर
एक लड़का जो बैठा है
अपनी जिंदगी की खुशनुमा पलों में
वो अपने बरांदे मे चेयर पर
अपने वाऐ पाऊ पे दाई पाऊ रखते हुए बढ़िया आराम से बैठा है
वही बाहर तेज बारिश हो रही है
वह चेयर पर बैठते हुए
अपने हाथों में रखी हुई पेन से
कॉपी की तरह देखते हुए कुछ लिख रहा है
और अभी अचानक वह नजर उठा कर बारिश की तरह देखा है और वह बारिश की तरह दिखते ही
वो मुस्कुराता है
और वह अचानक से उस पेन को उसी कॉपी के बीच में
रखते हुए
उठ खड़ा होता है
वही सामने रखी टेबल पर एक और कॉपी होती है
जिस पर उसकी नजर जाता है
और हल्के झुकते हुए
वह धीरे-धीरे अपने हाथ नीचे करता है
और उसकॉपी और पेन को उसी टेबल पर साइड में रखता है
और अचानक हल्के हाथ बढ़ाकर
उसी टेबल पर रखी हुई एक और
कॉपी को उठना है
और उठते ही उस कॉपी को पलटते हुए
उस कॉपी से एक पन्ना फार कर निकलता है
और फिर इस कॉपी को वही रखते हुए
वो और खुशी-खुशी उस पाने से एक नाऊ बनता है
और नाऊ बनते ही
वो चलकर बरांडे के किनारे आता है
और वो वहां बैठते हुए
तेज बारिश में अपने हाथ बड़ाते हुए
अपने बनाए हुए नाऊ को बारिश की पानी में वहां देता है
बिना सोचे कि उसने उसे पन्नों में क्या लिखा था
उसने देखा भी नहीं
बस वह खुश था उस वक्त नाऊ को पानी में बहते देखा
वह मुस्कुराते हुए
आपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए
अपनी नाऊ को अपने द्वारा से बेहे कर सड़क की तरफ जाते हुए देख रहा है
गजल
थी कहां तुम्हारे जिंदगी में मैं
हमसफर की तरह
थी बस एक ग़ज़ल की तरह
किसी शाम बैठकर तुमने लिखा था
एक डायरी में मुझे
एक मदहोशी सी धड़कन ने मुझे छुआ था
एक एहसास हूं मैं
जो कभी तुम्हें हुआ था
आदतें नहीं मैं तुम्हारी
जो मैं तुम्हारे संग रह जाऊं
किसी दिन भूलकर तुमने डायरी से वही पन्ना फार कर
कागज के नाऊ बनाकर बारिश में बहा दिया
बस तुम खुश थे
छोटे बच्चों की तरह कागज की नाऊ से बारिश में खेलते हुए
तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल
तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल
जो दे तू मुझको गम
शौक से ले जाऊं
मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं
हा मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं
ऊपर लिखी गई दृश्य
बस एक नाटक्या
इस ग़ज़ल की असली कहानी नहीं
गजल के अंदर कोई है जिसे दर्द हो रहा है
पर वह शिकायत नहीं कर रही
वह खुश है उसे खुश देख कर
पर वो गजल नहीं है
उसकी जिंदगी में ग़ज़ल की तरह ही है