*बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -276*
11-7-26- शनिवार- *गुलरया* (मन में गाली देना)
संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
*प्राप्त प्रविष्ठियां :-*
*1*
धौंस गुलरया में गुँजा, खूब झाड़वें शान l
शाबाशी जिनखों हँसी, सुनबे लगतें कान ll
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-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
*2*
कुबढाइ जब जबर करै, कोऊ कछु ना केत।
अगर लरम साजी कबै, सबइ गुलरया देत।।
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-विशाल कड़ा “मांझी”,बडोरा घाट
*3*
भनक लगी जब मंथरा, राजतिलक श्रीराम।
बता गुलरया कें दऔ, कैकइ सुत कौ नाम। ।
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- रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां
*4*
खूब गुलरया रय बलम, दारू पी कें रोज।
धीरें-धीरें दव मिटा, पूरे घर कौ खोज।।
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- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
*5*
पैसा रुपया लै भगे, राम लला के नाम।
गुलरयात सबरे फिरैं, भड़यन को जो काम।।
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-डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल
*6*
उयै चिनूना काट रय, जांनत है सब गाँव।
धरो जनम कौ गलरया, कोई न लेबै नाँव।।
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- डॉ. देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
*7*
कुबढ़ाई में जो फसौ,झंझट ऊके संग।
इक दिन उड़ ही जायगौ,मौड़े कौ सब रंग।।
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-प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला
*8*
काम बनै नै जौंन सैं, मतलब होय न सिद्ध।
मौन गुलरया कैत सब, कउआ कुत्ता गिद्ध।।
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- अमर सिंह राय, नौगांव
*9*
मन माँ देत गुलरया, बाहर हँसे सुहाय।
कपटी मन के चाल सों, नेह न कबहुँ निभाय॥।
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- डॉ. महावीर पूर्णिया
*10*
अरे गुलरया छोड़ दै,आदत जा बेकार।
गुससां पूरौ गांव है,जलदीं करौ सुधार।।
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- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
*11*
खीज भरे छाती जला , दांतन खौं दे मीस |
गटा निकारत लाल है , भरत गुलरया हीस ||
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-सुभाष सिंघई, जतारा
*12*
बुरौ गुलरया होत है, साप करौ सब बात।
मन मै जो खुन्नस भरी, बोलें सैं मिट जात।।
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-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
*13*
बेइ जन गुलरया करें, तन धन तें कमजोर।
जे सशक्त मुँह में कहें, पटकें सकत मरोर।
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-रामलाल द्विवेदी प्राणेश, कर्बी
*14*
कहौ काम की जो कजन, सुनें न एकउ बात।
नार गुलरया ढोलती, तुरत बायरें जात।।
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-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
*15*
दूर गुलरया सैं रओ, करहे मन बेचैन।
मुशकल से कटवै समव, ऐसे हों दिन रैन।।
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-श्यामराव धर्मपुरीकर, गंजबासौदा
*16*
बुलयावें हंँस-हँस धना,बोल गुलरया बोल ।
गालन गड़कुलियाँ परैं,कहें दबा कें पोल ।।
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-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
*©संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़