गीत
अगर आजाद मन तुम्हारा है तो
आजादी के पीछे भागे
दुनिया उसका कुछ ना लगे
वह खो गए खुद में बावड़ी
नादान मन का
रास्ता लंबा कंकरो भरी
उड़ने की मन में चाहा बरी है
उड़ान भर्ती गिरती पड़ती
फिर भी ना ठहेरती ना हीं संभालती
बस जिद्द ऊड़ जाने की
उसे पागल कर रही
कैसे समझाऊं उस नादान लड़की को
उसके बेकरारी बेचैनी वह भी ना जाने
कैसे बताऊं मैं उसे
वह जानती है या नही
जिस रोग की दवाना नही
वह रोग लगाए बैठी है वह
आजादी नींद छीन लेती
आजाद कि रहा शगुन नहीं देती
आजादी मांगती है लहू
और जिद्द से भरी परिश्रम तेरी
जो तू करती रही
दुनिया से पहले खुद से ही लड़ती रही
आजादी को ढूंढते फिरे
नादान मन भागते फिरे
इस उम्मीद में कड़ी परिश्रम करते फिरे
उसके बाजू में कोई पंख आ कर लग जाए कहीं से
और वो उड़ जाए झट से
नादान मन का
आसमा दूर कहीं
आसमा देख देख के
जो उड़ने की ख्वाहिश पनपे मन में
यह ख्वाहिश उसे पागल करती है
उसे और उसके ही जिद्दो जहेद घायल करती है
इस पागलपन में बिखरी हुई मन में भटक रहना कोई
कोई किनारा नहीं
यह दुनिया विशाल समुद्र डूबता हुआ
वह अपनी मन की ही अंदर
जूज जुज कर उठ खड़ी होती है
उसके दिलों के तर्पण होठों से आह भरती है
कोई बचा ले कोई संभाले यह उम्मीद नहीं
उसके बाजू में कोई पंख निकल आए
बस यही दुआ
मैं भी करता उस पागल लड़की के लिए
यही दुआ
पंक्तियां
दुआ भी तभी तो कबूल हो
जब खुद हो
काश दुआ कबूल हो
इस जहां में कोई तेरे लिए भी खुदा हो
और
अगर ना हो तो तू खुद की खुद खुदा हो
मन में उड़ने की चाहत है
आजाद ख्याली मन है
और दर्दे से भरी तुम हो
और कांच और पत्थर कांटों से भरी दुनिया
तुम्हें और चोट लगेगी
तुम्हारी निकलते हुए पंखें
निकलने से पहले ही जख्मी कर दिया जाएगा
पर यही दुनिया कहते हैं
जिस की हर रोम रोम आजादी में रम गया है
तो
दुनिया की कौन से जंजीरें तुम्हें रोक सकता है
निकलते हुए पंख जख्मी होने के बावजूद भी
निकाल आएंगे
और फिर एक दिन हरी भरी होकर
तुम्हारे बाजू को सहारा देंगे
और दौड़ते हुए तुम आसमान की ओर उड़ परोगी
तुम्हें यकीन करना होगा
यह आसमान तुम्हारा है तीनों जहां तुम्हारा है
अगर आजाद मन तुम्हारा है तो