चूसें जो रस फूलों से
प्रकृति के नजारों से,
शोखियों और नजाकत से
इठलाती इतराती सी एक
तितली !
मधुर मधु से सजाती है
मधुमक्खी ! अपना घर
मधुर मधु टपकाती है,
हर दम -हरपल,,
जिस पल भापे वो खतरा
डंक छुपा देती अपना
है अजब रिश्ता दोनों का
ही फूलों से,
एक सहेजें फूलों का रस!
दूसरा चूस के उड़ जाता
हैं,,। शुभ मनिका ✍️