क्या मैच फिक्सिंग को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता ?
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यदि मैच फिक्सिंग को कानूनी कर दिया जाए तो धीरे धीरे मैच फिक्सिंग कम होती चली जायेगी, और एक बिंदु के बाद यह पूरी तरह से बंद भी हो सकती है।
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कुछ चीजे ऐसी होती है, जिनका धंधा प्रतिबन्ध पर ही टिका होता है। शराब, तम्बाकू, अफीम, गांजा, जुआ, वैश्यावृति और मैच फिक्सिंग इसी तरह की चीजे है। इन्हें प्रतिबंधो से कभी भी रोका नहीं जा सकता। तो सरकारें इन धंधो से हफ्ता वसूलने के लिए प्रतिबन्ध लगाने का नाटक करती है। प्रतिबन्ध लगाने के बाद अधिकारी-नेता-जज आदि इस धंधे के कारोबारियों एवं उपभोक्ताओं से हफ्ता लेना शुरू कर देते है।
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सरकारें डाकू गब्बर सिंह की तरह लोगो को लूटने के लिए बंदूक का इस्तेमाल नहीं करती है। वे इसके लिए कानूनों का इस्तेमाल करते है। और क्रिकेट में काफी पैसा है।
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समाधान : मेरे विचार में सरकार को मैच फिक्सिंग को कानूनी करने के लिए गेजेट में निचे दी गयी इबारत छापनी चाहिए :
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यदि कोई व्यक्ति यह आरोप लगाता है कि अमुक मैच फ़िक्स था, तो इस आरोप पर कोई FIR या शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी। यदि कोई खिलाड़ी मैच फिक्सिंग करता है तो यह पूरी तरह से कानूनी होगा, और उसे भारत के किसी भी न्यायालय या सरकारी संस्था द्वारा दण्डित नहीं किया जा सकेगा।
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इससे क्या बदलाव आएगा ?
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जब यह तय हो जाएगा कि अब मैच फिक्सिंग को आरोप नहीं बनाया जा सकता तो क्रिकेट पर पैसा लगाने वालो को यह सही शुबहा होने लगेगा कि ज्यादातर मैच फिक्स है, और मैंने यदि पैसा लगाया तो यह डूब जाएगा। इससे सट्टा लगाने वालो की संख्या में कमी आएगी।
सट्टा लगाने वालो की संख्या गिरने से सटोरियों ( आयोजको ) की कमाई गिरने लगेगी, और वे क्रिकेट को प्रोत्साहित करने के लिए कम पैसा खर्च कर सकेंगे।
पैसे का बहाव कम होने से कम लोग क्रिकेट देखेंगे, और इससे दर्शक संख्या और भी घट जायेगी। दर्शक घटने से खिलाड़ी सस्ते में बिकने लगेंगे, और फिक्सिंग के लिए टके टके पर मिलने लग जायेंगे। और इससे फिक्सिंग में मुनाफा नहीं रह जाएगा।
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दुसरे शब्दों में जल्दी ही युवा वर्ग इस तथ्य से सूचित हो जाएगा कि सभी खिलाड़ी फिक्सर है। क्रिकेट के आयोजक पहले दौर में यह साबित करने की कोशिशे करेंगे कि हम सभी लोग पूरी तरह ईमानदार है और किसी भी मैच में कोई धोखा धड़ी नहीं कर रहे है। किन्तु युवा उनकी बात सुनना बंद कर देंगे। दुसरे शब्दों में जल्दी ही यह बात कॉमन नोलेज में आ जायेगी कि सभी मैच फिक्स होते है।
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यह 1999 के आस पास की बात है जब क्रोनिये ने कैमरों के सामने स्वीकार किया था, कि उसने मैच फिक्सिंग की थी। उसने लगभग दर्जन भर खिलाडियों के भी नाम बताए थे जिन्होंने पैसे लिए थे।
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तब क्रोनिये की विश्वसनीयता बहुत ज्यादा थी। वाकयी में काफी ज्यादा। इस स्केंडल में लगभग आधा दर्जन भारतीय खिलाड़ी भी चपेट में आए थे। लेकिन भारत में क्रिकेट को बचाने के लिए पेप्सी रत्न सचिन को बचाना जरुरी था, और वे उसे निकाल भी ले गए। बहरहाल, मेरा मानना है कि, यदि हमें फिक्सिंग रोकनी है तो इसे कानूनी कर देना चाहिए।
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क्रिकेट पर और विवरण आप यहाँ भी पढ़ सकते है - https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/posts/1512807665758972/
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