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New bites

Log kehte hain, ladki hai, kya hi kar payegi,
Khud ko sambhalna nahi aata, kya hi ukhaad payegi.
Paisa kaise kamaya jaata hai, kya hi jaan payegi,
Ladki hai, kamzor hai — kuch bhi na kar payegi.
Lekin wahi ladki hai jo sab kuch kar jaati hai,
Thak kar bhi har bojh muskurakar uthati hai.
Khud ko sambhalti hai, khud ko bachati hai,
Akele hi apni zindagi bhi jee jaati hai.
Kai kaam hain jo ladke bhi na kar paate,
Par ladkiyaan unhe chutki mein nibha jaate.
Aurat wo taakat hai jo akeli hi sab kar jaaye,
Har mushkil mein khud apna raasta banaye.
Aur sach to yeh hai —
Mard ke jeevan mein agar aurat na ho saath,
To ek pyali chai bhi ban jaaye unke liye ek bada sawaal.

niti21

ક્યાં સહેલું છે રામ બનવું?
ભાઈઓ ખાતર જતું કરવું!
લેવો જન્મ એક રાજકુળમાં,
ને લેવી શિક્ષા એક ગુરુકુલમાં!
હોય સાહ્યબી મહેલમાં,
ને કરવી પડે ચાકરી ગુરૂજનોની આશ્રમમાં!
રાખવા માન પિતાનાં વચનનું,
જાળવવા પરંપરા રઘુકુળની,
હસતાં મોંએ સ્વીકારવો વનવાસ!
શું સુંદર વનવાસ કર્યો રામે!!!
હતો ગૃહત્યાગ અને રાજત્યાગ,
પણ બન્યો એ જીવોનો ઉદ્ધારક!!!
હોય તાડકા કે માતા અહલ્યા,
કે હોય શબરીમાતા,
કર્યો ઉદ્ધાર સૌનો,
આવ્યાં જે જીવ મારગમાં!!!
કરું હું વંદન એ દિવ્યાત્માને,
બોલો સૌ સાથે મળીને,
જય જય શ્રી રામ🙏

s13jyahoo.co.uk3258

Let's take a look at the divine moments from the Stop N Stay-2 Khatmuhurat 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/zybYA2Zq

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dadabhagwan1150

क्या आपने कभी जज को वकील के माध्यम से पैसे देकर कोई फैसला लिया है ?
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जजों के भ्रष्टाचार की बात करना भारत में गैर कानूनी है। अत: इस सवाल का जवाब कोई भी आपको ठीक से नहीं देगा।
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भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्ट महकमा अदालतें है। एक तरह से अदालतें भ्रष्टाचार की गंगोत्री है। देश के सारे प्रकार के हर स्तर के भ्रष्टाचार की जड़ में भ्रष्ट जज बैठे है। जब जजों का भ्रष्टाचार नागरिको के सामने आने लगा तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने ईमानदार होने का एक बेहद सीधा और आसान तरीका निकाला। उन्होंने "न्यायपलिका की अवमानना" का कानून छापकर जजों के भ्रष्टाचार पर तबसरा करने को गैर कानूनी बना दिया। और इस तरह एक झटके में भारत के जज फ़रिश्ते बन गए !!
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मेरी मान्यता है कि --
भारत की सुप्रीम कोर्ट के 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 10% निकम्मे है एवं उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
हाई कोर्ट के 80% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 20% निकम्मे है, और उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
निचली अदालतों के 70% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। और उन्हें भारत की अदालते सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
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अमूमन एक कार्यकर्ता के तौर पर मैं उस व्यक्ति को सिरे से खारिज कर देता हूँ, जो जजों के भ्रष्टाचार पर अपना रूख साफ़ नहीं करता या जजों के भ्रष्टाचार पर बोलने से कतराता है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर बोलता है तो उसे सबसे पहले जजों के भ्रष्टाचार पर बोलना चाहिए। क्योंकि जब तक जजों का भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा तब तक किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में कमी नहीं लायी जा सकती।
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समाधान ?
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जूरी सिस्टम
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यदि भारत में जूरी सिस्टम लागू कर दिया जाता है तो मेरा मानना है कि सिर्फ अगले 3 महीने देश में हर प्रकार के भ्रष्टाचार में 80% तक की गिरावट आ जाएगी। जूरी सिस्टम के अलावा मैं जजों के भ्रष्टाचार का कोई समाधान नहीं देखता। हाँ , थोडा आंशिक सुधार जजों पर वोट वापसी प्रक्रियाएं लागू करके भी लाया जा सकता है। अन्य कोई मार्ग नहीं।
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मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ कि कैसे निरंकुश जजों का भ्रष्टाचार देश की बैंड बजाता है, और कैसे वोट वापसी इसमें सुधार लाता है।
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2016, कैलिफोर्निया के जज एरोन पर्सकी को नागरिको ने वोट वापसी क़ानून का प्रयोग करके निकाल दिया था। दरअसल एक 20 वर्षीय युवक ने नीम बेहोश युवती के साथ बलात्कार किया था, और नागरिको की जूरी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद पर्सकी ने उसे सिर्फ 6 माह की सजा दी थी !! टर्नर पर जो आरोप साबित हुए थे, उनमे उसे 14 वर्ष तक की सजा दी जा सकती थी , किन्तु पर्सकी ने सिर्फ 6 माह की टोकन सजा दी !! पर्सकी 80 सालो में पहले जज थे, जिन्हें नागरिको ने वोट वापसी के अधिकार का प्रयोग करके पद से बर्खास्त कर दिया था।
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California Voters Remove Judge Aaron Persky, Who Gave a 6-Month Sentence for Sexual Assault
Aaron Persky, the California judge who drew national attention in 2016 when he sentenced a Stanford student to just six months in jail for sexually assaulting an unconscious woman, was recalled on Tuesday, according to The Associated Press. He is the first judge recalled in California in more than 80 years.
With nearly all precincts reporting on Wednesday, just under 60 percent of voters were in favor of removing Judge Persky from the Santa Clara County Superior Court, where he had served since 2003. Cindy Hendrickson, a prosecutor, was elected to replace him.


चित्र में आप इस भ्रष्ट जज को देख सकते है जो मतदान के दिन तख्ती लेकर नागरिको से अपील कर रहा था कि उसे नौकरी से निकालने के लिए वोट न करें !!
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तो इस तरह वोट वापसी का प्रयोग करके अमेरिका के नागरिक नेता-पुलिस एवं जजों को चेतावनी देते रहते है, ताकि अन्य नेता-जज-अधिकारी ईमानदार बने रहे। इस कहानी में एक सबक यह भी है कि लोग सब जगह एक ही जैसे होते है। चाहे भारत हो या अमेरिका। जिसे भी आप निरंकुश ताकत देंगे, वो अपना रंग दिखाने लगेगा। जब तक उन पर डंडा तना रहेगा तब तक ही वे ठीक से काम करते है।
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जजों को ईमानदार बनाए रखने का यह बेहद सरल एवं निरापद तरीका है - एक भ्रष्ट जज को दंड दो , ताकि उसका हश्र देखकर अन्य जज तमीज में काम करने लगे।
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और भारत का हाल आपको मालूम ही है। सारा जोधपुर जानता है कि, सलमान ने हिरण मारे थे, और इसके भर भर के सबूत मौजूद है। और सारा मुंबई जानता है कि उस रात दारु पीकर गाड़ी दबंग खान ही चला रहा था। जिन सबूतों के आधार पर सेशन जज ने सलमान को सजा सुनाई, उन्ही सबूतो के आधार पर हाई कोर्ट जज ने सलमान को बरी कर दिया। निचोड़ यह है कि, अदालत में सबूत कोई मायने नहीं रखते। मायने यह रखता है कि क्या जज किसी सबूत को सबूत मानने को राजी है या नहीं।
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सारा मामला जजो के विवेक यानी कि उन्हें दी गयी घूस पर टिका हुआ है, न कि जिरह और सबूतों पर !! भ्रष्ट जजो को नौकरी से निकालने और दंड देने की शक्ति जब तक नागरिको के पास नहीं आएगी, जज इसी तरह के काण्ड करते रहेंगे।
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भारत में वोट वापसी क़ानून लाने के लिए हमें जो इबारत गेजेट में छपवाने की जरूरत है उसका प्रस्तावित ड्राफ्ट निचे दिए गए लिंक पर देखें। यदि ये इबारत गेजेट में छाप दी जाती है तो भारत के प्रत्यके नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी और उन्हें वोट वापसी लेने का अधिकार मिल जाएगा।
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प्रस्तावित वोट वापसी पासबुक

sonukumai

“वयं क्षत्रियाः स्मः।
अस्माकं कृते श्रीरामः केवलं भगवान् न,
अपितु परमः आदर्शः अस्ति।
यः क्षत्रियधर्मस्य रक्षकः,
यः धर्माय खड्गं उद्यमितुं जानाति,
मर्यादायै च शिरः नमयितुं अपि।
सः एव अस्माकं मार्गदर्शकः, प्रेरणास्त्रोतः च।
जय श्रीरामः॥”🚩🙏🏻

aarushisinghrajpute

रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं.. 🙏🙏

arunkumargupta452gmail.com047232

Hamesha Bade Sapne Dekho

nishadawad

जय श्री राम 🙏🙏

sonishakya18273gmail.com308865

Good morning friends have a great day

kattupayas.101947

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947

માતૃભારતીના વાંચકોને રામનવમીની હાર્દિક શુભ કામનાઓ.અહીં એક રામ ભજન ની લિંક આપી છે જરુરથી સાંભળશો.https://youtu.be/NTCdK7Qb_1E?si=z5TCthjO7tThig7L

amiralidaredia175421

#श्रीरामनवमी -काव्यपुष्प💐

arunvdeshpande

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर हार्दिक अभिनंदन। 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

माॅ महागौर्यै नमः।🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मुझे Matrubharti से Golden Badge प्राप्त हुआ है ❤️
यह मेरे लिए सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि मेरी लेखन यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मैं अपने सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद करती हूँ, जिनके प्यार और समर्थन से यह संभव हो पाया 🙏
#matrubharti #achievement #writing #storytelling

https://www.matrubharti.com
मुझे मातृभारती पर फोलो करें

jhakajal

“तुझे चाहा है ऐसे जैसे हक़ हो मेरा,
कोई और देखे तुझे ये भी मंज़ूर नहीं मेरा…
मोहब्बत है तुझसे, पर थोड़ी सी ज़िद भी है,
तू सिर्फ मेरी है—ये दिल का फ़ैसला भी है…”

sonambrijwasi549078

દોસ્ત! ખુદમાં વસતા રાવણને હરાવી રામ ને જીવંત કરો ત્યારે ખરી રામનવમી.

રામનવમી પર્વની માતૃભારતી પરિવારના દરેક સદસ્યને ખૂબ ખૂબ શુભકામના 🙏🏻

falgunidostgmailcom

મર્યાદા પુરુષોત્તમ પ્રભુ શ્રીરામના જન્મોત્સવની આપ સૌને હાર્દિક શુભકામનાઓ 💐🙏
🙏શ્રીરામ જય રામ જય જય રામ🙏
🙏🚩જય શ્રીરામ 🚩🙏
🚩સનાતન ધર્મકી જય 🚩

jighnasasolanki210025

1M સુધી પહોંચાડવા બદલ...
આભાર સહ
Matrubharti ની પૂરી ટીમ, અને
સૌ વાચક મિત્રોને મારા પ્રેમ અને લાગણીભર્યા, દિલથી નમસ્કાર🙏

shaileshjoshi0106gma

રામ નવમીની સૌને શુભકામનાઓ 🚩🏹

રામ - આ બે અક્ષરના નામમાં જાણે સમગ્ર જગત સમાઈ ગયું હોય એવું લાગે.

રામ એટલે મર્યાદા અને સંયમનો પર્યાય.
અખૂટ શક્તિ પણ સંયમ ભારોભાર.
મુખ પર છલકાતું મૌન સ્મિત.

આદર્શ રાજાનું ઉત્તમ ઉદાહરણ.
જ્યાં છળ કપટનું નામોનિશાન નહીં.
જેનું યુદ્ધ પણ નિયમોનુસાર આદર્શ હતું.


*"ચૌદ વર્ષ, વન પણ જાણે વૈકુંઠ બની ગયું હતું."*

પ્રકૃતિના દરેક જીવો તેનો પરિવાર બની ગયા હતા.

- વિશાખા મોઠિયા

mothiyavgmail.com3309

Good morning friends..

kattupayas.101947

यदि पीएम जूरी कोर्ट का प्रस्तावित कानून गेजेट में छाप देता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक बता कर रद्द कर देता है, तो क्या किया जा सकता है ?
https://hi.quora.com/q/gtevjihzvzgehiip/जूरी-कोर्ट-शेषन-हायर-सुप्रीम-कोर्ट-में-जूरी-अदालतो-की-स्थापना
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जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून की कोई भी धारा भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद एवं भारत में लागू किसी भी क़ानून की किसी भी धारा का उलंघन नहीं करती है। यहाँ तक कि पीएम को जूरी कोर्ट गेजेट में निकालने के लिए लोकसभा की अनुमति लेने की भी जरूरत नहीं है। पीएम इस पर हस्तक्षर करके सीधे गेजेट में छाप सकता है। किन्तु यह तकनिकी बिंदु है, व्यवहारिक नहीं।
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व्यवहारिक बिंदु यह है कि यदि पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छापता है तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों के पास इस क़ानून को खारिज करने की विवेकाधीन शक्ति है। और इसीलिए यह तय है कि कोई न कोई बहाना बनाकर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज इसमें अडंगा जरुर लगायेंगे।
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और तब पीएम निम्नलिखित में से कोई या क्रमिक रूप से सभी कदम उठा सकता है :
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(i) पीएम गेजेट में सुप्रीम कोर्ट जज पर वोट वापसी की प्रक्रिया छापेगा। वोट वापसी आने के बाद भारत के नागरिक अमुक सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल कर किसी ऐसे व्यक्ति को यह नौकरी दे देंगे जो जूरी कोर्ट क़ानून में अडंगा नहीं लगाए।

(ii) यदि सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्ट जज वोट वापसी का क़ानून भी ख़ारिज कर देता है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज के खिलाफ संसद में महाभियोग लाएगा। पीएम महाभियोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को नौकरी से निकालकर अपने किसी भी वफादार को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है।

(iii) यदि महाभियोग गिर जाता है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के माता-पिता, पुत्र-पुत्री, भाई-भतीजो आदि के खिलाफ सीबीआई लगाकर उलटे सीधे मुकदमे कायम करेगा और उन्हें जेल में डाल देगा। पीएम इसके लिए लोकसभा के प्रस्ताव का इस्तेमाल करेगा। ज्ञातव्य है कि लोकसभा को यह शक्ति है कि वह देश के किसी भी व्यक्ति को बिना कोई मुकदमा चलाये जेल में डाल सकती है। और इसकी अपील अदालत में नहीं की जा सकती।

(iv) पीएम गेजेट में जनमत संग्रह की प्रक्रिया छापेगा, और देश के सामने यह प्रश्न रखेगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए। यदि 51% मतदाता जनमत संग्रह में “हाँ” दर्ज कर देते है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को निकाल देगा। जनमत संग्रह में यदि कोई प्रस्ताव पास हो जाता है तो फिर उसे लोकसभा या राज्यसभा द्वारा रोका नहीं जा सकता।

(v) यदि जनमत संग्रह के पास होने के बावजूद सांसद इसमें अडंगा करते है तो पीएम सांसदों पर वोट वापसी का क़ानून छापेगा ताकि नागरिक जूरी कोर्ट का विरोध कर रहे सांसदों को निकाल कर नए सांसद भेज सके।

(vi) यदि सांसद वोट वापसी के दायरे में आने से इनकार करते है तो पीएम लोकसभा भंग करके नए चुनावो की घोषणा करेगा। नए चुनावों में वे सभी सांसद हार जायेंगे जो जूरी कोर्ट के विरोध में थे, और वे प्रत्याशी जीत कर संसद में जायेंगे जो जूरी कोर्ट के समर्थन में है।

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ये सब सीधे तरीके है। इसके अलावा पीएम टेढ़े तरीको का इस्तेमाल करके भी सुप्रीम कोर्ट जज को काबू कर सकता है :
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पीएम इमरजेंसी का प्रस्ताव पास करेगा, और सुप्रीम कोर्ट बंद करवा देगा। आपातकाल लगाने के बाद पीएम जीतने मर्जी उतने क़ानून छाप सकता है और सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों का रिव्यू नहीं कर सकता। आपातकाल लगाने के बाद पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को उसके रिश्तेदारों के एनकाउन्टर वगेरह करने की धमकी भी दे सकता है। पीएम के पास पुलिस और मिलिट्री होती है।
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अत: यदि पीएम बल प्रयोग करने पर आये तो सुप्रीम कोर्ट जज को 2 मिनिट में ठिकाने कर सकता है। हालांकि मेरे विचार में पीएम को आपातकाल लगाकर इस तरह की हिंसात्मक कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है, और न ही उसे इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। ऐसे कई सीधे और कानूनी तरीके मौजूद है जिनका इस्तेमाल करके पीएम लोकतान्त्रिक तरीके से सुप्रीम कोर्ट जज को चित कर सकता है।
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यदि पीएम लोकतान्त्रिक तरीके से यह स्थापित कर देता है कि, सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्ट जज नागरिको के बहुमत की मंशा के खिलाफ जा रहा है तो अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी(*) सक्रीय होकर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज से मुलाक़ात करने को तत्पर हो जायेंगे। और इससे पहले कि अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सुप्रीम कोर्ट जज से मुलाक़ात करें सुप्रीम कोर्ट जज या तो इस्तीफा दे देगा या फिर जूरी कोर्ट में अडंगा लगाना बंद कर देगा।
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तो मेरे विचार में सही तरीका यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज जूरी कोर्ट क़ानून में अडंगा लगाते है तो पीएम इस स्थिति को लोकतान्त्रिक तरीके से निपटाए, बल प्रयोग से नहीं।
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(*) अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी लोकतंत्र के रक्षक है। जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति स्पष्ट बहुमत के खिलाफ जाता है तो जिन भी लोगो में अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी का अंश है वे लोकतन्त्र की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाते है। यहाँ इस बात पर ध्यान देना जरुरी है कि अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी अपने विवेक से सही गलत का फैसला नहीं करते। वे बस लोकतान्त्रिक मूल्यों का पालन करते है।
अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी, अहिंसामूर्ती महात्मा मदन लाल जी धींगरा, अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद आदि उधम सिंह जी के ही प्रकार थे, और गोरो द्वारा लोकतंत्र की अवहेलना किये जाने के कारण वे अपने अपने तरीके से विभिन्न परिस्थितियों में गोरो से मुलाक़ात करते रहते थे।
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काम की बात : लोकतान्त्रिक तरीके से पीएम सिर्फ तभी आगे बढ़ पायेगा जब कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग जूरी कोर्ट क़ानून का समर्थन करें। यदि देश के नागरिको को जूरी कोर्ट के क़ानून के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और न ही कार्यकर्ताओ में इस क़ानून का समर्थन मौजूद है, तो पीएम को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा, और पीएम सुप्रीम कोर्ट जज के आगे टिक नहीं पायेगा।
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वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट जज को पेड मीडिया के प्रायोजको का समर्थन प्राप्त है। अत: जब सुप्रीम कोर्ट जज जूरी कोर्ट को ख़ारिज करेगा तो देश के सभी मीडिया हाउस, सभी पेड मीडिया पार्टियाँ एवं उनके नेता, सभी सांसद, सभी पेड बुद्धिजीवी, सभी पेड संविधान विशेषग्य, सभी पेड कलाकार आदि सुप्रीम कोर्ट जज के पक्ष में एवं जूरी कोर्ट केविरोध में खड़े हो जायेंगे।
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आम असूचित नागरिक पेड मीडिया द्वारा संचालित इस गिरोह की चपेट में आकर पीएम के कदम का विरोध करना शुरू कर देंगे, या कम से कम पीएम का समर्थन नहीं करेंगे। ऐसी स्थिति में पीएम इस गिरोह से निपट नहीं सकता। पीएम इस गैंग से सिर्फ तब निपट सकता है जब पीएम को कम से कम 8 से 10 लाख ऐसे कार्यकर्ताओ का समर्थन हासिल हो, जो जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट के समर्थन में है, और पेड मीडिया की गिरफ्त से बाहर है।
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सार यह है कि, जूरी कोर्ट जैसा क़ानून पीएम के चाहने भर से रातों रात देश में लागू नहीं किया जा सकता। इसका सिर्फ एक रूट यह है कि बिना पेड मीडिया की सहायता के भारत में कम से कम 10 लाख कार्यकर्ताओ को जूरी कोर्ट क़ानून का समर्थन करने के लिए तैयार किया जाए। और 10 लाख कार्यकर्ताओं तक पहुँचने के लिए कम से कम 10 करोड़ नागरिको तक जूरी कोर्ट ड्राफ्ट की जानकारी पहुंचानी होगी। वो भी पेड मीडिया के बिना। जाहिर है, यह काफी दुरूह एवं लम्बी प्रक्रिया है। यह काम तब और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है, जब पेड मीडिया के प्रायोजक जूरी ट्रायल के बारे में गलत एवं अधूरी सूचनाएं देकर लोगो को लगातार भ्रमित करते रहने वाले है।
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जूरी कोर्ट जैसे क़ानून को गेजेट में छपवाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है। इसे पढ़े -- Pawan Kumar Sharma का जवाब - क्या भारत सुपर पावर बन सकता है? कैसे और कब? नागरिकों की क्या भूमिका होनी चाहिए?
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मेरा मानना है कि, जूरी ट्रायल मानव जाति द्वारा खोजा गया एक मात्र लंगर है जो सरकार को संविधान एवं इसके सिद्धांतो का पालन करने के लिए सफलतापूर्वक बाध्य कर सकता है -
थॉमस जेफरसन ( अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणा पत्र के लेखक )

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sonukumai