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New bites

मेरे pass दो चॉकलेट एक मैं खाऊंगा और
एक मैं .. ही

Thodi देर बाद खाउंगा...

ऐसे Kya देख रही हो तुम्हें नहीं दूंगा..!!

anisroshan324329

अनजान शहर से इतनी जान पहचान ठीक नहीं "मुसाफिर" मेरा शहर दूसरा हैं और मुझे लौटकर भी जाना है....!!

🥀🤌❤️‍🩹

kanoparjapati8861

आज में मार्केट गया था
एक लड़की मुझे घूर रही थी
मैने पूछा
तुम रेल में वड़ा पाव बेचती हो क्या
तब उसने
घूरना बंद किया
मतलब समझे क्या आप लोग

anisroshan324329

"भीड़ दिन में मिलती है, खुद से मुलाकात शाम में होती है।"

गुड इवनिंग
Dharmendra Kumar

erdharmendra

भूख चाट जाती है मज़हब को पेट भरते नहीं वज़ाइफ़ से ! मोल पूछा था मैंने रोटी का
रक़्स करती हुई तवायफ़ से !

anisroshan324329

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं✍️

mamtagirishtrivedi740648

"जो तुम्हें समझ न सका, उससे घृणा मत करो, उसके सोच की सीमा वहीं तक थी।"

gOoD afternoon
Dharmendra Kumar

erdharmendra

🌅 समय बड़ा बलवान

समय की चाल निराली है,
न रुकता है, न थकता है,
चुपचाप अपनी राह चले,
हर पल आगे बढ़ता है।

न कल को वापस लाता है,
न बीते पल को रोक सके,
जो हाथ से निकल गया पल,
उसे कोई फिर न खोज सके।

धन खो जाए तो धन आए,
टूटे रिश्ता जुड़ भी जाए,
खोई चीज़ मिल सकती है,
पर बीता समय लौट न पाए।

कल की चिंता छोड़ मुसाफिर,
आज को अपना मान ले,
जो करना है कर ले अब तू,
जीवन को पहचान ले।

कहता था मन—“अभी समय है,
कल से सब कुछ कर लेंगे,”
कल की राह देखते-देखते,
कितने कल यूँ गुजरेंगे।

सुबह हुई तो शाम भी आई,
दिन आया तो रात हुई,
देखते-देखते जीवन में,
कितनी जल्दी बात हुई।

बचपन खेलों में बीत गया,
यौवन सपनों में खोया,
मौका आया सामने लेकिन,
हमने उसको देर से बोया।

समय कभी आवाज़ न देता,
फिर भी सबको समझाता है,
जो इसकी कीमत समझ गया,
वही जीवन में बढ़ पाता है।

किस्मत को मत दोष हमेशा,
मेहनत से रिश्ता जोड़ो,
छोटी-छोटी कोशिश करके,
अपने सपनों को तुम मोड़ो।

एक कदम आज बढ़ा लो,
कल राह आसान होगी,
आज की मेहनत ही कल जाकर,
जीवन की पहचान होगी।

जो विद्यार्थी आज पढ़ेगा,
कल ज्ञान का दीप जलाएगा,
जो किसान समय पर बोएगा,
वही फसल को घर लाएगा।

जो युवा हुनर सीख लेगा,
कल अपना संसार बनाएगा,
जो आज समय को खो देगा,
वह कल पछताएगा।

समय न राजा देखता है,
न देखे कोई गरीब,
सबके लिए समान है इसका,
चलता रहता अजीब।

महल में भी समय गुजरता,
झोपड़ी में भी ढलता है,
धनी हो या निर्धन कोई,
समय सभी का चलता है।

राजा आया, राजा गया,
सत्ता बदली, ताज गया,
जिसने सोचा मैं अमर रहूँगा,
उसका भी एक दिन आज गया।

फूल खिले और मुरझाए,
नदियाँ आगे बहती हैं,
ऋतुएँ आती-जाती रहतीं,
घड़ियाँ बस चलती रहती हैं।

समय कहता—“मत रुक जाना,
गिरकर फिर से उठते रहना,
हार मिले तो सीख तुम्हारी,
जीत मिले तो विनम्र रहना।”

यदि अतीत ने दर्द दिया है,
उससे सीखो, मत घबराओ,
बीती बातों को छोड़कर अब,
नया सवेरा खुद बनाओ।

जो खोया, उसको भूल न जाना,
पर उसमें मत फँसे रहना,
बीते कल से सीख लेकर तुम,
आज के संग आगे बढ़ना।

एक पल कभी किसी की,
पूरी दुनिया बदल सकता है,
एक सही निर्णय जीवन को,
नई दिशा में ढाल सकता है।

एक घंटा मेहनत का शायद,
भाग्य बदलने की शुरुआत,
एक छोटा सा सही कदम भी,
बन सकता है जीवन की बात।

समय किसी का शत्रु नहीं है,
समय गुरु बन जाता है,
जो इसकी भाषा समझ सके,
वही आगे बढ़ पाता है।

जब दुख आए, धैर्य रखना,
जब सुख आए, मत इतराना,
समय कभी एक सा नहीं रहता,
यह सत्य हमेशा याद रखना।

आज अगर मुश्किल है जीवन,
कल आसान भी हो सकता,
आज अगर अंधेरा है तो,
कल सूरज भी उग सकता।

बस तू अपना कर्म निभा ले,
मेहनत से नाता जोड़,
समय की धारा के संग चलकर,
अपने सपनों की ओर।

घड़ी की टिक-टिक कहती है,
“मैं हर पल आगे जाती हूँ,”
तुम सोते रहो या जागते,
मैं फिर भी चलती जाती हूँ।

मैं लौटकर फिर नहीं आती,
मैं रुककर इंतज़ार न करती,
जिसने मेरी कदर न जानी,
उसकी राह मैं नहीं सँवारती।

इसलिए ऐ जीवन के राही,
मेरी बात जरा सुन लेना,
आज मिला जो सुंदर अवसर,
उसको हाथ से मत जाने देना।

माता-पिता का मान रखो,
गुरु की बात समझना सीखो,
ज्ञान मिले तो बाँटना सीखो,
समय मिले तो जीना सीखो।

रिश्तों के लिए समय निकालो,
अपनों को थोड़ा प्यार दो,
सिर्फ कमाने में मत खो जाना,
जीवन को भी थोड़ा समय दो।

क्योंकि जीवन केवल धन नहीं,
जीवन केवल नाम नहीं,
जीवन हर उस पल का संगम,
जिसका कोई दाम नहीं।

आज किसी को मुस्कान दे दो,
आज किसी का दर्द सुनो,
आज किसी का हाथ पकड़कर,
उसके संग कुछ दूर चलो।

जो समय प्रेम में बीता है,
वही जीवन की याद बने,
जो समय सेवा में बीता है,
वही सच्चा संवाद बने।

कल का सूरज कैसा होगा,
किसने देखा, किसको पता?
इसलिए आज को जी लो तुम,
यही समय है सबसे बड़ा।

न बीता कल हाथ में है,
न आने वाला कल अपना,
जो कुछ है वह आज है केवल,
आज ही गढ़ता है सपना।

तो उठो, संभलो और चल पड़ो,
अपने मन में दीप जलाओ,
छोटी कोशिश, छोटी मेहनत से,
जीवन में परिवर्तन लाओ।

समय नदी की धार समान है,
बहता जाता पल-पल करके,
जो इसमें तैरना सीख गया,
वह पहुँचेगा साहिल पर चढ़के।

और जो किनारे बैठा रहा,
वह लहरों को देखता जाएगा,
मौका उसके सामने होगा,
फिर भी हाथ मलता रह जाएगा।

याद रखो यह बात हमेशा—
समय किसी का दास नहीं,
इसके आगे धन भी छोटा,
इससे बड़ा कोई राज नहीं।

समय से बड़ा शिक्षक न कोई,
समय से बड़ा प्रमाण नहीं,
समय से बड़ा बलवान न कोई,
समय से बड़ा वरदान नहीं।

इसलिए हर पल की कदर करो,
हर दिन को सुंदर बनाओ,
जो सपना दिल में पलता है,
उसको सच करने में लग जाओ।

बीते कल को प्रणाम करो,
आज को दिल से स्वीकार करो,
आने वाले कल के लिए तुम,
आज ही अपना संस्कार करो।

जब जीवन की शाम ढलेगी,
पीछे मुड़कर देखोगे,
तब धन से ज्यादा याद तुम्हें,
अपने बिताए पल होंगे।

इसलिए समय को मत खोना,
हर पल को पहचानना,
जीवन छोटा है, सत्य यही है—
इसे हँसकर जी जाना।

घड़ी की हर एक टिक-टिक में,
जीवन का संदेश छिपा है,
जो पल अभी तुम्हारे पास है,
वही सबसे अनमोल खज़ाना है।

समय चलता है, चलता जाएगा,
कोई इसे रोक न पाएगा।
जो इसकी कीमत जान गया,
वही जीवन में जीत पाएगा।

न कल हमारा, न कल हमारा,
आज ही अपना सच्चा सहारा।
समय की कदर जो करता है,
वही जीवन को सुंदर करता है।

🌸 समय बड़ा बलवान है,

🌸 समय ही जीवन की पहचान है।

🌸 जो समय को सम्मान देता है,

🌸 समय उसका जीवन बदल देता है

skptech

Diabetes Can Affect Your Eyes Before It Affects Your Sight
An Indian national survey found that 16.9% of people aged 50 or older with diabetes had diabetic retinopathy — roughly one in six people in the group studied. Importantly, this figure represents the proportion of people who had diabetic retinopathy, not a percentage of vision loss.
The figure matters because early diabetic retinopathy often causes no pain or noticeable change in vision. A person may continue reading, working or even driving normally while changes are developing in the retina.
High blood sugar can damage the tiny blood vessels in the retina — the light-sensitive layer at the back of the eye. If diabetic retinopathy is detected early, an eye doctor can monitor the condition and determine when treatment or further care is needed.
Dr. Anchal Gupta’s Message
“Diabetes can affect your eyes before it affects your sight. Clear vision does not always mean that the retina is healthy. Regular retinal examination is an important part of diabetes care, even when there are no noticeable changes in vision.”
If you have diabetes, make a dilated retinal examination part of your routine care, even when your vision seems clear. The National Eye Institute advises that most people with diabetes should have a dilated eye examination at least once a year, or as advised by their eye doctor.
Do not wait for blurred vision to get your eyes checked.
— Dr. Anchal Gupta
9319909455
For public health awareness

bhumikabhati.662947

I prefer curd rice over full meals.

kattupayas.101947

lunch time.. enjoy

kattupayas.101947

Do you know that you should make a firm resolve to look for a solution and overcome your misery? Suicide should never be an option, because you will suffer the consequences in your next life.

Find out more on: https://dbf.adalaj.org/eFmH80OJ

#selfhelp #selfimprovement #doyouknow #facts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

एक रोज़ आँखे नम होंगी तुम्हारी एक रोज़ ज़ब तुम्हारी यादों में, तुम्हें तड़फती मिलेगी क़लम मेरी

एक रोज़ हम याद आएंगे तुम्हें एक रोज़ ज़ब क़लम ख़ामोश होगी मेरी

anisroshan324329

કાશ! મારા સિવાય ઘણાં હશે હ્રદયની નજીક તો મને કંઈ વાંધો નથી.
પરંતુ મને નજીક જોઈ જશો તો હૈયું તમારું તમારા કાબુમાં નહિ રહે.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

break fast ready he patharo

virdeepsinh

जिम्मेदारी में पीछे छूटे वजूद

​"यह कहानी किसी घर या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन अनकही भावनाओं का एक आईना है जो अक्सर रसोई की चारदीवारी में दब जाती हैं। इसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करना है।"

रश्मि सुबह से घर के काम में लगी हुई थी। कभी किचन से आती कुकर की सीटी पर वहाँ भागती, तो कभी कमरे में ऑफिस के लिए तैयार होते पति की आवाज़ पर उसके काम करने के लिए जाती। साथ में सास को दवाई देना और बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना—रश्मि, जो बस 30 साल की है, लेकिन जिम्मेदारियाँ उठाते-उठाते जैसे 50 साल की हो गई हो। उस घर के लिए रश्मि एक इंसान से ज़्यादा एक 'टाइम-मशीन' थी, जिसमें बस समय सेट कर दिया जाता था और फिर उसका इस्तेमाल करने वाले उसे भूल जाते थे।

आज छुट्टी का दिन था, घर में सुकून और शांति थी, लेकिन यह सब घर से बाहर जाने वालों के लिए था, रश्मि के लिए नहीं। रश्मि अपने तय समय के अनुसार उठकर किचन में सबके लिए नाश्ता बना रही थी। किचन से आती पराठों की खुशबू और चाय से अदरक की महक रश्मि के मन को सुकून दे रही थी। घर की स्त्रियाँ बहुत मन से सबके लिए खाना बनाती हैं, शायद उसमें वह प्यार भी घुल जाता है जो वे कह नहीं पातीं, और उसी में उन्हें खुशी भी मिलती है।

सुबह सब साथ में नाश्ता कर रहे थे। पति हाथ में अखबार लिए बैठा था। रश्मि, जो सबसे पहले उठी थी, बच्चों को नाश्ता करवा रही थी। नाश्ते की प्लेटों के टकराने की आवाज़ के बीच पति ने अखबार पलटते हुए खुशी से अपनी माँ से कहा, "माँ, आज-कल लड़कियाँ कहाँ से कहाँ जा रही हैं! देखिए, पेपर में एक लड़की के बारे में लिखा है जो कभी एक छोटे से गाँव से थी, आज वो बिज़नेस वूमन बन गई है।

यह सुनकर रश्मि जैसे और चुप हो गई। वह सोचने लगी, "मैंने भी M.Com किया है। क्या हो अगर मैं भी कोई बिज़नेस करना चाहूँ? क्या शादी से पहले या बाद में मैंने यह बात की होती, तो क्या ये भी वैसे ही खुश होते? क्या ये मेरी जिम्मेदारियों में हाथ बँटाते?"

तभी रश्मि का बेटा, जो आँगन में खेल रहा था, उसकी गेंद से सामने वाली खिड़की का काँच टूट गया। उस आवाज़ से रश्मि ख्यालों से बाहर आई। सास कुछ कहती, उससे पहले ही पति ने अखबार टेबल पर पटकते हुए कहा, "क्या यार रश्मि! तुम बच्चों पर ध्यान नहीं देती, मैं तो ऑफिस में व्यस्त रहता हूँ।"


रश्मि को यह बात सीधे दिल पर जा लगी। वह चाह कर भी कुछ न बोल पाई। अपनी जगह से उठी और टूटी हुई उम्मीदों के साथ टूटा हुआ काँच समेटने लगी, फिर किचन में बाकी काम निपटाने चली गई। सास यह सब देख रही थी, वह कुछ नहीं बोली, बस रश्मि को देखती रही।

शाम को जब सब चाय पी रहे थे और अपनी छुट्टी का आनंद ले रहे थे, रश्मि फिर शाम के खाने की तैयारी और बच्चों के काम में उलझी हुई थी। तभी सास ने चाय का कप रखते हुए बेटे से कहा, "बेटा, कल मैं रश्मि के साथ अपने मायके जा रही हूँ। शाम में आऊँगी। तुम बच्चों और घर का ख्याल रखना।

"यह सुनकर बेटा चौंक गया और कल के ढेर सारे कामों की लिस्ट गिनाते हुए बोला, "मैं नहीं देख पाऊँगा।" रश्मि ने सरलता से कहा, "नहीं माँ, आप चले जाइए, घर ये नहीं देख पाएंगे।" लेकिन सास अपनी ज़िद पर थी। आख़िरकार बेटे को उनकी बात माननी पड़ी।

रश्मि सुबह 3 बजे उठी और जल्दी-जल्दी दिन भर के सारे काम निपटा दिए—खाना, साफ़-सफाई, बच्चों के कपड़े, और फिर सास के साथ निकल गई। रश्मि उनके साथ तो गई, लेकिन उसका मन बच्चों में अटका रहा। शाम को जब दोनों घर आईं, तो घर का हाल देख रश्मि के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पूरे घर में यहाँ-वहाँ खिलौने और अखबार फैले थे। यह देख सास हल्की सी मुस्कुरा दीं और बेटे ने रश्मि पर शिकायतों की झड़ी लगा दी।

रश्मि बिना कुछ बोले जल्दी-जल्दी सामान समेटने लगी। सास किचन से चाय बना लाईं और रश्मि को आवाज़ दी, "रश्मि, चाय पी ले, फिर करना।" यह सुनकर बेटा और भड़क गया और चिढ़कर बोला, "क्या माँ, आप देख नहीं रही हैं, मैं कितना परेशान हो गया हूँ!"

सास ने चाय का एक घूँट लिया, कप टेबल पर रखा और बेटे से बहुत प्यार से बोलीं, "बेटा, तुम एक दिन में परेशान हो गए? जिसे रश्मि सालों से बिना किसी शिकायत के कर रही है। आज भी वह सब काम करके गई थी, बस तुम्हें देखना था, जो तुम नहीं कर पाए। उस दिन तो तुम अखबार देखकर खुश हो रहे थे, क्या कभी रश्मि से पूछा कि वह घर के अलावा कुछ करना चाहती है या नहीं?"

बेटा चुप हो गया, जैसे उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा हो। सास आगे बढ़ीं और रश्मि के पास खड़े होकर बोलीं, "मेरी बहू ने भी M.Com किया है, लेकिन कभी उसने कोई शिकायत नहीं की, अपनी जिम्मेदारी मानी। क्या हो अगर कोई अपनी पहचान बनाना चाहे? जो तुम दूसरों की तारीफ करते हो, क्या कभी रश्मि का हाथ बँटा पाओगे?"

यह सुनकर रश्मि की आँखें भर आईं। सास ने रश्मि के कंधे पर हाथ रखा और बड़े प्यार से कहा, "अगर मेरा सपना सिर्फ सीमित न होता, तो आज मैं तुम्हें अपने सपनों को मारने नहीं देती। मुझे माफ़ करना, रश्मि।"

एक एहसास

​रश्मि की कहानी सिर्फ एक घर की नहीं, हर उस महिला की है जो अपनी डिग्री और सपनों को अलमारी में बंद कर चुकी है। याद रखिए, किसी का हाथ बँटाना 'मदद' नहीं, बल्कि 'जिम्मेदारी' है।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

*#हिंदी_दोहे -312 - #रौशनी *

जीवन में हो रौशनी,सुंदर होवें कर्म।
शांति रहे तब गेह में,रहे साथ भी धर्म।।

जहाँ ज्ञान की रोशनी, वहाँ फले विज्ञान।
और कर्म देता मिले,स्वयं तुम्हें सम्मान।।

सज्जन की संगत मिले,खिल जाती है धूप।
जिसको कहते रौशनी,सुंदर लगता रूप।।
*** दिनांक -29.9-2026
*✍️ #राजीव_नामदेव "#राना_लिधौरी "*
           संपादक "#आकांक्षा " पत्रिका
संपादक-'#अनुश्रुति 'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog - rajeevranalidhori. blogspot. com

rajeevnamdeoranalidhori247627

Time for breakfast

kattupayas.101947

हँसते हँसते करते रहें हम
खुद को तबाह और बर्बाद
अरसा कितना हो चला है
यह हमको भी नहीं है याद


गजेंद्र कुडमाते

kudmate.gaju78gmail.com202313

वो द्वापर युग था कान्हा !

जहां पत्नी की नहीं प्रेमिका की प्राथमिकता थी

ये कलयुग है, यहां प्रेमिका का कोई स्थान नहीं

anisroshan324329