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સ્વાતંત્ર્ય દિવસ સ્પેશિયલ...

એકલવીર સાપ્તાહિકમાં પ્રકાશિત થયેલ મારો લેખ...

#martyrsofindia #patriotic #jaihind

mothiyavgmail.com3309

गुलाबी पेरूचे पंचामृत

श्रावण महिन्यात अथवा कोणत्याही धार्मिक कार्यक्रमात जेवणात पंचामृताचे फार महत्व असते
कोणत्याही फळाचे पंचामृत करता येते
पानात वाढलेले पंचामृत पानाची शोभा वाढवत असते

साहित्य..
एक मोठा गुलाबी पेरू
दोन मुठभाजलेले शेंगदाणे
मुठभर भाजलेले तीळ
कढीलिंब,बडीशेप
जीरे मोहरी हिंग मेथी
एका लिंबा एवढ्या चिंचेचा कोळ
तेवढाच गुळ
मीठ, तिखट, हळद ,काळा मसाला
दोन सुक्या मिरच्या

कृती
गुलाबी पेरूच्या मध्यम आकाराच्या फोडी करून घेतल्या

सुके खोबरे काप तळून घेतले
एक मूठ दाण्याचे आणि भाजक्या तिळाचे कूट केले
एक मुठ दाणे अखंड ठेवले
जीरे ,मोहरी ,हिंग ,मेथी , सुक्या मिरच्या घालून फोडणी केली
कढीलिंब त्यात खरपुस तळून
पेरूच्या फोडी घातल्या
वेगळे ठेवलेले दाणे आणि तळलेले खोबरे काप घातले
झाकण ठेवून एक वाफ आली की
फोडी बुडतील ईतके पाणी घालून परत झाकण ठेवले
एक उकळी आली की आवडीनुसार तिखट ,मीठ, हळद, काळा मसाला, गूळ, चिंचेचा कोळ , बडीशेप घातली
दाण्याचे आणि तिळाचे कुट घालून एकसारखे करून घेतले
शेवटी एक झाकण ठेवून वाफ आणली
चवीष्ट चमचमीत पेरुचे पंचामृत तयार आहे
पोळी ,पुरी, भात, धिरडी कशासोबत ही मस्त लागते
नुसते सुध्दा टॉक,😋 लागते
तोंडाला चव आणते 😊😊

jayvrishaligmailcom

શ્રાવણ માસ એટલે માત્ર શિવપૂજા નહીં,
પણ શિવ જેવા ગુણોને જીવનમાં ઉતારવાનો અવસર...

ગળી જાય અપમાન જે વિના અદાવત,
કહેવાય એ મહાદેવજીના સાચા ભગત!

ચાલો, આ શ્રાવણમાં મહાદેવ પાસેથી
સમતાથી જીવવાની અને સૌને આશીર્વાદ આપવાની કળા શીખીએ. 🙏🔱: https://dbf.adalaj.org/buhYqkc1

#harharmahadev #omnamahshivay #shiva #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🍁If the world of dreams
is the most beautiful place,
why should I ever
open my eyes?🍁

shakthisky108659

"…दो महीने का रक़ीब..."

ये जहां खत्म होने से पहले
मैं जाना चाहता हु वहां
उसी दुनिया के अंतिम छौर पर,

जिस कायनात में
थे पुराने ढर्रे के मंदिर
मुंह से बोले गए जुटे मंत्र

और तुम!

जीर्ण काले पत्थरों के घाट की
किसी पायदान पर बैठी
सामने बहती बेनाम सी नदी।

साथ हर तरफ लगे हुए
चातुर्मास के मेले,

आंगन में रंगोली बनाती तुम
बिखरे रंग सिमटकर उन्हें
अलग-अलग भाषाओं में
बुन देती आई हो हमेशा
जैसे बनाती हो दो दुनियाओं के
बीच कोई बेगाना सेतू।

फिर पूछती हो
रंगोली बनाते
या पत्थर पर बैठे हुए
की तुम कहानीकार हो
तो सुबह की हल्की बारिश में
छिड़क दो अपनी कहानियां,

सोनी महीवाल की
हिर रांझा की
लैला मजनू की
कोई भी कहानी सुना दो
जो हजार बार सुन चुकी हु
तुम्हारे मुंह से
लेकिन कितना भी सुनो कहानियां
कभी पुरानी या जुटी नहीं होती
मंदिरों या मंत्रों की तरह।

जितने भी नाम गिनाए
तुमने हर उस पन्ने पर औरत का नाम
पहले आता है

क्योंकि प्रेम ही औरत होना है
मर्द तो बस कर सकता है इबादत

जैसे अपनी ही लैला में
खोए हुए मजनू ने नमाज पढ़ते
लोगों के दिलों में चिल्लाते हुए डाली थी खलन

हां, यही कारण था
उसे पत्थरों से नवाजा गया

तो तब क्या कहा था उसने
उन नमाजियों को?

अपना हाथ ठूड्डी पर रखते हुए
सिर को हल्का सा झुकाकर
वह मेरी तरफ देखते हुए
व्याकुलता से पूछती है

तो तब मजनू ने क्या कहा था?

और मैं देखता हु
आसमान की तरफ जिसमें असंख्य छेद थे
हल्की बूंदे बारिशी शॉवर की तरह टपक रही थी
पायदान के काले पत्थर चमक रहे थे
शायद इन पत्थरों के ही पूर्वज
मजनू को किसी वास्तविकता की तरह
लगे हो जोर से।

तो मजनू के बदन से खून बहता रहा
उसके देह का हर एक कोना
कर दिया गया था छन्नी
फिर भी बहते हुए सुर्ख लहू में
बस दो ही अक्षर थे

लै... ला... लै... ला...
लै... ला... लै... ला...

चेहरे की हर सिलवट में जरा भी गुस्सा नहीं था
क्यों हो प्रेम का प्रतिशब्द नहीं होता है नफरत
या तिरस्कार...
प्रेम का विलोम होता है अहंकार
उसी अंह के गर्भ में दबा होता है गुस्सा

तो जहां प्रेम हो
वहां अंहकार ही नहीं
तो फिर कैसे आता मजनू को गुस्सा
उन नमाजियों पर

उसने बस उन्हें कहा इतना कि
मैं... मैं... तो अपने माशूक में खोया हुआ था
मुझे आप इबादत में गढ़े हुए दिखाई नहीं दिए
इस चिल्लाया
पर आप भी तो अपने माशूक में खोए हुए थे
फिर आपको मैं कैसे सुनाई दिया?

कहानी खत्म करते हुए
मैंने उसकी तरफ देखा
उसने मेरे लिए सप्तरंग में डूबा
छाता खोल दिया था

शॉवर से पानी के पत्थर
अब मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे

फिर उसने पूजा की थाल उठाई
जिसमें रंगोली भी थी
पुराने ढर्रे के मंदिरों के लिए
वह थाल समर्पित थी
साथ अर्पित थे चातुर्मास के ये उसके दो महीने भी

मैं खफा था कि
मुझे पूरे साल में उसके बस दस महीने मिलते है

पूरे दो मास
वह नहीं रहती मेरी कभी
वह सबकुछ भूल जाती है
जो आसमान में छेद करते हुए
शॉवर चालू करता है
ये दो महीने वह बस उसकी होती है

और मैं जलता
या ईर्ष्या नहीं करता हु उससे

इसीलिए ये जहां खत्म होने से पहले
मैं जाना चाहता हु वहां
उसी दुनिया के अंतिम छौर पर,

जहा दो मास मेरे महबूब को
उसके लिए मिले
मेरी कोई खलन ना हो

वह अपनी इबादत में डूबी रहे
और मैं बैठा रहूं तीसरी पायदान मुहब्बत पर ही
उसे पांचवीं पायदान पर बैठे बेनाम सी नदी को देखते हुए

मैं उस सेतु पर चलता जाऊ
जो उसने अपनी रंगोली में पिरोया था।

क्योंकि ये दो महीने
रब ही मेरा रकीब रहेगा

anupgajare819691

तुम्हें दूर से ही देखकर
हम तसल्ली कर लेते हैं
हमारी साँसों का पैमाना
अब भी भरा हुआ है

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

சில வலிகள் சிரிக்கும் நிலை
எதிர்காலத்தின் வழித்தடத்தில்
காரணம்.....?


........கடந்த காலம்

ibusamee7gmail.com830355

जो कहते थे के जाएंगे न छोड़ के तुझे हर हाल में,
वही गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।

क्यों गए दूर इतने, क्या मुझसे ख़ता हो गई थी,
जाते-जाते बता जाते, क्या दूर होना ही एक सज़ा थी।
सुलगती जलती रातें मिला है मुझे उपहार में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।

बरसों से जो छुपा था, वो प्यार याद दिला गये,
छण भर की खुशियों के बाद हमें अब रुला गये।
ना जी सकूँ, न मर सकूँ, वो दर्द दिया है प्यार में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।

दबाये प्यार सीने में जी रहे थे तो सब ठीक था,
मिलकर बिछड़ने से तो न मिलते तो ही ठीक था।
अब आँसुओं के सहारे जिंदगी चली है राह में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।

✍️बेनी सागर

benisagar

तेरे दिल से मैं यह पनाह माँगता हूँ,
दे जा मुझे मोहब्बत, यहीं गुनाह माँगता हूँ।

देख लूँ मैं जी भरकर और करूँ प्यार मैं तुझे,
सामने बैठे रहो मेरे यही दीदार-ए-महताब माँगता हूँ।

डूब जाऊँ इन आँखों में, हो जाऊँ गुम कहीं,
तेरी रोशन दो आँखों से, यहीं शराब माँगता हूँ।

कोमल सी पंखुड़ियाँ मेरे लबों पे आ गिरे,
तेरे सुर्ख होठों से, वो गुलाब माँगता हूँ।

थाम लो मेरा दामन और बन जाओ मेरे हमराज,
पढ़ी जाए दास्ताँ हमारी, वो किताब माँगता हूँ।

✍️बेनी सागर

benisagar

कबीर जी के दोहे,,,, 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

बे-चैन इस कदर था कि सोया न रात भर,
पलकों से लिख रहा था तेरा नाम चाँद पर।।♥️

narayanmahajan.307843

जिंदगी की बस, यहीं फलसफा है,
यहां हर शख्स हीं बेवफा है।

ना पलो उम्मीदों को, हरगिज़ बढ़ाकर,
यहां दम घोटता हीं वफ़ा है

कोई जाए दिल तोड़, इसमें क्या हैरत है,
यहां मोहब्बत करना हीं जफ़ा है।

कोई आाये बनके हमदर्द, कोशिश ना करना,
यहां ज़ख्म देने वाला हीं, खुद खफा है।

पहले दिल तोड़ते है, फिर बिखेर देते हैं,
यहां ताउम्र जीना हीं एक दफ़ा है।

✍️बेनी सागर

benisagar

🌸जरा सोचिए🌸

जरा मौसम की अदा देखिए,
जरा सोचिए और सदा देखिए।

भर के आँखों में तुझे, ताउम्र गुज़ार लूँ,
जरा आँखों की वफ़ा देखिए,
जरा सोचिए और सदा देखिए।

फूल ही फूल बिछाए हैं कदमों में तेरे,
जरा मोहब्बत की शमां देखिए,
जरा सोचिए और सदा देखिए।

मुद्दतों बाद मिले हो, आओ ठहर जाओ,
जरा दिल की रज़ा देखिए,
जरा सोचिए और सदा देखिए।

हो तुझे मुबारक़, तेरी मोहब्बत जो बख्शी,
जरा दिल की दुआ देखिए,
जरा सोचिए और सदा देखिए।

✍️बेनी सागर

benisagar

Some Stories Begin With a Single Unanswered Question,
Every Unanswered Question Is A Doorway To A Deeper Story.

Keep Writing....
Keep Dreaming....
Keep Believing....

🫶🏻🫶🏻🫶🏻🫶🏻

@noctis_whisper

pallavidas

कुटिल हृदय, चरित्र-हीन मन,
हर अच्छाई में खोजे छल।
अपने ही कपट-दर्पण में,
देखे जग को व्याकुल पल।
पावनता भी लगे दिखावा,
ज्ञान बने जिसकी चालाकी,
खुद की कालिख दूसरों पर मल,
खोजे अपनी ही नापाकी।
----@vyomatara

cosmicstar

ખબર નય...!
આ ઝાડ મને કેમ ખેંચે છે ?
એને જોતા જ પેલી નજરે,

ખબર નય...!
ખેંચે રૂપાળા ફુલ એના સુંગધી,
એકમાં બીજા હજાર નારંગી,

ખબર નય...!
ઓઢાડી છે ચાદર ભોંયે હરોળી,
જાણે ચંદન સરીખ કેસરઘોળી,

ખબર નય...!
ખેંચે નમણી ડાળ્યુ એ પાતલરી,
કોને ચડાવવા દાદર આગોતરી,

ખબર નય...!
લાગે છે જોતા વેંતજ માયાવી,
નાંખું નજર્યું નોખી મન મનાવી,

ખબર નય...!
પાંહે ઝાડવા તો બીજા ઘણા,
તોયે લાગે મને એકજ નમણાં,

ખબર નય...!
શેનું છે ઝાડ? એની પણ મને,
એને જોતા અડતા ખેંચતું કને,

ખબર નય...!
પૂછું હું આસપાસ જાણસારું,
માળું આવું તે કેવું કામણગારું,

ખબર નય...!
પૂછી જ લીધું શું નામ ભાઈ તારું,
"ગોપાલ"નું "કદંબ" છે નામ મારું.

" જય શ્રી કૃષ્ણ "
🪈 🦚 💙 🙏 🙇


✍️ ગોપાલ સરૈયા

saraiya80gmailcom

बंजर ज़मीन और समुद्र
बंजर ज़मीन को
 चाहत है पानी की,
 तो क्या हो
 अगर समुद्र
 अपना थोड़ा-सा हिस्सा
 उसके नाम कर दे?
बस एक मुट्ठी जल…
इतना-सा
 कि सूखी मिट्टी
 पहली बार
 अपनी देह में
 किसी संभावना को महसूस करे।
मैं सोचती हूँ
 शायद उम्मीद भी
 ऐसे ही जन्म लेती है।
पहले
 एक बूँद उतरती है
 बिना किसी वचन के।
फिर मिट्टी
 उस बूँद को
 अपनी स्मृति बना लेती है।
वहीं से
 एक कल्पना जन्म लेती है
कि शायद
 यह भूमि भी हरी हो सकती है,
 शायद यहाँ भी
 किसी बीज को
 घर मिल सकता है।
कल्पना धीरे-धीरे
 एक स्वप्न बनती है।
और स्वप्न…
कितना विचित्र है न
जितना सुंदर होता है,
 उतना ही भय देता है।
डर लगता है
 कि कहीं वर्षा रुक गई तो?
कहीं बीज
 अंकुरित होने से पहले मर गया तो?
कहीं समुद्र ने
 अपना जल वापस माँग लिया तो?
मगर फिर…
एक नन्ही-सी हरियाली
 मिट्टी का सीना चीरकर
 बाहर आती है।
और उस क्षण
 भय पीछे छूट जाता है।
स्वप्न
 यथार्थ का पहला अक्षर लिखता है।
जो कल तक
 केवल सोचा था,
 वह आज
 आँखों के सामने होता है।
एक अंकुर
 फिर पौधा बनता है,
 पौधा वृक्ष बनने का
 साहस करता है।
और तब समझ आता है
उम्मीद
 कमज़ोरों का सहारा नहीं,
वह तो
 टूटी हुई धरती के भीतर
 छिपी हुई शक्ति है।
एक बूँद से
 हरियाली तक पहुँचना
 चमत्कार नहीं होता
यह उस मिट्टी की
 निरंतर साधना होती है
 जो सूखकर भी
 जीना नहीं भूलती।
और फिर…
जिस भूमि को कभी
 समुद्र की एक बूँद की
 चाहत थी,
वहीं से
 एक दिन
 नदी जन्म लेती है।
वह बहती है…
अपनी प्यास पीछे छोड़कर।
और शायद यही
 जीवन का सबसे सुंदर रहस्य है
जिसे कभी
एक बूँद की आवश्यकता थी,
वही एक दिन
किसी और की प्यास बुझाने लगता है।
यही है
 उम्मीद का चक्र
एक बूँद से
 एक कल्पना,
कल्पना से
 एक स्वप्न,
स्वप्न से
 एक भय,
भय से
 एक साहस,
साहस से
 एक यथार्थ,
और यथार्थ से…
एक नया जन्म।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

કુદરત અને સેક્સ એડ્યુકેશન... આ એક અદ્ભુત વિષય છે... કુદરત તરફ થી દેહ પ્રાપ્ત થાય છે.. અને દેહ નો સ્વભાવિક ધર્મ છે વિકસિત થવું... આ વિકાસ માટે કુદરતે કોઈ પણ જીવ માં મૂળભૂત વૃતિઓ આપી છે.. (૧) નિદ્રા (૨) ભૂખ તરસ (૩) સક્રિયતા અને સુરક્ષા (૪) ભય - પીડા (૫) સેક્સ...

આ ૫ કુદરતી વૃત્તિઓ થી જ કોઈ પણ જીવ નો વિકાસ અને પોષણ સંભવ છે. નિદ્રા, ભોજન ,પાણી, સક્રિય શરીર, સુરક્ષિત વાતાવરણ ,ભય અને પીડા અંગે સભાનતા અને રક્ષા રોજે રોજ ના જીવન માં ખૂબ આવશ્યક છે... અને એટલી જ આવશ્યક છે સેક્સ ની લાગણી...

સેક્સની વૃત્તિઓ પ્રેમ, સુખની લાગણીઓ અને મનુષ્ય માં રહેલી રચનાત્મક સર્જન ક્ષમતાઓ સાથે જોડાયેલ છે.

yashibc123gmail.com135615

"એક નાનકડું છમકલું" માં આજે..
શીર્ષક:- લગ્નના ૨૫ વર્ષ પછી...

ચાલ, કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ...

કંઈક દૂર સુધી જો સાથ તારો મળે,
તો ચાલ કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

ભૂલભુલૈયા જેવા નીરસ જીવનમાંથી,
ખોવાયેલા પ્રેમને ફરી ઝંઝોળીએ.

જિંદગી વીતી ગઈ રોજના કામકાજમાં,
ચાલ પ્રિયે, કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

એકલદોકલ હાસ્યના ઝરણાંને,
અટહાસ્યની નદીમાં આજે ફેરવીએ.

દિવસ-રાતના કાળચક્રને,
આજે ઘડીક રોકી દઈએ.

સમય કાઢી પ્રેમ નામનું
ખાબોચિયું તો ફરી ગોતીએ.

કા... કા... કરતા કાગડાને ભૂલી,
કોયલનો કલરવ સાંભળીએ.

ચાલ પ્રિયે...
કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

સમુદ્રની ભીની રેતીમાં,
તારું-મારું નામ લખીએ.

પહાડોની મહેફિલમાં,
તારા-મારા નામના પડઘા સાંભળીએ.

શબ્દોના તીરથી,
એકબીજાનું હૃદય તો કોતરીએ.

ચાલ પ્રિયે...
કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

જીવનમાં આને, તેને, બધાને,
સમય તો ઘણો ફાળવ્યો.

હવે થોડો સમય,
પોતાને પણ આપીએ.

પ્રેમ નામના થીજી ગયેલા શબ્દમાં,
ફરી જીવનની અગ્નિ પ્રગટાવીએ.

ચહેરા પર ઓઢેલા
સાંસારિક મુખોટા તો ઉતારીએ.

પ્રણય નામના જૂના શબ્દોને,
આજે ફરી વાગોળીએ.

વર્ષો વીતી ગયા,
પલક ઝપકાવ્યા વિના તને જોતાં.

ચાલ આજે,
આંખોમાં આંખો પરોવી,
એકબીજાનું પ્રતિબિંબ તો જોઈએ.

ઢળતી જતી જિંદગીનો
હવે શું ભરોસો કરવો?

આજે પૃથ્વી પર સૂઈએ તો,
કાલે કદાચ વૈકુંઠમાં સવાર થાશે,

ચાલ...
ઘડીક એકાંતમાં જઈ,
યાદોના હિંડોળા ઝુલાવીએ.

છેલ્લો શ્વાસ આવે, તે પહેલાં...
એકવાર ફરી,
પ્રેમનો આસ્વાદ માણીએ.

કંઈક દૂર સુધી જો સાથ તારો મળે,
તો ચાલ...

કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

✍️ જિગર અશોક પંડ્યા

pandyajigar

“Ramayana हमें...” और “Mahabharata हमें...” वाला मुख्य Hindi हिस्सा जरूर रखें—इससे Byte पढ़ने वाले को तुरंत समझ आएगा कि आपका पूरा लेख किस विषय पर है।

🌺 रामायण और महाभारत — एक संदेश, अनेक भाषाएँ 🌺

रामायण और महाभारत भारतीय संस्कृति के दो महान ग्रंथ हैं। दोनों हमें केवल प्राचीन कथाएँ नहीं बताते, बल्कि जीवन को समझने की दिशा भी देते हैं।

रामायण हमें प्रेम, परिवार, भाईचारा, त्याग, मर्यादा, धैर्य और अच्छे चरित्र का महत्व समझाती है। महाभारत हमें धर्म और अधर्म के बीच अंतर समझने, अपने कर्म और कर्तव्य को पहचानने तथा कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देती है।

दोनों का मूल संदेश यही है—सत्य, धर्म, मानवता, अच्छे संस्कार और सही कर्म के मार्ग पर चलना।

తెలుగు | Telugu

రామాయణం మనకు ప్రేమ, కుటుంబ విలువలు, త్యాగం, మర్యాద మరియు సోదరభావాన్ని నేర్పుతుంది. మహాభారతం ధర్మం, కర్మ, కర్తవ్యం మరియు కష్టకాలంలో సరైన మార్గాన్ని ఎంచుకోవడం నేర్పుతుంది.

தமிழ் | Tamil

இராமாயணம் அன்பு, குடும்பம், தியாகம், மரியாதை மற்றும் சகோதரத்துவத்தை கற்றுத் தருகிறது. மகாபாரதம் தர்மம், கர்மம், கடமை மற்றும் கடினமான நேரத்தில் சரியான பாதையைத் தேர்ந்தெடுக்க கற்றுத் தருகிறது.

मराठी | Marathi

रामायण आपल्याला प्रेम, कुटुंब, त्याग, मर्यादा आणि बंधुभाव शिकवते. महाभारत आपल्याला धर्म, कर्म, कर्तव्य आणि कठीण परिस्थितीत योग्य मार्ग निवडण्याची शिकवण देते.

ગુજરાતી | Gujarati

રામાયણ આપણને પ્રેમ, પરિવાર, ત્યાગ, મર્યાદા અને ભાઈચારો શીખવે છે. મહાભારત આપણને ધર્મ, કર્મ, કર્તવ્ય અને મુશ્કેલ સમયમાં સાચો માર્ગ પસંદ કરવાની શીખ આપે છે.

മലയാളം | Malayalam

രാമായണം നമ്മെ സ്നേഹം, കുടുംബബന്ധം, ത്യാഗം, മര്യാദ, സഹോദരസ്നേഹം എന്നിവ പഠിപ്പിക്കുന്നു. മഹാഭാരതം ധർമ്മം, കർമ്മം, കടമ, പ്രതിസന്ധികളിൽ ശരിയായ വഴി തിരഞ്ഞെടുക്കൽ എന്നിവ പഠിപ്പിക്കുന്നു.

বাংলা | Bengali

রামায়ণ আমাদের ভালোবাসা, পরিবার, ত্যাগ, মর্যাদা ও ভ্রাতৃত্বের শিক্ষা দেয়। মহাভারত আমাদের ধর্ম, কর্ম, কর্তব্য এবং কঠিন পরিস্থিতিতে সঠিক পথ বেছে নেওয়ার শিক্ষা দেয়।

اردو | Urdu

رامائن ہمیں محبت، خاندان، قربانی، عزت اور بھائی چارے کی تعلیم دیتی ہے۔ مہابھارت ہمیں دھرم، کرم، فرض اور مشکل حالات میں صحیح راستہ اختیار کرنے کا درس دیتی ہے۔

ਪੰਜਾਬੀ | Punjabi

ਰਾਮਾਇਣ ਸਾਨੂੰ ਪਿਆਰ, ਪਰਿਵਾਰ, ਤਿਆਗ, ਮਰਿਆਦਾ ਅਤੇ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਮਹਾਭਾਰਤ ਸਾਨੂੰ ਧਰਮ, ਕਰਮ, ਫਰਜ਼ ਅਤੇ ਔਖੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸਹੀ ਰਸਤਾ ਚੁਣਨਾ ਸਿਖਾਉਂਦੀ ਹੈ।

🌸 एक अंतिम संदेश

भाषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता का संदेश एक है।

रामायण हमें सिखाती है कि जीवन में मर्यादा, प्रेम और अच्छे चरित्र के साथ कैसे जीना है।

महाभारत हमें सिखाता है कि जब जीवन कठिन हो जाए, तब धर्म, विवेक और सही कर्म का मार्ग कैसे चुनना है।

हम किसी भी भाषा में पढ़ें, किसी भी प्रदेश में रहें और हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति अलग क्यों न हो—सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, कर्तव्य और मानवता का मूल्य सबके लिए समान है।

आइए केवल इन महान ग्रंथों को पढ़ें नहीं, बल्कि इनके अच्छे संदेश को अपने जीवन में उतारें। 🌺

🙏 जय श्रीराम।
🙏 जय श्रीकृष्ण।
🌸 धर्म की जय हो, मानवता की विजय हो।

skptech

Jai shree Ram

skptech