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New bites

अब मैं लोगों को उनके चेहरे,
अल्फ़ाज़, लिबास, काबिलियत, ओहदे, शोहरत से नहीं.. उनकी निर्दोष हँसी,
गहरी आँखों से जानता हूँ..

अब मैं शायद एक दो लोगों को ही जानता हु

anisroshan324329

बुराई की अंधी चेन

“दुनिया बहुत ख़राब हो गई है...”
यह लाइन आपने भी किसी न किसी से ज़रूर सुनी होगी, या शायद खुद कही होगी। लेकिन कभी शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछा है कि इस दुनिया को बुरा बनाने में हमारा अपना कितना हाथ है?

असल में हम सब एक अजीब मानसिक चक्रव्यूह में जी रहे हैं। जब हमसे कोई ग़लती होती है, तो हमारे पास मजबूरियों, हालातों और पारिवारिक तनाव के बहानों की पूरी लिस्ट तैयार होती है। हम खुद को तुरंत ‘निर्दोष’ मान लेते हैं। लेकिन जब वही ग़लती कोई दूसरा करता है, तो हम उसकी परिस्थितियों को जाने बिना, पल भर में उसे ‘गुनहगार’ घोषित कर देते हैं।

इसी दोहरे रवैये से जनमती है ‘बुराई की अंधी चेन।’ जहाँ समाज का हर इंसान खुद को एक ‘बेचारा पीड़ित’ समझ रहा है और सामने वाले को ‘विलेन।’ हर कोई किसी न किसी से बदला ले रहा है, कोई किसी पर ग़ुस्सा निकाल रहा है, और नफ़रत का यह अंतहीन सिलसिला चलता जा रहा है।

इस चेन को तोड़ने का सिर्फ एक ही तरीक़ा है— दूसरों को जज करना बंद कीजिए। किसी पर उंगली उठाने से पहले, एक पल के लिए खुद को उसकी जगह पर रखकर देखिए। जब आप हर बात पर तुरंत रिएक्ट करना छोड़ देते हैं और अपनी ग़लतियों की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं, तो आप अनजाने में नफ़रत की इस अंधी चेन को तोड़ देते हैं। याद रखिए, दुनिया को बदलने की शुरुआत हमेशा खुद को बदलने से होती है।
पूरा लेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
https://www.matrubharti.com/book/19994635/blind-chains-of-evil

praveenkumrawat012852

coming soon

sonambrijwasi549078

कुछ इस तरह वो शख़्स मुझे छोड़ गया

मानो किसी मछली को समंदर से निकालकर रेत में छोड़ गया

anisroshan324329

World Music Day

Music gives voice to devotion. 

On World Music Day, let us subscribe to the Dada Bhagwan Foundation Music Channel: https://dbf.adalaj.org/rze6cL8S

#worldmusicday #musicday #devotionalmusic #bhakti #youtubemusic #DadaBhagwanMusic

dadabhagwan1150

इक बूंद ज़हर कोई आज मिला दे, इश्क़ को आसान पीना होगा। मारो खंजर रूह में सीधा, हिज्र फ़िराक़ न जीना होगा।

क़ैद मुझे कर दे कोई, मैं गैर के साथ न उसको देखूँ, जहाँ छुआ हो उसने तुझको, बदन पे मेरे सीना होगा।

तू जा, खुश रह उसकी बाँहों में, मैं तन्हाई ब्याह कर लेंगे, रक़्स-ए-मस्ती आलम तेरा, मुझको ग़म में जीना होगा।

इक बूंद ज़हर कोई आज मिला दे, इश्क़ को आसान पीना होगा।

anisroshan324329

"मैं से मैं तक"

मैं सोचती हूँ...
आज जो मेरा हिस्सा है
ये धड़कन, ये ज़िद, ये नाम
जिसे लोग मेरा कहकर बुलाते हैं
कल को अगर वो मेरा न रहा,
तो क्या बचूँगी मैं?

क्या मैं बदल जाऊँगी
किसी ऐसी औरत में,
जिसकी आँखों में मेरा अक्स न हो?
या रह जाऊँगी एक खाली खोल,
जिसमें समंदर की आवाज़ तो है,
पर समंदर नहीं?

अगर ढूँढते-ढूँढते,
मैं रास्तों में ही बँट गई,
और हर मोड़ पर
ख़ुद का एक टुकड़ा छोड़ आई...
तो क्या होगा?

क्या मिलूँगी ख़ुद से,
आधी रात को,
जब सारी दुनिया सो जाती है
और सिर्फ़ साँसें जागती हैं?
या पाऊँगी ख़ुद को
उन सवालों के ढेर पर,
जिनके जवाब कभी दिये ही नहीं गए?

डर लगता है...
कि कहीं टूटी हुई मैं,
ख़ुद को जोड़ने की कोशिश में
और ज़्यादा न बिखर जाऊँ।
कि कहीं आईने में देखूँ,
और पूछ बैठूँ
"तुम कौन हो?"

पर फिर कोई कहता है भीतर से
टूटना भी तो बनना है।
बीज अगर टूटे न,
तो पेड़ कैसे बने?

तो अगर मैं खो भी गई,
तो क्या?
मैं अपनी ही राख से,
फिर से जन्म लूँगी।
क्योंकि मैं नदी नहीं,
जो समंदर में मिट जाए
मैं समंदर हूँ,
जो हर लहर में
ख़ुद को नया नाम दे देता है।

और जो मेरा है,
वो मिटता नहीं
बस मौन हो जाता है,
जब तक मैं उसे
फिर से सुनना न सीख लूँ।
प्राची तंवर …..

prachitanwar111

आज एक के घर में दो बच्चे हुए जुड़वा
मैने खालू से कहा
अच्छा खालू एक तीर से दो शिकार

anisroshan324329

हमारी वसीयत में सिर्फ दो बातें होंगी..
तुम्हारी हर शिकायत मेरे हिस्से,
और मेरे सारे लफ़्ज़ तुम्हारे नाम

anisroshan324329

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rajukumarchaudhary502010

# તેઓને પરવા નથી

ચારે બાજુ શોરનો મેળો છે,
સાચા શબ્દોનો ગળો ઘૂંટાયો છે.
ખોટા ચહેરાઓની આ ભીડમાં,
સાચું દિલ આજે એકલું છે.

લોકો આવે છે, લોકો જાય છે,
સમય પોતાની ચાલ ચલાવે છે,
પણ સત્યનો દીવો મનમાં બળે છે,
એ ક્યારેય બુઝાતો નથી.

હું તો બસ એટલું કહું આજે,
તેઓને પરવા નથી આપણી,
પણ એથી સપનાઓ મરતા નથી,
ને હિંમતના રસ્તા અટકતા નથી.

નફરતના ઘેરા વાદળ વચ્ચે,
આશાનો પ્રકાશ જલાવીએ,
જે દીવાલો રોકે છે રસ્તા,
એ દીવાલોને તોડી આગળ વધીએ.

હારનો વિચાર પણ ન કરીએ,
અંધકારથી ડર ન માનીએ,
સત્યને સાથી બનાવીને,
નવી દિશામાં પગલાં માંડીએ.

હું તો બસ એટલું કહું આજે,
તેઓને પરવા નથી આપણી,
પણ આપણે હાર ન માનવી,
લખવી છે નવી કહાણી.

ચાલો, હાથમાં હાથ લઈ,
સત્યની સાથે ચાલીએ,
આશા અને વિશ્વાસના સંગે,
નવી સવાર લાવીએ.
heena gopiyani (Dhamak)

heenagopiyani.493689

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

"दिल की राहत"

कदम थम गए मेरे जब उस पर नजर मेरी गई,
वो मुस्कुराए दूर से मुझे देख कर फिर धड़कने ठहर सी गई।

फिर एक खुशी झलक उठी आंखों के दरमिया से,
एक अरसा बाद आज इस दिल को राहत मिल गई।

मैं ठहरा नहीं इस दफा बस दौड़ पड़ा उसकी तरफ,
बाहों में समेट कर उसे, मेरी दुनिया मुकम्मल हो गई।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

Sometimes the people who change our lives don't arrive with a warning.

They simply appear...

And suddenly nothing feels the same.
📖🤍

"I noticed her instantly."

"Beauty disappears once you stare long enough."

#UpcomingNovel

"Would you keep reading after this page? 📖✨"

shivi27

अगर कोई पूछे कि सुकून कैसा दिखता है...
तो मैं तुम्हारा नाम लिख दूँ।

parmarsantok136152

no need any caption

vanshsingh118873

चेहरे पर लिखी नहीं होती हैं सच्चाई
उसके पीछे झाँकना पड़ता हैं
किसी इंसान को परखने के लिए
उसकी फ़ितरत को जाँचना पड़ता हैं

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

અંધારી ઓરડીમાં નાનકડું કાણું શું પડી ગયું,
પ્રકાશનું એક કિરણ મળતાં ફૂલ ખીલી ગયું🌻🌸
રહેતું હતું એ અસમંજસમાં કે ઊગવું શી રીતે,
ઊગવાની ચાહમાં એને કિરણ મળી ગયું,
ને સવાર સવારમાં એ ફુલ ખીલી ગયું ,🌻
ન રોકી શકે હવે એને કોઈ અંધકાર,
એના જીવનનું અજવાળું હવે થઈ ગયું❤️🌻

ayushikadia732904

."Soul copy nahi hoti".

arnagvanshi051673

Coming Soon 😇❣️

avinashgondukupe96025gmail.com5127

Ho Tum

Inn akhon mein
Basi tasveer ho tum

Iss dil mein
Basi dhadkan pe
likha hua naam
ho tum

Sach kahu toh
Meri shiddat ho
Tum

Aur Jo mere
Pyar mein saari
Hadh par kar jaye
Voh deewane ho tum

kya kah uss
deewane ko na
rukta hai
na kehta
fir bhi.....

Check out complete Poem on Writco by Gunjan Gayatri
https://writco.in/Poem/P76406182026225242

👉 https://bit.ly/download-writco-app

#Writco #WritcoApp #WritingCommunity

gunjangayatri949036

मेरी आंखों से पूछो मोहब्बत की बेबसी,
तेरे सिवा इसको कोई अच्छा नहीं लगता...!!!

narayanmahajan.307843

"दीवारों के पार"

कुछ ख़ास नहीं... हाँ, बहुत आम हूँ मैं।
मेरे नाम के आगे कोई ताज नहीं,
मेरी हँसी के पीछे कोई राग नहीं।
उजाले कभी थे मेरे, अब खो गए हैं,
अब तो बस एक थकी हुई, ढलती शाम हूँ मैं।

पर मेरे भीतर...
एक कमरा है।
न उसमें खिड़की है, न दरवाज़ा।
बस चार दीवारें हैं
और एक मैं हूँ,
जो ख़ुद से ही छुपी हुई हूँ।

इस कमरे को रोज़
मेरे भीतर का शोर खटखटाता है।
वो शोर जो चीख़ बन नहीं पाया,
वो आँसू जो बह नहीं पाए,
वो बातें जो कही नहीं गईं।
सब जमा हैं यहाँ,
साँस ले रहे हैं अँधेरे में।

हर सुबह एक सुनहरी रोशनी आती है,
मेरे जिस्म की दरारों से झाँकती है।
खिड़की ढूँढती है... नहीं मिलती।
थककर, मेरे ही साये से लिपटकर,
लौट जाती है रात के पास।
और मैं,
उसकी पीठ देखती रह जाती हूँ
बिना आवाज़, बिना शिकायत।

पर अब...
अब ये अँधेरा चुभने लगा है।
अब ये ख़ामोशी काटने लगी है।
अब मेरा मन
इस कमरे की मरम्मत चाहता है।

मुझे एक खिड़की चाहिए
छोटी ही सही,
पर इतनी बड़ी कि
कोई सवेरा उसमें से झाँक सके,
और पूछ सके "तुम ठीक हो?"

मुझे एक दरवाज़ा चाहिए
जिसकी चौखट पर
कोई दस्तक दे,
और मैं डरकर छुपूँ नहीं,
बल्कि कहूँ "आ जाओ,
यहाँ अँधेरा है, पर जगह है।"

मैं नहीं चाहती कि मेरा शोर
इन दीवारों में दफ़न हो जाए।
मैं चाहती हूँ कि वो
किसी के नाम की दुआ बनकर
इस कमरे से निकले।

मैं ख़ास नहीं हूँ, मुझे पता है।
पर ये दर्द... ये इंतज़ार...
ये ख़ास है।
और शायद
इसी इंतज़ार के नाम
एक सवेरा लिखा जाए।

तो आज,
मैं हथौड़ी उठाती हूँ
पहली चोट अपनी ही दीवार पर।
क्योंकि ढलती शाम को
अगर जीने का हक़ है,
तो उसे सुबह बुलाने का हक़ भी है।
प्राची तंवर …..

prachitanwar111

सच्चा प्रेम शोर नहीं करता...
बस हर सफ़र में चुपचाप साथ चलता रहता है।

parmarsantok136152