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New bites

लोग अभी बोल रहे हैं, खामोशी से सुन लेना तुम।
जब तुम्हारा वक्त आए,जो भी दिल में हो सब कुछ कह देना तुम, कि कैसे तुमने चलना सीखा, गिर कर खुद संभलना सीखा...

authorsahiba

थके हो तो सुनो
तुम अकेले नह ींहो
कविता


थके हो तो सुनो थोड़ा आराम कर लो
आराम करना आलस नहीं है

दिल में बहुत कुछ दबे है तो बोलो
दिल की बात बताना कमजोरी नहीं है

अगर रोना आता है तो रो लो जी भर रो लो
रोना कोई गुनाह नहीं है

तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हो
बस कहाँ एक बार मैं थक गया हूं
और मैं आराम करना चाहता हूं

मुझे गले लगाओ मैं तुम्हारे बाहों में सोना चाहता हूं

तुम्हारी कमजोरी को कोई नहीं जाचेगा
नहीं तो तुम्हारी गलती को कोई गिनबाने बैठेगा

बस वह तुम्हारे साग तुम्हारे गम में तुम्हारे हो ले गा
तुम्हारी गलतियों को भूल कर तुम्हें गले से लगाएगी

तुम्हें प्यार से गले लगाएगा कोई तो होगा

मत दिखाओ अपनी कठोर चेहरा हर बार
जो तुमसे प्यार करता है
उसके आगे थोड़ा नरम रहना कोई कमजोरी नहीं

abhinisha

दिल में आने का तो रास्ता होता है पर जाने का नही

इस लिए जब भी कोई इंसान जाता है, दिल तोड़ कर ही जाता है !

anisroshan324329

તને જો હું ના પસંદ પડુ
તો સાફ ના કહી દેજે.
પછી કોઈ પણ બહાને પ્લીઝ
મારો પ્રાણ ના લેજે.

amiralidaredia175421

मन रे तू काहे न धीर धरे-Mann Re Tu Kahe Na Dheer Dhare-Live| Singer: Vanita Thakkar| Original: Rafi
https://youtu.be/I98zodrkJhw

मन रे तू काहे न धीर धरे …. Mann Re Tu Kahe Na Dheer Dhare …. Live

Such a beautiful song !! Great lyrics by Sahir Ludhiyanavi, perfect composition by Roshan and par excellence singing by the great Muhammad Rafi !!

Here, it is presented by,
Singer : Vanita Thakkar

Film : Chitralekha (1964)

Recorded Live on StarMaker on 8th May, 2026

vanitathakkar

मेरे दोस्त…..

कितने दोस्त हैं तुम्हारे?  
हाँ दोस्त... दोस्ती सबको पसंद है...  
मुझे भी है।  

पर मेरी दोस्ती मतलबी लोगों से नहीं।  
मेरी दोस्ती है अंधेरों से 
जो मुझे उजालों तक ले जाने के क़ाबिल बना रहे हैं।  
जो गिराते हैं, ताकि उठना सिखा सकें।  
जो डराते हैं, ताकि हिम्मत पहचान सकूँ।

मुझे बैठना पसंद है अपनी ख़ामोशी के साथ  
वो मेरी पक्की सहेली है।  
क्योंकि वो शोर नहीं करती, सिर्फ़ सुनती है...  
मेरे एहसास, मेरे आँसू, मेरी वो बातें  
जो लफ़्ज़ों से कहने लायक़ नहीं।  
वो डाँटती नहीं, बस समझती है।

मैं रोज़ अपने ख़ास दोस्त 'अकेलेपन' के साथ बैठकर खाना खाती हूँ।  
वो हर निवाले पर मुझे रिश्तों की अहमियत समझाता है।  
बताता है कि भीड़ में भी इंसान कितना तन्हा हो सकता है,  
और तन्हाई में भी कोई कैसे तुम्हारा अपना बन जाता है।

मेरे दोस्तों का कोई रूप नहीं, कोई रंग नहीं...  
अदृश्य हैं वो सब।  
पर रहते हैं मेरे अंदर, मेरी साँसों में, मेरी रग-रग में।  
हर क़दम पर मुझे संभालते हैं,  
जब दुनिया धक्का देती है, तो यही मुझे थाम लेते हैं।

लोग पूछते हैं, "तुम अकेली क्यों रहती हो?"  
मैं हँस कर कहती हूँ, "अकेली कहाँ... मेरे साथ मेरी पूरी महफ़िल है।"  

मेरा दर्द मेरा दोस्त है…..जो मुझे मज़बूत बनाता है।  
मेरी रातें मेरी दोस्त हैं …..जो मुझे सपने बुनना सिखाती हैं।  
मेरा सब्र मेरा दोस्त है …..जो मुझे टूट कर बिखरने नहीं देता।  

और हाँ,  
जब सब छोड़ जाएँ,  
तो यही अदृश्य दोस्त कंधे पर हाथ रख कर कहते हैं….
"चल... अभी सफ़र बाक़ी है। हम हैं ना तेरे साथ।"  

तो मेरी दोस्ती आम नहीं...  
वो ख़ास है, बेमिसाल है।  
क्योंकि मेरे दोस्त दिखते नहीं,  
पर ज़िंदगी के हर मोड़ पर मिल जाते हैं।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

📖 मजदूर का सपना: मेरी पत्नी IAS बनेगी

rajukumarchaudhary502010

ઝલક તારી મળે જો એક આ આંખને જોવા
મળે ટાઢક આંખોને જીગરને હાશ થઈ જાશે.
હજી ગઈ કાલ સુધી તો જેને કદી જોયા પણ નોતા
ખબર નોતી હૃદયમા ઉતરીને આજ એ ખાસ થઈ જાશે.

amirali3796

ख़ामोश जवाब……

ज़रूरी नहीं हर सवाल का जवाब हो...  
कोई जवाब न होना भी जवाब हो सकता है।

और अगर तुम पूछो कि "कहाँ तक जाना है?"
तो मैं फिर चुप हो जाऊँगी।  
क्योंकि कुछ मंज़िलों के नाम नहीं होते,  
बस एक एहसास होता है 
कि रुकना नहीं है।

मैंने सपनों को अब ताले में नहीं रखा,  
ना दीवारों पर टाँगा है।  
मैंने उन्हें अपनी थकान में बोया है,  
अपनी नींद में सींचा है।  
वो अब दिखते नहीं,  
पर उगते ज़रूर हैं 
हर उस सुबह में,  
जब मैं गिर कर भी उठ जाती हूँ।

लोग कहते हैं “बड़ा सोचो",
मैं कहती हूँ "सच्चा सोचो"  
क्योंकि बड़े सपने अक्सर दुनिया के लिए होते हैं,  
और सच्चे सपने... सिर्फ़ अपने लिए।

तो मेरा जवाब यही है   
कि मैं जवाब नहीं दूँगी।  
मैं बस चलती रहूँगी,  
उस रास्ते पर जो अनजान है,  
उन पैरों से जो थके हैं,  
उस उम्मीद से जो ज़िद्दी है।

एक दिन जब पहुँच जाऊँगी,  
तो तुम ख़ुद देख लेना...  
मेरी ख़ामोशी क्या कह रही थी।

क्योंकि कुछ कहानियाँ  
सुनाई नहीं जातीं,  
वो एक रोज़ सब को ख़ुद सुन जाती है ।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

उम्मीदें…..

मेरी कई उम्मीदें थीं 
दोस्तों से, अपनों से, खुद के सपनों से...  
कभी बेफिक्र होकर, बिना सोच-विचार,  
मैं उन उम्मीदों के पीछे भागा करती थी।  
न परवाह थी लोगों की, न समाज की, न किसी तंज की...  
बस इतना मालूम था कि "जो होगा, देखा जाएगा"।

फिर वक़्त ने आँखें खोलीं।  
कुछ सपने गिरे, कुछ अपने बिखरे,  
कुछ दोस्तों ने रास्ते बदले, कुछ मैंने।  
जिन बातों पर हँसा करती थी, उन्हीं बातों ने रुलाया।  
जिस "देखा जाएगा" पर ऐतबार था,  
उसने ही आईना दिखाया।

और अब जब देखने की बारी आई,  
जो हुआ उससे... अब मैं बहुत फ़िक्र करती हूँ।  
न जाने, न चाहते हुए भी,  
मुझे परवाह रहती है लोगों की, समाज की, और हर एक तंज की।  
मुझे अब मालूम है बेपरवाह होने की कीमत
वो हँसी से नहीं, नींदों से चुकाई जाती है।

अब हर कदम से पहले, करती हूँ मैं बहुत सोच-विचार।  
न जाने अब उम्मीदें चल पड़ी हैं किसी अलग दिशा में 
जो मेरी नज़रों से ओझल है,  
और अब मैं उनके पीछे भाग रही हूँ,  
थके हुए पैरों से, पर ज़िद्दी हौसलों के साथ।  

मैं अब भी भागती हूँ,  
बस अब गिरने से डरती हूँ।  
पहले उड़ती थी, अब संभल-संभल कर चलती हूँ।

शायद बड़े होना यही है   
कि सपने वही रहते हैं,  
बस उन तक पहुँचने के रास्ते बदल जाते हैं।  
और हम, उन रास्तों पर चलते-चलते,  
खुद को थोड़ा-थोड़ा खो कर,  
फिर से पा लेते हैं।

और शायद उम्मीदें भागती नहीं,  
हमारे साथ बड़ी हो जाती हैं।  
बचपन में दौड़ती थीं, अब साथ चलती हैं,  
हाथ थामे, धीरे-धीरे... पर रुकती नहीं।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

जिस हृदय में करुणा है,🪷
वहीं भगवान का वास्तविक मंदिर है।🌸🙏🏻
हरि ॐ 🙏🏻

janshisaroha503972

गली गली में पंगे हो
हर शहर में दंगे हो

और जोह लड़की मुझसे बात नहीं करती
अल्लाह करे उसके बच्चे गंजे हो

anisroshan324329

इंसान जब समझदार होता है
तो सबसे पहले दिखावा छोड़ता है

ganeshkumar6818

विस्तार और समृद्धि का अंक :३
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विस्तार का अर्थ है फैलाव, यह विस्तार कैसे होता है, यानी आप का विस्तार क्या है? आपका ज्ञान, आपका कुटुंब(पत्नी और बच्चे सहित), आपकी कीर्ति ,आपकी प्रतिष्ठा, आप का शिक्षण, आपका धन और वैभव ,आप का आत्मिक उद्धार । यह विस्तार आप के शरीर के मेद और वजन का भी हो सकता है, यदि आप शिक्षक है तो आप अपने शिष्यों द्वारा आने वाले समाज और पीढ़ी का विस्तार और विकास करते है।
अंक ३ का स्वामी गुरु है और सभी कारक जो ऊपर कहे गए है वह गुरु से संबंधित है।
जब अंक ३ की पुनरावृत्ति होती है ३३३ होने पर पारिवारिक समस्याएं, जल्दी से धन और प्रतिष्ठा की इच्छा यह सब बढ़ सकता है। ३३ आध्यात्मिक उन्नति देता है, यह कुछ सौम्य है। यह कॉम्बिनेशन सेफेरियल ग्रिड से देखा जाता है।

yashibc123gmail.com135615

શુદ્ધ જ્ઞાનથી મોક્ષ, સદ્જ્ઞાનથી સુખ ને વિપરીત જ્ઞાનથી દુઃખ. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/vRtj554M

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dadabhagwan1150

कोई कहानी झूठी बता कर वापस गया है कोई अपनी आदत लगाकर वापस गया है

मेरा यूँ टूट कर बिखर जाना भी लाजमी था यार कोई दिल के अंदर आकर वापस गया है ..!!!

anisroshan324329

खुश खबरी
सब के लिए रिश्ता लाया हूं
किस किस को शादी करनी है

anisroshan324329

इश्क़ के बाजार में
हुस्न का मेला रह गया........

भीड़ हैं लाखों की मगर...
दिल अकेला रह गया..........





दिखावा करने वाले ले गए
मोहब्बत का किताब.......



शिद्दत से चाहने वाला.....
हर इंसान अकेला रह गया..!!

anisroshan324329

🌱हळदीच्या पानातील पानगी 🌱

🌱पानगी हा प्रकार केळी अथवा कर्दळीच्या पानांवर सुद्धा केला जातो
प्रत्येकाची आणि प्रत्येक ठिकाणी केली जाणारी पानगी वेगळी असते
ही पानगी मी हळदीच्या पानात केली आहेत
घरच्या बागेत भरपूर हळदीची पाने आहेत
उकडणे वाफवणे यासाठी ती भरपूर प्रमाणात वापरली जातात

🌱कधी कधी एखाद्या रस भाजीत सुद्धा य पानाचे एक दोन तुकडे मी टाकते
छान स्वाद येतो 😊

🌱हळद जंतुनाशक असते
शिवाय त्या पानांचा सुगंध आणि त्यामुळे पदार्थाला येणारा स्वाद अप्रतिम असतो
सगळे घर या खमंग सुगंधाने दरवळून जाते
अगदी बाहेर पर्यंत वास पसरतो

🌱य पानात मी केलेल्या पानगी साठी
प्रथम एक वाटी तांदूळ पिठीत
थोडेसे ताक, किसलेले आले, मीठ, किंचित हळद, जिरे व मीठ घालून सरसरीत भिजवून ठेवले
पंधरा वीस मिनिटे हे झाकून ठेवले
(ताक ऐच्छिक आहे नुसत्या पाण्यात पण भिजवू शकता)

🌱हळदीची पाने स्वच्छ धुवून पुसून घेतली
त्याचे चौकोनी तुकडे केले
जेणेकरून तव्यावर भाजायला बरे पडेल

🌱तवा गरम करायला ठेवला
पानांवर आतील बाजूला भिजवलेले तांदळाचे पीठ हाताने पसरून लावले
वरती हलकेच बाहेरच्या बाजूने दुसरे पान ठेवून हलकेच दाबले

🌱अशी सर्व पाने तयार केली
तवा कडकडीत तापल्यावर ही पाने ठेवून दोन्ही बाजूने खमंग भाजून घेतली
याला भाजताना तेल अथवा तूप अजिबात लागत नाही

🌱खाली काढून हलकेच दोन्हीकडची पाने काढली
गरम गरम पानगी तूप आणि घरच्या लिंबाच्या लोणचे सोबत खायला घेतली

🌱अतीशय चविष्ट झाली होती 😋
हळदीच्या पानामुळे ही पानगी खमंग आणि सुवासिक झाली होती 😊

jayvrishaligmailcom

"मेरे कान्हा... रिश्ता शब्दों से नहीं,
उस एहसास से है जो हर पल साथ रहता है।

parmarsantok136152

कोई मेरी जिंदगी का ख़ूबसूरत पल पूछेगा तो ,
मैं उसे तुमसे मुलाक़ात का किस्सा सुनाऊँगा ।।💕

narayanmahajan.307843