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New bites

my short stories collection is named as "ஸ்னேகாவும் புத்தகமும்"

kattupayas.101947

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kattupayas.101947

PROJECT ROSHNI — Empowering Through Education
Project Roshni is an initiative focused on creating awareness, building confidence and opening new possibilities for young women through education and skill development.
The initiative brings learning beyond the classroom by encouraging girls to understand their potential, develop practical skills and take confident steps towards a better future.
For Dr. Anchal Gupta, initiatives like Project Roshni are about creating opportunities that can make a lasting difference in the lives of young people.
“True empowerment begins when we give people the knowledge, confidence and opportunity to shape their own future. Project Roshni is a small step towards helping young girls see greater possibilities for themselves.”
— Dr. Anchal Gupta
The smiles, certificates and shared moments captured during the initiative reflect something simple but powerful — when education reaches the right hands, it can become the beginning of a new journey.
Project Roshni
Educate. Empower. Inspire.

bhumikabhati.662947

🌾 अन्नवत की हार्दिक शुभकामनाएँ | अन्न ही जीवन है | किसान सम्मान | Annavat Festival Wishes 2026

अन्नवत पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌾🙏
अन्न, किसान और प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए यह शुभकामना संदेश समर्पित है। किसान का सम्मान करें, अन्न की कद्र करें और समृद्धि व खुशहाली की कामना करें।

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rajukumarchaudhary502010

mera man fakir . mera tan fakir
ganja ki moj

virdeepsinh

🌷" કોઈના માટે "🌷

ખર્ચાઈ જ ગયા કોઈના માટે.
ચર્ચાઈ જ ગયા કોઈના માટે.
છતાંય ક્યાં સાંપડ્યું સુખ છે,
વેંતરાઈ જ ગયા કોઈના માટે.

ના લગાવ્યો મલમ ઘાવ પર,
ખોતરાઈ જ ગયા કોઈના માટે.
બૂરાઈનું પણ ભલું કરવા કાજે,
જોતરાઈ જ ગયા કોઈના માટે.

સંબંધોને સાચવવામાં કાયમ,
ખોવાઈ જ ગયા કોઈના માટે.
અમારું તો કોઈ ન થયું છતાંય,
લૂંટાઈ ગયા અમે કોઈના માટે.

મૃત્યુના ખોળે પોઢીને "વ્યોમ",
હણાઈ પણ ગયા કોઈના માટે.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અંજાર. મુ. રાપર.

omjay818

"अंधेरा कभी डरावना नहीं होता, अंधरे में जो सोचा जाता है वह डरावना होता है।"
GM
Dharmendra Kumar

erdharmendra

संगत अगर शकुनी की हे,
तो भगवान श्री कृष्ण भी दुश्मन है।

anisroshan324329

अकेलापन..
दीवाली की तैयारी की घर में अलग ही रौनक थी। हर कोई किसी न किसी काम में लगा हुआ था। किचन से आती मिठाई और नमकीन की खुशबू इस दिन को और खास बना रही थी। आँगन में दादी मिट्टी के दीये तैयार कर रही थीं और उनके पास बैठी सिया बत्तियाँ बनाने में व्यस्त थी। तभी किचन से आती बर्तनों की खनक के बीच माँ की आवाज गूंजी, “सिया, इधर आकर मेरी मदद करवा दे।” सिया सिर्फ 15 साल की थी, लेकिन घर में उसे अब बड़ी बेटी की तरह जिम्मेदारियां निभानी थीं। थोड़ी झिझक के साथ जब वह किचन की देहरी पर पहुंची, तो लड्डू बना रही चाची ने हल्का-सा मुस्कुराते हुए कहा, “सिया, अगर खेलना हो गया हो तो सबके लिए चाय बना लो। देखो, वेदु तुमसे छोटी है, फिर भी कैसे हाथ बँटा रही है।” सिया ने उम्मीद भरी नजरों से माँ की तरफ देखा, लेकिन माँ ने कड़ाही से नमकीन निकालते हुए बस इतना कहा, “चाची ठीक कह रही हैं।” यह सुनकर सिया चुपचाप चाय बनाने में लग गई।
​जब शाम को सब दीवाली की जगमगाहट में डूबे हुए थे, तो सिया छत पर अकेली दूर आती रोशनी को निहार रही थी। शायद वह खुद को ही ढूँढ़ने की कोशिश कर रही थी। वह अक्सर सोचती थी कि आखिर वह ऐसा क्या करे जिससे सबको लगे कि वह भी इस घर का हिस्सा है? क्या घर में सिर्फ लोगों के काम आना और पढ़ाई करना ही पहचान का पैमाना है? वक्त के साथ सिया अपने ही अंदर कहीं खोती चली गई। उसे जब कोई बात चुभती, तो वह चुप हो जाती, और घरवाले उसकी इस खामोशी को उसका घमंड समझ लेते। जबकि वह तो बस यह चाहती थी कि जैसी वह है, सब उसे वैसे ही अपना लें।
​एक दिन अपनी 12वीं की मार्कशीट हाथ में लेते हुए उसे याद आया कि कैसे उसने सबके दिल में जगह बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करके 75% हासिल किए थे। उसे लगा था कि सब खुश होंगे, लेकिन उसी दिन वेदु का 10वीं का रिजल्ट भी आया था। वेदु हमेशा टॉप करती थी और उससे 85% आने की उम्मीद नहीं थी।
उसके 85% आने पर घर में सबको इतना दुख हुआ था कि वे यह भी भूल गए थे कि आज सिया का भी रिजल्ट आया है।
अपने ख्यालों में डूबी सिया ने खुद से कहा, “चलो सिया, कुछ तुममें ही कमी होगी... या शायद मैं ही पीछे छूट जाती हूँ?” तभी आँगन से माँ की आवाज ने उसे फिर हकीकत में खींच लिया। किचन में काम करते हुए उसने सुना कि चाची और माँ गर्व से वेदु की तारीफ कर रही हैं, और माँ कह रही हैं, “मुझे तो बस सिया की फिक्र होती है, न इसे काम-काज आता है, न पढ़ाई में मन है।” रोटी बनाती सिया के मन में उधेड़बुन चल रही थी कि अगर कोई थोड़ा सा भी उस पर भरोसा कर लेता या प्यार से पूछ लेता कि उसके सपने क्या हैं, तो शायद वह भी कुछ कर पाती।
​घर की इन घुटन भरी दीवारों के बीच, जब सिया ने बाहर की दुनिया में थोड़ी राहत और अपनापन तलाशना शुरू किया, तो उसकी जिंदगी में राज आया। राज उसकी चुप्पी को कभी घमंड नहीं समझता था, बल्कि प्यार से पूछता— “आज फिर चुप हो?” धीरे-धीरे सिया अपनी छोटी-छोटी बातें, घर के ताने और मन का हर डर राज से कहने लगी। राज उसे समझाता नहीं था, बस उसका साथ देता था। जब राज ने उससे पूछा कि वह आगे क्या करना चाहती है, तो सिया कुछ देर चुप रही, क्योंकि इतने सालों में किसी ने उससे यह सवाल कभी नहीं पूछा था। राज के रूप में उसे वह अपनापन मिल गया जिसकी तलाश उसे बचपन से थी। इसी सहारे के चलते, जब घर में शादी की बात उठी, तो उसने राज का नाम लिया और राज ने भी हामी भर दी। सिया को लगा कि अब उसे रोज-रोज खुद को साबित नहीं करना पड़ेगा।
​लेकिन वह दिन आया जब सिया सब तैयार होकर राज का इंतजार करती रही। सुबह से शाम ढल गई, पर राज नहीं आया। घर की नजरों में जो सवाल और तंज थे, वे किसी तीर की तरह चुभ रहे थे। रात करीब 11 बजे राज का फोन आया और उसने बेफिक्र अंदाज में कहा कि घर की किसी समस्या के चलते वह आ नहीं पाया। उस एक फोन ने सिया के अंदर वर्षों से जमा हुआ बाँध तोड़ दिया। वह फूट-फूटकर रोई, अपनी जिंदगी के हर उस पल को याद करके रोई जहाँ उसे किसी अपने का साथ चाहिए था, जो उसे कभी नहीं मिला।
​रोते-रोते जब उसकी आँखें सूख चुकी थीं, तो खिड़की से सूरज की पहली किरण उसके कमरे में दाखिल हुई। उस गुलाबी रोशनी ने सिया के मन को एक ऐसा सुकून दिया जिसकी तलाश उसे उम्रभर थी— अपने अकेलेपन से दोस्ती करने का सुकून, खुद को खुश रखने का सुकून। सिया के चेहरे पर एक नई चमक के साथ हल्की-सी मुस्कान उभरी। वह उठी, अपना मनपसंद जोड़ा पहना और अच्छे से तैयार हुई। उसकी आँखों में अब उदासी नहीं, बल्कि अपने सपनों को जीने की जिद थी। जिंदगी में पहली बार, सिया को किसी और के जरिए अपनी पहचान साबित करने की जरूरत नहीं महसूस हुई; उसे सिर्फ खुद को पहचानना था।
☆अनामकारा

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मैंने खुद को चुन लिया है! 🔥💯

आप क्या सोचते हैं इस बारे में?? ( comment, like and follow also)

santoshikatha858769

जीवन तो जीना ही है ❤️🙏

sudarshanpandeynaman443445

jai jagannath

skptech

Radhe Krishna

skptech

તમારી વાટ હું જોઉં છું અને તમે વાયદા અને દિવસ લાંબાવ્યા કરો છો.
આમ ને આમ દિવસ વરસ વીતી જશે,પછી કોણ રાખમાં મળવા આવશે?

savdanjimakwana3600

From Mauritius to Delhi: When Trust Travels Beyond Borders
A patient from Mauritius recently chose to seek eye care at Netram Eye Centre, New Delhi, reflecting the trust that patients place in their doctors when it comes to something as precious as vision.
For Dr. Anchal Gupta, every patient journey is more than a medical consultation. It is about understanding the patient's concerns, providing the right guidance and helping them feel confident throughout their treatment journey.
Dr. Anchal Gupta shares:
“When a patient travels from another country and places their trust in us, it is a responsibility we deeply value. Good eye care is not only about treatment—it is also about listening, guiding and making every patient feel cared for.”
Patients may come from different cities and countries, but the expectation remains the same — trust, clarity and compassionate eye care.
A patient's trust is one of the most meaningful parts of a doctor's journey.
— Dr. Anchal Gupta
9319909455

bhumikabhati.662947

आ...... गया....... है ➡👻🖤
काल गढ़ की तारा - 4

दुल्हन जैसा सजा आँगन, बारातियों की जगह मौत का साया!
रुद्र दूल्हा बना है दिल का इंतजार तारा या दुल्हन🧟‍♀️🧛‍♀️?


दीयों से सजा है आँगन, पर छाया है घोर अंधेरा,
दूल्हा बन बैठा रुद्र, ये कैसा मौत का फेरा।
गेंदा फूल महक रहे, पर हवा में खौफ बसा है,
हज़ार दीयों की लौ में, कोई राज़ छिपा हंसा है।
तारा चले जिस डगर, वो डगर नहीं आसान,
काल गढ़ की दीवारों में कैद है उसकी जान।
अब देखो तारा बनेगी तारा, या बुझेगी बन शमशान।

raktkamal

रुक जाना नहीं-Ruk Jaanaa Nahin-Live | Singer: Vanita Thakkar | Original: Kishore Kumar| L-P Majrooh
https://youtu.be/EWwOuDZBoTM

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के - Ruk Jaanaa Nahin Tu Kahin Haar Ke …. Live

Singer: Vanita Thakkar

Recorded Live on StarMaker on 20th September, 2026 ….

Original : Kishore Kumar
Music Director : Laxmikant Pyarelal
Lyricist : Majrooh Sultanpuri
Film : Imtihaan (1974)

A song which has inspired millions …. Another hit by Kishore Da …. Must have heard it hundreds of times on Vividh Bharati …. Always love singing it …. Hope everyone enjoys listening to it 👍🏻👍🏻🎵🎵🙏🏻🙏🏻

- Vanita Thakkar (Omkaar Swar Vihar)

vanitathakkar

एक अधूरा सफर: खुद को पाने की चाहत में
​आखिर ऐसा भी क्या पाना था, जिसके लिए मैंने खुद को ही खो दिया?

​“अक्सर हम सफलता की दौड़ में अपनी पहचान को पीछे छोड़ आते हैं। आज की यह कहानी सिर्फ अर्णव के संघर्ष की नहीं, बल्कि उन अनकहे जज्बातों की है जो हम में से हर कोई कभी न कभी महसूस करता है। आइए ठहर कर अपने उस 'अधूरे सफर' को याद करें जिसे हम दुनिया को तो नहीं दिखा पाते, लेकिन जो हमारी रूह में कहीं दर्ज है।”

​कमरे में चल रहे पंखे की सर-सर और एसी की ठंडी हवा माहौल को ठंडा तो कर रही थी, लेकिन अर्णव के भीतर मची जलन को जैसे और हवा दे रही थी। बाहर अगस्त की स्याह रात और घुटन भरी उमस बिल्कुल उसके जीवन की दास्तान जैसी लग रही थी। अर्णव कुर्सी से उठा और चुपचाप खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।
​एक गहरी सांस लेते हुए, आंखों में बेपनाह दर्द और तकलीफ के बावजूद, उसके चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान उभरी। उसने धीरे से गुनगुनाया, "क्या यह स्याह रात कभी खत्म होगी, या फिर जीवन का हर पन्ना अंधेरा ही रहेगा?"
​खिड़की बंद कर वह वापस अपनी जगह आ बैठा। उसकी नजर उन किताबों और नोट्स के बंडलों पर थमी, जिन पर शायद अब थोड़ी धूल जमने लगी थी। यह उसकी सालों की मेहनत और तपस्या के अकेले गवाह थे। उसने टेबल पर रखी अपनी मार्कशीट उठाई—वही मार्कशीट जो जैसे चीख-चीख कर कह रही थी कि उसने मेहनत नहीं की।
​तभी उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे। अर्णव का दिल और वह बंद कमरा, दोनों जानते थे कि उसने कितना हौसला दिखाया था। पर दुख तो यह था कि दुनिया के पास उसकी नाकामी का सबूत था, और अर्णव के पास अपनी मेहनत का कोई गवाह नहीं। आखिर जज्बातों का कोई सबूत थोड़ी होता है।
​तभी फोन की रिंग बजी। कांपते हाथों से उसने फोन उठाया। दूसरी तरफ से उसकी मां की आवाज आई, "बेटा, कैसे हो? खाना खाया?" अर्णव कुछ कहना चाहता था, पर शब्द जैसे गले में ही फंस गए। मां की आवाज में छिपे उस ममता भरे स्पर्श ने जैसे उसके सब्र का बांध तोड़ दिया। दूसरी तरफ, मां अपने बेटे की खामोशी और सुबकियों को सुनकर दिल थामे रह गई।
​उन्होंने बड़े धैर्य और प्यार से कहा, "बेटा, कोई बात नहीं। हम तुम्हारे साथ हैं। मां हर हाल में अपने बच्चों के साथ खड़ी रहती है।" सच तो यही है, इंसान चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, दुख के वक्त सबसे पहले मां ही याद आती है।
​अर्णव ने आंसू पोंछे और भारी मन से धीरे से पूछा, "मम्मी... पापा क्या कह रहे हैं?" मम्मी की आवाज में थोड़ी हंसी घुली और वह बोली, "पापा कह रहे हैं कि अर्णव को बोलो, कुछ दिन घर आ जाए... अच्छा लगेगा।"
​अर्णव ने एक भारी सांस ली और हल्के से "हां" कह कर फोन रख दिया। पर उसके मन को तसल्ली नहीं थी। वह गहरी सोच में डूब गया—कैसे एक एग्जाम की तैयारी के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया, दोस्तों से दूरी बना ली, और आखिर में उसका वह एक प्यारा रिश्ता भी बेरोजगारी की भेंट चढ़ गया। और अब, इन सबके बीच... उसने शायद खुद को ही खो दिया था।
​तेज हवा की वजह से खिड़की फिर से खटकी, तो वह अपने खयालों से बाहर आया। उसने एक गहरी सांस ली और खुद से ही पूछा: "आखिर ऐसा क्या पाना था, जिसके लिए मैंने खुद को ही खो दिया?"
​एक एहसास
​कभी-कभी हम वक्त की भाग-दौड़ में इतने खो जाते हैं कि रुक कर यह सोचना भूल जाते हैं कि हम असलियत में क्या चाहते हैं। सफलता जरूरी है, मगर क्या अंत में खुद को ही खो देना सही है? आज शायद वक्त है खुद को फिर से ढूंढने का। इस सफर के कुछ पन्ने शायद हम सभी के पास होते हैं—वह अधूरे हिस्से जो हम किसी को दिखा नहीं पाते, पर खुद में महसूस करते हैं।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

Do you know that during difficult times, you should surround yourself with positive people?

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#positivity #positive #staypositive #facts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

माँ...अम्बे की पदयात्रा

भाद्रमास की यह पदयात्रा
भक्तों का यह विराट प्रवाह ,
माँ अम्बे की पावन चरणों में
अंबाजी की ओर चलता रहा ।

हर एक भक्त का शुद्ध मन
अरावली के कठिन पथ पर ,
गब्बर की ऊँची छाँव तले
लाखों पाँव स्वयं बढ़ते रहे ।

जहा माँ ने मन से पुकारा
वहा भक्त खिंचा चला आया ,
निरंतर चलता रहा श्रद्धालु
पैरों में छालों की तीव्र पीड़ा ।

मुख पर सदैव माँ का नाम
तन बेशक थककर चूर हुआ ,
पर मन कभी हार न मानें
आँखों में बस एक ही सपना ।

दिल में बस दर्शन की प्यास
बाहर विकट परिस्थिति में भी ,
जाग रहा भीतर दृढ़ विश्वास
हाथों में पवित्र ध्वजा थामें ।

लाल चुनर माथे पर बाँधे
जुबां पर अटूट श्रद्धा से ,
' बोल मारी अम्बे, जय..जय..अम्बे ' का
मधुर सूर सर्वत्र गूँज उठा ।

झुंड के झुंड आगे बढ़ते रहे
बूढ़े-बच्चे और जवान
भूलकर अपना होश, ज्ञान ,
सब रथ के संग नाच रहे ।

सब संघ के साथ चल रहे
पथ-पथ पर आगे-पीछे ,
परस्पर मिल-जुलकर
एकता का स्नेह बाँटकर ।

जगह-जगह पर लगें हैं
निःशुल्क सेवा शिविर ,
पग-पग पर भोजन, विश्राम
कोई दबाता पाँव थके ।

कोई लगाता ज़ख्म पर मरहम
कोई आराम में ले माँ का नाम ,
निराली है मांँ तेरी यह लीला
सब भक्तजन तेरा स्मरण करें।

निस्वार्थ भाव की बहती गंगा
भक्त तेरी करुणा का आधार ,
अरासुरी के इस पावन स्थल पर
तेरा दिव्य और भव्य दर्शन पाने ।

सदैव निर्मल हृदय से
अनन्य भक्त की दृष्टि पड़ी ,
तेरे अनंत धाम पर
सारा कष्ट क्षणभर में मिटे ।

माँ..अम्बे के चरणों में
शीश झुककर धन्य हुआ ,
पुर्ण हुई असीम कृपा से
उसकी हर मनोकामना ।

शक्तिपीठ का यह महाकुंभ
भक्ती का यह अद्भुत संगम ,
श्रद्धा की अविरल धार
पा ले तू जीवन की नैया पार ।

©®- शेखर खराड़ी
तिथि-२४/९/२०२६

shekharkharadi6923

MY NEW UPCOMING BOOK ....A REAL LIFE STORY ...

davekaushik016gmailc

🟨पाटवडी

🟨कोल्हापुरात हीला बेसन वडी किंवा थापट वडी किंवा पिठल्याची वडी पण म्हणतात🙂
रेणुका देवीच्या (जी यल्लंमा देवी म्हणून ओळखली जाते)प्रसादात या वडीला अग्र स्थान आहे
शिवाय नेवेद्याच्या पानात
श्राद्धाच्या जेवणात सुध्दा या वडीचे महत्व आहे

🟨साहित्य

बारीक बेसन पीठ दिड वाटी
दोन मोठ्या मिरच्या बारीक ठेचून
मिरची तिखट असावी म्हणजे चव लागते
नाहीत वडी मिळमिळीत होते
कढीलिंब एक डहाळी
भाजलेली खसखस व तीळ
कोथींबीर ओले खोबरे
पंच फोडण.. किंवा फोडणीचे साहित्य
हींग ,हळद

🟨कृती

🟨प्रथम कढईत तेल घालून पंच फोडण ,हिंग ,हळद ,कढीलिंब ,
ठेचलेली मिरची घालून फोडणी करावी
त्यात एक वाटी पाणी घालावे
चवीनुसार मीठ घालावे

🟨पाणी उकळले की गॅस बारीक करुन त्याला हळू हळू डाळींचे पीठ लावावे
गुठळी होऊ देऊ नये

🟨पिठाचा गोळा झाला की झाकण ठेवून पाच मिनीटे शिजवून घ्यावे
एका ताटलीला तेल लावून हे गरम मिश्रण त्यावर थापावे

🟨वरती भाजलेली खसखस व तीळ लावावे
थोडे खोबरे कोथींबीर थापावे

🟨गरम असतानाच आवडीच्या आकारात वड्या कापून घ्याव्या.

🟨तोंडी लावणे म्हणून चांगल्या लागतात
आवडतं असल्यास यात आले लसूण वापरता येते
(पण नैवेद्य करताना काही ठिकाणी लसूण चालत नाहीं )

jayvrishaligmailcom

"तुम्हारे बिना जीना नहीं,
तुम्हारे भीतर जीना सीख रहा हूं।"

Very good morning
Dharmendra Kumar

erdharmendra