Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

बेटी?....

माँ वह, जो किसी और के बच्चों को भी ममता दिखाती है।
फिर क्यों मैय्या, जिस संतान को तोहे जन्म दिया,
उनके साथ तुमने क्यों भेद-भाव किया?
मैंने भी तोरी कोख से जन्म लिया,
उसी की तरह वही दूध पीया,
फिर भी यह भेद-भाव क्यों, मैय्या?
क्यों हर बात मुझे ही समझना पड़ता है मैय्या?
वह भी तो तोरी बात को समझ जाए ना मैय्या।
अगर मैं बेटी हूँ तोरी, तो वह बेटा है तोरा,
क्यों मैं ही तोरी पीड़ा का भार अकेले ले चलूँ?


क्या मेरे नाम से जन्म लिए यह तोरे शब्दों ने—
'तोहे जैसी बिटिया किसी को ना मिले, करम फूटे थे मेरे जो मैंने तुझे जन्म दिया'
आखिर क्यों मैय्या? यह भेद-भाव क्यों?
उसका नाम छोड़ो, वह तो कहे ऐसा ही है।
मैय्या तो ममता के लिए जानी जाती है,
फिर यह भेद-भाव क्यों मैय्या?
उसके भाग्य में तू मैय्या है, तो मेरे भाग्य में क्यों नहीं?


अगर वह 'राजा बेटा' है तोरा,
तो मैं भी तो तोरी बेटी हूँ।
फिर यह भेद-भाव क्यों आया?
वह वारिस है, तो मैं क्यों 'पराया धन' कहलाऊँ मैय्या?
मैं भी तो तोरी बेटी हूँ,
तूने ही तो जना है मुझे, तूने ही दूध पिलाया मुझे,
फिर आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?
आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?

mayahanchate855175

Bharat mata ki jai Radhe Krishna

skptech

तुम्हें होगा डर

मेरी वफ़ा से
मेरे इरादों से
मेरे इश्क़ से
मेरे प्यार से

मुझे तो बस ये डर है

तुम्हारे न होने का
तुम्हें खोने का
तुम्हारे दूर जाने का
तुम्हारे रोने का

anisroshan324329

ना देखना मेरी नज़र से...
खुद को कभी आईने में...
उम्र ही लग जानी है...
ना देखना मेरी नज़र से...
खुद को कभी आईने में...
उम्र ही लग जानी है...
फिर नज़र उतरवाने में... फिर नज़र उतरवाने में...

anisroshan324329

Aap sabhi ko 15 august ki hardik shubhkamnaye

sandeepadventurestories

do no frind the

virdeepsinh

मोहब्बत के चिरागों में नफ़रत को बसने न देना,

हँसता रहे ये हिंदुस्ताँ हमारा, इसे कभी बिखरने न देना ।।

anisroshan324329

🌿मोड आलेली नाचणी आणि मिश्र डाळ डोसे 🌿

🌿साहित्य
एक वाटी नाचणी
मूग मसूर उडीद डाळ एक वाटी

🌿कृती

एक वाटी नाचणी
रात्री भिजवून ठेवणे
सकाळी तिला मोड आणण्यास एका चाळणीत ठेवणे
ही चाळणी एका पातेल्यात पाणी घेऊन त्यावर झाकून ठेवणे
दोन दिवसात छान दरदरीत मोड येतात

उडीद, मूग, मसूर सर्व मिळून एक वाटीभर सकाळी भिजत ठेवणे
संध्याकाळी या डाळी आणि मोड आलेली नाचणी बारीक वाटून एकत्र करून ठेवणे

रात्र भर ठेवले की सकाळी पीठ छान फुगून येते
चांगले हलवून मीठ घालून डोसे घालणे

मोड आलेली नाचणी
सर्व डाळी
शिवाय आंबवलेले मिश्रण यामुळे
हा डोसा पौष्टिक व चवदार होतो
आपल्या आवडीच्या चटणी अथवा भाजी सोबत खायला घेणे

jayvrishaligmailcom

તારી પાસે બધો ખુલાસો કરવામાં બીક લાગે છે,તમને ગુમાવવાની.
હું તો ચાહું છું.તેટલું જ યાદ રાખું છું,એજ મારી મૂડી છે,ચાહવાની.

savdanjimakwana3600

शिव का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है,
‎बाकी सब तो समय का किनारा है।
हर हर महादेव 🌿🙏

anitasorte6489gmail.com190157

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Written by Neha Banchhor ✍️💖

nehabanchhor331838

પાંખે સપનાં,
ટેરવે ક્ષણો વીધી,
મેટ્રો દોડતી.

suketu100

परदेश में तीज कैसे मनाऊं

आ गई तीज सखी, कैसे मनाऊं
ना पड़े झूले अमीया की डाल पे
वो झूले, वो अमीया की डाल कहां से लाऊं
आ गई तीज सखी कैसे मनाऊं

मेरा मन फंसा है पीहर गलियों में
मैं यहां परदेस में, कैसे जाऊं
फर्ज हमेशा मुझको पुकारे
कैसे तीज मनाऊं

सावन देखो बरस रहा है
मायके जाने को मन तरस रहा है
राह निहारे मां मेरी,
पर मैं छोड़ पिया का आंगन
तीज मनाने कैसे जाऊं

रच गई मेहंदी हाथ सखी
नेह की पींगे कैसे क बढ़ाऊं
शहर में अकेले पड़ गई मैं तो
बिन सखियों के तीज कैसे मनाऊं

चूड़ी खनके, खनके पायलियां
बिजली कड़के, बरसे बदलियां
मन रोये याद कर पीहर की गलियां

ना है झूले, ना है सखियां
कैसे गीत मिलन के गाऊं
सखी कैसे तीज मनाऊं

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

મારું દિલ નાજુક છે,તમારા કઠોર જવાબ સહન નથી કરી શકતું ત્યાં દિવસ રાત ઉજાગરો આખો.
હું ક્યાં માગું છું,કોઇ સ્થૂળ ચીજ! ફક્ત તમારો હસમુખો માસુમ ચહેરો રૂબરૂ જોવા તડપે છે,મારી આંખો.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

जिंदगी.,....

कभी धूप है, कभी छाँव है जिंदगी,
कभी हँसी है, कभी घाव है जिंदगी।
जो कल मिला था, आज दूर हो गया,
यही तो बदलता हुआ भाव है जिंदगी।
कभी अपने भी पराए हो जाते हैं,
कभी अजनबी दिल के करीब आते हैं।
जिसे हम समझते हैं अपना हमेशा,
वही अक्सर हमें सबक सिखाते हैं।
गिरना भी पड़े तो घबराना नहीं,
टूट जाओ मगर बिखर जाना नहीं।
रास्ते चाहे कितने भी मुश्किल हों,
अपने कदमों को पीछे हटाना नहीं।
वक्त किसी के लिए रुकता नहीं,
दर्द हमेशा दिल में टिकता नहीं।
आज अगर आँखों में आँसू हैं तो क्या,
हर मौसम हमेशा एक-सा रहता नहीं।
बस चलते रहो, चाहे राह कठिन हो,
उम्मीद रहे तो मंज़िल भी निश्चित हो।
जिंदगी ने जो दिया, उसे स्वीकार करो,
और जो नहीं मिला—उसका इंतज़ार करो।
क्योंकि जिंदगी नाम ही चलते रहने का है,
गिरकर फिर अपने पैरों पर खड़े होने का है।
हार मान लेना तो आसान है मगर,
असली मज़ा तो जिंदगी से लड़ने का है।

mannugujjar

"...ओ साजना..."

क्यों नहीं आए तुम पहले
जब शाम हो रही थी
सूरज टूट रहा था
बिखर रहा था
डूब रहा था बारिश में

क्या तभी तुम्हें दस्तक देनी थी?

प्रभात देखी है तुमने
मौसम कुछ अलग होता हैं
रौशनी पेड़ो के झुरमुट से
छलनी नहीं हो रही होती है
बल्कि आ रही होती है छलकर
आहिस्ता दबे पांव -
पिंजरे में कैद चिड़िया की तरह नहीं
वह गाती है मधुर विरह में गहराई से।

हां, तुम्हें उन दिनों ही आ जाना चाहिए था
जब उन्स की बूंदे बदन पर प्रेम लिखती थी।

पर आ ही गई हो न तुम
मैं तो अब भी तुम्हारे कूचे के
किसी किराना दुकान पर घंटों सिगरेट पीता
खड़ा रह सकता हु
उठे धुएं में तुम्हारे घर को उतनी ही देर निहार सकता हु
जितना उन दिनों देखा करता था
जब तुम थी; कही गई नहीं थी।

जामुनी सारी में किसी लकड़ी के ठेले पर
मुझे देखते हुए तुम
चाय का एक-एक घुट पीया करती थी।

क्या मेरी वह चूड़ियां
तुमने संभालकर रखी है
बैंक के किसी लॉकर में
या उन नजरों से छुपाकर
जो नजरे जानती थी
की तुम मुझे सिर्फ जानती नहीं हो जान।

और वह पायल?
अरे हां, कितनी मीठी याद है वो
जब तुम्हारे पैर मैले न हो
इसलिए तुमने मेरे हाथों पर
अपना मुलायम पांव रखा था
उसी दिन तो मैंने तुम्हें वह पायल पहनाई थी
अपने हाथों से।

ये वही मनहूस दिन था
तुम्हारे भाई ने मुझे देख लिया था
पायल पहनाते हुए,

और उसी दिन से
शाम होने लगी
सूरज टूटने लगा
बिखरने लगा ही था बारिश में -

के तुमने दस्तक दी
फिर एक बार
और मैं चल पड़ा
मचल पड़ा फिर एक बार।

अब तुम देखना प्रभात
ऊषा का मौसम ही कुछ अलग होता हैं
लेकिन अब पेड़ो के झुरमुट से नहीं
बल्कि आ रही है तुम्हारे हिस्से के हर रंध्र से।

मैं सतर्क हु
क्योंकि अब वे आंखे ज्यादा पैनी हो गई हैं
चुभने लगी है उनकी आंखों में तुम्हारी पायल।

आहिस्ता दबे पांव
कुछ भी हो सकता हैं
क्योंकि यहां लड़की के पैदा होते ही
उसके लिए सोने का पिंजरा तैयार किया जाता है।

कल तुमने मुझसे पूछा था कि
क्या मैं अब भी तुम्हारे साथ हु
और मैंने कुछ भी न सोचते हुए
हां, में सिर हिला दिया था

कुछ भी न सोचते हुए
अनकहे ही महसूस करते हुए
सामनेवाले को पढ़ लेना ही प्रेम है।

anupgajare819691

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

🌸रात गुजार लूँ🌸

तेरी ज़ुल्फ़ों तले रात गुज़ार लूँ,
जिस्मों की हरारत सँभाल लूँ।

मुद्दतों बाद मिले हो, चाँदनी रात है,
मिल जाओ इस तरह की थकान उतार लूँ।

तेरे होंठों की ख़ामोशियों को पढ़ूँ,
तेरी साँसों में अपनी साँसें वार लूँ।

तेरी धड़कन से अपनी धड़कन मिला,
आज ख़ुद को तुझ पर निसार लूँ।

तेरी बाँहों में कुछ पल ठहर जाऊँ,
सारी दुनिया से ख़ुद को किनार लूँ।

आज की रात फिर लौटकर आए न आए,
आ तुझे अपनी यादों में शुमार लूँ।

✍️बेनी सागर

benisagar

— THE UNIVERSAL SCIENCE OF LIFE
शून्य — जीवन का सार्वभौमिक विज्ञान
The Science of Being Here, Now
और पुस्तक का केंद्रीय सूत्र:
जो जीवन अभी है, उसे छोड़कर जीवन की खोज करना ही मनुष्य का मूल भ्रम है।
0 वह स्थान नहीं जहाँ पहुँचना है; 0 वह वर्तमान है जहाँ से कभी हटे ही नहीं थे।
Agyat Agyani

Independent Researcher & Philosopher
Founder — Vedanta 2.0 ©
ORCID: https://orcid.org/0000-0000-8083-0685

शोध-दृष्टि

Agyat Agyani एक स्वतंत्र शोधकर्ता और दार्शनिक हैं, जिनका कार्य विज्ञान, वेदांत, चेतना और अस्तित्व के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में केंद्रित है। Vedanta 2.0 के माध्यम से वे प्राचीन भारतीय प्रज्ञा को आधुनिक वैज्ञानिक, दार्शनिक और अस्तित्ववादी (Existential) परिप्रेक्ष्य में पुनर्पाठ करने का प्रयास करते हैं।

उनकी दृष्टि किसी धार्मिक सिद्धांत की स्थापना के बजाय जीवन, चेतना और अस्तित्व को प्रत्यक्ष अनुभव तथा संरचनात्मक चिंतन के आधार पर समझने पर केंद्रित है।

यह कार्य इस मूल प्रश्न से आरंभ होता है—

क्या जीवन को समझने के लिए हमें जीवन से बाहर किसी अंतिम उत्तर की आवश्यकता है, या जीवन स्वयं अपने उत्तर का प्रथम और प्रत्यक्ष आधार है?

इसी प्रश्न से Vedanta 2.0 में शून्य (0), वर्तमान, चेतना, द्वैत-अद्वैत, अस्तित्व और मानव अनुभव को एक समकालीन वैचारिक ढाँचे में देखने का प्रयास किया गया है।

Vedanta 2.0 ©
An independent philosophical framework exploring the synthesis of science, Vedanta and existential inquiry.

«प्राचीन प्रज्ञा को आधुनिक भाषा में दोहराना नहीं, बल्कि उसे वर्तमान मनुष्य के जीवन और अनुभव के प्रश्नों के सामने पुनः जाँचना—इसी दिशा में यह कार्य एक स्वतंत्र प्रयास है।»

https://www.vedanta2life.com

bhutaji

ઢોલ, ઢોલક, ગવાર, બુદ્ધિ વગરનું, શુદ્ર, એટલે ઝીણા જીવ જંતુઓ, નારી, એટલે પ્રકૃતિ. પ્રકૃતિ જડ છે એટલે એને તમે પીડા ના આપો તો ના સુધરે. પ્રકૃતિ સજીવની પણ હોય અને નિર્જીવની પણ હોય. વિચારો કે તમે પથ્થર પર પડો કે પથ્થર તમારા પર પડે લાગશે તો તમને જ઼.દારૂડિયો દારૂ ના મૂકે છેલ્લે દારૂ દારૂડિયા ને મૂકી દે.આગ, પાણી, વાયુ આ પ્રકૃતિ છે આ ત્રણ તત્વ શરીરમા વધે તોય નુકસાન કરે અને ઘટે તોય નુકસાન કરે. વાત, પિત્ત અને કફ સરખું હોવું જોઈએ. જો આદત સારી હોય તો જીવન સુધરે અને ખરાબ હોય તો જીવન બગાડે. માટે જે આપણો આત્મા છે એનું કહ્યું માનવાનું જો મનનું કહ્યું માનશો તો મરશો. લી, "આર્ય "

aryvardhanshihbchauhan.477925

कविता पार्ट 1
औरत के लिए


शायरी किताबों पर ही अच्छी लगती है
औरत के लिए
मर्द यह करते हैं मर्द वह करते हैं औरत के लिए
फिर औरत क्यों रोती है

रियल लाइफ में देखो
हर कविता बेकार लगती है
औरत के लिए

कोई चांद नहीं कोई शान नहीं
ना सुनहरा जहां
ना कोई सितारा ना खुद का कोई सूरज
बस खाली आसमान


लोग कहते हैं बंजर है
धरती यहां की
जहां औरत रहती है
बस खुद की



तुमने कहा
औरत के लिए मर्द क्या-क्या नहीं करते
पर हर औरत इतनी खुश नसीब नही होती
की कविता से बाहर
उस औरत की जिंदगी कोई मर्द आ कर
उसकी जिंदगी सवार दे


सच यह है कि औरत को मर्द नहीं चाहिए
बस चाहिए एक साथी जो उसके साथ चलते रहे
सच यह है कि
औरत को मर्दों से कुछ नहीं चाहिए
ना धन दौलत ना ना चांद सितारे
ना हीरा मोती
बस औरत को चाहिए उसे समझने वाला एक इंसान

उसे एक ऐसा इंसान चाहिए
जो औरत को कहे
तु औरत नहीं एक इंसान है
और आजादी पर जितना मेरा हक है
उतना ही तुम्हारा भी



औरत इसलिए नहीं खुश होती की
दुनिया की हर कविता
उसे पर लिखी जा रही है


औरत इसलिए रोती है
क्योंकि उस कविता में
औरत पूरी तरह से खुद की नहीं है
कभी कोई कविता औरत को पूरी तरह से शामिल किया ही नहीं है


औरत को कविता से बाहर वह मर्द चाहिए
जो औरत को उसे अपना कर दे
और कहे जी ले
अपनी जिंदगी मैं हूं ना
तेरे साथ

abhinisha