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आज का यह #लेख उन सभी जीवट योद्धाओं के नाम है जो #किडनी_रोग से ग्रसित हैं और #डायलिसिस की मशीनों और #अस्पताल की सफेद दीवारों के बीच हर दिन एक नया #युद्ध लड़ रहे हैं।

मैं यह बात मैं पिछले 24 वर्षों के अपने निजी अनुभव और #संघर्ष के आधार पर कह रहा हूँ। किडनी रोग से मेरा सामना साल 2002 में शुरू हुआ था। वह एक लंबा और थका देने वाला रास्ता था, जो 2012 में अत्यंत #गंभीर स्थिति तक जा पहुँचा। साल 2014 मेरे जीवन का वह भावुक और कृतज्ञता से भरा मोड़ था, जब मेरी #जीवनसंगिनी ने अपनी #किडनी_दान देकर मुझे '#पुनर्जन्म ' दिया। आज 2023 से मैं पुनः डायलिसिस पर हूँ, लेकिन ईश्वर की कृपा और अपनो के प्रेम व #आशीर्वाद से मेरे चेहरे की यह मुस्कान और मन का #विश्वास आज भी अटूट है।

​डायलिसिस पर होने का अर्थ जीवन का रुक जाना कतई नहीं है। मैं स्वयं एक व्यवसायी हूँ और अपने #व्यवसाय को आज भी पूरा समय देता हूँ। व्यवसाय की भागदौड़ के साथ-साथ मैंने अपनी रचनात्मकता को भी जीवित रखा है और #साहित्य की सेवा के माध्यम से अपनी भावनाओं को शब्द दे रहा हूँ। मेरा मानना है कि बीमारी केवल हमारे शरीर को थका सकती है, हमारे सपनों और हमारी कर्मठता को नहीं। जब आप कर्म में डूबे रहते हैं, तो दर्द का #अहसास गौण हो जाता है।

किडनी रोग से ग्रसित एवं डायलिसिस का सामना कर रहे मेरे प्रिय साथियों, डायलिसिस #मशीन आपके रक्त को शुद्ध करती है, लेकिन आपके विचारों को शुद्ध और #सकारात्मक रखने का काम केवल आप स्वयं कर सकते हैं। जब भी आपको लगे कि आप थक रहे हैं, तो अपने #परिवार के उस त्याग को याद करें जो उन्होंने आपके लिए किया है। मेरी पत्नी का वह #त्याग मुझे हर दिन यह याद दिलाता है कि मेरा जीवन केवल मेरा नहीं है, बल्कि यह उन सब का है जो मुझसे #प्रेम करते हैं। इसलिए, हमें हारने का कोई अधिकार नहीं है।

​जीवन एक #संघर्ष तो है, और जीवन कितना लम्बा होगा यह ईश्वर के हाथ में ही है, लेकिन डायलिसिस को एक बोझ के रूप में देखने के बजाय, इसे #जीवन की एक 'रीफिलिंग प्रक्रिया' के रूप में देखें जो हमें एक और नया दिन देखने का #अवसर देती है। अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहें, अपने शौक पालें और ईश्वर पर भरोसा रखें। हम इस #बीमारी से कहीं बड़े हैं। आइए, मिलकर यह साबित करें कि एक मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बड़ी से बड़ी व्याधि भी घुटने टेक देती है। मुस्कुराते रहिए, क्योंकि आपकी #मुस्कान ही इस बीमारी के खिलाफ आपकी सबसे बड़ी जीत है।

एक बात और कि मैं जब यह लेख लिखकर #पोस्ट कर रहा हूँ तब मैं डायलिसिस पर ही हूँ।

डाॅ.विजय प्रताप शाही, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
#साहित्य #गोरखपुर
#किडनी_रोग #डायलिसिस #संघर्ष

vijaypshahi

ઉમાશંકર જોશી ની જન્મ જયંતિ નિમિત્તે ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

फिर बोलेंगे की कहनी क्यो नही आ रही । कहानी पर 200 से ज्यादा व्यूज है लेकिन डाउनलोड 100 का आंकडा भी पार नही कर रहे और रिव्यू उनके तो क्या ही कहने। अब समझ आ रहा है की कहानी या प्लैटफॉर्म की दिक्कत नही है। कमी हिंदी साहित्य को पढने वाले पाठको की है। हिंदी भाषी पाठको को कहानी पढनी तो होती है लेकिन बात जब रिव्यू और पैसे देने की आती है वो उनसे होता नही है।मै रूड नही होना चाहती पर अब बुरा लगता है। महनत करो और उसकी बेकद्री हो तो दिल दुखता है। सच बता रही हू ये मेरी आखरी कहानी है इस प्लैटफॉर्म पर। आई स्टिल लव यू का कल पहला भाग आ रहा है अगर उसपर कमेंट नही मिले तो माई डियर प्रोफेसर खत्म कर कोई कहानी नही लाउंगी। आप लोग कद्र नही करते..ना लेखक की ना कहनियो की। इसी तरह का बिहेवियर रहा तो हिंदी साहित्य और बुरी तरह पिछड जाएगा। पहले ही कोई हिंदी नोवल पढना पसंद नही करता। कभी इंग्लिश कहानियो पर रिव्यू देखे है। वो होता है और नी को प्यार देना , लेखक और कहानी..दोनो की ही कद्र करना। मेरा क्या है..मै तो इंग्लिश मेलिखना शुरू कर दुंगी।

gautamreena712gmail.com185620

🍀बाजरीचे आप्पे
आणि बाजरीचे डोसे..

हे दोन पौष्टिक प्रकार..

🍀दीड वाटी बाजरी
पाव वाटी उडीद डाळ
पाव वाटी मूग डाळ
पाव वाटी पोहे

🍀सकाळीच बाजरी स्वच्छ धुवून भिजत घातली
डाळी दोन्हीं वेगळ्या भिजत घातल्या

🍀रात्री बाजरी ,डाळी, व एक वाटी भिजवलेले पोहे
यातील निम्मे भरड असे आप्पे करण्या साठी वाटून घेतलें

🍀 निम्मा भाग डोसे करायला बारीक वाटून घेतला
सकाळी पीठ छान फुलले
त्यात मिठ व जिरे घालून
त्याचे डोसे व
मिरची कोथिंबीर वाटण घालून आप्पे केले

🍀सोबत आपल्या आवडीप्रमाणे खोबरे चटणी

मी दोन्हीं प्रकार एकाच दिवशी केले

🍀या साहित्यात सहा डोसे
व सोळा आप्पे झाले😊😊

jayvrishaligmailcom

भोजपुरी गीत:-

बड़ा यादि आवेला, गऊवाँ जवरवा,
पिपरा के लागे ऊ खपड़वा के घरवा ।।

अँगना ओसारी बिछे खटिया बिछवना,
किस्सा आ कहानी सुनें छेटेछोटे छवना,
भरि के हुँकारी हँसें दाबि के पँजरवा ।।

होत भिनसारे बोले कगवा कोयलिया,
सोहे अनसोहे फरगुद्दिया बवलिया,
चँहके किलहटिनिं पारि के कजरवा ।।

चले पुरवाई साजि बाजि के सिवनवाँ,
होखे गुलजार बागी खेत खरिहनवाँ,
फूले फूले घूमें लागे लबरा भँवरवा ।।

धीरे से हिलोरा मारे पोखरा के पनियाँ,
पँवरे बत्तखवा के संगें बत्तखिनियाँ,
कब्बो कब्बो ऊड़े मेड़राये कबुत्तरवा ।।

कहाँ ले भुलाई मन मटिया के बतिया,
भरि भरि आँखि बऊराई दिन रतिया,
काटे खाती धाई कटि नाईं दुपहरवा ।।

बड़ा यादि आवेला, गऊवाँ जवरवा,
पिपरा के लागे ऊ खपड़वा के घरवा ।।

@ सर्वाधिकार सुरक्षित-डाॅ.विजय प्रताप शाही,गोरखपुर

vijaypshahi

હું તું અને આપણે બન્ને
શું વાત કરું જયારે મળીએ ત્રણેય.
થોડો અહમ, થોડો પ્રેમ,
બાકી બચતી લાગણી બંનેમાં સેમ.

મારી હા તારી ના , તારી હા મારી ના,
બાકી થાતું બધું એડજસ્ટમેન્ટ અપણામાં.
તારી પૂજા ને મારી ઓફીસ જવાની ઝટપટ,
બાકી થતી આપણી આંખો અને ઈશારામાં રમઝટ.

મારો ગુસ્સો ને તારી હડતાલ,
એમાં લગતી ઉપવાસોની વણજાર.
મારી ભૂલો ને તારા ગોટાળા,
એમાંથી નીકળતા હાસ્ય ના ફુવારા.

ચિંતા તારી કે હોય દુ:ખ મારું,
ભુજા પર ઢળતું એકબીજાનું માથું.
મારો પુરષાર્થ ને તારી મમતા,
કુટુંબ નો આધારસ્તંભ બંને રચતા ....

હું તું અને આપણે બન્ને
શું વાત કરું જયારે મળીએ ત્રણેય.

:- જીગર અશોક પંડ્યા

pandyajigar

" રાખમાંથી બેઠું થતું જીવન "

પળભર પહેલાં કંઈ ન હતું પળમાં ધરા ધ્રુજી ગઈ,
ઉછળતી-કૂદતી જિંદગી એ ક્ષણમાં જ થીજી ગઈ.

અસ્તવ્યસ્ત કરી નાખ્યું જીવન, એક ગોઝારા ભૂકંપે,
ઢોર ને ઢાંખર મર્યાં, માનવની જાન અને પૂંજી ગઈ.

પડ્યા ઉપર જ પાટું માર્યું આ કોરોના મહામારીએ,
થપાટ ના જાણે આ કેવી કુદરત જોરથી વીંઝી ગઈ.

ખોવાયા હસતા ચહેરા ને થઈ સુમસામ આખી વસ્તી,
કુદરતની આ આફત સામે, વિજ્ઞાનની પણ કૂંજી ગઈ.

રાખમાંથી બેઠા થવાની તાકાત દુનિયાની જોઈ "વ્યોમ",
જીવનના ઘડતર કાજે, આફતની આગ ખુદ બૂઝી ગઈ.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

मेरा भारत

ashuashu858439

me aap jese banuga sir

virdeepsinh

Let's take a look at Pujya Deepakbhai's Toronto Tour 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/J3PjBvKQ

#Toronto #photogallery #photooftheday #picoftheday #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🙏🙏हर बार हम ही 'सच' नहीं होते,

कभी कभी किसी ओर की दिखाई दे रही 'गलती' उसकी 'मजबूरी' भी हो सकती है।🦚🦚

parmarmayur6557

बुद्धि भ्रष्ट

माधव की बुआ के समय बीता हुआ शिशु हुआ।
सब खुशियां मनाए रहे पर जब देखा पहली बार शिशु को सब संकोच उठाए रहे।
चार भुजा तीन नेत्र देखकर सब घबराए रहे।
माता-पिता चले त्यागने शिशु को दूर कर रहे।
हुई आकाशवाणी जब फिर परमात्मा समझाए रहे।
मत त्यागो पुत्र को जिसकी गोद में खेल के यह ठीक होगा।
वही पुत्र का अंत करेगा।
अब बारी माधव की थी।
लेत गोद में जब शिशु को झड़ गए सभी अंग बन गया सामान्य शिशु को देखकर खुशी बना रहे।
याद आई बुआ को बात फिर क्या था?
मांगने लगी माधव से वचन तुम 100 गलती भी क्षमा करो।
वचन दो माधव मुझको दिया वचन माधव ने मैं 100 गलती क्षमा करूं।
101 गलती पर अंत करूं।
सुन वचन बुआ माधव के अब कुछ संतुष्टि पाई शिशु बड़ा होने लगा।
नाम शिशुपाल कहलाने लगा।
माधव को बैरी मान रहा।
अब उनकी निंदा कर रहा।
यज्ञ कराया पांडव ने सबको न्योता आया।
भारी भरी सभा में माधव को उत्तम पुरुष माना।
यही नहीं सह पाया निंदक फिर क्या होना था?
लगा बोलने माधव को छलिया ग्वाला अनगिनत नाम लगे माधव करने गिनती अब हुई 99 गलती।
फिर माधव ने सोच चेत किया।
आखिरी गाली मत करना।
फिर उसको समझाया है पुत्र मेरी बुआ का गलत लगता मेरा भाई है।
मान जा गलती मत करना।
यही सीख समझाई है।
जब अकल पर पत्थर पड़ जाएं कुछ नजर नहीं आता है।
आखिर उसने फिर माधव का अपमान किया।
लिया सुदर्शन चक्र बुलाए फिर उसका अंत किया।

vanshsingh118873

જીવનમાં ગમે તેટલી મુશ્કેલીઓ, અવરોધો કે બંધનો આવે, છતાં આ જીવે હાર માન્યા વગર પોતાની મહેનત અને હિંમતથી આગળ વધવાની પ્રતિજ્ઞા કરવી જોઈએ.

જેમ નાનુ બીજ કઠણ પથ્થરની તિરાડમાંથી પણ બહાર નીકળીને સૂર્યપ્રકાશ તરફ આગળ વધે છે, તેમ માણસે પણ મુશ્કેલ પરિસ્થિતિઓને હરાવીને પોતાના સપનાઓ સુધી પહોંચવાનો પ્રયત્ન કરવો જોઈએ.

મુશ્કેલીઓ કેટલીય મોટી હોય, પરંતુ જો જીવવાની જીદ અને આત્મવિશ્વાસ હોય તો રસ્તો જરૂર બની જાય છે.

જીવન જીવવાની મેં જીદ પકડી છે,
આમ પથ્થર તોડી બહાર થોડો નીકળું.

મનોજ નાવડીયા

#try #life #સારાવિચાર #મારાવિચાર #મારીવાત #manojnavadiya #manojnavadiyabooks #manojnavadiyapoetry #goodthinking #goodvibes #maravichar #marivat #saravichar

manojnavadiya7402

आपका दिल गुलाब हो जाए ।
और आदत खराब हो जाए ।।

शाम को साथ बैठिए आ के ।
फिर पुरानी शराब हो जाए ।।

दिल्लगी के सवाल पर मेरे ।
आपका भी जवाब हो जाए ।।

खर्च कितना हुआ नफासत पे ।
आज इसका हिसाब हो जाए ।।

डूबकर के 'विजय' मुहब्बत में ।
बेख़बर बेहिसाब हो जाए ।।

@डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

श्री हनुमंत प्रकाश एक समीक्षात्मक आलेख
सर्वप्रथम मैं आदरणीय विजय प्रताप शाही जी गोरखपुर उत्तर प्रदेश को उनके द्वारा रचित "श्री हनुमंत प्रकाश" खंडकाव्य प्रकाशित होने पर हार्दिक बधाई देता हूँ। यह आध्यात्मिक पुस्तक मुझे कुछ दिवस पूर्व भेंट स्वरूप प्राप्त हुई थी जिसका मैंने एक-एक शब्द बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा है और तब मैं आपसे इसके संबंध में अपने मन की कुछ बात कहने जा रहा हूँ। "हनुमंत प्रकाश" खंडकाव्य छ: सोरठा,इक्यावन दोहे,चार सौ चौपाइयाँ एवं हनुमान जी की स्वरचित आरती से सुसज्जित है जो निसंदेह रचनाकार की हनुमान जी के प्रति असीम श्रद्धा एवं विश्वास को दर्शाता है। प्रथम चरण में अपने गुरुदेव के अतिरिक्त भगवान श्री गणेश, वीणापाणि माँ सरस्वती, भगवान गौरी शंकर तथा भगवान श्री सीताराम की वंदना में बहुत ही सरस सोरठा का सृजन किया है।
एक वानगी देखिए
वंदउँ बारम्बार गुरु पद पारस मनहिं मन।
करहिं जगत उजियार हे सत साधक सहज बढ़ि।।
वंदउँ बारम्बार श्री गणेश विघ्नेश अब।
करहिँ नमन स्वीकार आदि पूज्य प्रथमेश पुनि।।
इस खंडकाव्य में महावीर हनुमान के जन्म प्रसंग से लेकर भगवान श्री राम के राज्याभिषेक तक का वर्णन बहुत ही रोचक एवं भावपूर्ण है।
एक वानगी कुछ इस तरह से
हे हनुमत वीर बलवंता।दानव दलन संत रिपुहंता।।
मंगल मूर्ति महा बलवाना।संकट मोचन कृपानिधाना।।
इसके मध्य में प्रसंग बस भगवान श्री राम के जन्म एवं उनके द्वारा की गई पारलौकिक लीलाओं के वर्णन के साथ-साथ रावण की राजधानी लंका का भी बड़ा मनोहरी चित्रण बन पड़ा है।
भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए रचनाकार लिखते हैं कि
रामचंद्र बैठहिं सिंहासन।अति उत्तम उत्सव आयोजन।।
सियाराम की शोभा न्यारी।सुंदर सुखद सुमंगलकारी।।
मैं यह निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि आदरणीय विजय प्रताप शाही जी द्वारा रचित "श्री हनुमंत प्रकाश" खंडकाव्य प्रत्येक सनातन धर्मी को प्रातः नित्य पाठ करने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। इसके पठन पाठन से अंजनी पुत्र हनुमान जी की अवश्य कृपा प्राप्त होगी ऐसी में कामना करता हूँ साथ ही एक बार पुनः इस खंडकाव्य के रचनाकार को हार्दिक बधाई देता हूँ साथ ही आशान्वित हूँ कि भविष्य में भी इसी प्रकार के आध्यात्मिक सृजन वे करते रहेंगे और हम पाठकों को उनके सृजन को पढ़कर ज्ञान अर्जन होता रहेगा।
आपका शुभचिंतक
सुरेंद्र शर्मा सागर
श्योपुर मध्य प्रदेश

vijaypshahi

दरियाँ के दो किनारे होते हैं।
बागों से हीं तो बहारें होती हैं
ढूंडते हैं हम ख़ुशी को हरतरफ़
दरअसल पास हमारे होती हैं।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

મિત્રો,
ફરી હાજર છું એક નવી રચના સાથે આશા છે આપ સહુ ને પસંદ આવશે.

|| અશક્ય મિલન ||

મારો મારા ખુદ પર ચાલતો નથી કાબૂ કોઈ,
તમારી આંખો ના કામણના જાદુ ચાલશે કેમ?

અમારા માટે અમારી ખુમારી જીવનતત્વથી કિંમતી,
તો પછી આ મસ્તક તમારા ચરણોમાં ઝૂકશે કેમ?

નિજ મન-ઉપવનમાં ખુદની શોધમાં મગ્ન છું,
મારી સૂની આંખોમાં તમારી છબી મળશે કેમ?

સંસાર ના બજારમાં અમારી કોડીની કિંમત નથી,
મારાથી તમારા જેવું મોંઘામૂલું રતન વહોરાશે કેમ?

હાથની લકીરોમાં ક્યાંય તમારો ઉલ્લેખ નથી,
તો પછી નસીબ આપણને મેળવશે કેમ?

આમ પણ દુનિયાના બંધનો નડે છે ડગલે ને પગલે,
આ રીત-રિવાજો આપણો સાથ સ્વીકારશે કેમ?

અમારી ખુદની કોઈ ઓળખાણ મળતી નથી,
તમારું નામ અમારાથી અમારી સાથે જોડાશે કેમ?

આમ જોવો તો એ જ ફર્ક છે જીવવાની રીતમાં બંનેની પ્રિય,
તમે વિચારીને જીવો છો, મારા થી જીવ્યા પહેલાં વિચારાશે કેમ?

jiteshdattani024052

प्रकृति की पाठशाला ममता गिरीश त्रिवेदी ✍️

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જય શ્રી રાધેકૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

"शुरुवात"

कुछ ख़त्म करने के लिए,
पहले एक शुरुआत ज़रूरी है।

और अगर शुरुआत ही न हो,
तो क्या कोई अंत...
दर्दनाक हो पाएगा?
सुखद हो पाएगा?
या ख़ूबसूरत भी हो पाएगा?

पूछो उस बारिश की बूंद से,
जो आज समंदर बनकर बह रही है।

कैसे बादलों की कोख में छटपटाई होगी,
गिरने से पहले कितनी बार डरी होगी।
कैसे कतरा-कतरा,
ज़मीन की ठोकरें खाकर,
धूल में लोटकर,
फिर भी बहती रही होगी।

और एक दिन,
खुद को खोकर ही,
उसने समंदर में नई शुरुआत पाई होगी।

हम भी वही बूंद हैं।
जब तक बादल में हैं, सुरक्षित हैं।
जब तक रास्ते का पत्थर हैं, इस्तेमाल हो रहे हैं।

पर असली चमक,
असली मुकाम,
असली अंत...
तभी आता है
जब हम गिरने की हिम्मत करते हैं।

इसलिए डरो मत।
शुरुआत करो।
क्योंकि हर ख़ूबसूरत अंत की,
पहली सीढ़ी...
एक डरती हुई शुरुआत ही होती है।
प्राची गुर्जर……

prachitanwar111