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शीर्षक :- कुछ कर दिखाने का जुनून🏆🎉
(Part =1) comment for part 2
Especially for Neets, UPSC, CA, CS, etc students.

संघर्षों का पहाड़ टूटा,
फिर भी हार ना माना था।
धरती पर बोझ ना बनकर,
कुछ करने को जो ठाना था।
भीड़ में ना घुलकर हमने,
अलग निखरना चाहा था।
कठिनाई सामने आती रही,
फिर भी हार ना माना था।

ashuashu858439

Radhe Krishna

skptech

*"शिक्षा - जीवन का उजाला"*

कागज़ और कलम से रिश्ता जोड़े,
वो नाम है *शिक्षा* प्यारी।
अंधेरों को चीर कर निकले,
ज्ञान की वो उज्ज्वल तारी।

माँ की गोद पहली पाठशाला,
गुरु का आशीष पहला मंत्र।
"अ से अनार" से शुरू होकर,
"ज्ञ से ज्ञान" तक का ये तंत्र।

पंछी को मिले दो पंख जैसे,
वैसे ही इंसान को दो आँखें।
एक आँख से देखे संसार,
दूसरी से पढ़े किताबों की भाषा।

*शिक्षा* नहीं पूछती जात-पात,
*शिक्षा* नहीं देखती अमीर-गरीब।
झोपड़ी में बैठा लड़का भी,
बन सकता है देश का नसीब।

देखो सावित्री बाई फुले को,
जिन्होंने जलाया ज्ञान का दीप।
काँटे चुभे, पत्थर लगे,
फिर भी न मानीं हार, न कीं चूक।

देखो अब्दुल कलाम को,
मिसाइल मैन से राष्ट्रपति बने।
छोटे से रामेश्वरम से उठकर,
पूरे विश्व में नाम रोशन किए।

ये कमाल किसका है dear?
बस *शिक्षा* का, बस *ज्ञान* का।
जो झुक कर सीखता है,
वही एक दिन आसमान छूता है।

*शिक्षा* है राधा का प्रेम,
जो मीरा को भक्ति सिखाए।
*शिक्षा* है कृष्ण की गीता,
जो अर्जुन को कर्म का रास्ता दिखाए।

*शिक्षा* है माँ आदिशक्ति,
जो अज्ञान के राक्षस को मारे।
*शिक्षा* है जगन्नाथ की रसोई,
जहाँ सबको बराबर प्रसाद मिले।

आज मोबाइल का ज़माना है,
ऑनलाइन क्लास, डिजिटल ज्ञान।
पर गुरु का मान वही है,
विद्यार्थी का सम्मान वही है।

किताबें दोस्त बन जाती हैं,
लाइब्रेरी मंदिर लगती है।
हर सवाल का जवाब मिलता,
हर समस्या का हल दिखती है।

पर अफसोस, कुछ लोग आज भी,
गमंड में डूबे रहते हैं।
पढ़े-लिखे होकर भी,
दूसरों को छोटा समझते हैं।

अरे मूर्ख! *शिक्षा* का मतलब ही यही,
कि विनम्र बनो, सेवा करो।
जैसे नदी झुकती है तभी,
सागर तक पहुँच पाती है।

पेड़ जितना फलदार होता,
उतना ही झुक जाता है।
इंसान जितना ज्ञानी होता,
उतना ही विनम्र हो जाता है।

इसलिए dear, पढ़ो, लिखो, सीखो,
रुको मत, थको मत।
हर दिन एक नया सबक,
हर रात एक नया संकल्प।

देश तभी आगे बढ़ेगा,
जब हर बच्चा स्कूल जाएगा।
बेटी भी पढ़ेगी, बेटा भी पढ़ेगा,
तभी भारत विश्व गुरु कहलाएगा।

*शिक्षा* है वो हथियार,
जिससे गरीबी मिटती है।
*शिक्षा* है वो दवा,
जिससे कुरीति कटती है।

आओ प्रण लें आज हम,
ज्ञान का दीप जलाएँगे।
अपने लिए, अपने घर के लिए,
और पूरे समाज के लिए।

क्योंकि अंत में यही सच है:
*"सा विद्या या विमुक्तये"*
अर्थात - *वही विद्या है जो मुक्ति दिलाए*।

*जय जगन्नाथ* 🙏🌼
*राधे राधे* 🦚

---

*

skptech

પાણી /જળ

eshahajola

जयभीम

sureshbansode

इश्क़ की यह कैसी इम्तेहान...?
दर्द का सिलसिला थमता नहीं
ग़म का आलम फिसलता नहीं ,
बेरूख़ी का जज्ब़ा पिघलता नहीं
बस जला है दिल कश्मकश की आग में
धुवां.., धुवां... होकर ||

©- Shekhar kharadi

shekharkharadi6923

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

🔥♥️ हुक्म और हसरत ♥️🔥
Chapter 18
Sneak Peek #3

कमरे में फिर वही गहरा सन्नाटा लौट आया...

अर्जुन ने धीरे-धीरे अपनी मुट्ठी खोली।

उसकी हथेली में अब भी सिया की उँगलियों की हल्की-सी गर्माहट बाकी थी। 🤍

उसने अपनी हथेली को धीरे से अपने होंठों तक उठाया...

आँखें बंद कर लीं...

एक गहरी साँस ली...

और उसके होंठों से बस एक शब्द निकला—

"मोह..." ❤️

✨ Episode 18... जल्द ही! ✨

#HukmAurHasarat
#ArSia
#Chapter18
#Diksha

dikshaparashar.699046

🔥♥️ हुक्म और हसरत ♥️🔥
Chapter 18
Sneak Peek #2

महल की संगमरमर की सीढ़ियाँ हल्की फिसलन भरी थीं...

अचानक सिया का पैर फिसल गया।

"आह...!" 😨

ज़मीन पर गिरने से पहले ही...

किसी मज़बूत बाँह ने उसकी कमर थाम ली। ❤️

दोनों के बीच बस कुछ इंच की दूरी थी...

सिया की धड़कनें बेकाबू थीं...

लेकिन अर्जुन ने उसकी आँखों में देखे बिना बस इतना कहा—

"संभलकर, राजकुमारी।" 🤍

और अगले ही पल...

वो फिर उससे दूर चला गया। 🥀

#HukmAurHasarat
#ArSia
#Chapter18
#Diksha

dikshaparashar.699046

🔥♥️ हुक्म और हसरत ♥️🔥
Chapter 18 | Sneak Peek #1 🤍

सिया ने धीरे-धीरे अपना हाथ बढ़ाया...

उसने अपनी लंबी, पतली उँगलियाँ अर्जुन की खुरदुरी उँगलियों में धीरे-धीरे पिरो दीं। 🤍

दोनों के हाथ पहली बार इस तरह जुड़े थे...

सिया बहुत धीमे स्वर में फुसफुसाई—

"मैं आपके साथ हूँ, अर्जुन..." ❤️

"हर बात जानना ज़रूरी नहीं होता... लेकिन किसी का साथ देना ज़रूरी होता है।"

अर्जुन ने धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद कर लीं...

बरसों बाद...

किसी के स्पर्श ने उसके भीतर फैले शोर को कुछ पल के लिए शांत कर दिया।

#HukmAurHasarat
#ArSia
#Chapter18 #Diksha

dikshaparashar.699046

આજ ફરી કોઈ શાયરી ક્યાંક
તારા નામ ના થય જાયે.
લખતા લખતા મારી ક્યાંક
જીંદગીની ના શામ થય જાયે.

amirali3796

कमीना कमज़र्फ बे हया लानती फरेबी
में था में हुं
शरीफ़ शरीफजादो
बताओ सच सच....
तुम अपना यूं सच कहोगे क्या

anisroshan324329

गजल दीवार

एक ही घर, हम दोनो हैं, फिर यह कैसी दीवार है,
एक दर्द कितना बेरहम, जो आर और पार है।

एक घुटन सी होती है, वो क्यों नही समझता ,
जख्म गहरा लगता है, हर बात में तेरी वो धार है।

भूला न पाऊं तुम्हे मोहब्बत हर रोज बढता है,
इशारे क्यों नही समझता, जो तू इतना समझदार है।

भरोसा उठ गया अब तो,आबो-हवा में भी है हलाहल,
एक ही बार में खत्म कर दो न, क्यों डंसता बार-बार है।

✍️बेनी सागर

benisagar

யாரோ அவன்...
என் சோகங்களில்
தோள்கொடுக்கும் நண்பனானவன்.
யாரோ அவன்...
அன்பைப் பொழிவதில்
தந்தையுமானவன்.
யாரோ அவன்...
என்னை அணைக்கும்
ஒவ்வொரு நொடியும்
என் பாதுகாவலனானவன்.
யாரோ அவன்...
எந்த நிலையிலும்
என்னை விட்டுக் கொடுக்காத
என் துணையானவன்.
யாரோ அவன்...
என்னுடன் சண்டையிடும்
நேரங்களில்
என் எதிரியானவன்.
யாரோ அவன்...
சமாதானம் செய்வதில்
என் மனதை வசப்படுத்தும்
மந்திரக்காரனானவன்.
யாரோ அவன்...
என் கனவுகளுக்கு
பாதை அமைத்தவனானவன்.
யாரோ அவன்...
சேட்டை செய்வதில்
என் குழந்தையானவன்.
யாரோ அவன்...
என்னைப் பொறாமைப்பட வைப்பதில்
குறும்புக்காரனானவன்.
யாரோ அவன்...
என் அன்பில்
உயிராய் கலந்தவனானவன்.
யாரோ அவன்...
என் காதலுக்கு
அவன் மட்டுமே
உகந்தவனானவன்.

shakthisky108659

Do you know that if everyone at home is in good health, then even if there is a loss in the business ledger, it should be seen as profit?

To know more visit here: https://dbf.adalaj.org/M4TprMqB

#business #selfhelp #selfimprovement #doyouknow #facts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

“लोग”

गले लगाकर गला काटते हैं लोग,
दुआएँ भी अब फायदा देख कर बाँटते हैं लोग…

रोने वालों को यहाँ रुलाया जाता है,
और हँसने वालों को खुशियाँ बाँटते हैं लोग…

फकीरों के लिए कौड़ी भी नहीं बची,
रईसों को तोहफे बाँटते हैं लोग…

गिराकर दूसरों को खुद बढ़ने के लिए,
मंदिरों में मन्नतें माँगते हैं लोग…

सच्चाई का दिखाना यहाँ जुर्म बन गया है,
झूठ बोल कर इज्जत कमाते हैं लोग…

अपना मतलब निकल जाए जहाँ से,
वही रिश्ते पल में भूल जाते हैं लोग…
प्राची गुर्जर….

prachitanwar111

त्याचे प्रेम ..

त्याला जेव्हापासून ती भेटलेली असते ..
त्याचे मन जणू कापसासारखे ‘तरल”झालेलं असते !!
“तीचे बोलणे “..तीचे हसणे “..
त्याची नुसती “उलघाल “होत असते
मनातले हे “वादळ “तीला कसे सांगावे
हे मात्र त्याला उमगत नसते .!
स्थळ ..काळ ..वयाचे बंधन असते जरी .
त्याला मात्र वाटत असते ती त्याच्या स्वप्नातली “परी “.
तशी ती ही असते रुप गुणाची “खाण”.
त्याला मात्र असते फक्त तिच्या “अस्तित्वाचे “भान ..
“आताच का हे “प्रेम “व्हावे .
हे त्याचे त्याला ही कळत नसते ..
तिचा “सहवास “अप्राप्य आहे
हे कळते ..पण वळत नसते ..
आता पुढे काय होईल ...काय मनात देवाच्या
त्याला मात्र तिची ..साथ द्यायचीय “अंतापर्यंत जगाच्या ...!!!
...................................वृषाली **

jayvrishaligmailcom

आलम इकबाल मैं क्या खूब पंक्तियां लिखी है मतलब समझो तो समझ में आता है वरना तो लिखते तो हर कोई है

vanshsingh118873

एक स्त्री चाहती हैं केवल प्रेम,
और ‎इस प्रेम के अनेक रूप हैं।
‎‎एक बेटी चाहती हैं परिवार से निस्वार्थ स्नेह...
‎एक बहन चाहती हैं भाई का संपूर्ण सानिध्य....
‎एक पत्नी चाहती हैं पति से उसका सदैव समर्पण....
‎एक बहु चाहती हैं, ससुराल में उसका सम्मान....
‎एक मां चाहती हैं, बच्चों से केवल ममत्व....
‎इस स्नेह, सानिध्य, सम्मान के बदले में न्योछावर है स्त्री का सम्पूर्ण जीवन, उसके सपने....सारी ख्वाहिशें .... और उसकी अपनी आज़ादी।

anitasorte6489gmail.com190157

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है! अदरक पर अधिकार

mamtagirishtrivedi740648

The door is open.
The question is...which side will you choose?
The Returned Part-1 is live now

soumyaasharrma755758

મિત્રો,
ફરી હાજર છું, અરમાનો ના બળતા રણ માં કોઈ કારણ વગર ઊગેલ ઘટાદાર વૃક્ષ જેવી ઊર્મિઓ ને શબ્દો ના સોનેરી તાંતણે ગૂંથી બનાવેલ સોહામણા શણગાર જેવી આ રચના સાથે, આશા છે આપ ને પસંદ આવશે.

શું એવું ન બને કદી...?

શું એવું ન બને કદી હું સપના જોઉં, સવારે તમે આવો?
શું એવું ન બને કદી હું શ્વાસ લઉં, મહેક બની તમે આવો?

ચાલતો જાવ છું નિષ્ફિકર, આ રસ્તોઓ પર તમારી ધૂનમાં,
શું એવું ન બને કદી હું થોભું, વિસામો બની સામે તમે આવો?

આ નયનના તીર લાગે તે માટે, હૃદય સમરાંગણમાં ઉતર્યો,
શું એવું ન બને કદી હું ઘાયલ થાવ, દવા બની તમે આવો?

પ્રસંગો બધા માણી લીધા, દુઃખના દર્દના, તકલીફના,
શું એવું ન બને કદી હું અશ્રુ વહાવું, સ્મિત બની તમે આવો?

સંવેદના આમ તો ઘણી અનુભવતો રહું છું, કહું પણ છું,
શું એવું ન બને કદી હું મૌન રહું, અવાજ બની તમે આવો?

લખ્યો નથી એક પણ અક્ષર, કોરું છે અરમાનોનું આ પુસ્તક,
શું એવું ન બને કદી, હું કલમ ઉઠાવું, શબ્દ બની તમે આવો?

સર્વત્ર યાદી ભરી છે આપ ની, હૃદયમાં છબી મઢી આપની
શું એવું ન બને કદી વાત કરું પ્રસંગ ની કથા બની તમે આવો?

નાસ્તિક બની રહ્યો છું આજ સુધી, માંગ્યું ન ઇશ્વર પાસે કઈ
શું એવું ન બને કદી, હું મંદિર જાઉં, પ્રાર્થના બની તમે આવો?

અસ્તુ.....

jiteshdattani024052

wrong decision 😞❌

gulaboo22