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New bites

​इस खामोश रात के साए में,
हर उलझन को थोड़ा बहने दो।
जो बातें दिन में कह न सके,
आज दिल को वो सब कहने दो।
​हर दर्द, खुशी, और टूटे ख्वाब,
सीने में बसा कर सो जाओ।
आहें भी आज आजाद कर दो,
जज्बात में पूरे खो जाओ।
​सोने दो आंखों को एक पल अब,
हर जख्म को मरहम मिलने दो।
इस रात के मीठे साए में,
दिल को जी भर के भरने दो।

ritukumari509471

கதை: ❤️‍🔥 உயிரே ஒரு வார்த்தை சொல்லடா உனக்காக காத்திருப்பேன் ❤️️‍🔥

எழுத்து & குரல்: சக்திசுரே

❤️‍‍🔥 மரணத்தின் விளிம்பிலும் மறக்காத காதல்... தேனியில் மலர்ந்த இதயத் துடிப்பு! — அத்தியாயம் 1

அத்தியாயம் — 1

உயிருக்குப் போராடும் ஒரு பெண்ணின் நினைவலைகள்... தேனியின் பசுமையில் மலர்ந்த அவளது அழகான பள்ளிக்காலம்!

மாதா சிலையின் முன் அவள் வைத்த வேண்டுதலும், அவளை அறியாமல் அவள் மீது விழுந்த அந்த ஒரு ஜோடி விழிகளும்... 👀❤️

அவள் வாழ்க்கையை மாற்றப்போகும் அந்த நபர் யார்?

கதையின் முதல் அத்தியாயத்தைப் படித்துவிட்டு உங்கள் கருத்துக்களைக் கமெண்ட்டில் சொல்லுங்கள்! Ratings & Comments மூலம் உங்கள் ஆதரவைத் தாருங்கள் நண்பர்களே! 👇🥰

✨ கதை அறிமுகம்:

✨ "காதல் என்பது அழகிய உணர்வு..."
இந்த உலகத்தில் சொல்லப்பட்ட காதலை விட சொல்லாத காதல் தான் அதிகம்! சிறுவயதில் ஏற்படும் அந்த முதல் காதல்... அதுவும் சொல்லப்படாத காதல் ஜெயிக்குமா?

நாயகன்: விஜய் (Mass Hero) 🦁
நாயகி: சுடர்விழி (Innocent Heroine) 🌸

சிறுவயதில் அவன் மீது கொண்ட அளவற்ற காதலால், மனதை அவனிடம் பறிகொடுத்துவிட்டு இங்கு நடைபிணமாக வாழ்கிறாள் சுடர்விழி!

மறுபுறம், "சுவாசக் காற்றே அவள் தான்... அவள் மட்டும் தான்!" என்று அவளுக்காகவே வாழ்ந்து கொண்டிருக்கிறான் விஜய்!

இரு மனங்களின் போராட்டமான அழுத்தமான காதல் கதை! காதல் இருப்பதை உணர்ந்தும், விதியின் வசத்தால் பிரிந்திருக்கும் இவர்கள் ஒன்று சேர்வார்களா?
ரொமான்ஸ், அதிரடி, ஆக்ஷன் கலந்த ஒரு வித்தியாசமான காதல் காவியம்! 🔥❤️

✍️ எழுத்தாளர்: சக்திசுரே
🪔 பெண்மையை போற்றுவோம் நாவல்ஸ்

⛔ பதிப்புரிமை அறிவிப்பு (Copyright Notice):
இக்கதையின் கதைக்களம், கதாபாத்திரங்கள் மற்றும் வசனங்கள் அனைத்தும் எழுத்தாளர் சக்திசுரே அவர்களுக்கு மட்டுமே சொந்தமானது. ஆசிரியரின் முன் அனுமதியின்றி இக்கதையை வேறு பக்கங்களிலோ, குழுக்களிலோ அல்லது இணையதளங்களிலோ மறுபதிவு (Copy/Paste) செய்யக் கூடாது.
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lifeisverysweetrefashiontailoring827652

જ્યારે એક પરિવાર પોતાની દીકરી પર વિશ્વાસ મૂકે છે, ત્યારે તે આખા સમાજ માટે ઉદાહરણ બને છે. ✨🌸

nirali7688

"सब मिल जाता है, बस वक्त पर अपना नहीं मिलता।"

-Dharmendra Kumar

erdharmendra

पर कब तलक उम्मीद रखें
कविता



उम्मीद उम्मीद कखते हुए लोग जींदा तो है
पर उम्मीदें एक झूठा सपना है
लोगों को तसल्लि दें कर जिंदा तो रकता है
पर कभी दर्द कम नहीं करता
बल्कि दर्द उम्मीद सो और वड़ जाती है



क्यों इंसान को पता होता है कि उम्मीद है
सब कुछ ठीक हो जाएगा
पर कव तक उम्मीद रखे
यह नहीं पता होता
और यह सबसे बड़ी बिड़मनां है


एक आसफल होने वाली वाखया।।। उम्मीद
कभी ना खत्म होने वाली दर्द की उम्मीद

झूठा सपना कल्पना लालच से भरी हुई बातें
सब कुछ ठीक हो जाएंगे
अच्छी दिन आएंगे
सारे कहने की बातें हैं
एक लंबा इंतजार बस दर्द को सेहत हुई उम्मीद
उम्मीद पर
हर दुख दर्द झेलते हुए



इंसान बस कल्पना करता है
अपनी खयाली दुनिया में
सब कुछ ठीक हो जाएंगे
और यह उम्मीद सदियों तक चलता है
कभी ना खत्म होने वाली चीज की तरह


उम्मीद है उम्मीद रखते हुए इंसान
जिंदा रहने के साथ समझे की
उम्मीद रखना हमेशा सही नहीं है

उम्मीद है कि मुझे अब कोई उम्मीद नही है
किसी से भी नहीं
ना इस दुनिया से ना अपने से
बस है थोरी सी उम्मीद खुद से
कि मैं थोरी और जियो गी

abhinisha

અનુભવ
         અનુભવ તો રોજ થતા હોય છે પણ થોડી
વાત કરું તો આજે સવારમાં એક બાળક શાળાએ ન જવા માટે રડતું હતું, ત્યાં એક નાનુ બાળક વહેલા ઘર બહાર નીકળવા રડતું હતું.સવારે દાદા પૌત્રને શાળા એ મૂકવા જતાં હતા ત્યાં એક માતા વ્યવસાય કરતી હોઈ બાળકને શાળાએ મૂકી પોતે ઉતાવળમાં દોડતી હતી.
          નાના મોટા રેકડીવાળા , દુકાનવાળા સૌ પોતપોતાના ધંધે લાગી ગયા હતા. મહેકતા પુષ્પોને પુષ્પોથી મહેકતી માળાઓ શોભતી હતી ને મંદિરે સૌ ભક્તોની અવર જવર ને મધુર એ ભક્તિભાવભર્યા સૂર મનને ગમતાં હતાં. ઓફિસના સમયે સૌ ભાગદોડમાં હતાં ને વાહનોની લાઇનો લાગી હતી.ઘરેથી નીકળતા જોયું કે એક પિતા નાના સંતાનને તેડી બહાર ખુલ્લી હવામાં ફેરવતાં હતાં,ત્યાં રસ્તા પર જોયુ કે એક પુત્ર એંશી વર્ષના પિતાને એક્ટિવા પર નાના બાળકની જેમ આગળ બેસાડી સવારના
આ માહોલમાં એમને આંટો મરાવતો હતો.
       ખરેખર આ દૃશ્ય દિલને સ્પર્શી ગયું એક તરફ બાળપણ કે જ્યાં પિતા બાળકને ફેરવે છે ને બીજુ કે જ્યાં પુત્ર પિતાને ફેરવે છે!...... કેટલુ સુંદર આ દ્રશ્ય કે જે ઘણુ બધું કહી જાય છે.
જય શ્રી કૃષ્ણ: પુષ્પા એસ ઠાકોર

thakorpushpabensorabji9973

पहाड़ों की खामोशी मन को सुकून देती हैं,
शहर की चकाचौंध और आवाजें दिल का
अकेलापन दूर नहीं कर सकते।

kalpanasatav823113

मैं जिद्दी बहुत हूं
इसलिए जिंदगी से हार नहीं मानी...
वरना .. पहुंच तो हम वहाँ गए थे,
जहां से अक्सर लोगों की वापसी
नहीं होती।

kalpanasatav823113

घुमुरा की प्रतिध्वनि❤️

कलाहांडी के सुंदर पहाड़ी क्षेत्र, घने साल के वृक्षों की छाया और कल-कल बहती नदी के किनारे एक आदिवासी युवक गोविंद और चंचल युवती माधवी का निश्छल प्रेम पनपा था।

गोविंद घुमुरा वादन में निपुण था। उसके हाथों की थाप से घुमुरा से निकलने वाली गंभीर ध्वनि पहाड़ियों की सीमाओं को पार कर सीधे माधवी के हृदय को छू जाती थी। घुमुरा की एक विशेष ताल और उसकी ध्वनि ही उनके गुप्त मिलन का संकेत थी।

लेकिन उनके गाँवों के बीच चली आ रही पुरानी दुश्मनी उनके प्रेम की राह में बाधा बन गई। दोनों गाँवों के मुखियाओं ने उनके मिलन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। माधवी को अपने ही गाँव की सीमा के भीतर रहने के लिए बाध्य कर दिया गया।

फिर चैत्र पर्व की रात आई।

वर्ष की उस विशेष रात में सभी गाँववासी एकत्र होकर नृत्य और गीतों का उत्सव मनाते थे। उसी रात घुमुरा के वादन की गूँज चारों ओर फैलने लगी।

गोविंद अपने घुमुरा में अपना सारा विरह और दर्द उड़ेलकर बजाने लगा। उसकी गंभीर थाप में जैसे प्रेम की पुकार, विरह की पीड़ा और एक निश्छल हृदय की व्याकुलता समाई हुई थी।

वह आवाज़ सुनकर माधवी स्वयं को और रोक नहीं सकी। घुमुरा की प्रतिध्वनि का अनुसरण करते हुए वह उस शांत रात में जंगल की पगडंडी से दौड़ती हुई चली गई।

मांदल और घुमुरा की तेज होती ताल के बीच वह उत्सव के मंच तक पहुँची और सबके सामने गोविंद के सामने आ खड़ी हुई।

घुमुरा की थाप पर दोनों का मिलन हुआ। फिर दोनों ने ऐसा मनमोहक नृत्य किया कि उन्हें देखकर वहाँ उपस्थित ग्रामीणों के मन से वर्षों पुराना क्रोध जैसे धीरे-धीरे मिटने लगा।

घुमुरा की उस पवित्र ध्वनि ने दो शत्रु गाँवों को एक-दूसरे के करीब ला दिया।

उस दिन के बाद कलाहांडी की लोककथाओं में घुमुरा केवल एक वाद्य नहीं रहा, बल्कि वह ऐसे अमर प्रेम का प्रतीक बन गया, जिसने विरह को मिलन में बदल दिया।

~अनामिका✍️

niharikabehera251459

Typical lunch..

kattupayas.101947

रूह तक अपनी बात पहुंचाने का दम रखते हैं
शायर है हम सीधा दिल में कदम रखते हैं...

chiragvora055249

फ़िज़ूल...,

तेरे सिवा...!
रहता कहां हूं मैं आज-कल ?
आस-पास होकर भी इक ख़्वाब हूँ ,
साथ होकर भी इक भ्रम हूँ
ना जाने में किस दर्द का बेदर्दी हूँ ,
लाख इलाज़ भी फ़िज़ूल हैं ।


©®- शेखर खराड़ी
तिथि- ७-१०-२०२६

shekharkharadi6923

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

https://youtube.com/shorts/GacABTDw4_8?si=Quy_D2W14DFvlhWC

mamtagirishtrivedi740648

To be non-violent or to practice non-violence, one must first understand what violence actually is. How does it cause harm? And What real non-violence means? When we gain this knowledge and develop faith in it, only then does non-violence begin to manifest in our conduct and violence comes to a stop.

Thus, the first step in practicing non-violence is to acquire the right understanding.

For the right understanding, visit here: https://dbf.adalaj.org/KfNmO8UC

#spirituality #spiritualfacts #ahinsa #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

"रिश्ते खून से नहीं, एहसास से बनते हैं।"
GM
-Dharmendra Kumar

erdharmendra

late breakfast

kattupayas.101947

मश्रुम बटर मसाला
मश्रुम..
व्हिटॅमिन डी
बी 12
अणि कॅल्शियम चा जबरदस्त स्त्रोत..

कृतीच्या नावात जरी मसाला असले तरी फार मसालेदार नाही
बटण मश्रुम (जे बाजारात अथवा डी मार्ट मध्ये उपलब्ध असते..)आठ ते दहा
एक मोठा कांदा
एक 🍅 टॉमॅटो
गरम मसाला अर्धा चमचा
एक छोटा चमचा जिरे
कसुरी मेथी एक चमचा
तिखट एक चमचा
हळद अर्धा चमचा
साखर पाव चमचा
मीठ चवीनुसार
प्रथम मश्रुम धूवून त्यांचे देठ काढून टाका
मश्रुम चार चार उभे तूकडे करून घ्या
कांदा 🍅 टोमॅटो उभे चिरून घ्या

एका पॅन मध्ये दोन मोठे चमचे बटर घाला
बटर वितळले. सुगंध घरभर पसरला की
त्यात एक चमचा जिरे घाला
उभा चिरलेला कांदा घाला
कांदा थोडाच परातून
वर कसुरी मेथी घालावी
त्यानंतर टॉमॅटो च्या उभ्या फोडी घालून दोन मिनिट परतावे
आता हळद मीठ गरम मसाला तिखट घालून
चांगले परतून घ्यावे
मश्रुम तूकडे घालून पुर्ण मसाला त्याला लागेल असे परतावे
त्यावर झाकण ठेवण्यापूर्वी फक्त पाण्याचा एक हबका मारावा
दोन मिनिट झाकणं ठेवताच मश्रुम शिजतो
झाकणं काढून आवडत असल्यास पाव चमचा साखर घालावी परत थोडे एकत्र करावे
वरती कोथिंबीर घालावी
गरम गरम खायला घ्यावें
सोबत ब्रेड अथवा पोळी, पराठा मस्त लागतो
अत्यांत चविष्ट कमी वेळात होणारी एक पौष्टीक डिश 😊

jayvrishaligmailcom

दिन का शोर हुआ अब रुख़्सत, ढलने लगी ये काली रात,
सन्नाटों की चादर ओढ़े, खुद से कर लें थोड़ी बात।
​सड़कें सूनी, रोशन गलियाँ, बंद हुए सब दरवाज़े,
ना अब कोई भीड़ का हिस्सा, ना झूठे कुछ अंदाज़े।
​तारों की इस महफ़िल में अब, चाँद अकेला जगता है,
दिन भर की इस दौड़ के आगे, रात का लम्हा सच लगता है।
​जो बातें हो सकीं न सबसे, वो ख़ामोशी कहती है,
दिल के गहरे एक कोने में, एक नदी सी बहती है।
​ना कोई उम्मीद किसी से, ना कोई बेजा फ़रियाद,
अंधेरे में जलती-बुझती, बस कुछ भूली-बिसरी याद।
​सो जाने दो इस दुनिया को, तुम अपनी एक दुनिया बुन लो,
गहरे सन्नाटों के अंदर, बहता हुआ सुकून तुम चुन लो।

ritukumari509471

रात का सन्नाटा अब डराने लगा है,
ज़िंदगी का हर ज़ख़्म पुराना सताने लगा है।
दिन भर तो उलझे रहे दुनिया के शोर में,
अब अंधेरा दिल की हर एक आस मिटाने लगा है।
​किस राह पर निकला था, कहाँ आ गया हूँ,
ज़िंदगी की इस दौड़ में खुद को गँवा आया हूँ।
कोई मंजिल नज़र आती नहीं इस मोड़ पर,
थका-हारा बस ख़ामोशी की चादर ओढ़ आया हूँ।
​काँच की तरह बिखरे पड़े हैं सारे अरमान,
रूह है ख़ामोश और अंदर मचा है तूफ़ान।
हासिल कुछ न हुआ इतनी जद्दोजहद के बाद,
बस यूँ ही गुज़रती जा रही है यह बेबस जान।
​काश थम जाए ये वक्त इसी गहरी छाँव में,
न कोई दर्द हो अब इस बेनाम से गाँव में।
सो जाए यह दिल हमेशा के लिए इस तरह,
जैसे कोई लहर खो जाती है समंदर के बहाव में

ritukumari509471

हर कोई इस ज़माने में कहता है
कि यह लोगों का नहीं, कलियुग का प्रभाव है।
पर क्या यह सच है?
अगर हम खुद को बदल नहीं पाए

तो इसे कलियुग का प्रभाव कह दिया जाता है?
या फिर हम बुराई को छोड़ नहीं पाते,
इसलिए दोष ज़माने पर डाल देते हैं?
असली प्रभाव किसका है—

समय का, दुनिया का,
या फिर हमारी अपनी कमज़ोरियों का,
जिन्हें हम कभी मानना ही नहीं चाहते?

✍️by A.Shadow🖤
All Rights Reserved©

aarikashadow258865

अजनबी
​रिया जल्दी-जल्दी घर के काम खत्म करने में लगी हुई थी और बार-बार उसकी नज़र घड़ी की तरफ जा रही थी। आज कॉलेज में एक बहुत महत्वपूर्ण सेमिनार होने वाला था, जिसमें कुछ लोग बाहर से और कुछ दूसरे कॉलेज से आने वाले थे। उस सेमिनार की ज़िम्मेदारी रिया और उसके ग्रुप को दी गई थी।
​30 साल की रिया में उसकी उम्र से कहीं ज़्यादा ठहराव था। वह हमेशा अपने शांत चेहरे पर एक मुस्कान ओढ़े रहती थी, जो उसकी आँखों की उदासी और दर्द को बखूबी छुपा लेती थी।
​काम खत्म करने के बाद रिया ने अपने बिखरे बाल सँवारे और कॉलेज के लिए निकल गई।
​बस में बज रहे एक पुराने गाने ने उसे अचानक उसके पुराने वक़्त में पहुँचा दिया। वही वक़्त, जहाँ रिया अल्हड़ थी, बेफ़िक्र होकर अपनी ज़िंदगी जिया करती थी। उसके लिए उसका प्यार उसकी पूरी दुनिया हुआ करता था। सुबह से लेकर रात तक उसकी ज़िंदगी बस उसी प्यार के चारों तरफ घूमती थी। उसे याद भी नहीं रहा था कि वह खुद भी एक इंसान है, उसकी अपनी भी कोई ज़िंदगी है और उसकी अपनी एक सेल्फ-रिस्पेक्ट भी है।
​कच्ची उम्र के उस प्यार में रिया सामने वाले के व्यवहार को समझ ही नहीं पाई थी। जिसे वह प्यार समझकर इबादत कर रही थी, शायद दूसरे के लिए वह सिर्फ़ एक टाइम पास था। और जब उसका भरोसा टूटा, तो उसके साथ रिया भी पूरी तरह टूट गई। उसे सँभलने में आठ साल लग गए।
​इन आठ सालों में रिया उस प्यार के सदमे से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाई थी। लेकिन शायद उसी दर्द ने उसकी उम्र से कहीं ज़्यादा उसके भीतर एक ठहराव भर दिया था।
​बस के अचानक ब्रेक लगने से एक झटका लगा और रिया अपने ख़यालों से बाहर आ गई। तभी उसकी सहेली अंजलि ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, “रिया, कॉलेज आ गया। उतरना है।” रिया ने अपना सामान सँभाला और बस से उतर गई। कॉलेज पहुँचते ही वह सेमिनार के काम में लग गई।
​सेमिनार शुरू हुआ तो बाहर से आए लोगों में आकाश भी था। रिया को काम में व्यस्त देखकर उसने उसकी मदद करने की पेशकश की। आकाश लगभग रिया की ही उम्र का था, लेकिन अपनी उम्र के लोगों से थोड़ा ज़्यादा सुलझा हुआ। रिया थोड़ी झिझकी, लेकिन उसके पास उसकी मदद लेने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था।
​दो घंटे के उस सेमिनार में रिया और आकाश के बीच बस हाय-हैलो हुई और काम को लेकर थोड़ी-बहुत बातचीत। इससे ज़्यादा कुछ नहीं। लेकिन एक महीने चलने वाले उस सेमिनार के कारण अब दोनों की रोज़ मुलाकात होने लगी। रिया से बात करने की पहल अक्सर आकाश को ही करनी पड़ती थी। वह बातचीत की शुरुआत तो करता था, लेकिन रिया की ख़ामोशी को भी उतनी ही इज़्ज़त देता था।
​एक दिन सेमिनार शुरू होते ही रिया हॉल से उठकर बाहर आ गई। हाथ में कॉफी का कप लिए वह एक तरफ बैठकर अपने ख़यालों में खो गई। तभी आकाश भी वहाँ आ गया। उसने रिया के पास बैठने की इजाज़त माँगी रिया ने अपना दुपट्टा सँभाला और बिना कुछ कहे उसे बैठने की इजाज़त दे दी।आकाश उसके पास बैठ गया।
​आकाश ने कॉफी की एक सिप लेते हुए पूछा, “आप हमेशा इतना चुप रहती हैं?” जवाब में रिया बस मुस्कुरा दी। आकाश ने फिर पूछा, “आप किस्मत पर यक़ीन करती हैं?” रिया ने उसकी तरफ देखा, हल्का सा मुस्कुराई और बहुत धीमी आवाज़ में बोली, “हाँ।”
​शायद यह वही पहला जवाब था, जिसने आकाश को उसकी ख़ामोशी के पीछे छुपे सवालों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने फिर हल्के अंदाज़ में पूछा, “आप अपनी किस्मत से क्या चाहती हैं?”
​इस सवाल पर रिया ने आकाश की तरफ देखा। कुछ पल चुप रही और फिर थोड़ी संजीदगी और दबी हुई आवाज़ में बोली, “अपने दिल का सुकून।”
​आकाश बस उसे देखता रहा। रिया वहाँ से चली गई, लेकिन अपने पीछे आकाश के मन में कई सवाल छोड़ गई। उसकी ख़ामोशी में छुपे दर्द के सवाल। उसकी मुस्कुराती आँखों के किनारों में छुपी उस कहानी के सवाल, जो शायद वह किसी से नहीं कहती थी।
​धीरे-धीरे रिया भी आकाश के साथ सहज होने लगी। अब वह सिर्फ़ आकाश के सवालों के जवाब नहीं देती थी, बल्कि उससे पलटकर सवाल भी करने लगी थी। कभी-कभी तो ऐसे सवाल कर देती, जिनका जवाब आकाश के पास मुस्कुराने के अलावा कुछ नहीं होता था।
​एक दिन आकाश ने रिया से पूछा, “आपके according सबसे अच्छा रिश्ता कौन सा होता है?” रिया ने सहजता से जवाब दिया, “हसबैंड-वाइफ... माता-पिता का...” फिर अचानक रुक गई। एक गहरी साँस लेकर बोली, “पिता और बच्चे का रिश्ता कितना उलझा हुआ है।”
​आकाश, जो उसकी बातें ध्यान से सुन रहा था, थोड़ा रुका और पूछा, “कैसे?”
​रिया थोड़ी संजीदा हो गई। “पिता और बच्चे दोनों को एक-दूसरे से प्यार होता है, लेकिन फिर भी दोनों एक-दूसरे से कुछ कहने और अपना प्यार जताने में कतराते हैं।”
​आकाश उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया। “ये तो समाज ने ही ऐसा बनाया है और ऐसा ही चलता आ रहा है।”
​रिया ने उसकी तरफ देखा। “आपको ऐसा क्यों लगता है?”
​आकाश ने कहा, “माँ ही बच्चे को पालती है। पिता घर के बाहर कमाने की responsibility पूरी करता है।”
​रिया मुस्कुरा दी और हल्के अंदाज़ में बोली, “आपको नहीं लगता, आप समाज की बात कर रहे हैं, लेकिन उसमें आपकी अपनी राय कहाँ है?”
​आकाश के पास मुस्कुराने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। जाने-अनजाने में आकाश ने रिया के उस मन को छुआ था, जिसे शायद लंबे समय से किसी ऐसे ही स्पर्श की ज़रूरत थी—जो उसे बदलने की कोशिश न करे, बस उसे समझने की कोशिश करे।
​आकाश ने रिया से कोई वादा नहीं किया था। फिर भी, दोनों एक-दूसरे के उस ख़ालीपन के लिए एक सहज-सा जवाब बन गए थे, जिसे शायद दोनों ने कभी शब्दों में समझाने की कोशिश भी नहीं की थी।
​आख़िर सेमिनार का अंतिम दिन आ गया। अब दोनों को अपने-अपने रास्ते जाना था। दोनों आख़िरी बार मिले। वैसे ही सहजता से बात हुई। कुछ मुस्कुराहटें थीं, कुछ ख़ामोशियाँ थीं और फिर बिना किसी बड़े अलविदा के दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए।
​न फिर मिलने की कोई चाह थी, न कोई शिकवा-गिला। बस था तो एक शुक्रिया। रिया की ख़ामोशी को जगह देने के लिए। उसकी boundaries का सम्मान करने के लिए। और उस रिश्ते के लिए, जिसका कोई नाम नहीं था, फिर भी उसमें कुछ अधूरा नहीं था।
​एक ऐसा रिश्ता, जिसे रिया वक़्त के किसी भी दौर में याद कर सके और बिना किसी झिझक के मुस्कुरा सके।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

जिस बाप ने अपनी बेटी को दिल से अमीर
बनाया हो वो बेटी किसी की दौलत देखकर
प्यार नहीं करती 💯❤️‍🩹💫

kalpanasatav823113

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