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આ સંસાર આપણને પોષાતો હોય તો કશું સમજવાની આગળ જરૂર નથી અને સંસાર આપણને કંઈ હરકતકર્તા થતો હોય તો આપણે અધ્યાત્મ જાણવાની જરૂર છે. અધ્યાત્મમાં 'સ્વરૂપ'ને જાણવાની જરૂર છે. 'હું કોણ છું' એ જાણ્યું કે બધાં 'પઝલ' સોલ્વ થઈ જાય છે. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

"Success is sweeter with the right people beside you."

parmarsantok136152

"The work you do now will make space for future blessings."

parmarsantok136152

🟦 दही वडा स्टाईल मखाणे

🟦 मखाणे योग्य प्रकारे आणि योग्य वेळी खाल्ले तर वजन कमी करण्यासाठी त्याचा चांगला फायदा होतो.
मखाण्यामध्ये मॅग्नीशियम असतें
उपयोगी अँटी-ऑक्सिडंट असतात.
हे अँटी-ऑक्सिडंट्स हृदयाचे आरोग्य चांगले ठेवण्याचे काम करतात.
मखाणेचा ग्लाईसेमिक इंडेक्स कमी असतो
असे गुगल सांगते ..

🟦 मखाणे प्रथम कोरडेच भाजून
कुरकुरीत करून घ्यावे
ते ताटात काढून ठेवावे
आता कढईत एक मोठा चमचा साजुक तूप घालावे
तूप वितळले की त्यात हे भाजलेले मखाणे एक मिनिट परतून काढून ठेवावे

🟦 दही गोड असावे ते चमच्याने चांगले फेटून घ्यावें
त्यात
चवीनुसार साखर
मीठ
बारीक आले घालावे

🟦 कढईत तूप घालून
जिरे व हिंगाची फोडणी करावी
ही फोडणी दह्यावर घालून
चांगले मिसळून घ्यावे

🟦 या दह्यात तुपात परतलेले मखाणे घालून
वरती बारीक कोथिंबीर घालावी
आवडतं असल्यास याच वेळेस बारीक पुदीना घालू शकता
वरती तिखट पुड भुरभुरावी
हे थंड करण्यासाठी फ्रिज मध्ये ठेवावे
खायला घेण्यापूर्वी दहा मिनीटे बाहेर काढावे

🟦 खुप चवदार डिश तयार होतें 😋
एक वेगळा आणि सोपा प्रकार म्हणुन जरुर करून बघा

jayvrishaligmailcom

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આજના સમયમાં સમજવા લાયક સુંદર વાર્તા 👌👌

ronakjoshi2191

...बहता हुआ दरिया ...

मेरी कमी क्या होगी किसी को,
मैं ठहरा एक बहता हुआ दरिया,
जो बहाव की जद में बस बहता गया।

कुछ लौटते हैं मुसाफिर शहर में,
पर मैं तो बस राहों का होकर रह गया।

कौन ढूंढेगा मुझको उस गुज़रे हुए वक्त में,
मैं यादों के दरमियां बस सिमट सा गया।

ना कोई साहिल मिला, ना कोई मंज़िल मिली,
मैं तो बस दो किनारों के बीच बंट कर रह गया।


-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

changes are needed in modern woman's life. even though this film is drama. I like it.

kattupayas.101947

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है कचूमर

https://youtube.com/shorts/xsnIatdADUI?si=d7Y98b8hJGIuiGtZ

mamtagirishtrivedi740648

3.. रावल जैत्रसिंह (शासनकाल: 1213–1253 ईस्वी)।
इल्तुतमिश के अहंकार का मर्दन और भूताला का युद्ध

यह वह दौर था जब दिल्ली सल्तनत का सुल्तान इल्तुतमिश अपनी अजेय सेना के घमंड में चूर था। वह संपूर्ण भारत पर अपनी सत्ता स्थापित करना चाहता था। इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़े थे मेवाड़ के शासक रावल जैत्रसिंह। जब इल्तुतमिश ने मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा पर हमला कर उसे तहस-नहस किया, तब रावल जैत्रसिंह ने पीछे हटने के बजाय धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए तलवार उठाई।
गोगुंदा के पास ऐतिहासिक 'भूताला के युद्ध' में रावल जैत्रसिंह ने अपनी कुशल युद्धनीति और अदम्य साहस का परिचय देते हुए इल्तुतमिश की विशाल तुर्क सेना को इस कदर काटा कि दिल्ली के सुल्तान को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। इस युद्ध में मेवाड़ के वीरों ने न केवल तुर्कों के अहंकार को कुचला, बल्कि सदियों तक के लिए दिल्ली सल्तनत को हिलाकर रख दिया।

तुर्कों द्वारा नागदा को नष्ट किए जाने के बाद, रावल जैत्रसिंह ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया। उन्होंने सामरिक दृष्टि से बेहद सुरक्षित और अभेद्य चित्तौड़गढ़ दुर्ग को मेवाड़ की नई राजधानी बनाया। उनके इस एक फैसले ने आने वाली सदियों के लिए मेवाड़ को प्रतिरोध का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। उन्हीं की तैयार की हुई इस मजबूत नींव पर आगे चलकर रावल रतन सिंह, महाराणा कुंभा, महाराणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ धर्मयुद्ध जारी रखा।
पढ़े - https://www.matrubharti.com/book/19993612/part-01-maharana-thousand-years-of-crusade-3

hindgaurav710743

Do you know that by getting angry, the work does not get done faster? On the contrary, the work gets disturbed even more, obstacles get created, and as the ego of the person is hurt, he revolts.

To know more, visit here: https://dbf.adalaj.org/CPbeUAqN

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dadabhagwan1150

ग़ज़ल: एक आत्मा की अधूरी आवाज़
कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

भटकती फिर रही है रूह, अभि कोई तो सदा दे दे,
जो इस तन्हाई से रोके, मुझे ऐसी कोई दवा दे दे।-१

ये कैसा हश्र है मेरा, न ज़िंदा हूँ न मुर्दा हूँ,
कोई आए क़रीब मुझको जीने की दुआ दे दे।-२

हवाएँ सनसनाती हैं तो दिल धड़कता है मेरा,
कोई इस थरथराहट को ज़रा-सा आसरा दे दे।-३

चले थे जिस तरफ़, उस राह का कोई सिरा ही नहीं,
मुसाफ़िर थक गया है, अब तो कोई रास्ता दे दे। -४

सुलगती आग है भीतर, धुआँ बाहर नहीं आता,
ये कैसा दर्द है जिसका कोई भी वास्ता दे दे। -५

मैं सदियों से अकेलेपन के इस साए में ज़िंदा हूँ,
मुझे इस क़ैद से कोई मसीहा अब तो रिहा दे दे। -६

ज़माने भर के मेले में अकेले ही रहे हम तो,
जो मेरा दर्द समझ सके, मुझे वो आश्‍ना दे दे। -७

पुकारा था जिसे मैंने, वो मुड़कर देख भी न पाया,
मेरी आवाज़ खोई है, अभि कोई तो इब्तिदा दे दे। -८

ये सन्नाटा मुझे अंदर ही अंदर खाए जाता है,
कोई आकर मेरे घर का दीया फ़िर से जला दे दे। -९

मैं उस चौखट पे बैठा हूँ जहाँ कोई नहीं आता,
जो मेरे नाम की तख्ती वहाँ आकर लगा दे दे। -१०

बिछड़कर आपसे हम इस तरह बर्बाद बैठे हैं अभि,
कि जैसे कोई लहर कश्ती को साहिल पे डुबा दे दे। -११

अधूरी आस है मेरी, अधूरी हर कहानी है,
जो इस अधूरेपन को एक मुकम्मल दास्ताँ दे दे। -१२

लिखा था नाम जिसका दिल पे, वो भी मिट गया आख़िर,
कोई इस कोरे कागज़ को नया एक आशिया दे दे। -१३

गले में घुट रही है चीख़, पर आवाज़ मद्धम है,
मेरी इस बेबसी को कोई चीख़ने की वफ़ा दे दे। -१४
कवि / शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'

abhi006

कुछ शब्द इतने चतुर होते हैं,
कि सच को भी झुठला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने मीठे होते हैं,
कि पत्थर दिल को भी पिघला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने ज़हरीले होते हैं,
कि हँसते चेहरे को रुला जाते हैं…
कुछ शब्द इतने नखरीले होते हैं,
कि अपनेपन में भी दूरी ला जाते हैं…
कुछ शब्द बड़े छलिया होते हैं,
जो सामने हँसते हैं…
और पीछे वार कर जाते हैं…
कुछ शब्द ऐसे होते हैं—
जो गहरे घाव दे जाते हैं…
और कुछ शब्द…
उन्हीं घावों पर
मरहम बनकर लग जाते हैं…
कुछ शब्द ऐसे भी होते हैं—
जो ज़ख्म पर ज़ख्म दे जाते हैं…
और कुछ शब्द…
प्रेम बनकर टपकते हैं…
दिल को सुकून दे जाते हैं… ❤️
आख़िर…
ये सब शब्दों का ही खेल है…
शब्दों से ही रिश्ते बनते हैं,
और शब्दों से ही टूट जाते हैं…
दुनिया में सबसे बड़ा रिश्ता भी—
शब्दों से ही बना होता है…
इसलिए…
शब्दों को सिर्फ उनकी मिठास से मत परखो…
उनके पीछे छिपी नीयत को समझो।
क्योंकि…
तुम्हारे शब्द ही तय करते हैं—
तुम्हारे रिश्तों की उम्र… 💔

archanalekhikha

"The world fears what it cannot control..."
"...and she was never meant to be controlled.
https://youtube.com/shorts/m8fDL7GMLfs?si=SN0DHO6kQVwEP7PE

sakshirai.582109

એમેઝોન પર ૨૨૪૦ પેજનું 'દરેક ક્ષેત્રમાં સફળતા' નામનું સંપૂર્ણ પુસ્તક ઈબુક સ્વરૂપે પબ્લીશ થઈ ગયું છે તેમજ ૪ તારીખ સુધી ૯૯ રુપિયાની કિંમતનું આ પુસ્તક સંપૂર્ણ ફ્રી છે તો વહેલી તકે તેનો લાભ ઉઠાવવા વિનંતી.
આભાર...
https://www.amazon.in/dp/B0H37MG1G3/ref=sr_1_1?crid=T6ASKOHYUMW4&dib=eyJ2IjoiMSJ9.sWy8rEPKHVBWaEy94O1-hw

amitparmar170646

They will see my success, but only you will know how many storms I crossed to earn it.

piyu 7soul ❤️

parmarsantok136152

Good Morning 🌅

harshparmar8722

Good morning friends.. congratulations to RCB

kattupayas.101947

🥭आंबा ड्राय फ्रूट सॅलड

भोपळ्याच्या बिया
सुर्यफूल बिया
काजूचे तुकडे
बदाम तुकडे
काळया मनुका
चेरी फळे
थोडी रंगीत टुटी फ्रुटी
हापुस आंब्याच्या केशरी फोडी
वरती थोडा लिंबू रस
चवी पूरते मीठ
आणि थोडे चिली फ्लेक्स...
आंब्याच्या सिझन मध्ये केलेले हे सॅलड...
यामध्ये तुमची क्रिएटिव्हीटी वापरू शकता..🙂

jayvrishaligmailcom

—तय मुलाकात—
​कल फिर मुलाकात करेंगे तुमसे,
अधूरी ये बात फिर करेंगे तुमसे।

​जो दिल में छिपे हैं जज़्बात अभी,
वो मिलकर बयां फिर करेंगे तुमसे।

​अब क्यों उदास हो तुम...
कल फिर मिलेंगे तो हम!

​ऐसे ना तुम अब करो,
इंतजार थोड़ा तो करो।

​हम भी बेचैन हैं थोड़े, जुदा होने से डरें,
रात ही की तो बात है, फिर तय मुलाकात है।

​अब मुस्कुरा दो तो जरा,
इस गम को भुला दो जरा।

​चलो अब उठ जाते हैं, अपने घर को जाते हैं,
रात रोके तो क्या, एक-दूजे के ख़्वाब में आ जाते हैं।"

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

By The Train Window - Poem
Dissolving Into The Vastness Within And Around By The Train Window ....
By Vanita Thakkar ….

https://vanitathakkar.blogspot.com/2026/05/by-train-window-poem.html

vanitathakkar

बाग में मोर नाचा, सबने देखा
मोर ने अपने पैरों को देखा
एक टीस उभरी जैसे चाँद में दाग
क्यूँ नहीं किसी ने मेरा दर्द देखा
पंख मेरे अनन्य सुन्दर
पैर मेरे क्यूँ कुरूप फिर
चिढ़ाए मोरनी मुझको क्यूँ
कैसा है ये कुदरत का लेखा
सावन में जब बरसे पानी
कुदरत भी झूमे बन दीवानी
आ जाता मेरी आँख से पानी
क्यूँ रह जाता एक काश किसी कहानी में
अपूर्णता ही बने सुन्दरता सबकी कहानी में
कहे मोरनी मुझको देखो
मैं सुंदर पर सुंदर पंख नहीं है मेरे पास
अनदेखा कर अपनी कमी
पोंछ आँखों की नमी
छुओ आसमान पर ना छुटे जमीं
तेरी-मेरी नहीं सबकी यही कहानी
थोड़ी खट्टी थोड़ी मीठी जिंदगी सयानी
ईश्वर का वरदान है जिंदगानी
सुंदर गुलाब सबने देखा
संग काँटों का हमेशा ना देखा
बारिश में मोर नाचा सबने देखा
सुख दुख तो है विधि का लेखा

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*डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

सब शून्य है शून्य में है यही दृष्टि
एक चक्र है जीवन दर्शन उसकी दृष्टि

drvandnasharma8596