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कविता
मैं सब जानती हूं


मैं सब जानती हूं
और मान भी चुकी हूं

फिर भी तकलीफ हो रही है
इस बात से नहीं की मुझे अब भी किसी से उम्मीद है
इस बात से तकलीफ हो रही है
की सच्चाई को स्वीकार करके भी
मैं भूल नहीं पा रही बीते हुए समय को
या तो जो हो रहा है
उन सबको

मैं स्वीकार तो कर रही हूं
पर वह मुझे तकलीफ दे रही है
मुझे चोट पहुंचा रही है

मैं नहीं सोच रही की किसी और के लिए अवेलेबल है
तो मेरे लिए क्यों नहीं

मैं जानती हूं कि सबके लिए हो सकती है
पर मेरे लिए नहीं
फिर भी तकलीफ हो रही है


सब कुछ जानते हुए
सबको पहचानते हुए भी तकलीफ हो रही है

और सब जान भी मैं इस तकलीफ से बाहर खुद को नहीं निकल पा रही
मैं इस दर्द को छोटा नहीं कह सकती
नहीं तो खुद के दर्द को नाकर पा रही हूं


सब कुछ ऐसा ही है
ऐसा ही होता है
मैं मानती हूं
की समाज परिवार यह दुनिया सब ऐसे ही है
हमेशा से

और मुझे भी उम्मीद नहीं किसी से
क्यों यह सब ऐसे हैं
नहीं तो मेरे अंदर किसी के लिए शिकायत है

पर अंदर है
बस निराश गहरा निराश
और उदासी
जिसमें कोई उम्मीद नहीं है किसी से भी नहीं
पर अकेले छोड़े जाने का गम सबसे ज्यादा है



शांति बिल्कुल नही है
है तो बस गहरी खामोशी
राहत बिल्कुल नहीं है
है तो बस चुप्पी

उम्मीद से छुटी हुई
अंदर से टूटी हुई
अकेलेपन में पड़ा हुआ

सब जानकर भी रोता हुआ
मैं यहां

abhinisha

🇮🇳🇮🇳 सैनिकों की जिंदगी 🇮🇳🇮🇳

यह सैनिकों की जिंदगी
कितनी कठिन है,
कभी रेट से ढ़क जाते हैं
तो कभी जंग में बिखर जाते हैं,
हमारे लिए वह सरहद पर
अपनी जान गवाते हैं।

सैनिक घर से निकलते हुए
अपने परिवार से यह कह कर जाते हैं की:-  मैं वापस आऊंगा मैं-
         अपना कर्तव्य निभाऊंगा,
         अगर शहीद हुआ तो-
         आंसू ना बहाना,
         मेरे लिए रोकर अपनी-
         आंख ना सुझाना।

अगर कोई पूछे तो
गर्व से बताना कि:-
मैं सैनिक था गद्दार नहीं,
मैं चट्टान था कमजोर इमारत नहीं,
मैं दुश्मनों से मारा ताकि
तुम चैन से सो सको,
अगर कोई पूछे तो
गर्व से कह सको:-

                        वह ऐसा चट्टान था-
                        जिसे कोई मिता ना सका,
                        वह ऐसे इंसान था-
                        जिसे कोई भुला न सका,
                        जिसे कोई भूल न सका।

उसने मुझे एक-
बात बताया था,
अपने जीवन का-
एक  राज सुनाया था की:-

  जब रेट से मैं थक जाता हूं-
तो चादर बन जाता है,
जब बर्फ से में ढक जाता हूं-
तो तिरंगे का कफन बन जाता है,
इस देश की धरती पर-
जीने में स्वर्ग सा लगता है,
इस देश की धरती के लिए-
मरने पर मुझे मुक्ति मिल जाता है।

इस देश की धरती का-
कर्ज में कैसे अदा कर पाऊंगा,
जिस धरती पर में पला-बड़ा-
उसका कर्ज कैसे चुका पाऊंगा,
इस देश के लिए बलिदान देने पर भी-
इसका कर्ज न चुका पाऊंगा,
इस देश की धरती का कर्ज में-
सात जन्मों में भी अदा न कर पाऊंगा।

इस देश के लिए जीना-
और मरना है मेरा जुनून,
इस देश के लिए कफन में-
लिपटना भी है मुझे मंजूर।।

             🇮🇳  मेरा देश मेरी जान है,
  इसके लिए मेरा जीवन भी कुर्बान है।🇮🇳

🇮🇳 देश के लिए मर मिटना कबूल है मुझे अखंड भारत बनाने का जुनून है मुझे।
अखंड भारत बनाने का जुनून है मुझे।।🇮🇳

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ashuashu858439

✔️💯

narendraparmar2303

"सच का स्वाद"

मैं सोचती हूँ...
सच इतना कड़वा क्यों होता है?
कि सही होकर भी उसे
कोई पीना नहीं चाहता।

मैं उलझन में हूँ...
सच अगर सही है,
तो उससे आँख मिलाने से
हर कोई क्यों कतराता है?

क्या हो...
अगर हर ज़ुबान पर
सिर्फ कड़वा सच उगने लगे?
क्या रिश्ते तब भी मिठास से जी पाएँगे,
या अपने ही हाथों से
रेत की तरह फिसल जाएँगे?

क्या तब ईमान ज़िंदा रहेगा,
या झूठ के घूँघट में
हर कोई सादिक़ बना रहेगा?

शायद सच कड़वा इसलिए है,
क्योंकि उसमें चीनी मिलाने की इजाज़त नहीं।
और झूठ मीठा इसलिए लगता है,
क्योंकि उसे हम अपने हाथों से घोलते हैं।

पर मैं कहती हूँ,
कड़वी दवा ही मर्ज़ मिटाती है,
और मीठा ज़हर...
सिर्फ़ मौत बाँटता है।

प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

"घर और इंसान"

सबको महलों में रहने का शौक है,
पर टूटे घर की छत पर
कोई खड़ा होना नहीं चाहता।

छज्जे से उगता सूरज सबको अच्छा लगता है,
पर टूटी खिड़की से जो चाँदनी झाँकती है,
उसको कोई अपनाना नहीं चाहता ।

मैं घर की बात नहीं कर रही,
ये तो इंसान की बात है।
सबको सफल लोगों से रिश्ता चाहिए,
पर जो हार गया हो,
उसका हाथ कोई नहीं पकड़ता।

टूटी दीवारों पर भी धूप आती है,
दरारों से भी उजाला अंदर आता है।
पर लोगों की नज़र सिर्फ चमकते शीशों पर रहती है,
नींव में लगी सीलन को कोई नहीं देखता।

जीत का आँगन भरा रहता है,
हार की दहलीज़ पर सिर्फ सन्नाटा होता है।
सबको रोशन नाम चाहिए,
पर बुझे दिए को जलाना
कोई अपना काम नहीं समझता।

मैं कहती हूँ,
महल भी एक दिन गिर जाते हैं,
फ़र्क़ बस इतना है
मिट्टी के घर आँधी से टूटते हैं,
और इंसान के घर...
अक्सर अपनों की आँखों से बिखरते हैं।

प्राची गुर्जर ……

prachitanwar111

"किनारा"

हर बढ़ता कदम मुझे खुद से दूर ले जा रहा है...
आगे तो बढ़ रही हूँ, पर क्या यही वो राह है
जिस पर चलने को कभी मेरा जी चाहता था?

नहीं रहना था मुझे अर्श पर,
निशान तो चाहिए थे मुझे अपने ही फ़र्श पर।
मगर ज़िंदगी की भाग-दौड़ में
मैं उन कदमों से कदम मिलाने लगी,
जो कभी मेरे थे ही नहीं...

क्यों काट रही हूँ मैं वो फसल,
जिसके बीज मैंने कभी बोये ही नहीं?
क्यों सवार हूँ मैं उस कश्ती पर,
जो भटक गई है समुंदर की लहरों में?

क्योंकि रास्ते बदल गए,
और मैं खुद को भूल गई।
पर दूर कहीं एक किनारा नज़र आता है...
शांत, मौन, समुंदर के शोर से जुदा।

क्या जी सकती हूँ मैं उस शांत किनारे पर?
क्या लौट सकती हूँ मैं वापस... खुद तक?

हाँ। क्योंकि किनारा कहीं बाहर नहीं,
वो तेरे ही अंदर सोया है।
जिस दिन तू रुकेगी,
और लहरों का शोर सुनने के बजाय
अपनी साँस की आहट सुनेगी...
उस दिन कश्ती खुद मुड़ जाएगी,
और हर कदम तुझे तुझ तक ले जाएगा।
तू अर्श की नहीं, अपने फ़र्श की है
और तेरा निशान वहीं बनेगा।
प्राची गुर्जर ….

prachitanwar111

पैसों के लोभ में बहुत से लोग बर्बाद हुए हैं। इस दुनिया में रहते हुए पैसों की आवश्यकता है लेकिन क्या आपको पता है, पैसे किस नियम से आते हैं? क्यों सभी लोग पैसों के पीछे भाग रहे हैं? पैसों का व्यवहार कैसा होना चाहिए? क्या संसार में रहते हुए भी पैसों के मोह से छूटा जा सकता है?

सुनिए हिंदी पॉडकास्ट “पैसों की समझ” और पाइए सभी समस्याओं का समाधान: https://dbf.adalaj.org/c1VVH77R

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dadabhagwan1150

"પક્ષપાત તો મારે કરવો જ પડે, કારણ કે જે મારી શરણમાં આવ્યું છે તેની રક્ષા કરવી એ જ મારો પ્રથમ અને અંતિમ ધર્મ છે."👇👇👇👇👇

મે ભગવત ગીતા માંથી શીખ્યું છે...💯💯💯💯

ભગવદ્ ગીતાના આધારે 'શરણાગતનું રક્ષણ' એ માત્ર એક જવાબદારી નથી, પરંતુ તે એક ઉચ્ચતમ ધર્મ (સ્વધર્મ) ગણવામાં આવે છે. ગીતાના સંદર્ભમાં આ વાતને નીચે મુજબ સમજી શકાય છે:

૧. શરણાગતિનો મહિમા (શરણાપન્નનું મહત્વ)

ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ ગીતાના ૧૮મા અધ્યાયના ૬૬મા શ્લોકમાં સ્પષ્ટ કહે છે કે જે કોઈ મારી શરણમાં આવે છે, હું તેને સર્વ પાપોમાંથી મુક્ત કરું છું. આ શ્લોક મનુષ્યને શીખવે છે કે જ્યારે કોઈ વ્યક્તિ સંપૂર્ણ વિશ્વાસ સાથે તમારી પાસે આવે, ત્યારે તેનું રક્ષણ કરવું એ પરમાત્માના ગુણને ધારણ કરવા જેવું છે.

૨. ક્ષત્રિય ધર્મ અને અન્યાય સામે રક્ષણ

અર્જુનને જ્યારે રણમેદાનમાં મોહ થયો ત્યારે કૃષ્ણે તેને સમજાવ્યું હતું કે, જે નિર્દોષ છે અને જેણે તારા પર વિશ્વાસ મૂક્યો છે, તેના રક્ષણ માટે લડવું એ જ ક્ષત્રિયનો ધર્મ છે. 'પક્ષપાત' શબ્દ અહીં નકારાત્મક નથી, પરંતુ તે 'ધર્મની પક્ષમાં રહેવું' તેવો અર્થ સૂચવે છે. જ્યારે તમે કોઈ અસહાયની રક્ષા કરો છો, ત્યારે તમે સત્ય અને ધર્મના પક્ષમાં ઉભા રહો છો.

૩. નિષ્કામ કર્મ અને કર્તવ્ય

ગીતા કહે છે કે ફળની ચિંતા કર્યા વગર પોતાનું કર્તવ્ય કરવું. જો તમારું કર્તવ્ય કોઈની રક્ષા કરવાનું છે, તો તે રક્ષા કરતી વખતે આવતી મુશ્કેલીઓ કે દુનિયાના વિરોધની ચિંતા ન કરવી જોઈએ. તે રક્ષા જ તમારા માટે 'યજ્ઞ' સમાન છે.
રાધે રાધે 🙏 🙏
જય શ્રી રામ 🙏 🙏 🙏
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manonbhai4739

🙏🙏तुम किनारे खड़े रहकर,
बस सागर को देखकर,
उसके सौन्दर्य का लुत्फ उठा सकते हो,

तुम यदि बन जाओ नाविक,
सागर में जा कर तुम अपने,
साहस और शौर्य के बल पर सिद्धी प्राप्त कर सकते हो।🦚🦚

parmarmayur6557

" સ્મૃતિ આંખો મહીં "

યાદો હૃદયથી ગઈ નથી, આંસુ જાય છે વહી.
સાચવી રાખી છે સ્મૃતિ તારી, આ આંખો મહીં.

લોકો પૂછે છે આ આંસુ વહેવાનું કારણ મને,
નથી નબળાઈ પ્રેમની, એ તો છે વફાની સહી.

રાત આખી જાગી બસ એ જ વિચારું છું હવે,
કે, સાથ છોડતાં પહેલાં, તેં વાત પણ ના કહી?

શ્વાસ ચાલે છે ફક્ત ને વહેમ છે કે જીવિત છું,
જીવ તું લઈ ગઈ હવે આ દેહમાં કંઈ છે નહીં.

રાહ જોતાં આંખો પણ થઈ ગઈ પથ્થર હવે,
પાછા ફરવાની કશી યે આશ પણ નથી રહી.

આગમાં વિરહની, રોજ અમે તો બળતાં રહ્યાં,
રોમેરોમ બળ્યાં "વ્યોમ" બસ રાખ વધી અહીં.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

“क़ीमत”

बेटी पैदा होते ही
घाटे का सौदा मान ली जाती है।

पापा के सपने
EMI में बदल जाते हैं,
माँ की चुप्पी
सौदे की रसीद बन जाती है।

लड़की नहीं पूछी जाती,
बस सामान गिना जाता है
सोफ़ा, सोना, नक़द…
और बीच में
एक ज़िंदा इंसान।

वो जली
तो कहा गया किस्मत थी,
वो चुप रही
तो कहा गया संस्कार।

समाज हाथ मलता है,
आँख नहीं मिलाता,
और अगले घर की बेटी के लिए
फिर वही माँग दोहराता है।

दहेज आग नहीं है,
ये तो
रोज़ की हत्या है
जिसे हम
रिवाज़ कहकर
घर के अंदर छुपा देते हैं।
प्राची गुर्जर

prachitanwar111

हम शरीफ़ घर के लड़के है लाला अगर दिल आज़माना हो तो अकेले आना



और जिगर आज़माना हो तो अपना पूरा खानदान लाना..!

anisroshan324329

یہ مجھ پر گزری ہوئی ایک کیفیت تھی جسے میں نے لفظوں میں ڈھالنے کی کوشش کی ہے پڑھیے ۔

xsarkar333venomgmail.com729902

Good morning fiends.. have a nice day

kattupayas.101947

साधना का अर्थ भागना नहीं,
बल्कि अपने भीतर उतर जाना है।
जहाँ मन शांत हो जाए,
वहीं ईश्वर का वास होता है। 🕉️

🙏🏻हरि ॐ 🙏🏻

janshisaroha503972

जिसके नसीब में तेरे जैसा हमसफ़र हो वो दूसरों के ख़्वाब नहीं देखा करते !

anisroshan324329

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947

राधे.. क्वाबो में जो आते हो रोज़ रोज़ तुम, फिर भी मिलने का मोका छोड़ रहे हो।

कुछ नहीं मुजसे तुम्हें वास्ता कहते हो, फिर भी मेरी फ़िकर हर पल कर रहे हो ॥

anisroshan324329

मैने तुझे बिना देखे
बिना जाने
ये दिल दे दिया
क्योंकि तू धड़कन है
में तेरी जिंदगी

anisroshan324329

वास्तविक सच्चाई यही है कि कोई सुनना नहीं चाहता....💔

abhi006

मुद्दतें हो गयीं... उनसे मुलाकात किये हुए ....
क्या पता कितने रह गये हैं... उनके दिल मे हम ........💔

narayanmahajan.307843