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गीत
इस दर्द में



मुझको पता है दर्द तुमे हो रहा है
पर जरा ठहरो
इस दर्द को संभालो
चिखो यह चिला लो

तुम्हारा जहां में कोई भी नहीं
जो तुम्हें समाले वो कोइ पथर भी नही
झुठि है आसे लगाना तु बंन कर
दुनिया जमाना पत्थर से भी है गए गुजरे


इस दर्द में जीना सीख
मरहम की ना तू रख कोई उम्मीद


या तो खुद को संभाल
थोड़ी सी खुद को बचा

दुनिया है जालिम कोई ना सुने गा तेरी चिखे
तु चाहे कितना भी चिख चिला लो



फर्क किसको है पड़ता
तु दर्द मे खुद की ही मरता

दर्द में जिंदगी हो जाए
ऐसा लगे कि सांसे आखरी हो जाए
फिर भी तू आहें भर



चाहे जिंदगी हो जहर
फिर भी तू जग से थोड़ी और लड़

जीना ना सिख सके गी किया
थोड़ी हौसला अपना बड़ा
थोड़ी देर और चिख चिला कर अपनी मौत को टाल
खुद को अपना बना
कुछ देर और खुद को गले से लगा



मुझको पता है दर्द तुमको हो रहा है
सिने में दिल ठहेर नहीं रहा
बस दिन गुजार रहा है
जिंदगी चल नही रहा

बस तरपते हुए लमहा कट रहा है

2


तो क्या
फिर भी तुम्हें आगे देखना होगा
अपने कदमे बढ़ाना होगा


पलकों पर कुछ तो होगा
कोई ख्वाब तो लगा होगा
जरा उट उन्हें सच करने के लिए चल


मुझको पता है दर्द तुमे हो रहा है
पर जरा ठहरो
इस दर्द को संभालो
चिखो यह चिला लो


राहे तुम्हारी है सपना तुम्हारा
सच करना है या ना यह इरादा तुम्हारा
आगे बढ़ाना है या ना यह हौसला भी तुम्हारा


फिर देख जरा खुद को
क्या हाल बना रखा खुद का

उतरा हुआ चेहरा टूटे हुए शिशे मे है दिख रहा
देख लिया है खुद को तो रो ले

चीख और चिल्ला ले
तू खुद को गले लगा ले
तू और खुद को गले लगा ले

तुझको कोई ना प्यार करने वाले तू
खुद को गले लगा ले
इस बात के लिए तू खुद को समझने

खुद से प्यार जाता
तू खुद को अपना बना ले
चिख और चिल्ला ले
खुद को गले लगा ले

abhinisha

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ronakjoshi2191

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

परियों सी अहाते में खिलखिलाके डोलतीं,
कुछ बोलतीं तो खूब तोतला के बोलतीं,
थोड़ी बड़ी होतीं तो बड़ा ख्याल ये करतीं,
पापा की तो हर वक्त देख भाल ये करतीं,
मम्मी की मदद शौक से करतीं हैं बेटियाँ,
माँ - बाप को आनंद से भरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरती हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

पढ़तीं हैं तो ये और मन लगा के हैं पढ़तीं,
धीरे से सफलता की सीढ़ियों पे हैं चढ़तीं,
सेना में ये जातीं हैं एवरेस्ट पे जातीं,
स्पेस यान और वायुयान उड़ातीं,
बेटों सा कीर्तिमान भी गढ़तीं हैं बेटियाँ,
सपनों में रंग बाप के भरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

परिवार की प्यारी सी दुलारी सी ये होतीं,
भईया के लिए राजकुमारी सी ये होतीं,
वैसे तो ये माता - पिता का मान बढ़ातीं,
कुछ बन गईं विजय तो स्वाभिमान बढ़ातीं,
हँसते हुए लड़तीं हैं झगड़तीं हैं बेटियाँ,
आकाश में किरणों सी उभरतीं हैं बेटियाँ,

जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।

सर्वाधिकार सुरक्षित
✒️✒️---©️--®️ डाॅ. विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

लड़कियो ...
नीम के पत्ते और अनार की छाल भैंस के दूध में उबालकर खाली पेट पीने से यह भ्रम दूर हो जाता है..

कि मैं बहुत सुंदर हूं..

anisroshan324329

"जो सुबह छूट गया, उसे शाम पकड़ लेती है।"

Dharmendra Kumar

erdharmendra

The first chapter of my novel Specialz is out!!!

Read Now :)

md.ahadsillyhare615444

हवा की तरह कुछ लोग आते हैं…
और राख की तरह ख़ामोशी छोड़कर चले जाते हैं। 🍂
कुछ रुख़सतियाँ आवाज़ नहीं करतीं, बस दिल में एक सन्नाटा छोड़ जाती हैं।

— सुदर्शन पांडेय ‘नमन’

sudarshanpandeynaman443445

"पहरे"

यह कहानी किसी घर या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन अनकही भावनाओं का एक आईना है जो अक्सर हम जाने-अनजाने में अनदेखा कर देते है इसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करना है।"

​शीतल एक ऐसे परिवार में जन्मी थी जहाँ बेटी से ज्यादा बेटे को मान दिया जाता है। परिवार कुछ रूढ़िवादी सोच के दायरे में सिमटा हुआ था।
​
शीतल का आज 12वीं कक्षा का रिजल्ट आया। वह अच्छे अंकों से पास हुई थी। अपनी ऑनलाइन आई मार्कशीट और चेहरे पर एक सुकून व मेहनत की मुस्कान लिए वह भागती हुई आई और चहकते हुए अपने पिता से बोली, "पापा, मैं पास हो गई!" उसने मार्कशीट पापा की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "पापा, अब मुझे भी भाई की तरह बाहर बड़े कॉलेज में पढ़ना है।" पापा उसकी बात पर मुस्कुरा दिए और 'हाँ-हाँ' बोलते हुए उसके अंक देखने लगे।

​आगे पापा कुछ कहते, उससे पहले ही दादी थोड़ा चिढ़कर और तंज भरे रवैये से बीच में ही बोल पड़ीं, "तुम बाहर पढ़कर क्या करोगी? कौन सा तुमको इस घर में रहना है या हमें तुम्हारी कमाई मिलनी है?" जिस कमरे में अभी हँसी गूँज रही थी, वहाँ सन्नाटा पसर गया। शीतल के चेहरे की मुस्कान एक पल में खत्म हो गई। उसकी मासूम आँखें पापा और मम्मी की तरफ देखने लगीं और वह मन ही मन सोचने लगी कि क्या पापा-मम्मी भी वैसे ही उसकी साइड लेंगे जैसे भाई की लेते हैं?

​मम्मी, जो पास में ही रोजमर्रा के काम में लगी थीं, वह अपनी बेटी की सफलता पर खुश तो थीं, लेकिन काम में उलझी हुई ही उन्होंने बिना कुछ बोले दादी की बात का समर्थन कर दिया। शीतल अंदर ही अंदर दुखी हो गई और भागकर अपने कमरे में चली गई और खुद को अंदर बंद कर लिया। वह सोचती रही कि कैसे सब भाई की साइड लेते हैं, उसकी नहीं; कैसे उसकी जीत महज बस उसकी होती है और भाई की जीत पूरे परिवार की! यह वह अनछुआ अहसास होता है जो परिवार वाले समझकर भी इस बात से
पर्दा डाल देते हैं कि 'बेटी हो'।
​
शीतल पूरे दिन कमरे से बाहर नहीं आई और अपने ही ख्यालों से अकेले लड़ती रही। शाम के वक्त जब सब चाय पी रहे थे, तो पापा ने शीतल को बुलाया। शीतल, जो कुछ वक्त पहले खुश थी, अब उसके चेहरे पर एक गहरी उदासी थी और मन में अनगिनत सवाल। पापा ने शीतल की तरफ चाय का कप बढ़ाते हुए कहा, "शीतल, कॉलेज के लिए देखेंगे, तुम उदास मत हो।"

​शीतल कुछ कहती, इससे पहले मम्मी ही बोल पड़ीं, "सुनिए जी, हमारे पास अभी एक और इतना बड़ा खर्चा उठाने की गुंजाइश नहीं है और अगले साल इसकी शादी करनी है। अम्मा ठीक कह रही हैं, हम इसको पढ़ने के लिए मना नहीं कर रहे, बस इसी शहर में ही एडमिशन ले ले। हम कौन सा इसके दुश्मन हैं?" मम्मी ने शीतल के सिर पर प्यार से हाथ रखकर कहा, "बेटी, तुम तो समझदार हो।"

​शीतल का जैसे दिल के साथ भरोसा ही टूट गया। वह अपनी मम्मी की आँखों में देखने लगी और सोचने लगी—क्या मम्मी और दादी को इस बात का अहसास भी है कि वे खुद उस पहरे की पहली सीढ़ी बन रही हैं? जिसे समाज पुरुष-प्रधान कहता है और लोग कहते हैं कि घर के पुरुषों को यह पसंद नहीं है, लेकिन वास्तव में घर की औरतें ही घर की औरतों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सबसे पहले पहरे लगाती हैं।
​
वह सोचने लगी कि कैसे लोग कहते हैं कि घर के मर्द औरतों पर पहरे लगाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि घर की औरतें ही घर की औरतों पर पहरे लगाती हैं—कभी जिम्मेदारी के नाम पर तो कभी रिवायतों के नाम पर।

​एक एहसास
हमें खुद से, अपने घर की औरतों से और समाज से यह पूछना चाहिए कि जाने-अनजाने में कहीं वे किसी और औरत के सपनों पर पहरे तो नहीं लगा रही हैं?

☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

"पहाड़ों में नदियाँ ज़िग-ज़ैग बहती हैं। तब समझ आया कि प्रकृति सबसे छोटा रास्ता नहीं, सबसे सुरक्षित रास्ता चुनती है।"

Very Good afternoon
Dharmendra Kumar

erdharmendra

Time for Sunday lunch. Enjoy with family and friends. just 4 fun

kattupayas.101947

"प्रेम में गिरा नहीं जाता, प्रेम में उठा जाता है, जो गिराता है वह मोह है।"

Good morning
Dharmendra Kumar

erdharmendra

*Title:*
Khule Aasman Ke Neeche Baithi Ek Maa - Ek Sacci Kahani

*Category:*
Jeevan Kahani / Samajik / Maa

*Description (Introduction):*
Ye koi kalpana nahi, meri apni aap-beeti hai.
Jammu ki ek thandi Purnima ki raat, jab mera 6 mahine ka bacha mere aangan me so raha tha, aur main khule aasman ke neeche baith kar ye diary likh rahi thi.
Jiske liye maine apna sab kuch chod diya, aaj wahi shakhs mere aur mere bache ke khilaaf khada hai.
Ye kahani hai ek maa ki himmat ki, jo apne bache ke future ke liye insaaf ki ladai lad rahi hai.
Agar aap bhi ek maa hain, toh ye kahani aapke dil ko chhoo jayegi.

*Tags:*
#maa #jammu #purnima #realstory #struggle #motherhood #insaaf #ekmaakikalamse #momandbaby

pd708672gmail.com358285

નાનપણમાં સ્વજનોના
ખોટા સ્નેહને પણ સાચો સમજતા હતા.

​પણ હવે પોતાના ઓની,
થોડીક ઔપચારિક સંભાળ પણ,
સાવ ખોખલી ને નિરર્થક લાગે છે.

​છતાંય, બધું જ જ્યારે
આટલું સ્પષ્ટ સમજાઈ જાય છે,
ત્યારે એ સત્ય પણ ક્યાં.....
ક્યારેક મન ને ગમે છે?

ઢમક

heenagopiyani.493689

jai jagannath

skptech

प्रकृति और किसान

​टूटी उम्मीद और सूना आँगन

​"हम बारिश का इंतज़ार चाय और सुकून के लिए करते हैं, लेकिन एक किसान के लिए यही बारिश उसके पूरे साल के सपनों की डोर होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब वही उम्मीद टूटती है, तो एक भरा-पूरा आँगन कैसे सूना हो जाता है? आइए, आज उस किसान के संघर्ष को महसूस करते हैं, जिसकी दुनिया मिट्टी और मौसम के बीच कहीं खो गई।”

​वैसे तो आज कल लगभग सभी गाँव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे बुंदेलखंड का हाल एक अलग ही दर्द भरी कहानी कहता है। आषाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में जो पहली बारिश होती है, वह तपती धूप और पिघला देने वाली गर्मी से न सिर्फ राहत देती है, बल्कि यहाँ के किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण बन कर आती है।
​बड़े-बड़े शहरों में बारिश बस गर्मी से आजादी, कहीं अच्छी जगह घूमने या चाय के साथ गरमा-गरम भजिये की वजह बनती है, तो दूसरी तरफ किसानों के लिए उनके जीवन-यापन और सभी छोटे-बड़े सपने सच करने की उम्मीद।
​कैलाश काका बैठक में बैठे बाहर से आती बारिश की मन को छू लेने वाली आवाज़, साथ ही तेज़ सर-सर की करती हवा जो बैठक की खिड़की से कैलाश काका को छू कर जा रही थी और साथ ही काका के सपनों को उम्मीद दे रही थी। काका के चेहरे की झुर्रियां जैसे खुशमन के आगे कम हो गई थीं और आँखों में पोती की ब्याह और पोते को पढ़ाई के लिए बड़े शहर भेजने के सपने चमक रहे थे। वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में खनन (mining) के लिए बड़ी-बड़ी क्रशर मशीनें लगाई जा रही थीं।
​बारिश के थमते ही काका ने खेत में बुवाई शुरू कर दी। कैलाश काका ने बुवाई ही नहीं, खेत की ज़मीन में अपने सपने, मेहनत और एक-एक कर जमा की गई पूंजी भी बीज के साथ खेत में बो दी थी (शायद सभी किसान यही करते हैं)। इस उम्मीद में कि जब फसल कट कर घर के आँगन में आएगी तो न सिर्फ आँगन, बल्कि उनका जीवन भी खुशियों से भर जाएगा। साथ ही कैलाश काका को धीरे-धीरे चिंता सताने लगी थी क्रशर मशीन की खड़-खड़ करती आवाज़ के साथ सफ़ेद उड़ती हुई धूल, जो फसल, पेड़-पौधे, ज़मीन, पानी और साथ में लोगों के स्वास्थ्य पर भी सफ़ेद चादर बन कर बिछ रही थी, जो धीरे-धीरे सब को अपने आगोश में लेकर सब कुछ खत्म करने का काम कर रही थी।
​देखते ही देखते, क्वार (सितंबर-अक्टूबर) का महीना आ गया। बुंदेलखंड के किसानों और उनकी खरीफ की फसलों के लिए यह महीना किसी सांस रोक देने वाले इम्तिहान जैसा होता है। हर कोई बस यही दुआ करता है कि आसमान साफ़ रहे। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। क्वार की एक काली, भयानक रात अपने साथ बेहिसाब और तेज़ बेमौसम बारिश लेकर आई।
​उस बारिश के साथ कैलाश काका की फसल ही बर्बाद नहीं हुई, उनका सब कुछ बर्बाद हो गया—उनके सपने, मेहनत और जमा पूंजी भी (अक्सर किसानों के साथ ऐसा ही होता है)। पीछे छोड़ गया तो गिरता हुआ स्वास्थ्य, टूटे सपने और बैंक का कर्ज़ा, जो किसानों के लिए किसी बड़ी समस्या से कम नहीं होता, जिसको चुकाने के लिए किसान जाने क्या-क्या करते हैं।
​ऐसे ही बैंक के कर्ज़ को चुकाने और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए कैलाश काका के परिवार को बड़े शहर जाकर मज़दूरी करने के लिए जाना पड़ा। जिस आँगन में कैलाश काका हरी-भरी फसल रखने, पोती की बारात लाने के सपने देख रहे थे, अब वह आँगन हमेशा के लिए सूना हो गया था।
​एक एहसास
​खनन (mining), ये शब्द पढ़ने में बहुत छोटा है लेकिन असल में इसका मतलब बहुत बड़ा है—जो हरे-भरे पेड़-पौधों, जीवन और ज़मीन को बंजर बना देता है। ऐसे ही बेमौसम बारिश, जो किसानों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होती।
​कभी-कभी सोचती हूँ, हमने प्रकृति और किसानों के साथ कितना अन्याय किया है।
☆अनामकारा

anamcara397gmail.com353208

सितारों से भरी हुई रातें पसंद है…
बेवजह की हुई उसकी बातें पसंद है…
तारीफ़ के क़ाबिल है उसके बाल भी पर,
मुझे ज़्यादा उसकी आँखें पसंद है।। 👀❣️

shivamdhuriya291955

एक ख़ूबसूरत अनकही दास्तान एक लड़की को जो गुज़र रही है शक से, अपनों के रूखेपन से, नई राहों से, धोखेबाज़ी से, दुनिया की सच्चाई से, अनकही मुहब्बत से, और ज़िंदगी से जुड़े मामूल कर्ब से।
और रास्तों में मिले नए रिश्ते।
कई सवाल हैं -
कई राहें हैं -
कई जुस्तुजू है -
जिसे उसे ख़ुद हल करना है।
लेकिन वो कई मोड पर अपने आप में उलझती जा रही है।

वो अपनी राह कैसे चुनेगी?
ख़ुद को कैसे सुलझाएगी?
और जुस्तुजू को कैसे हल करेगी?

https://www.matrubharti.com/novels/67955/dastan-e-karb-by-n-a
A novel by Azoorey.
DASTAN-E-KARB भ्रम से परे क्या है?

Aaplog novel padhie aur achi लगे तो apne reviews दीजिए।...

na achi लगे तो bad reveiws bhi chalenge ✌️😁

"जीत के लिए हार ज़रूरी है"

bulab1904gmail.com508096

तुमसे करीब और कौन है मेरे
तुम छू दो तो रूह तक को दवा मिल जाती है💞

narayanmahajan.307843

एक दिल है जो तेरी तरफ़ भागता है
और एक हक़ीक़त है जो तेरे पास आने नहीं देती ❤️

narayanmahajan.307843

Good evening friends have a nice time

kattupayas.101947

सादगी सुंदर है
जैसे बिंदिया में तुम

anisroshan324329

आदमी मुसाफ़िर है …. Aadami Musafir Hai …. Live

This philosophical song is much famous and loved among Hindi Film Music lovers. It was regularly broadcast on Vividh Bharati and telecast on Doordarshan in programmes featuring Film songs like Rangoli and Chitrahar ….
Here it is presented by ….

Singer: Vanita Thakkar
Recorded Live on StarMaker on 23rd September, 2026 ….

I had sung this song at the Karaoke programme in Club Mahindra Resort, Shimla in May, 2017 and the Fun Zone executives who had conducted the event gifted a beautiful local wooden show piece, which had written on it - “Gift of Shimla” and “Love me Less, but Love me Long” as a mark of appreciation from the Resort and the audience 😊😊

- Vanita Thakkar (Omkaar Swar Vihar)

Original by ….
Singer : Lata Mageshkar and Muhammad Rafi
Music Director : Laxmikant Pyarelal
Lyrics : Anand Bakshi
Film : Apanapan (1974)

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आदमी मुसाफ़िर है-Aadami Musafir Hai-Live|Singer: Vanita Thakkar|Original: Lata-Rafi L-P Anand Bakshi
https://youtu.be/VjQAsMFN7KE

vanitathakkar

Government Eye-Care Initiatives: Taking Eye Care Closer to Communities
Eye health is an important part of public healthcare, and India’s government health system has programmes aimed at preventing avoidable vision loss and improving access to eye-care services.
Under the National Programme for Control of Blindness & Visual Impairment (NPCBVI), eye-care efforts include areas such as vision screening, refractive-error correction, cataract care and referral for ophthalmic services. Primary eye-care services have also been integrated into Ayushman Arogya Mandirs in many states.
For communities, especially those where access to specialist eye care may be limited, screening and timely referral can play an important role in identifying eye problems before they lead to avoidable vision loss.
Dr. Anchal Gupta says:
“Eye care should not begin only when a person notices a vision problem. Awareness, regular screening and timely referral can help people access the right care at the right time.”
Government programmes, healthcare professionals and community-level awareness efforts can work together to make eye care more accessible and encourage people to take their vision seriously.
The message is simple:
Regular eye care is not a luxury — it is an important part of overall health.
— Dr. Anchal Gupta
Eye Health Awareness Message
This is a general public-health awareness message and not a substitute for individual medical advice.

bhumikabhati.662947