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New bites

હોય સાંજ મજાની એક,
ઝરમર વરસતો વરસાદ,
ને હાથમાં હોય ચાનો કપ.
સાથ હોય એક સુંદર પુસ્તકનો,
પસાર થઈ જાય ક્યાં
કલાકોનાં કલાકો આમ!

s13jyahoo.co.uk3258

भगवान श्री राम जी की असीम कृपा से आज मुझे एक और सम्मान पत्र प्रदान किया गया है तथा अतिथि वक्ता के रूप में आभारी पटल पर संगोष्ठी में आमंत्रित किया गया है।

*सभी सम्माननीय सदस्यों को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि "श्री राम और सामाजिक समरसता"विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 13/5/26 और 14/5/26 को किया जा रहा है।

प्रस्तावित नामों के अनुसार क्रमशः वक्ता उक्त विषय पर निर्धारित पांच मिनट में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। दो दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी का समय सांय 7: 30 रहेगा।

प्रथम दिवस 13/5/26 वक्ता रहेंगे -

1 -डॉ राजेश तिवारी मक्खन झांसी, उ प्र

2- दीप्ति गुर्जर

3-डॉ शिव प्रताप सिंह भदौरिया म प्र

4डॉ करु लाल जामदा

5-दीपल सिंह भदौरिया म प्र

6- दिलीप कर्पे म प्र

7- राजीव नामदेव राना लिधौरी टीकमगढ

8-डॉ सरोज गुप्ता, कोंच, उप्र

आभार

rajeevnamdeoranalidhori247627

सब पढ़ाया गया हमे...

त्रिकोण, चोकोण, लघुकोण, समको परंतु जो जीवन में सबसे उपयोगी था नही पढ़ाया गया... ।'

दृष्टिकोण ...।

anisroshan324329

उसकी फरमाईश मुझसे
महोब्बत भरी सांझ चाहिए

चाँद चाहिए
आफताब चाहिए

सितारों की जगमगाहट
जुगनुओं की टिमटिमाहट चाहिए

और लाकर रख दो
तमाम नूर मेरे आसपास

और मैं एक सच्चा आशिक
उसकी फरमाईश पे तथास्तु कहता गया

ferojkhan.536289

Person who can't control his words shows that he cannot control himself, and is unworthy of respect .🤐🤐

jadhavkshitija

“प्रेम में प्रतीक्षा करना सब के बस की बात नहीं;
इसके लिए बहुत साहस चाहिए,
जो केवल एक सच्चे प्रेमी के पास होता है।
निस्वार्थ भाव से
किसी की राह देखना
कोई खेल नहीं है।”
राधे राधे 🌸

parmarsantok136152

#ওরা_ককরোচ

ওরা ককরোচ।
যাদের দেখে নাক সিঁটকায় সভ্য সমাজ,
দেখলেই যাদের পিষে মারতে চায়
চটির তলায়, বুটের তলায়,
ক্ষমতার অহঙ্কারে।

ওরা ককরোচ।
দেয়ালের ফাটলে বেঁচে থাকে,
পচা নর্দমার গন্ধে টিকে থাকে,
ক্ষুধার সঙ্গে সন্ধি করে,
অপমানের সঙ্গে সহবাস করে।

তুমি ওদের ঘৃণা করো -
কারণ ওদের চোখে তোমার সভ্যতার
মেকি মুখোশটা ধরা পড়ে যায়।

ওরা সভায় বসে বক্তৃতা দেয় না,
টেলিভিশনের স্টুডিওতে আলো খায় না,
সংবিধানের ভাষাও জানে না ঠিকঠাক -
তবুও শহরের প্রতিটি ধুলোয়,
কারখানার প্রতিটি মরিচায়,
বেকার যুবকের প্রতিটি দীর্ঘশ্বাসে
ওরা ছড়িয়ে থাকে নিঃশব্দে।

ওদের কেউ সম্মান দেয় না।
কারণ সম্মান সবসময় সাজানো ড্রয়িংরুমে জন্মায়,
রান্নাঘরের অন্ধকার কোণে নয়।

তবুও একটা কথা মনে রেখো -
আগুন লাগলে প্রথমে ইঁদুর পালায়,
তারপর ভদ্রলোকেরা।
কিন্তু ককরোচ ?
ওরা শেষ মুহূর্ত পর্যন্ত টিকে থাকে।

কারণ ওরা জানে -
এই পৃথিবী কখনোই ওদের জন্য নরম ছিল না।

তাই এখন ককরোচরা জেগে উঠছে।
চুপচাপ নয়,
নিজেদের নাম নিয়েই।

যাদের এতদিন ঘৃণা করা হয়েছে,
আজ তারাই রূপক হয়ে ফিরে আসছে -
প্রতিবাদের নতুন ভাষা হয়ে।

krishnadebnath709104

चुटकुला

rammake323039

જીતનો સિક્કો

​એક જ ઘામાં સદીઓનો એ વસવસો મટી જશે,
જ્યારે જીતનો સિક્કો વાગશે, ત્યારે આખો ઇતિહાસ પલટી જશે.
​વર્ષોથી એક એવી જીતની રાહ છે,
દિલમાં છુપાયેલી બસ એ જ એક ચાહ છે,
જે વર્ષોની દરેક હારનો હિસાબ ચુકાવી દે,
આજ સુધી વેઠેલી બધી તકલીફ ભુલાવી દે.
​भલે વાર લાગે, પણ એ જીતનો નશો ભારે હશે,
જેના તારા ડૂબ્યા હતા, એનું આખું આભ મુઠ્ઠીમાં હશે,
જ્યારે સફળતાનો સૂરજ ઉગશે, ત્યારે આ અંધારું શમી જશે.
હીના. ગોપીયાણી (DHAMAK)

heenagopiyani.493689

मायके में पति की बुराई करना—क्या वाकई समझदारी है?
शादी के बाद हम अक्सर अपने मायके को अपना 'सेफ ज़ोन' मान लेते हैं। जब पति से अनबन होती है या उनकी कोई आदत खटकती है, तो दिल का बोझ हल्का करने के लिए हम सीधे मायके का रुख करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पति की दस कमियां गिनाकर आप क्या खो रही हैं?
1. आप अपने रिश्ते की नींव कमजोर कर रही हैं:
जब आप मायके में पति की बुराई करती हैं, तो आपके माता-पिता या भाई-बहन उनके प्रति एक नकारात्मक छवि बना लेते हैं। कल को जब पति-पत्नी के बीच सब कुछ ठीक हो जाएगा, तब भी आपके मायके वालों के मन में पति के लिए वह कड़वाहट रह जाएगी। वे उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएंगे, जबकि आप उन्हें माफ कर चुकी होंगी।
2. खुद की कमी निकालने का अवसर:
यह मानवीय स्वभाव है कि जब आप किसी की बुराई करती हैं, तो सामने वाला आपकी कमियों पर बात करना शुरू कर देता है। पति की दस कमियां बताने पर, घर वाले यह कह सकते हैं— "तुम्हें ही एडजस्ट करना चाहिए था" या "तुम्हारी भी तो ये गलतियां थीं।" अंत में, आपकी समस्या सुलझने के बजाय, आप पर ही सवाल उठने लगते हैं।
3. इज़्ज़त का गिरना:
लोग अक्सर सोचते हैं कि पति की बुराई करके वे हमदर्दी हासिल कर लेंगी, लेकिन हकीकत यह है कि इससे आपकी अपनी इज़्ज़त कम होती है। एक समझदार महिला वही है जो अपने वैवाहिक जीवन की मर्यादा को घर की चारदीवारी के अंदर ही रखे। आपकी शिकायतें अक्सर लोगों के लिए सिर्फ 'गॉसिप' (चर्चा का विषय) बन जाती हैं।
4. समाधान अंदर है, बाहर नहीं:
याद रखिए, जो कमियां आपके पति में हैं, उन्हें सुलझाने की शक्ति सिर्फ आपमें और आपके पति में है। मायके वाले बाहर से सिर्फ सलाह दे सकते हैं, लेकिन वे आपके साथ घर नहीं बसाएंगे।
निष्कर्ष:
अपने वैवाहिक जीवन के मुद्दों को परिपक्वता के साथ अपने पति के साथ बैठकर सुलझाएं। हर घर में समस्याएं होती हैं, लेकिन जो इन समस्याओं को अपने तक सीमित रखना जानती है, वही अपनी और अपने पति की इज़्ज़त को सुरक्षित रखती है।
याद रखें: आपकी खामोशी कभी-कभी आपको और आपके रिश्ते को किसी भी तर्क-वितर्क से ज्यादा मजबूत बनाती है।
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chanchal1718

आध्यात्मिक दृष्टि से एक बहुत बड़ा गहन सवाल है कि यदि आत्मा शुद्ध ही है फिर आत्मा इस संसार में क्यों है? आत्मा को संसार में बार बार क्यों आना पड़ता है? आइए, इन सभी रहस्यों को पूज्यश्री दीपकभाई से जानते हैं।

Watch here: https://youtu.be/awSDQ_RHx7w

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dadabhagwan1150

🙏🙏मैंने सुना है कि दो कप चाय से वर्षों पूराने दुश्मन भी दोस्त बन सकते हैं।🦚🦚

parmarmayur6557

Good Morning 🌅

harshparmar8722

मुझे मेरे कान्हा से प्रेम है।
ऐसा प्रेम जिसमें शिकायतें भी हैं,
नाराज़गियाँ भी हैं,
पर छोड़कर जाने की चाहत कभी नहीं।
एक ऐसा प्रेम,
जिसमें उसकी आवाज़ सुनते ही
दिल को सुकून मिलने लगता है।
जिसमें उसकी छोटी-छोटी बातें,
“खाना खाया?”
“अपना ध्यान रखना…”
दुआ जैसी लगती हैं।
मुझे नहीं पता
दुनिया इसे क्या नाम देगी,
पर मेरे लिए —
वो सिर्फ मेरा प्रेम नहीं,
मेरी शांति, मेरा विश्वास
और मेरी रूह का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। 💙

parmarsantok136152

सोया है या मर चुका है
वो जो आंख बंद कर चुका है

जायजा तो लो उसकी सांस का कोई
जारी है या मामला सिमट चुका है

अब तो आया सैलाब ही समझो
आंख में पानी उतर चुका है

समेटना है,कोई अपना थैला देगा हमें
ख़्वाब हमारा बिखर चुका है

जो दर्द था कल तक सीने में
अपनी गजलों में उतर चुका है

ferojkhan.536289

जो दहेज मांगते हैं, उन्हें दहेज दीजिए... बेटी नहीं!
अक्सर लोग कहते हैं कि अच्छा घर-परिवार देखकर बेटी की शादी कर देनी चाहिए। लेकिन क्या कभी हमने गौर किया है कि जो लोग शादी के मंडप में बेटी की नहीं, बल्कि अपनी 'कीमत' और 'दहेज' की बात करते हैं, वे क्या वाकई एक 'अच्छा परिवार' हो सकते हैं?
समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी दहेज को अपना अधिकार समझता है। उन लोगों को मेरा सीधा संदेश है— "यदि आप दहेज मांगते हैं, तो कृपया दहेज ही स्वीकार करें, बेटी की मांग न करें।" क्योंकि जिस बेटी को आपने पैसों से तौल दिया, उस बेटी का मोल आप कभी नहीं समझ पाएंगे।
सच तो यह है कि बेटी की कोई कीमत नहीं होती। वह अनमोल है, लेकिन जो लोग उसकी कीमत लगाने की हिम्मत करते हैं, वास्तव में उनमें उस बेटी की गरिमा को संभालने की 'हैसियत' ही नहीं होती।
कई बार माता-पिता सिर्फ 'स्टेटस' और 'दिखावे' के चक्कर में अपनी बेटी को दहेज लोभियों के हवाले कर देते हैं। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि जिन्होंने पहले ही दिन पैसों से आपकी और आपकी बेटी की 'औकात' तय कर दी है, वे उम्र भर आपकी बेटी को सम्मान क्या खाक देंगे?
दहेज सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि यह आपकी बेटी के आत्म-सम्मान पर लगा पहला प्रहार है। जो इंसान अपनी बहू को लाने के लिए बोली लगाता है, वह उसे कभी 'बहू' का दर्जा नहीं दे सकता, वह उसे सिर्फ एक 'सामान' की तरह ही समझेगा।
वक्त आ गया है कि हम 'अच्छा रिश्ता' ढूंढना बंद करें और 'अच्छे इंसान' को पहचानना शुरू करें। याद रखिए, जिस घर में बेटी की कीमत नहीं, वहाँ बेटी का भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता।

दहेज बंद करें, बेटी बचाएं।
"जो पैसों से रिश्ता जोड़ते हैं, वो बेटी की कद्र क्या जानेंगे?"

#SayNoToDowry #BetiBachao #SocialIssues #RespectWomen #StopDowry #IndianSociety #RealityCheck #Empowerment #HindiVichar #Matrubharti

chanchal1718

क्या सिर्फ नारों से सजेगी बेटियों की शिक्षा की राह?
सरकार का नारा है—'बेटी पढ़ाओ, देश बचाओ'। सुनने में यह बहुत सुकून देने वाला लगता है, लेकिन क्या किसी ने उस मध्यम और गरीब परिवार के घर की स्थिति देखी है जहाँ दो वक्त की रोटी कमाना ही सबसे बड़ी चुनौती हो?

हम सबको पता है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था किस पायदान पर खड़ी है। ऐसे में जब माता-पिता अपनी बेटी का भविष्य संवारने के लिए प्राइवेट स्कूल की तरफ देखते हैं, तो वहां की फीस इतनी ज्यादा है कि वह शिक्षा नहीं, बल्कि एक 'मुनाफा कमाने वाला व्यापार' लगने लगता है।

सच तो यह है कि आधी आबादी आज भी बुनियादी जरूरतों (रोटी-कपड़ा-मकान) के लिए संघर्ष कर रही है। जब किसी बाप की जेब में बेटी की फीस भरने के लिए पैसे नहीं होते, तो उसकी आँखों का वह सपना वहीं दम तोड़ देता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा का अधिकार वाकई 'मुफ्त और अनिवार्य' है? या यह सिर्फ कागजों पर चलने वाली एक योजना बनकर रह गई है?

नारे लगाने से देश नहीं बदलता, देश तब बदलेगा जब हर बेटी के लिए शिक्षा का दरवाजा सिर्फ उसकी काबिलियत से खुलेगा, न कि उसके पिता की जेब की गहराई से।
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chanchal1718

खामोश समझौते : एक आदत .....

अब तो मुस्कुराने की आदत डाल ली है हमने,
हर एक गम को छुपाने की आदत डाल ली है हमने।

तुम मुतमईन रहो, ये आंसू अब नज़र नहीं आएंगे तुम्हें,
अब खुदको भी झुकाने कीआदत डाल ली हमने ।

जानते हैं ये दिल तड़प पेगा कई मर्तबा,
पर इस दिल को मनाने की आदत डाल ली हमने ।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

बेटी घर का चिराग होती है उसे दहेज़ के साथ अँधेरे नरक में मत भेजो 🥺🥺....

tejendragodara639990

आसमां, मैंने तारों की गिनती पूरी कर ली
मगर नीदें अपनी अधुरी कर ली

किरदारों को हमने बहुत दुआयें भेजी
एक कहानी जो आज पूरी कर ली

आंखों में जम चुके आँसूं
ये खुद की हालत कैसी करली

दुख दर्द पे प्यार लुटाऊँ
आह से चाहत कैसी करली

दरिया ए शहर छोड, सहरा में जा बसे
प्यास और भी गहरी कर ली

ferojkhan.536289

साहिल बनना भी आसान नहीं
कई तुफानों को झेलना पड़ता है।
दरीया सामनें होकर भी लहरों से
मिलनें के लीये तडपना पड़ता है।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

मेरी आरजू को बहारों की तमन्ना थी
हर खुशी उड़ा ले गई हवा
अब क्या रह गई तमन्ना थी

दर्द भी क्या खुब दिया उसमें
हमेशा दिल में दबाकर रखने की तमन्ना थी

आधियों का जोर, है मालुम हमें
इक शमा जलाने की तमन्ना थी

चिराग काफी नहीं घर को
जुगनुओं को घर बुलाने की तमन्ना थी

मैं अपने गम को रोता नहीं मगर
तेरी आंखें नम देखकर
खुद को रुलाने की तमन्ना थी

ferojkhan.536289