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krishana drawing 🎨

kshitijabansode417224

thoughts

anu7801

Radhe Krishna jai jagannath

skptech

वायुमंडल – जीवन का अदृश्य रक्षक

धरती का सुंदर नीला आँचल,
जीवन का सबसे अनमोल संबल।
जिसे न देखा, न छू पाया,
उसने ही हर प्राण बचाया।

वायुमंडल की शीतल छाया,
प्रकृति ने कितना प्रेम लुटाया।
सूर्य की किरणों को संतुलित करता,
हर जीव का जीवन सुरक्षित रखता।

हर साँस में इसकी शक्ति समाई,
इसी ने जीवन की ज्योति जगाई।
पेड़-पौधों का यह सच्चा साथी,
धरती की हरियाली की परिभाषा यही।

यदि वायु दूषित हो जाएगी,
जीवन की धड़कन थम जाएगी।
नदियाँ, पर्वत, वन और खेत,
सब हो जाएँगे एक दिन शेष।

आओ मिलकर प्रण ये लें,
हर दिन एक पौधा हम रोपें।
स्वच्छ हवा का करें सम्मान,
यही है मानव का सच्चा अभियान।

वायुमंडल केवल गैस नहीं,
ईश्वर का अनुपम वरदान है।
जो इसकी रक्षा आज करेगा,
कल उसी का सुरक्षित संसार है।

— SKP Divine Creation 🌿✍️

skptech

🌸मोहब्बत भूल जाते है🌸

गजल

चलो फिर से हम मोहब्बत भूल जाते हैं
न हो परेशॉं मेरी जान, हम धूल हो जाते हैं।

होगी न खबर अब तूमको मेरे होंने का कभी
हम बनके धुँआ हवाओं में, मशगूल हों जाते हैं।

जमाने भर की दस्तक होगी दिल पे तेरे हमदम
हम छोड़ तेरे दहलीज, बहुत दूर हो जाते हैं।

माफ करना मेरे गुस्ताखियों का फेहरिस्त जो भी हो
मेरी वफा ही मेरे , अब शूल हो जाते हैं।

कभी तो आएगी नींद आंखों को सुकून मिलेगा
तुम हरगिज न बदलो, हम ही फिजूल हो जाते हैं।

✍️बेनी सागर

benisagar

🌸कोई रास्ता ही नहीं🌸
ग़ज़ल

कहाँ को जायें ये हंसी कोई रास्ता ही नहीं
हर तरफ़ धुंध है उजालों से वास्ता ही नहीं।

दिल क्या चीज़ है मैं जान भी लुटायूं उसपे
मेरी वफ़ा को मिले शोहरत वो दास्तां ही नहीं।

निगाहें ढूँढें लिए ख़्वाब आरमानों के कई
हो जाये मुकम्मल शौक़ ये रफ़्ता ही नहीं।

हो मेहर कभी तो दिल मिल जाये उनसे
मैं कैसे दर्द बताऊँ हरजाई समझता ही नहीं।

✍️ बेनी सागर

benisagar

કેટલા સમય પછી,
આનંદ મળ્યો મનને,

એવું લાગે કોઈ દી?
હા...હવે ઘણીવાર બને,

ખરેખરની વાત થઈ છે,
એ ભીડમા ખોવાયો છે,
આજે પોતાનેજ મળ્યો છે,

એવુ બને જાણે વરસો પછી,
વરસાદ મળ્યો છે રણને,

શોધતો હતો જગ આખું,
સુખની એક ઝલક માટે,

આંખો બંધ કરી સમજાયું,
એ વસતું હતું મારાં અંતરે..

મનોજ નાવડીયા

manojnavadiya7402

Book Review: काळे-करडे स्ट्रोक्स
______________________________
प्रणव सखदेव लिखित " काळे-करडे स्ट्रोक्स " ही एक आजच्या काळातील कादंबरी आहे. तरूण-वर्गात वापरली जाणारी इंग्रजीयुक्त भाषा हे तिचे वैशिष्ट्य. अगदी मोकळेपणाने ही कादंबरी आपल्याशी बोलते. सर्वसामान्य लेखनाच्या चौकटी मोडून काढत ती पुढे जाते. तरूण वर्गातील काही प्रातिनिधिक पात्रांभोवती ही कथा फिरते. ही कादंबरी आपल्याला खिळवून ठेवते, अस्वस्थ करते आणि पार घुसळून काढते. मुंबईतील रुईया कॉलेज आणि त्याचा सभोवताल हा ह्याचा महत्वाचा घटक आहे.

लेखकाचा आणि कथेच्या नायकाचा हारुकि मुराकामी हा आवडता लेखक आहे, त्यामुळेच या कादंबरीवर त्यांच्या 'नॉर्वेजिअन वूड्स' या पुस्तकाची छाप आहे. तरीही लेखकाने आपली वेगळी शैली आणि भाषा यांचा खुबीने वापर केला आहे.

या कथेत अनेक वळणं येतात, काही अपेक्षित तर काही मुळापासून हादरवून टाकणारे. घडणाऱ्या प्रत्येक घटनेचा कथेवर तसेच कथेचा नायक समीर याच्यावर खूप मोठा परिणाम होतो आणि तो आणखीनच गुरफटत जातो. उदासीनतेची एक वेगळीच छटा त्याच्या आयुष्यावर पसरते. ही कादंबरी वाचताना आपणही अंतर्मुख होऊन जातो. खरंच आपण जेवढं म्हणतो तेवढं आयुष्य सरळ-सोपं असते का? खरंच आयुष्य जितकं आनंदी रंगांमध्ये रंगवले जाते ते सत्य असते की निव्वळ भास ? असे नानाविध प्रश्न आपल्याला भंडावून सोडतात. इथे एक नेहमीपेक्षा पूर्णपणे भिन्न असा दृष्टीकोन अनुभवायला मिळतो. निराशा, उदासीनता, एकटेपणा अश्या विभिन्न भावनांचे हे मिश्रण चांगले जमून आले आहे. मराठी भाषेत पहिल्यांदा असे काही घडते आहे. जर असा वेगळा अनुभव घ्यायचा असेल तर नक्की हे पुस्तक वाचावं.

mandarkulkarni

ગોરલ ને પિયર જવાના ઓરતા,
પરબના પાંચ દી પેલા ઈ ફોરતા,

હૈયે એને મોર પિયરના બોલતા,
હોંશેને ઝટપટ કામ બેવડું કરતા,

હાહું માં નવા કામકાજ ગોતતા,
જાણે ગોરલ પાછા'જ ના ફરતા,

લઈ ઇંઢોણી વાસીદાઓ નાંખતા,
સાથે મનમાંને મનમાં ઈ હરખાતાં,

કૂવે બેનપણીયુ સૌ સાથે હરખાતા,
મલક મલક પાણીડાં શીશીને ભરતાં,

ફરે કંટાળોને આળસ તો આંટા મારતા,
આવા દી'હો'જ્યારે આણંદમાં જ રેતા,

સાંજ પડેને ગોરલ રોજ ઈ મૂંઝાતા,
સપના પિયરના પૂરા થાશે કે થાતા,

પિયુજી તો આગવા ગમમાં ફરતા,
વિચારી સપના એકલાના આગતા,

✍️ગોપાલ સરૈયા

saraiya80gmailcom

निकम्मा इश्क़

जी..जहाँ ,
निकम्मा हूँ ! फ़र्ज़ी हूँ !
तेरे इश्क़ में ,
काब़िल कहा हूँ मैं ?
तेरे पाक दिल के ,
हर दफ़ा, सौ-सौ ज़ज्बातें
तोड़ कर, तुम्हारे पास
अफलातून....,
वापस लौट आता हूँ |
बेशर्म, बेहया बनकर,
भोली-भाली बातों से,
झूठे-मूठे किस्सों से
अजीब-ओ-ग़रीब चश्में लगाकर ,
बनावटी सूरत दिखाकर ,
उल्टे-पुल्टे कारनामों पर
मख़मली मक्खन लगाकर ,
तुम्हें फिर से मनाता हूँ |
बेतुकी कहानी सुनाकर ,
जी-हजूरी करते-करते,
हमेशा-हमेशा तेरा ही
लुभाता हूँ कोमल मन..
फिर भी लायक कहां हूँ मैं !
तुम्हारी अच्छाईयों के आगे
अपने स्वार्थी, ज़िद्दी रवैये से ,
आदत से मज़बूर होकर ,
बन जाता हूँ, लायक से
इक खलनायक मैं ||

-©®- शेखर खराड़ी
तिथि-४/८/२०२६

shekharkharadi6923

એક ફેર ઝઘડો કરવો તે પાંચ હજાર રૂપિયાનું નુકસાન કર્યા બરાબર છે. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/DEpwA1Bd

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dadabhagwan1150

माझ्या आईची आणखी एक ख़ास पाककृती ..
गोळ्या चे सांबार

एक वाटी हरभरा डाळ असेल तर अर्धी वाटी उडीद डाळ व पाव वाटी मसूर डाळ रात्री भिजत घालणे.
सकाळी अत्यंत कमी पाण्यात ही डाळ थोड़े जीरे ,कड़ीपत्ता व मिर्ची घालून वाटुन घेणे
आता या मिश्रणात आपल्या आवडी प्रमाणे तिखट ,मीठ ,गरम मसाला ,हळद,
कोथिम्बिर ,थोड़ी बडीशेप घालुन चांगले एकत्र करावे .
आता फोडणी साठी कढ़ई ठेवणे .
त्यात हिंग मोहरी हळद घालुन फोडणी झाल्यावर त्यात चार ते पाच भांडी पाणी घालावे .या पाण्यात थोड़ी हळद,तिखट व मीठ,आमसूल घालावे
पाणी चांगले उकळले की ग्यास बारीक करावा .
आता ड़ाळ मिश्रणाचे हातावर घेवुन छोटे छोटे गोळे करून त्या या पाण्यात हलकेच सोडत राहावे
गोळे शिजले कि आपोआप वर येतात व हळू हळू रस्सा पण घट्ट होऊ लागतो .
सर्व गोळे वर आले की पाच मिनिटे झाकून ठेवावे
नंतर कोथिंबीर व खोबरे घालून सजवावे .
भाकरी पोळी अथवा भात कशा बरोबर ही हे सांबार मस्त लागते .
नुसते गोळे पण खूपच चविष्ट लागतात .
कधी भाजी नसेल तर हा पर्याय उत्तम आहे .
काही वेळाने सदर सांबार घट्ट होते त्यामुळे प्रथमच आपल्या आवडी नुसार एक दोन वाट्या जास्त पाणी घातले तरी चालते.
(मिश्रण वाटताना जास्त पाणी घातले तर गोळे फुटतील त्यामुळे कमी पाण्यात घट्ट वाटण जरुरी आहे . )

jayvrishaligmailcom

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

चाहतें तो होती हैं सभी की
चाहे अच्छी हो या हो बुरी
चाहने से आख़िर होता क्या हैं
चाहत होनी भी तो चाहिए पूरी

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है 🌹इत्र,

mamtagirishtrivedi740648

कविता
बस देख रही हूं



मुझे किसी से शिकायत नहीं
बस मुझे रोना आ रहा है
मैं जानती हूं कि मेरी जुबान कर्वी है


मैं किसी की कोई काम की नहीं
मैं डायरेक्ट सुनती नहीं
मैं सुनने के साथ सवाल भी करती हूं

यही बात किसी को पसंद नहीं

लोगों को और पेरेंट्स को
वह लोग वह बच्चे पसंद आते हैं
जो बिना सवाल कि उनकी बातें बस सुनता रहें
जो वो कहे वही करता रहे


पर मैं वह नहीं हूं
इसलिए अनदेखा की जा रही हूं
इसीलिए प्यार से दूर हूं


यहां हर चीज में सौदावाजी है
आप अगर उनकी सुनते हैं
तभी आप प्यार की हकदार हैं
तभी आप स्नेह और देखभाल की हकदार हैं



मैं लोगों के लिए किसी काम की नहीं रही
इसीलिए मैं लोगों के दिलों में अपनेपन की हकदार नहीं रखती



क्योंकि मैं एक गुड़िया बिल्कुल नहीं


बड़ी दिलचस्प बात है
खुद को इंसान कहना ही भूल गई
लोगों की बदलती हुई व्यवहार को देखकर




मुझे शिकायत नहीं है
ना ही अफसोस है
लोगों के बदलने पर
या खुद को बचाने की कोशिश करने पर


बस तकलीफ हो रही है
सब कुछ जानकार भी
लगता है काश अनजान राहते


मैं औरों की तरह ही
एक कठपुतली बनी रहती

जो चाहे जैसे ना चाहता
थोड़ा स्नेह तो दिखता





बस मैं देख पा रही हूं
अपनों के बीच में बेगैरत खुद को
कुछ नहीं कहे रही
नहीं सवाल कर रही हूं
नहीं जवाब मांग रही हूं

मैं जानती हूं कोई फायदा नहीं
मेरे चिकने और चिल्लाने से

सब अपने कानों में रूई लगा ली है
मेरी आवाज सुनने से डरे हुए हैं


सब अपने-अपने काम में लगा हुआ है
उनके लिए उनके काम के लोग हैं
उनके अपने हैं
मैं भला बेगैरत मेरी बात कौन सुनता है
अच्छा है की इग्नोर करता फिरें
मेरे दर्द कौन समझता है


सच्चाई मेरी जुबान से भी ज्यादा कर्वी है
और इस सच्चाई को स्वीकार करना दर्दनाक है

और सच्चाई के साथ जीना
घायल दिल पर पत्थर रख देना जैसा है

और अंजान बनने की कोशिश करना
इस पत्थर नुमाऐ भार को और भी बढ़ा देना है






सच्चाई सचमुच में बहुत ही कड़वी होती है
जिसे हम कभी-कभी स्वीकार तो कर लेते हैं
पर
उसके साथ जीना बहुत ही भारी है

abhinisha

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात

जो भी जंतर मंतर की गालीबाज लडकियों को सपोर्ट कर रहे हैं,

भागवान सबके घर में ऐसी ही बेटी, बहू और पत्नी दें.

पर मुझे न दे
सावन सोमवार के व्रत रख लूंगा
पर मुझे न दे

anisroshan324329

https://www.instagram.com/reel/DbkcreKS4QL/?igsh=MWhnYzlzaTV4cXJoYQ==

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

दीप बनो

अँधेरों से मत घबराना,
खुद एक छोटा दीप बन जाना।
राह कठिन हो, काँटे बिछे हों,
फिर भी मुस्कुराकर आगे बढ़ जाना।

जीवन केवल अपना नहीं,
हर धड़कन में संसार बसा है।
जो आँसू किसी के पोंछ सके,
वही इंसान सच्चा बना है।

ज्ञान बाँटो, प्रेम लुटाओ,
सेवा को अपना धर्म बनाओ।
कर्म की राह पर चलते-चलते,
हर दिल में विश्वास जगाओ।

ना धन अमर है, ना वैभव,
ना ऊँचे महलों की पहचान।
अमर वही है इस धरती पर,
जिसने जीता हर एक इंसान।

यदि एक दीप जल सका,
तो लाखों दीप जल जाएँगे।
प्रेम, करुणा और सत्य के पथ पर,
नए सवेरे फिर आएँगे।

चलो ऐसा जीवन जी जाएँ,
जिसे याद करे हर इंसान।
कर्म बने पूजा की माला,
सेवा बने हमारी पहचान।

skptech