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जब हर एक मोड़ पर एहसास होता है,
जिंदगी का असली रूप तब पास होता है।
जो भीड़ में भी अकेलापन सा महसूस हो,
वही इंसान खुद के सबसे ज्यादा पास होता है।
हम दौड़ते हैं रोज एक अनजानी मंजिल की ओर,
सुकून कहीं पीछे छूट जाता है शोर के बीच।
पर जब ठहर कर कोई लम्हा सोचता है इंसान,
तो समझ आता है क्या सचमुच खास होता है।
ये दुनिया रंग बदलती है मौसम की तरह यहाँ,
हर चेहरा यहाँ मुखौटा ओढ़े नजर आता है।
मगर जो पहचान ले खामोशियों की जुबान को,
उसी को हर एक धोखा बेनकाब नजर आता है।
वक्त के समंदर में सब कुछ बह जाता है धीरे-धीरे,
न निशान बचते हैं पैरों के, न कोई कहानी रहती है।
बस रह जाती है तो अपनों की वो यादें पीछे,
जिनका हर एक पल दिल के बहुत पास रहता है।
इसलिए जियो इस तरह कि कोई मलाल न रहे बाकी,
हर साँस को ऐसे मानो जैसे आखिरी हो सौगात।
जब सीने में जाग उठे इंसानियत का जज्बा सच्चा,
तभी समझो कि जीवन का हर एक पल आबाद होता है।

ritukumari509471

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

શરમજનક કે સન્માનજનક?

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ronakjoshi2191

हम हमारी जिंदगी को जिंदगी कहलवाने के लिए क्या नहीं करते... हम पढ़ाई करते हैे, नौकरी करते है, शादी करते है, बच्चे पैदा करते है, उन्हें पढ़ाते है, सबकी जिम्मेदारी निभाते है, सबकी छोटी-छोटी जरुरीयतो का ख्याल रखते है, हम वह सब कुछ करते है जो एक जिंदगी को जिंदगी कहलवाने के लिए काफ़ी है... लेकिन... अंत में फिर भी हम अपनी जिंदगी को जिंदगी बनाने में नाकाम ही रहे... क्योंकि हम दूसरों की जिंदगी की कॉपी करने के चककर में... हम जिंदगी को अपनी जिंदगी में कॉपी करना भूल ही गए...

chitrakshianant734586

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

कविता
बिल्कुल शगुन नहीं है

चारों तरफ बस खामोशी है
और इस खामोशी में अजीब सी शांति है
पर इस अजीब से शांति में कहीं भी बिल्कुल सगुन नहीं है


अजीब है शांति
जिंदगी है
पर जीने का एहसास नहीं है
सांसे चल रही है
पर क्यों दिल में कोई जज्बात नहीं है
दर्द हो रहा है पर कहां यह भी नहीं पता


आंखें नाम नहीं है
बस खाली है
खामोश ठंडी पड़ी हुई
जिसमें किसी से शिकायत भी नहीं है

ऐसा लग रहा है
कि सब कुछ जानकार उठने के बाद
एक नया सवेरा है


जहां कोई नया सूरज नहीं
जहां कोई उम्मीद नहीं
जहां से कोई और रास्ता शुरू ही नहीं होती
जिसका कोई मंजिल ही नहीं
बस एक ठेहराऊ है
अनंत समय के लिए

अपने अंदर की खालीपन को समेटे हुए
एक इंसान सुबह के उस अंनत अंधेरों में बस खड़ा है
बिना कहीं देखे
बिना किसी पर भरोसा किऐ
बस सारे उपेक्षा को खत्म करके बैठा है





अभी कोई पिक्चर नहीं है
बस में हूं और मेरे अंदर शांति है
अजीब सी जिसमें सगुन बिल्कुल नहीं है
जेसै की कुछ नहीं बदलने वाला
चाहे में कितनी भी कोशिश कर लूं
कोई उम्मीद नहीं है
बस ठेहराऊ है मेरे अंदर अनंत काल के लिए

abhinisha

જો દશેરાના ફાફડા- જલેબી ખાધા પછી
તમારા પેટમા બળતરા કે એસીડીટી થાય,
તો સમજી લેવુ કે તમારા ભીતર રહેલો
રાવણ બળી રહ્યો છે. 😜😜🤣🤣

jighnasasolanki210025

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

21/10/2026_Wednesday

I will never change my feelings for you, I love you always and forever.

मैं आपके लिए अपनी भावनाएं कभी नहीं बदलूंगा, मैं आपसे हमेशा और हमेशा के लिए प्यार करता रहूंगा।

kanoparjapati8861

लोग तारीफ कर रहे थे अपनी - अपनी मोहब्बत की..🥲

मैंने नींद का बहाना बनाकर महफ़िल ही छोड़ दी ..!❤️‍🩹

kanoparjapati8861

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है! पंछी

mamtagirishtrivedi740648

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

मोहब्बत छोड़ दी हमने,
अब हम सिर्फ खुद के दीवाने हैं।

kalpanasatav823113

🎉 કાવ્યા 🎊

પિતાના આપેલા વારસાને ગર્વ અપાવતી દીકરી 🎊

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ronakjoshi2191

थारे बगैर...

छोरा...!
थारे बगैर..,
फिक्का पड्या डुंगरपुर, बांसवाड़ा
कदि आवें मने निरखने ,
सूरत, अमदाबाद रोड़ होकर
करस्यूं तने घणो प्यार ,
हिवड़े से रात-दिन ।

तू सरहद ने पार...,
रंगीलों राजस्थानी छोरो
हूं छैल छबीली गुजराती छोरी..,
म्हारा कांगणिया री खनक
तन्ने खूब बुलावें,
आजा म्हारे साजन..
अब दूरी न सुहावै ।।


©®- शेखर खराड़ी
तिथि- २०-१०-२०२६

shekharkharadi6923

​"​हर तरफ यहाँ चेहरे हैं सब अनजान से,
मिलते हैं मगर रहते हैं बहुत बेजान से।
भीड़ में भी दिल को एक तन्हाई सी घेरती है,
जाने ये दुनिया कैसी चालें चलती है।
​हर शख्स यहाँ अपनी ही धुन में खोया है,
लगता है जैसे हर कोई यहाँ कुछ सोया है।
न कोई किसी का यहाँ दर्द पहचानता है,
हर कोई बस खुद को ही यहाँ जानता है।
​इस अनजान सफर में कदमों की है बेबसी,
अपनों की तलाश में बीत रही हर ख़ुशी।

ritukumari509471

जब मैं अपने अंतिम शब्द लिखूंगी तब रिश्तों को बेड़ियाँ.. प्रेम को पाखंड.. सुख को भ्रम... और दुख को सत्य लिखूंगी!! ❤️

ritukumari509471

शिकार करना छोड़ी है साहब,
पर अभी भी हम वही शिकारी है।
होशियारी किया तो बच ना पाओगे,
क्योंकि दहाड़ अभी भी वही पुरानी है।

ashuashu858439