Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
कविता


सब मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
मेरी थकी हुई आंखों को नहीं
सब मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे बेजान परे हुए जिस्मो को नहीं

कहते हैं बाल काटने के बाद
मैं अच्छी नहीं दिख रही
मेरी सुंदरता गायब हो गई है


लोग मेरी सुंदरता को देख रहे हैं
मेरे अंदर चल रही हलचल को नहीं


लोग मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे दर्द को नहीं


देखने का बहुत कुछ है
एक बदले हुए इंसान के अंदर
एक भटकते हुए रुह के अंदर

पर लोग वही देखना चाहते हैं
जो नारी के जिस्म में सजावट के काम करते हैं
काले घने बाल
सुंदर कपड़े सजी हुई चेहरे
पर जो नहीं देखते
रुह का तरपन


नहीं देखते थके हुए जिस्म को
नहीं देखते टूटती हुई हिम्मत को


नहीं देखते अटकती हुई सांसों को
नहीं देखते धक-धक धड़कते हुई धड़कनों को

नहीं देखते उसके कंपन को
जो हजारों उमिद टूट जाने के बाद होती है

जो हर जाने के बाद उठाती है
एक सेहरन सी पूरी बॉडी में
डर गुटन तरफ अकेलापन
हताशा निराशा नाउम्मीद


फिर भी ठेहरते हुए सांस धीरे-धीरे ले रहे हैं
कैसे वह जी रहे हैं

वह नहीं देखते एक इंसान जो चल रहा है
वह अंदर से जिंदा है
डरा हुआ है अकेला है
या कब की मर चुका है


वह कभी नहीं देखते
वह बस देखते हैं
रूप रंग चेहरे
हर ऊपरी बदलाव को
वह मन के अंदर की दुनिया को नहीं देखते

वो देखते हैं इस समाज में चल रही
उन औरतों को
जो खूबसूरती और लंबी वालों को सुंदरया मान चुके हैं



उन्हें नहीं भाता
वो औरतें जो खुद से परेशान होकर
खुद की ही बाल काट देती हैं
राहत पाने के लिए अपनी सर की बोझ थोड़ा कम कर देती है

पर अफसोस वह या नहीं देखते

abhinisha

"ठहरा हुआ पल"

कभी-कभी यूँ ही इंतज़ार अच्छा लगता है,  
जैसे शाम को ढलता सूरज सच्चा लगता है।

ना किसी के आने की जल्दी,  
ना किसी के जाने का डर।  
बस एक ख़ाली कुर्सी,  
एक कप चाय, और थोड़ा सा सब्र।

हवा में कोई आहट ढूँढना,  
दरवाज़े को यूँ ही तकना।  
घड़ी की टिक-टिक सुनना,  
और पलकों को धीरे से झपकना।

ये इंतज़ार मोहब्बत का नहीं,  
ये तो ख़ुद से मिलने का है।  
जो बीत गया उसको शुक्रिया,  
जो आएगा उसपे यकीन रखने का है।

कभी-कभी रुक जाना भी ज़रूरी है,  
भागती दुनिया में ठहरना ज़रूरी है।  
इंतज़ार सज़ा नहीं होता हमेशा,  
कभी-कभी ये दुआ सा लगता है।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

“वो जो आया ही नहीं…..”

इंतज़ार करते-करते अब आदत हो गई है,  
दर्द भी अब इबादत हो गई है।

सुबह उठते ही दरवाज़ा देख लेते हैं,  
शाम ढले फिर खिड़की ताक लेते हैं।  
कोई पूछे किसका इंतज़ार है,  
हम हँस के बात टाल देते हैं।

चिट्ठियाँ अब भी आती हैं,  
पर नाम उसका नहीं होता।  
कदमों की आहट सुनाई देती है,  
पर चेहरा वो ही नहीं होता।

लोग कहते हैं भूल जा,  
हम कहते हैं क्या भूलें?  
जो आया ही नहीं कभी,  
उसको कैसे दिल से निकालें?

अब तो हाल ये है अपना,  
इंतज़ार से ही इश्क़ हो गया।  
जिसके आने की थी उम्मीद,  
ना आने से ही सब्र हो गया।
प्राची गुर्जर……

prachitanwar111

“सफेद बालों वाला इश्क़……”

मुझे पसंद है बुज़ुर्ग जोड़ों को साथ देखना,  
उनकी मोहब्बत से सीखना….. तो उसी पे लिखा है।

मैं देखती हूँ उन्हें कहीं छज्जे पे बैठे,  
वो अख़बार पढ़ते हैं, ये स्वेटर बुनती हैं।  
बीच-बीच में नज़रें मिलती हैं,  
बिन बोले ही सारा दिन गुज़र जाता है।  
कोई शोर नहीं, कोई दिखावा नहीं,  
बस एक कप चाय, दो हिस्सों में बांटी जाती है।

मैं देखती हूँ उन्हें किसी बगीचे में,  
धीमी चाल से, पर क़दम मिलाकर चलते।  
वो लाठी थामे हैं, पर इनका हाथ नहीं छोड़ते,  
ये फूल तोड़ें तो वो मना नहीं करते।  
बेंच पर बैठकर घंटों ख़ामोश रहते,  
फिर भी लगता है बातें हज़ार करते।

मैं देखती हूँ उन्हें ट्रेन के बाद भी,  
स्टेशन पर उतरते ही वो भीड़ में ढूँढते हैं।  
"संभल के" कहना अब आदत हो गई है,  
पचास साल बाद भी फ़िक्र नई सी लगती है।  
वो टिकट रखती हैं, ये पैसे गिनते हैं,  
सफ़र ख़त्म हो, पर हमसफ़र नहीं बदलते हैं।

मैं देखती हूँ उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर,  
वो चढ़ नहीं पाते तो ये हाथ बढ़ाती हैं।  
प्रसाद में पहला निवाला उसे खिलाती हैं,  
दुआ में पहले उसका नाम लगाती हैं।  
लोग कहते हैं इश्क़ जवानी में होता है,  
मैं कहती हूँ इश्क़ तो बुढ़ापे में पूरा होता है।

कभी वो रूठे तो ये चश्मा साफ़ करती हैं,  
कभी ये खाँसे तो वो पानी ले आते हैं।  
ना गुलाब, ना तारीफ़, ना वादे बड़े-बड़े,  
बस एक-दूजे की दवाई वक़्त पे याद दिलाते हैं।

मुझे पसंद है बुज़ुर्ग जोड़ों को साथ देखना,  
क्योंकि उन्होंने सिखाया  मोहब्बत उम्र नहीं देखती,  
मोहब्बत बस निभाना देखती है।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

"બસ, પાંચ કિલો ખાંડ!"
હમણાં મારી ઈશ્વર અને ભાગ્ય પ્રત્યે શ્રદ્ધા ઓચિંતી ઉમટી પડી. આખી જિંદગી god fearing અને pious હોવા છતાં થયું કે દાન ધર્મ કરીએ, કંઇક રાહત મળે, ભગવાન રાહત આપે.
આજે શ્રીમતી બોપલ ભવ્યપાર્ક પાસે મારી જ કોઈ વસ્તુ લેવા ઉભેલ અને હું સાઇડ પર એકટીવા લઇને.
પહેલાં એક સાધન આવતું, light diya and god appears (એટલે એક તકતી પર ભગવાનની અદૃશ્ય છબી હોય, સાથેની દીવીમાં દીવો કરો એટલે ગરમીથી એ તકતી પર ભગવાનની છબી દેખાય.) એમ હવામાંથી કે કોણ જાણે ક્યાંથી એક ડોશી ભિખારણ પ્રગટ થઈ. "મારા વીરા, કાંઈક દાન કર, તારી બધી યાતનાઓ દૂર થઈ જશે" વગેરે કહેવા લાગી. (એને ક્યાં થી ખબર મારા મનમાં શું ચાલી રહ્યું હોઈ શકે? ફેસ રીડિંગ ની પ્રેક્ટિસ?)
હવે ઓચિંતા ધાર્મિક બનેલા મારા ખીસામાં પાકિટ નહીં. બધું યુપીઆઈ થી કરું. એને કહ્યું તો કહે "ભઈલા, સમજું છું. સામેની દુકાનમાંથી કાંઈક અપાવી દે." શ્રીમતી દૂર હતી, દેખાતી ન હતી. મેં કહ્યું બોલ, શું જોઈએ છીએ? તો કહે તું જે આપે એ. મેં કહ્યું એક બે કેરી કે ફ્રૂટ અપાવું? તો કહે ના, ફ્રુટ તો નથી લેવું. એમ કર, મારે પીવા ચા ખાંડ અપાવી દે. એ કરિયાણા વાળો સ્કેન લેશે. ઠીક, મેં કહ્યું ભલે, સો ગ્રામ ખાંડ અપાવું. તો કહે અરે બાપલા, એટલામાં શું થાય? પાંચેક કિલો કરી દે
!!
અમને બે ને પણ મહિને માંડ દોઢ કિલો કે ઓછી જોઈએ.
દાન નો વિચાર માંડી વાળ્યો . મુશ્કેલીઓ તો ઝળુંબે , આર્થિક અને અનેક ભય કે ટેન્શન લેતી આવે પણ એટલે આમ દાન કરવું ન ગમ્યું. ત્યાં શ્રીમતી આવી. મેં કહ્યું આને વીસેક રૂપિયા આપી દે. તો એ કહે બાઈ, સો તો સામાન્ય કહેવાય! Mrs કહે આ ગમે ત્યાંથી ટપકી પડે છે. અમુક ભિખારીઓ આવાં માર્કેટ પ્લેસ, મંદિરો પાસે પેધાં પડ્યાં હોય છે. હાલો, કરો એક્ટિવા સ્ટાર્ટ.
એ બાઈ થી પીછો છોડાવવા ત્રણ વાર મારી એક્ટિવા સાથે જગ્યા બદલી, એ બધે થોડી સેકન્ડમાં આવી ગઇ.
શ્રદ્ધા, દાન થી મુશ્કેલીઓમાં રાહત થશે વગેરે અંધ માન્યતા જેમાં અત્યારે હું પણ આવી ગયો, એ રહેશે ત્યાં સુધી આ ભિખારીઓ નો ધંધો અમર રહેશે. આમાં પણ નેગોશીએશન હશે, જે પાંચ કિલો કહી પાંચસો ગ્રામ પર આવશે?

sunilanjaria081256

“मुझे पसंद है टूटना..."

मुझे पसंद है खिड़की का वो कोना,  
जहाँ धूप आती है, पर रुकती नहीं।  
बस मेरे कंधे को छूकर चली जाती है,  
जैसे कोई पुराना खत पढ़कर रख दिया हो।

मुझे पसंद है अधूरे काम,  
मेज़ पर बिखरी हुई किताब,  
आधा लिखा हुआ कागज़,  
कलम की खुली हुई टोपी।  
बताते हैं कि मैं अभी ज़िंदा हूँ,  
कि अभी कुछ बाकी है।

मुझे पसंद है बारिश के बाद की मिट्टी,  
जो कुछ नहीं बोलती,  
बस साँस लेती है।  
और मैं उसके साथ साँस लेती हूँ।

मुझे पसंद है अपने हाथों को देखना,  
इनमें लकीरें कम, कहानियाँ ज़्यादा हैं।  
कहीं चाय का दाग, कहीं कलम की स्याही,  
सब सबूत हैं कि मैंने जीने में कंजूसी नहीं की।

लोग कहते हैं मैं खोई रहती हूँ,  
मैं कहती हूँ मैं मिली हुई हूँ।  
खुद से, इस पल से, इस सांस से।

मुझे पसंद है टूटना,  
क्योंकि टूटने के बाद ही पता चलता है  
कि मैं कितनी मज़बूत थी।

प्राची गुर्जर …….

prachitanwar111

जिन के पास मां-बाप है वह दुनिया का सबसे अमीर आदमी हैं।🌹🙏🌹

drbhattdamayntih1903

Granny Game Horror Story

. ग्रैनी के परिवार का इतिहासएंजलीना (Angelina): ग्रैनी की एक बेटी थी जिसका नाम एंजलीना था।स्लेंडरीना (Slendrina): एंजलीना की शादी एक वैज्ञानिक (The Coffin Guy) से हुई, जो बाद में खुद एक वैम्पायर बन गया। उन दोनों की एक बेटी हुई, जिसका नाम स्लेंडरीना था (यानी ग्रैनी की पोती)।श्राप और मौत: स्लेंडरीना का पूरा परिवार एक प्राचीन श्राप की वजह से भूतों में बदल गया। कुछ समय बाद, एंजलीना और स्लेंडरीना की रहस्यमयी हालातों में मौत हो गई।

पोती (स्लेंडरीना) की मौत के बाद, उसकी आत्मा ने अपनी दादी (ग्रैनी) को बहुत सारी डार्क पावर्स (भूतिया शक्तियां) दे दीं। इन शक्तियों के कारण ग्रैनी एक क्रूर और अमर भूत (ज़ॉम्बी जैसी जीव) बन गई। ग्रैनी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने मृत पति, ग्रैंडपा (Grandpa) को भी एक ज़ॉम्बी के रूप में जिंदा कर दिया।

किडनैपिंग: ग्रैनी अब एक पुराने, सुनसान और डरावने घर में अकेली (या ग्रैंडपा के साथ) रहती है। रास्ते से गुजरने वाले किसी भी अनजान इंसान (प्लेयर) को वह किडनैप कर लेती है और अपने घर में बंद कर देती है。5 दिनों की मोहलत: ग्रैनी प्लेयर को अपने घर में कैद रखती है। प्लेयर के पास उस घर से भागने के लिए केवल 5 दिन का समय होता है。तेज़ सुनने की शक्ति: ग्रैनी अंधी नहीं है, लेकिन उसके सुनने की क्षमता बहुत तेज है। घर में अगर कोई भी चीज़ (जैसे कोई बर्तन या किताब) नीचे गिरती है, तो ग्रैनी तुरंत उस आवाज को सुनकर वहां पहुंच जाती है और अपने हाथ में मौजूद भारी डंडे (Bat) से मारकर प्लेयर को बेहोश कर देती है。

खतरनाक अंत: अगर प्लेयर 5 दिनों के भीतर घर के मुख्य दरवाजे (Main Door Escape) या कार (Car Escape) के जरिए भागने में असफल रहता है, तो ग्रैनी उसे बेरहमी से मार देती है。

vihanbakshi008153

mere khayalo kiaa gai ue paheli barish
bhgi sadke or pahad fir bhi hum lavarish

naranjijadeja7114

https://hyltonupshon.wixsite.com/creative-edge/post/the-bamboo-water-bottle

Creative Edge 2011 का app आ गया है ।

सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App


https://primetrace.com/group/2308699/post/1189747776?utm_source=android_post_share_web&referral_code=KMM3L&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=SUPER_ADMIN?ref=KMM3L

hyltoncraigupshon.185547

I haved added my 7 short stories as a book. which includes the following stories. available on google play books.
ஸ்னேகாவும் புத்தகமும்
ப்ரவீனும் ஸ்வாமியும்
மதுமிதா வேலைக்கு போகிறாள்
வெயில் காலம்
இருளும ஒளியும்
அந்தி மாலை
சூர்யாவின் கதை

kattupayas.101947

" सुकून की तलाश "


कितने साल बीत गये ए दोस्तों, हमारी बात नहीं हो रही।
जब सजती थी हमारी भी महफिलें वो रात नहीं हो रही।

आज फिर से बचपन जीने की हो रही है तमन्ना दिल में,
पर क्या करें दोस्तों? आप से ही मुलाकात नहीं हो रही।

खो गइ कागज़ की कश्ती, थम गया अब बारिश का पानी,
जो भीगा सके इकठ्ठा हमें ऐसी अब बरसात नहीं हो रही।

कहा था सबने कि जुदा होकर भी मिलेंगे हर मोड़ पर,
मगर मिल सके एक दुसरे से वो इनायत नहीं हो रही।

कमा तो रहे हैं हम सब यहाँ शौहरत और पैसा, ए दोस्त,
मगर जो सुकून दे जाए दिलको वो खैरात नहीं हो रही।

मोबाइल की स्क्रीन पर अक्सर मिलने लगें हैं हम सब,
मगर गले लगकर जो हंस लें, वो कायनात नहीं हो रही।

चाय की वो टपरी आज भी हमारा इंतज़ार करती है,
मगर जहाँ ठहाके गूंजते थे, वो शुरुआत नहीं हो रही।

"व्योम" तन्हाई में अक्सर गुज़रने लगी हैं अब तो रातें,
जो सुबह सुकून देती थी, अब वो सौगात नहीं हो रही।

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

उनको प्यार जताना नहीं आता, लेकिन हर ज़रूरत पूरी करते है।

खुद एक जोड़ी कपड़े में गुजारा करते है, लेकिन मुझे राजकुमारी बना के रखते है ॥

anisroshan324329

उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो; जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;

इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है; इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो..

anisroshan324329

रिश्तों को बचाते-बचाते, खुद से ही दूर हो गए।

जिन लोगों के लिए हम हमेशा खड़े रहे, वही एक दिन हमें तन्हा छोड़ गए। और फिर समझ आया...

हर "अपना"

सिर्फ ज़रूरत तक अपना होता है।

anisroshan324329

असाच एक रविवार....

#एक_fundu_ट्रीप ..😍

पन्हाळा !!

कोल्हापुर पासून अत्यंत जवळ असलेला पन्हाळगड प्रत्येक कोल्हापुर वासी माणसाच्या हृदय्यात मानाचे स्थान राखुन आहे !!
पाउस सुरु व्हायच्या दिवसात पन्हाळा गडावर ढग..उतरतात.तो “नजारा “अप्रतिम असतो .एका वर्षी माझी मैत्रीण
तिच्या कुटुंबां सह कोल्हापूरला आली होती .देवीचे दर्शन तिला घ्यायचे होते .मी तिला सहज पन्हाळा सहल सुचवली .
खरेतर घरच्या एका महत्वाच्या प्रोब्लेम मुळे तिचा अजिबात मूड नव्हता एन्जोय करायचा ...पण माझ्या आग्रहा मुळे ती तयार झाली
जून ..महिन्याचा दुसरा आठवडा होता तो .. अजून सुरवात नव्हती पावसाला .आम्ही पन्हाळ्यात पोचलो थोड फिरायला सुरु केले
तोवर अचानक हवा बदलली आणि सगळीकडचे ढग गोळा व्हायला सुरु झाले ढग आमच्या इतके जवळ होते की अगदी हातात धरावे वाट्त होते !!!!

आणि अचानक झूम झूम पावसाला सुरवात झाली आम्ही पळत पळत एका हॉटेल चा आश्रय घेतला .तिथे मस्त कांदा भजी तयार करीत होते .मग हॉटेल च्या लोबी मध्ये बसून बाहेरचा पाउस एन्जोय करीत आम्ही खमंग कांदा भजी आणि चहा चा आस्वाद घेतला .
हॉटेल उंचावर असल्याने संपूर्ण गडावर पडणारा पाउस दिसत होता .दोन तास आम्ही तो “समा “अक्षरशः एन्जोय केला .
मैत्रीण खुप खुश झाली ..माझ्या चिंतांचा मला खरेच विसर पडला ग ..असे तीने मला बोलून दाखवले .
तशा असंख्य आठवणी आहेत पन्हाळ्या च्या .कोल्हापुरच्या अगदी जवळ असल्याने कधी ही “मूड “झाला की निघतो
आम्ही तिकडे .एखाद दिवशी उठले की चहा घेवून नाश्त्याला पन्हाळ्यात ,तर कधी दुपारचे जेवण घेण्या साठी तिकडे जायचे .
कधी संध्याकाळी डिनर तिथे एखाद्या हॉटेल ला घ्य्यायचे असाही बेत असतो .जानेवारी महिन्या च्या आसपास तिकडे रस्त्यावर
गुऱ्हाळ पण चालू असतात .येता जाता ओळखीच्या लोकांनी बोलावलेल्या गुऱ्हाळात पण जाऊन गरम गुळ ,उसाचा रस मनसोक्त
पिता येतो
तीन दरवाजां जवळ बचत गटातील बायकांनी खाद्य पदार्थांची दुकाने थाटली आहेत
खमंग भजी चमचमीत बटाटे वडा आणि इतर अनेक पदार्थ अत्यंत कमी किमतीत इथे मिळतात
सर्वाचे आकर्षण ठरलेला तेथील जेवणाचा मेन्यू म्हणज#पिठले भाकरी
फक्त तीस रुपयात एक मोठी कुरकुरीत पातळ ज्वारीची भाकरी पिठले ,मिरची चा खर्डा ,दही आणि मसाले भात असा
हा फक्कड बेत असतो .आवडत असेल तर तिखट चमचमीत भरले वागे पण देतात .
तव्या वरची गरम भाकरी आणि स्वच्छ मोकळी गडावरील हवा !
चार घास जास्त च जातात पोटात ...शिवाय वाढणाऱ्या बायकांचा प्रेमळ आग्रह
काय लागल तर मागून घ्या हा खास “कोल्हापुरी आग्रह ...फार समाधान वाटत जेवताना ..
सर्व थरातील आणि सर्व गावातील लोकांच्या या मेन्यू वर अक्षरशः उड्या पडतात
असा हा पन्हाळा प्रत्येक कोल्हापूर वासीयाची “जान “आहे ..

jayvrishaligmailcom

#राधा कृष्ण संवाद 🥀

एक दिन कृष्ण ने राधा से पूछा....
‎" राधे, बताओ तुम्हारे लिए प्रेम क्या है....???
‎राधा ने भी मुस्कुराकर बड़ी सरलता से जवाब दिया।"दो दिलों का मिलना, दो रूहों का जुड़ना यहीं प्रेम हैं।"

‎इस बात पर कृष्ण मुस्कुरा दिए और बोले.....
‎"बस यहीं प्रेम की परभाषा हैं तुम्हारे लिए,
‎अगर दो दिलों का मिलना प्रेम हैं तो फिर कोई एकतरफा प्रेम करे, क्या वो प्रेम नहीं है....??? प्रेम तो तब भी प्रेम ही रहेगा, प्रेम तो प्रेम हैं वहां दिलों का मिलना या रूहों का जुड़ना मायने नहीं रखता।
‎"….... प्रेम तो मां के मातृत्व में भी हैं जो अपने बच्चे को नव महिने अपने पेट में रखती हैं वो दर्द पीड़ा सहती है, उस असहनीय प्रसंव पीड़ा को सहन करने के बाद भी जब वो अपने हाथों में अपने नवजात शिशु को लेती हैं तब उसके चेहरे पर दिखने वाले उस भाव को, उसके दिल में जागने वाले उस एहसास को प्रेम कहते हैं।
‎.....प्रेम वो हैं जो पिता पुरा दिन मेहनत कर के अपने परिवार के लिए कुछ खुशियां कमा कर लाता है और अपने बच्चों के चेहरे पर दिखने वाली उस खुशी को देख कर उसके मन को सुकून मिलता है वो प्रेम हैं।
‎.....प्रेम इस प्रकृति में हैं, इन बहती हुई नदियों में हैं झरनों में हैं.... प्रेम हर उस वस्तु में हैं जो हमें खुशियां देती हैं, प्रेम हर उस रिश्ते में है जो हमसे जुड़ा है....इस खिलती हुई कलियों में हैं जो बीना किसी स्वार्थ के सभी को खुशियां देती है जीवन देती है यह है प्रेम....
‎प्रेम की कोई सीमित परिभाषा नहीं है, प्रेम अथाह हैं, अविरल हैं अनंत है...अदभुत है। इसे कहां दो दिलों में सीमित कर पाओगी तुम....!!!"

‎कृष्ण के इस बात पर राधा ने भी कृष्ण के कांधे पर सर रख के और उनका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़ी सरलता से फिर से जवाब दिया....
‎"प्रेम की परिभाषा क्या है यह मैं नहीं जानती, मेरे लिए तो प्रेम सिर्फ़ तुम हों, तुम्हारा ये साथ हैं जब तक तुम मेरे साथ हों मेरे लिए सारी दुनियां प्यारी है जिस दिन तुम मुझसे दूर हो जाओगे तब ना ये प्रेम रहेगा और ना मैं, तो मेरे लिए प्रेम का मतलब सिर्फ कृष्ण और कृष्ण मतलब ही प्रेम हैं....!!!"

‎जय श्री कृष्ण 🙏🌹

anitasorte6489gmail.com190157

!! इच्छाएं पूरी हो या ना हों,
ईश्वर और प्रेम बदले नहीं जाते !!

narayanmahajan.307843

जरूरी नहीं इश्क में बाहों के सहारे मिले,
किसी को "जी" भर के महसूस करना भी इश्क है...!!

narayanmahajan.307843

लोग अभी बोल रहे हैं, खामोशी से सुन लेना तुम।
जब तुम्हारा वक्त आए,जो भी दिल में हो सब कुछ कह देना तुम, कि कैसे तुमने चलना सीखा, गिर कर खुद संभलना सीखा...

authorsahiba

थके हो तो सुनो
तुम अकेले नह ींहो
कविता


थके हो तो सुनो थोड़ा आराम कर लो
आराम करना आलस नहीं है

दिल में बहुत कुछ दबे है तो बोलो
दिल की बात बताना कमजोरी नहीं है

अगर रोना आता है तो रो लो जी भर रो लो
रोना कोई गुनाह नहीं है

तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हो
बस कहाँ एक बार मैं थक गया हूं
और मैं आराम करना चाहता हूं

मुझे गले लगाओ मैं तुम्हारे बाहों में सोना चाहता हूं

तुम्हारी कमजोरी को कोई नहीं जाचेगा
नहीं तो तुम्हारी गलती को कोई गिनबाने बैठेगा

बस वह तुम्हारे साग तुम्हारे गम में तुम्हारे हो ले गा
तुम्हारी गलतियों को भूल कर तुम्हें गले से लगाएगी

तुम्हें प्यार से गले लगाएगा कोई तो होगा

मत दिखाओ अपनी कठोर चेहरा हर बार
जो तुमसे प्यार करता है
उसके आगे थोड़ा नरम रहना कोई कमजोरी नहीं

abhinisha