Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

हे श्याम! मैं तुमसे संसार का सुख नहीं माँगती। बस इतना वरदान देना कि मेरा मन हर परिस्थिति में तुम्हारे चरणों से जुड़ा रहे।🪷🙇🏻😊🙏🏻

janshisaroha503972

भर जू आयी जल तो
सखी,काहे गरजे है बदरी सारी?
जाह्न तो है कि थोड़े चल कर
हो जायेगी ठारी

zalakbhatt

❣️ मुझे इश्क़ तेरे होने से है ❣️

मुझे इश्क़…
तेरे होने से है।

तू पास हो या दूर…मेरे दिल ने,
तेरे बीच कभी फ़ासले रखे ही नहीं।

मुझे इश्क़…तेरी हँसी से है…
तेरी ख़ामोशी से भी,
तेरे ज़िक्र से भी…और तेरी कमी से भी।

तुझे शायद कभी एहसास न हो…
मगर मेरी हर सुबह तेरी याद से शुरू होती है,
और हर रात…
तेरे ख़याल पर ही गुज़र जाती है।

बस एक अरमान है…
जहाँ भी रहना…दिल से मुस्कुराते रहना।

क्योंकि…तेरा खुश होना ही…
मेरे हिस्से का सुकून है…💕🌙✨

narayanmahajan.307843

तुम आना एक रोज़
मुझसे मिलने...
मैंने बहुत संभाल
कर रखा है,
तुम्हारे हिस्से का
वक़्त
❣️❣️❣️

narayanmahajan.307843

पहिले प्रेम
मन माझं आजही तिच्यात अडकले आहे...
वहीच्या शेवटच्या पानावर आजही तिचंच नाव आहे..
ती चे हसन तीच रुसण आज ही आठवणीत आहे..
तिच्या त्या गालावरच्या खळी वर आज जीव झुरत आहे..
ती तर गेली विसरून मला पण माझं मन मात्र.
त्या वहीच्या शेवटच्या पानावर आज ही अडकून आहे.
रोज तीच वही काढून बसतो आणि
तीच नाव पाहून डोळ्यातील अश्रू ना वाट काढून देतो..
सोडून जाणारी जाते पण दुसऱ्याच आयुष्य नरक करून जाते...
शेवटच्या पानावर ती आज ही आठवणीत आहे...
आज ही विसरण होत नाही..
कारण प्रेम खरं होत माझं हे तिलाच समजल नाही...
काय खर प्रेम केलं हेच माझं चुकले हे मला समजले नाही..
ती कधी येणार नाही परत माहिती आहे ..
तरीही मन माझं तिचीच वाट पाहत आहे...
आज ही शेवटच्या पानावर तिचंच नाव आहे...
तिचंच नाव आहे....

kavitaparabkar817467

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

पछतावा क्यों नहीं पता

कविता




निराशा में डूबी हुई मन
धीरे-धीरे पछतावा में जा रहा है




निराशा किस लिए है पता है
पछतावा क्यों है नहीं पता



और यह मुझे बेचैन कर रही है
और गहरी पिरा महसूस करने पर मजबूर कर रही है


पर वह पीरा क्या है
वह दर्द किसकी है
मुझे नहीं समझ में आ रहा
बस है अंदर दुख


और दुख में डूबे हुए एक धड़कन
जो ठहरना चाहता है
जैसे यह बेचैनी बर्दाश्त नहीं हो रही
जिसे यह घबराहट बरदास नहीं हो रही



या तो ऐ रुक जाना चाहता है
या तो ऐ चाहता है कि मैं कुछ करूं
जिसके वजह से उसे थोड़ी राहत मिले


उस पछतावे को जानू
जो निराशा की वजह से आया है
उस दर्द को पहचानो जो मैं महसूस कर रही हूं


और सच कहूं तो
मुझे समझ में नहीं आ रहा
क्यों और क्या


मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि क्यों पछतावा हो रहा है
मैं मुझे नहीं समझ में आ रहा है
कि मेरा जो दर्द है
वह क्या है


वह पछतावे की दर्द
मेरे खुद की बेकार जिंदगी बिता देने की बात की है
या किसी और की दर्दों को महसूस करके मुझे
पछतावा हो रहा है


सच कहूं तो मुझे नहीं पता
मैंने उम्र भर खुद के लिए क्या किया
और दूसरों के लिए क्या नहीं किया


मुझे नहीं पता इस तरफ इस बेचैनी
इस बहते हुए आंखों
और इस पछतावे की असली मतलब

मुझे नहीं पता

abhinisha

Colleb...

inkimagination

"कितना मुश्किल है
इस अंदाज में ज़िन्दगी बशर करना"

"तुम्हीं से फासला रखना
और तुम्हीं से इश्क़ करना.!!

narayanmahajan.307843

"જે મન કૃષ્ણમાં સ્થિર થઈ જાય,
એને દુનિયાની કોઈ આંધી ડગમગાવી શકતી નથી."

parmarsantok136152

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🦚

पूर्णिमा की रात, वृन्दावन में कान्हा ने बाँसुरी बजाई।
सारी गोपियाँ मर्यादा की रेखा पार कर दौड़ आईं।
तब राधा रानी ने पूछा - सबसे ज़्यादा प्रेम कौन करता है?

कान्हा का जवाब सुनकर आप भावविभोर हो जाएँगे 🥹
उन्होंने कहा - ये सारी गोपियाँ आपकी ही अंश हैं राधे।
सब में आपकी ही छवि है। इनका प्रेम भी मेरे लिए सम्पूर्ण है।

यही है हमारे जीवन का सार
कृष्ण ही राधा हैं, राधा ही कृष्ण हैं
दो जान, एक शरीर 💛

इस वीडियो में जानिए:
Raas Leela का असली मतलब क्या है
क्या हम भी राधा का अंश हैं
सच्चा प्रेम मर्यादा से बड़ा कैसे है?

अगर वीडियो अच्छी लगे तो "राधे राधे" लिखकर चैनल को सब्सक्राइब करें
आपकी एक राधे राधे से किसी का दिन बन जाएगा।

#ShreeRadheKrishna #DoJaanEkShareer #RaasLeela #DearFever #JaiJagannath

skptech

બુક: સતી સાવિત્રી
લેખક: દેવદાત પટનાયક

એમ તો ખૂબ નવા લેખક છે મારી માટે..
નારી જાતિમાં જ્યાં એક સમય હતો
જ્યાં બાળકોના નામ પાછળ તેની માતાનું નામ લખવામાં આવતું તે સમયથી લઈ ને ઉપનિષ, વેદ,રામાયણ અને મહાભારત સુઘીની નારીઓની નાની કથા અને માન્યતા સાથે ખૂબ સારી રીતે વિચાર રજુ કરેલ છે.. આ બુક વાંચીને ખરેખર ખૂબ મજા આવી.. જો તમને પણ ઈતિહાસમાં મનુષ્યના જીવનમાં ભૂતકાળોમાં સ્ત્રી નું સ્થાન પ્રથા અને સમાજ વિશે જાણવામાં રસ હોય તો આ બુક જરૂરથી વાંચજો..

chiragvora055249

[ मुझे पाना तू चाहती थी,
तुझे पाने में वक्त लगेगा
वो कहते है न हीरा बनाने ओर उस हीरे को सिद्दत से पाने में
वक्त लगेगा
तू अगर छोड कर जा रही है तो याद रखना हीरा हर बार नदी में नहीं मिलता
मुझे पाने है to वो वक्त दुबारा नहीं मिलता
जरा सोच ले मेरा जैसा इंसान हर किसी को नहीं मिलता
तुझे होगा अहसास मुझे खोने का
जब वक्त भी कम होगा और तेरा मुझे न पाने का अफसोस भी होगा।

omparkashverma554460

Evil Nun 1 Game Story Hindi Comming Soon By Speedy Gamer

vihanbakshi008153

Once more, I yield thee to the heavens’ decree,
And turn away; I shall return no more.
Seek me if thou wilt, across the lonely shore—
Henceforth, thy search must find what's left of me

cosmicstar

सब देखा देखी का खेल है
मन को कितना भी कही लेजाए
पर मन कही ओर जाने लगता है

rupex

"अधूरा भी पूरा है"

क्या ज़रूरी है कि जो शुरू किया उसे पूरा करना ही है…
क्या हम कुछ अधूरा नहीं छोड़ सकते?
कोई रास्ता, कोई याद, कोई सपना, कोई किताब…
क्या होगा अगर कुछ बात बीच में ही रह जाए तो?

क्या हर नदी का समंदर तक जाना ज़रूरी है?
क्या हर चाँद का पूरा गोल दिखना ज़रूरी है?
अगर कोई गीत बीच में ही रुक जाए,
तो क्या वो कम सुंदर लगेगा?

देखो तो सही…
भगवान ने भी दुनिया पूरी नहीं बनाई।
कहीं पहाड़ आधे, कहीं नदियाँ प्यासी,
कहीं धूप कम, कहीं छाँव उदास।
उसने चाँद पर भी दाग छोड़ दिया,
शायद इसलिए कि कमी में भी खूबसूरती होती है।

हम क्यों डरते हैं अधूरेपन से?
अधूरी बात में ही तो फिर मिलने की आस होती है।
अधूरी किताब में ही तो नया सपना पलता है।
अधूरे रास्ते में ही तो लौट कर आने का मन करता है।

जो पूरा हो गया, वो कहानी बनकर खत्म हो जाता है,
पर जो अधूरा रह गया, वो साँस बनकर चलता रहता है।
पूरा होना मतलब रुक जाना है,
अधूरा होना मतलब चलते रहना है।

तो रहने दो कुछ बातें अनकही,
कुछ रास्ते बिना मंज़िल, कुछ सपने बिना रंग के।
शायद भगवान ने भी हमें अधूरा बनाया है…
ताकि हम एक-दूसरे से जुड़ कर
उसकी दुनिया को पूरा कर सकें।

प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

"मैं और मेरे अक्षर”…….

आईने से डरती हूँ मैं, वो सच दिखा देता है,  
मैं तो वो हूँ जो लफ़्ज़ों में ख़ुद को छुपा लेता है।


मैंने कभी देखना नहीं चाहा ख़ुद को दर्पण में…  
मेरी आँखों के कोर पर काजल टिकता नहीं,  
माथे पर बिंदी का बोझ उठता नहीं,  
नहीं चाहिए मुझे खन-खनाती चूड़ियों का श्रृंगार…  
मेरा शोर तो मेरे अक्षरों के पार है।

मैं अक्सर बह जाती हूँ स्याही की नदी में,  
अक्षर से भाषा, भाषा से वेदना की गहराई में।  
मेरा जी अटका है एक अजीब तड़पन में…  
जिसे न गहने चाहिए, न डोली का क़रार,  
बस चाहिए एक कोना किताब के हाशिये का उधार।

लोग कहते हैं “औरत हो, सँवर जाओ”,  
मैं कहती हूँ “शब्द हूँ, बिखर जाओ”।  
मेरी माँग का सिंदूर कविता की सुर्ख़ लकीर है,  
मेरा गजरा ग़ज़लों की महकती तहरीर है।

रात जब दुनिया सोती है, मेरी क़लम रोशन होती है,  
मेरे ख़्वाब पाँव में पायल नहीं,  
नज़्मों की पाज़ेब पहन कर जागते हैं।  
मेरा आँचल शब्दों से सिला है,  
मेरी मेहंदी अख़बार की सुर्ख़ियों से रची है।

मुझे दुनिया से नहीं, ख़ुद की परछाईं से पर्दा है,  
क्योंकि दर्पण में सिर्फ़ जिस्म उतरता है 
और मैं तो रूह की इबारत हूँ।  
मैं प्रेमचंद के पन्नों की कोई थकी हुई औरत हूँ,  
महादेवी के आँसू से भीगी कोई प्रार्थना हूँ,  
अमृता के ख़त की आख़िरी अधूरी सतर हूँ।

मेरी तड़प न मायके की देहरी की है, न ससुराल की दीवार की,  
मेरी तड़प उस सुबह की है 
जहाँ औरत को पढ़ने से पहले नापा न जाए,  
जहाँ उसके क़लम की नोक को उसके गहनों से पहले सराहा जाए।

तो रहने दो मुझे यूँ ही बे-रंग, बे-साज़…  
बिना काजल, बिना बिंदी, बिना चूड़ियों के अल्फ़ाज़।  
मैं ख़ामोश सही, मगर मेरे हर लफ़्ज़ में इनक़लाब है,  
मैं तन्हा सही, मगर मेरी किताबों में पूरा हिसाब है।

प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

मेरी हिंदी में लीखी पुस्तक। 12 अच्छी से अच्छी कहानियों का संग्रह जिसमें से ज्यादातर कहानियां इस प्लेटफॉर्म पर है।
अपने इस प्लेटफॉर्म के मित्रों के लिए सिर्फ 125 रु. शगुन के में दे सकता हूं। जो गुजराती समझ नहीं सकते उनके लिए और मेरी जैसे गुजराती जो हिंदी में लिखा enjoy कर सकते हैं उनके लिए। संपर्क 9825105466

sunilanjaria081256

बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर – जहाँ आस्था आज भी साँस लेती है
लेखिका: SKP Devine Creation
भारत की आध्यात्मिक भूमि पर ऐसे अनेक तीर्थ हैं, जहाँ केवल पत्थर की प्रतिमा नहीं, बल्कि श्रद्धा की जीवंत अनुभूति मिलती है। ओडिशा के गंजाम जिले का बेलागुंठा श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर भी उन्हीं दुर्लभ स्थलों में से एक है। यहाँ आने वाला हर भक्त अपने साथ केवल दर्शन नहीं, बल्कि मन की शांति और विश्वास लेकर लौटता है।
मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान श्री लक्ष्मी नृसिंह का स्वरूप भक्तों के हृदय में अद्भुत श्रद्धा जगाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान आज भी अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि जब वे भगवान के सम्मुख खड़े होते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे भगवान की दृष्टि सीधे उनके हृदय तक पहुँच रही हो। यह अनुभव व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन यही विश्वास इस मंदिर को विशेष बनाता है।
भगवान नृसिंह, भगवान विष्णु के उस दिव्य अवतार का प्रतीक हैं जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अधर्म का अंत किया। यही संदेश आज भी इस मंदिर में जीवित है—सत्य और भक्ति की रक्षा अवश्य होती है।
बेलागुंठा केवल आध्यात्मिकता का केंद्र नहीं, बल्कि कला और संस्कृति की भूमि भी है। यहाँ की प्रसिद्ध पित्तल मछ (Flexible Brass Fish) और आसपास के कारीगरों की कला इस क्षेत्र की पहचान हैं। इसलिए यहाँ आने वाला यात्री भक्ति के साथ-साथ ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होता है।
मंदिर का शांत वातावरण, घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों की रोशनी और श्रद्धालुओं की प्रार्थनाएँ मन को भीतर तक छू जाती हैं। ऐसा लगता है मानो समय कुछ क्षणों के लिए ठहर गया हो और केवल ईश्वर और भक्त का संबंध ही शेष रह गया हो।
आज जब जीवन भागदौड़ से भरा हुआ है, तब बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और भक्ति में होती है।
"जहाँ विश्वास अडिग होता है, वहीं ईश्वर का अनुभव सबसे गहरा होता है। बेलागुंठा का श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर इसी सत्य का जीवंत प्रतीक है।"

skptech

माँगना जो रब से तुझको, मेरी तो दुआ हो गई, उसने हीरे की जो दी अंगूठी, तो तेरी रज़ा हो गई।

anisroshan324329

ज़माना कहता है कि दिखाओ तो ही मानेंगे हम,
तो अब हो कर बेशर्म अपने दर्दों को सजाऊँ क्या?

anisroshan324329

बट गया था दिल मेरा, तेरे और मेरे दो हिस्सों में,
वही जो हिस्सा था तेरा, वकालत सिखाने आए हैं।

anisroshan324329