"बच्चे की मासूमियत या दिखावा"
"यह लेख एक काल्पनिक कहानी के माध्यम से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनसे जुड़ी सामाजिक अपेक्षाओं पर चर्चा करता है। मेरी कोशिश बस इतनी है कि हम 'सफलता' की परिभाषा को थोड़ा मानवीय बना सकें। यदि यह कहानी आपको अपने बचपन या अपने बच्चे के साथ बिताए किसी पल की याद दिलाती है, तो कृपया इसे एक आत्म-चिंतन (self-reflection) के रूप में देखें।"
सिया सब बच्चों से थोड़ी अलग है, दुनिया को अलग नज़र से देखती है। उसकी मासूम मुस्कान जैसे उसके अंदर के हाल को ढक लेती है, लेकिन उसकी बड़ी-बड़ी सुंदर आँखें बिना कुछ बोले सब बोलती हैं। ज़रूरत है किसी को बस उसको समझने की, लेकिन भाग-दौड़ वाली लाइफ में कौन 2 मिनट रुक कर देखता है और सोचता है?
सिया जो अभी महज़ 7 साल की है, लेकिन उसकी लाइफ तराजू के पलड़े पर बैठी है, जहाँ एक तरफ वह है तो दूसरी तरफ उसके टॉप करते भाई-बहन। सिया तीसरी क्लास में एक 'एवरेज' बच्चों में आती है।
'एवरेज' बच्चे क्या होते हैं, शायद इसकी परिभाषा अभी तक ठीक से बनी ही नहीं और न किसी ने समझा है। लेकिन दुनिया और घर की नज़र में एवरेज बच्चे क्लास की टॉप करने की नीति से नापे जाते हैं। और ये जो 'टैग' बच्चों को बिना मांगे दे दिया जाता है, वह उनकी अंदर की मासूमियत को थोड़ा और कम कर देता है और थोड़ा एवरेज से कम कर देता है।
ठीक ऐसे ही सिया हो गई थी; दिन-ब-दिन चुप-चुप होने लगी। अब वह और बच्चों की तरह न हंसती, उसकी हंसी में एक अनकही खामोशी झलकने लगी थी। पहले से ज़्यादा डरी-सहमी रहने लगी थी, अपनी ही बात कहने में डर जाती थी।
सिया के घर में आज एक बहुत बड़ी पार्टी थी। उसके मानो जैसे शहर के पढ़े-लिखे, 'वेल-एजुकेटेड' लोगों का आज उसके घर मेला लगा हो। सिया की फैमिली भी वेल-एजुकेटेड थी, पापा-मम्मी सरकारी नौकरी में थे और भाई-बहन टॉपर।
जब पार्टी में डिनर टेबल पर सब साथ बैठे और हंसी-मज़ाक और खुद के बच्चों की तारीफ करते लोग नहीं थक रहे थे, वहीं सिया के मम्मी-पापा बस उसके भाई-बहन की ही तारीफ कर रहे थे, सिया का ज़िक्र तक नहीं था।
सिया ये सब देख कर अंदर ही अंदर और घुट रही थी। एक बच्चे के लिए उसके माता-पिता दुनिया में सबसे ज़्यादा सुरक्षित जगह होते हैं, लेकिन जब वही लोग उसको एवरेज होने की वजह से हाथ छोड़ने लगें, तो बच्चे का बिखरना, घुटन जैसे बच्चे की नियति बन जाता है।
ठीक ऐसे ही सिया के साथ था—जिस बच्चे को ज़्यादा लाड-प्यार और केयर की ज़रूरत होती है, अक्सर उस बच्चे को सबसे अलग कर दिया जाता है, जैसे सिया को कर दिया गया।
एक एहसास:-
क्या हमें सच में एक ऐसे 'वेल-एजुकेटेड' दिखने की ज़रूरत है, या उस बच्चे का हाथ थामने की, जो बस हमारी तरफ देखता है?
☆अनामकारा