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New bites

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avinashgondukupe96025gmail.com5127

Ho Tum

Inn akhon mein
Basi tasveer ho tum

Iss dil mein
Basi dhadkan pe
likha hua naam
ho tum

Sach kahu toh
Meri shiddat ho
Tum

Aur Jo mere
Pyar mein saari
Hadh par kar jaye
Voh deewane ho tum

kya kah uss
deewane ko na
rukta hai
na kehta
fir bhi.....

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gunjangayatri949036

मेरी आंखों से पूछो मोहब्बत की बेबसी,
तेरे सिवा इसको कोई अच्छा नहीं लगता...!!!

narayanmahajan.307843

"दीवारों के पार"

कुछ ख़ास नहीं... हाँ, बहुत आम हूँ मैं।
मेरे नाम के आगे कोई ताज नहीं,
मेरी हँसी के पीछे कोई राग नहीं।
उजाले कभी थे मेरे, अब खो गए हैं,
अब तो बस एक थकी हुई, ढलती शाम हूँ मैं।

पर मेरे भीतर...
एक कमरा है।
न उसमें खिड़की है, न दरवाज़ा।
बस चार दीवारें हैं
और एक मैं हूँ,
जो ख़ुद से ही छुपी हुई हूँ।

इस कमरे को रोज़
मेरे भीतर का शोर खटखटाता है।
वो शोर जो चीख़ बन नहीं पाया,
वो आँसू जो बह नहीं पाए,
वो बातें जो कही नहीं गईं।
सब जमा हैं यहाँ,
साँस ले रहे हैं अँधेरे में।

हर सुबह एक सुनहरी रोशनी आती है,
मेरे जिस्म की दरारों से झाँकती है।
खिड़की ढूँढती है... नहीं मिलती।
थककर, मेरे ही साये से लिपटकर,
लौट जाती है रात के पास।
और मैं,
उसकी पीठ देखती रह जाती हूँ
बिना आवाज़, बिना शिकायत।

पर अब...
अब ये अँधेरा चुभने लगा है।
अब ये ख़ामोशी काटने लगी है।
अब मेरा मन
इस कमरे की मरम्मत चाहता है।

मुझे एक खिड़की चाहिए
छोटी ही सही,
पर इतनी बड़ी कि
कोई सवेरा उसमें से झाँक सके,
और पूछ सके "तुम ठीक हो?"

मुझे एक दरवाज़ा चाहिए
जिसकी चौखट पर
कोई दस्तक दे,
और मैं डरकर छुपूँ नहीं,
बल्कि कहूँ "आ जाओ,
यहाँ अँधेरा है, पर जगह है।"

मैं नहीं चाहती कि मेरा शोर
इन दीवारों में दफ़न हो जाए।
मैं चाहती हूँ कि वो
किसी के नाम की दुआ बनकर
इस कमरे से निकले।

मैं ख़ास नहीं हूँ, मुझे पता है।
पर ये दर्द... ये इंतज़ार...
ये ख़ास है।
और शायद
इसी इंतज़ार के नाम
एक सवेरा लिखा जाए।

तो आज,
मैं हथौड़ी उठाती हूँ
पहली चोट अपनी ही दीवार पर।
क्योंकि ढलती शाम को
अगर जीने का हक़ है,
तो उसे सुबह बुलाने का हक़ भी है।
प्राची तंवर …..

prachitanwar111

सच्चा प्रेम शोर नहीं करता...
बस हर सफ़र में चुपचाप साथ चलता रहता है।

parmarsantok136152

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rajukumarchaudhary502010

💔 अरबपति CEO की कॉन्ट्रैक्ट पत्नीFollow the Raju Kumar Chaudhary official channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb6nSzoDOQIXdQiMVl1U


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rajukumarchaudhary502010

ખુમારીભરી સુંદર વાર્તા 👌

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ronakjoshi2191

Good Evening Hedrabad city
☕☕☕☕

anisroshan324329

प्रेम हमेशा साथ बैठने का नाम नहीं होता...
कभी कैलाश और हिमालय के बीच की प्रतीक्षा भी प्रेम होती है। कभी वनवास की लंबी राहों में अटूट विश्वास भी प्रेम होता है। कभी वृंदावन और द्वारका की दूरी में जीवित स्मृति भी प्रेम होती है।
महादेव–पार्वती ने धैर्य सिखाया, सीता–राम ने समर्पण, और राधा–कृष्ण ने यह कि हर प्रेम का अंत मिलन नहीं होता, फिर भी वह अधूरा नहीं होता।
सच्चा प्रेम दूरी नहीं गिनता... वह बस मन में एक दीप जलाए रखता है, जो हर अंधेरी रात में कहता है—
"मैं यहीं हूँ।"

parmarsantok136152

नीलकमल को कभी यह चिंता नहीं होती कि सूरज उससे कितनी दूर है...
वह बस हर सुबह उसकी ओर खिलना जानता है।

कुछ रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं।
न हर पल साथ, न हर रोज़ मुलाकात...
फिर भी दिल में एक अजीब-सा सुकून रहता है कि वो कहीं है, खुश है, सुरक्षित है।
और कभी-कभी प्रेम का सबसे सुंदर रूप पास होना नहीं...
किसी की सलामती की दुआ बन जाना होता है।

parmarsantok136152

.'Life se Romance'.

arnagvanshi051673

अधूरी आत्माओं का पुनर्जन्म~~~~❣️🥀

कहते हैं,

जो प्रेम अपने पूर्ण स्वरूप तक नहीं पहुँच पाता,

वह समाप्त नहीं होता।

वह मृत्यु के साथ जलता भी नहीं,

मणिकर्णिका की अग्नि भी उसे भस्म नहीं कर पाती।

भागीरथी बहा ले जाती है अस्थियाँ,

पर प्रेम की तड़प जल में नहीं घुलती।

वह रह जाती है—

आत्मा के किसी अतल कोने में, एक अधूरी पंक्ति की तरह।

शायद इसी कारण

कुछ आत्माएँ मोक्ष नहीं पातीं।

वे लौटती हैं।

बार-बार लौटती हैं।

कभी किसी अजनबी की आँखों में अपना पुराना घर खोजने,

कभी किसी अनजान आवाज़ में अपनी खोई हुई पुकार सुनने,

कभी किसी स्पर्श में सदियों पुरानी पहचान पाने।

शायद पुनर्जन्म

सिर्फ कर्मों का नहीं,

अधूरे प्रेमों का भी विधान है।

शायद इसी कारण

कुछ लोग पहली ही भेंट में अजनबी नहीं लगते।

उनके दुःख परिचित लगते हैं।

उनकी चुप्पी समझ में आती है।

उनकी आँखों में अपनी ही प्रतीक्षा दिखाई देती है।

जैसे दो बिछड़ी हुई आत्माएँ

समय के विशाल मेले में एक-दूसरे को पहचान रही हों।

कौन जाने,

जो आज तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर रोता है,

वह किसी पिछले जन्म में तुम्हारे लिए रोते-रोते मर गया हो।

कौन जाने,

जिसकी अनुपस्थिति आज भी चुभती है,

वह किसी और युग में तुम्हारी ही प्रतीक्षा करते-करते भागीरथी के जल में विलीन हुआ हो।

मृत्यु सब कुछ समाप्त नहीं करती।

कुछ प्रेम

चिता की अग्नि से भी अधिक दीर्घजीवी होते हैं।

वे राख बनकर नहीं,

प्रार्थना बनकर बचते हैं।

फिर जन्म लेते हैं।

फिर बिछड़ते हैं।

फिर खोजते हैं।

फिर मिलते हैं।

जब तक कि

सृष्टि की किसी अंतिम संध्या में,

दोनों आत्माएँ अपने समस्त विरह, समस्त प्रतीक्षा, समस्त जन्मों का ऋण चुका न दें।

और जब अंततः

उनकी अधूरी पंक्तियाँ पूरी हो जाती हैं,

जब उनका प्रेम प्रार्थना से भी आगे बढ़कर अस्तित्व बन जाता है,

तब भागीरथी मौन हो जाती है।

मणिकर्णिका की अग्नि आशीर्वाद बन जाती है।

काल अपने द्वार बंद कर देता है।

और वे दोनों आत्माएँ,

जिन्होंने युगों तक एक-दूसरे को खोजा था,

अब किसी जन्म की नहीं, किसी मृत्यु की नहीं,

अनंत की हो जाती हैं।

तभी शायद

मोक्ष घटित होता है।

और बैकुंठ के किसी शांत आकाश में,

जहाँ न विरह है, न पुनर्जन्म,

वे दोनों आत्माएँ

एक-दूसरे के पास बैठी रहती हैं,

ठीक वैसे ही,

जैसे सृष्टि के आरंभ में बैठी हों—

और प्रेम,

अंततः अपने घर पहुँच गया हो।॥ 🌺

narayanmahajan.307843

​तू चाहिए—

​तू चाहिए हर किमत पर हमें,
ये ज़िद की है इस दिल ने मेरे।

​अब चाहे हो रास्ता कांटों से भरा,
बस हम चले आएंगे पीछे तेरे।

​हो अगर तुझको भी अहसास तो,
इस मोहब्बत को पर लग जाएं मेरे।

​बाहें फैलाकर मैं मौजूद हूँ,
तू आकर सीने से लग जा मेरे।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

જયાર થી લોકો એ માળા ફેરવવાનું બંધ કરી..
માણસો ને ફેરવવાનું ચાલુ કર્યું .. ત્યાર થી ભગવાને તેનો સાથ છોડી દીધો...👇👇👇👇

✍️✍️✍️✍️જ્યારે માણસ માળા ફેરવતો હતો, ત્યારે તે પોતાની જાતને અંદરથી તપાસતો હતો. એ માળાના મણકા સાથે તે પોતાના વિચારોને શાંત કરતો, અહંકાર ઓગાળતો અને ઈશ્વર સાથે એકરૂપ થવાનો પ્રયત્ન કરતો. એમાં નમ્રતા હતી.💯💯💯💯

પરંતુ, જ્યારે માણસે માણસોને ફેરવવાનું (એટલે કે કપટ, સ્વાર્થ અને સત્તા માટે લોકોને વાપરવાનું) શરૂ કર્યું, ત્યારે તે પોતાની અંદરનું દૈવત્વ ખોઈ બેઠો. જે ઈશ્વરને તે માળામાં શોધતો હતો, તે ઈશ્વર તો 'માણસાઈ'માં વસેલો છે. જ્યારે માણસાઈ જ મરી પરવારી, ત્યારે કુદરત અને ઈશ્વરનો સાથ આપોઆપ છૂટી જ જાય ને!🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

"જેણે પરમાત્માને પોતાની ભીતર શોધ્યા, તેણે દુનિયામાં શાંતિ પામી;
અને જેણે બીજાને નચાવવામાં સમય બગાડ્યો, તેણે પોતાની શાંતિ ગુમાવી."
રાધે રાધે 🙏🙏
જય શ્રી રામ 🙏🙏
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manonbhai4739

तेरी यादों की खुशबू महकती है इन सांसों में,तू नहीं पास तो क्या, तू बसी है मेरे ख्यालों में।
कट जाएगी ये उम्र भी अब इस तड़प के साथ,मिलेंगे कभी तो उस जहाँ में, जहाँ कोई जुदाई न हो।

narayanmahajan.307843

🍄 मश्रुम बटर मसाला 🍄

व्हिटॅमिन बी 12 चा स्रोत असणारा मश्रुम नेहेमी खाण्यात असावा

🍄 साहित्य
बटण मश्रुम (जे बाजारात अथवा डी मार्ट मध्ये उपलब्ध असते..)आठ ते दहा
एक मोठा कांदा
एक 🍅 टॉमॅटो
गरम मसाला अर्धा चमचा
एक छोटा चमचा जिरे
कसुरी मेथी एक चमचा
तिखट एक चमचा
हळद अर्धा चमचा
साखर पाव चमचा
मीठ चवीनुसार

🍄प्रथम मश्रुम धूवून त्यांचे देठ काढून टाका
मश्रुम चार चार उभे तूकडे करून घ्या
कांदा 🍅 टोमॅटो उभे चिरून घ्या

🍄 एका पॅन मध्ये दोन मोठे चमचे बटर घाला
बटर वितळले. सुगंध घरभर पसरला की
त्यात एक चमचा जिरे घाला
उभा चिरलेला कांदा घाला

🍄Bकांदा थोडाच परतून
वर कसुरी मेथी घाला
त्यानंतर टॉमॅटो च्या उभ्या फोडी घालून दोन मिनिट परता

🍄आता हळद मीठ गरम मसाला तिखट घालून
चांगले परतून घ्या
मश्रुम तूकडे घालून पुर्ण मसाला त्याला लागेल असे परता

🍄 त्यावर झाकण ठेवण्यापूर्वी फक्त पाण्याचा एक हबका मारावा
दोन मिनिट झाकणं ठेवताच मश्रुम शिजतो
झाकण काढून आवडत असल्यास पाव चमचा साखर घालावी परत थोडे एकत्र करावे

🍄वरती कोथिंबीर घालावी
गरम गरम खायला घ्यावें

🍄 सोबत ब्रेड अथवा पोळी, पराठा मस्त लागतो

🍄 अत्यांत चविष्ट कमी वेळात होणारी एक पौष्टीक डिश 😊

jayvrishaligmailcom

Do You Know that if you want to be liberated from this world, you have to accept whatever comes your way, whether it is good or bad? This way, your accounts will be settled.

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dadabhagwan1150

"साथ क्यों चाहिए?"

चुपचाप बैठी थी,
तभी मन में एक बात आई...
मैंने ख़ुद से पूछा
यार, ये 'साथ' इतना ज़रूरी क्यों होता है?

सुबह को सूरज का साथ चाहिए,
वरना दिन ही नहीं चढ़ता।
रात को चाँद का साथ चाहिए,
वरना अँधेरा अच्छा नहीं लगता।

बारिश को बादल चाहिए,
वरना वो गिरेगी कहाँ?
दिल को धड़कन चाहिए,
वरना वो जिएगा किसके लिए?

हमेशा से सुना है
"अकेले आए हो, अकेले जाना है।
यहाँ कोई किसी का नहीं होता।"

फिर भी क्यों?
जब हम रोते हैं,
तो कंधा ढूँढते हैं।
जब हम डरते हैं,
तो हाथ पकड़ना चाहते हैं।

शायद इसलिए...
कि अकेले तो बस
हम साँस लेते हैं।
साथ में ही हम
सच में जीते हैं।

सूरज भी अकेला नहीं रहता,
उसे आसमान चाहिए।
चाँद भी अकेला नहीं रहता,
उसे तारे चाहिए।

हम भी अकेले आए ज़रूर,
पर इंसान बनने के लिए
हमें एक-दूसरे का साथ चाहिए।

क्योंकि अकेले तो बस
दिन कट जाते हैं...
साथ में ही
यादें बन जाती हैं।

तो हाँ,
साथ ज़रूरी है
उतना ही,
जितना जीने के लिए
धड़कन।
प्राची तंवर …..

prachitanwar111

खुशी कहाँ है? खुशी में उच्च समाज और हाइलाइट शैली या बचपन की यादें शामिल हैं।

vanshsingh118873

विपरीत परिस्थितियां ही नए जीवन की शुरुआत हैं! ✨🌱

जब जीवन में हर तरफ से असफलता, मानसिक तनाव या अकेलापन घेर ले, तो निराश न हों। प्रकृति का एक नियम याद रखिए— “एक बीज को भी नया जीवन पाने के लिए सबसे पहले मिट्टी के गहरे अंधकार में टूटना पड़ता है।”

★आज का आध्यात्मिक विचार: हमारे जीवन में आने वाले दुख केवल हमारे पुराने कर्मों का हिसाब चुकता करने आते हैं। दुख का आना इस बात का संकेत है कि पुराना हिसाब ख़त्म हो रहा है और अब एक नया, सुंदर अध्याय शुरू होने वाला है।

★परम पूज्य दादा भगवान का सूत्र: “जो हो गया सो न्याय।”भूतकाल को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान को संभालकर भविष्य को दिव्य बनाया जा सकता है।

आज का संकल्प: मैं अपने बीते हुए कल (Past) का कैदी नहीं हूँ। मैं ईश्वर का अंश हूँ, और हर परिस्थिति से बाहर निकलने की शक्ति मेरे भीतर है।

#SpiritualAwaking #InnerStrength #Positivity #DadaBhagwan #MentalPeace #NewBeginning

nityaoswal430745

"मैं ऐसी ही हूँ"

मैं उम्र के उस पड़ाव पर हूँ
जहाँ दिल का लगना लाज़मी है मुझे।
हक़ीक़त में जीना सीखा ही नहीं
मेरा लगाव जो है, थोड़ा कागज़ी है मुझे।

मैं नहीं चाहती
मेरी उँगलियों में हीरा सजा हो कोई।
उठाकर घास का तिनका,
उम्र भर का वादा पहनाए मुझे
बस इतना काफ़ी है।

महँगे तोहफ़े, बड़ी-बड़ी बातें,
इन सबसे मेरा कोई लगाव नहीं।
अपने हाथों से ख़त लिखकर,
पढ़े कोई मेरे लिए
इससे बड़ी सौगात नहीं कोई।

हाँ, मैं ऐसी ही हूँ
थोड़ा बचपन, थोड़ी ज़िद हूँ।
न दुनिया जैसी, न दुनिया से अलग,
बस अपने जैसी हूँ।

मुझे तारे तोड़कर लाने वाले नहीं चाहिए।
मेरे साथ बैठकर
तारों को देखने वाला चाहिए।
बड़े-बड़े वादे नहीं,
एक छोटा सा भरोसा चाहिए
जहाँ मैं बिन डरे
ख़ुद को रख सकूँ।

तो आना,
अगर आ सको तो
ख़ाली हाथ आना।
बस एक कागज़,
एक कलम,
और साथ रहने का
सच्चा इरादा लाना।
प्राची तंवर …..

prachitanwar111

ना जाने कैसा रिश्ता है इस दिल का तुमसे,🫀
धड़कना भूल सकता है पर तुम्हारा नाम नहीं।❤️❤️

narayanmahajan.307843