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निकम्मा इश्क़

जी..जहाँ ,
निकम्मा हूँ ! फ़र्ज़ी हूँ !
तेरे इश्क़ में ,
काब़िल कहा हूँ मैं ?
तेरे पाक दिल के ,
हर दफ़ा, सौ-सौ ज़ज्बातें
तोड़ कर, तुम्हारे पास
अफलातून....,
वापस लौट आता हूँ |
बेशर्म, बेहया बनकर,
भोली-भाली बातों से,
झूठे-मूठे किस्सों से
अजीब-ओ-ग़रीब चश्में लगाकर ,
बनावटी सूरत दिखाकर ,
उल्टे-पुल्टे कारनामों पर
मख़मली मक्खन लगाकर ,
तुम्हें फिर से मनाता हूँ |
बेतुकी कहानी सुनाकर ,
जी-हजूरी करते-करते,
हमेशा-हमेशा तेरा ही
लुभाता हूँ कोमल मन..
फिर भी लायक कहां हूँ मैं !
तुम्हारी अच्छाईयों के आगे
अपने स्वार्थी, ज़िद्दी रवैये से ,
आदत से मज़बूर होकर ,
बन जाता हूँ, लायक से
इक खलनायक मैं ||

-©®- शेखर खराड़ी
तिथि-४/८/२०२६

shekharkharadi6923

એક ફેર ઝઘડો કરવો તે પાંચ હજાર રૂપિયાનું નુકસાન કર્યા બરાબર છે. - દાદા ભગવાન

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#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

माझ्या आईची आणखी एक ख़ास पाककृती ..
गोळ्या चे सांबार

एक वाटी हरभरा डाळ असेल तर अर्धी वाटी उडीद डाळ व पाव वाटी मसूर डाळ रात्री भिजत घालणे.
सकाळी अत्यंत कमी पाण्यात ही डाळ थोड़े जीरे ,कड़ीपत्ता व मिर्ची घालून वाटुन घेणे
आता या मिश्रणात आपल्या आवडी प्रमाणे तिखट ,मीठ ,गरम मसाला ,हळद,
कोथिम्बिर ,थोड़ी बडीशेप घालुन चांगले एकत्र करावे .
आता फोडणी साठी कढ़ई ठेवणे .
त्यात हिंग मोहरी हळद घालुन फोडणी झाल्यावर त्यात चार ते पाच भांडी पाणी घालावे .या पाण्यात थोड़ी हळद,तिखट व मीठ,आमसूल घालावे
पाणी चांगले उकळले की ग्यास बारीक करावा .
आता ड़ाळ मिश्रणाचे हातावर घेवुन छोटे छोटे गोळे करून त्या या पाण्यात हलकेच सोडत राहावे
गोळे शिजले कि आपोआप वर येतात व हळू हळू रस्सा पण घट्ट होऊ लागतो .
सर्व गोळे वर आले की पाच मिनिटे झाकून ठेवावे
नंतर कोथिंबीर व खोबरे घालून सजवावे .
भाकरी पोळी अथवा भात कशा बरोबर ही हे सांबार मस्त लागते .
नुसते गोळे पण खूपच चविष्ट लागतात .
कधी भाजी नसेल तर हा पर्याय उत्तम आहे .
काही वेळाने सदर सांबार घट्ट होते त्यामुळे प्रथमच आपल्या आवडी नुसार एक दोन वाट्या जास्त पाणी घातले तरी चालते.
(मिश्रण वाटताना जास्त पाणी घातले तर गोळे फुटतील त्यामुळे कमी पाण्यात घट्ट वाटण जरुरी आहे . )

jayvrishaligmailcom

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

चाहतें तो होती हैं सभी की
चाहे अच्छी हो या हो बुरी
चाहने से आख़िर होता क्या हैं
चाहत होनी भी तो चाहिए पूरी

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है 🌹इत्र,

mamtagirishtrivedi740648

कविता
बस देख रही हूं



मुझे किसी से शिकायत नहीं
बस मुझे रोना आ रहा है
मैं जानती हूं कि मेरी जुबान कर्वी है


मैं किसी की कोई काम की नहीं
मैं डायरेक्ट सुनती नहीं
मैं सुनने के साथ सवाल भी करती हूं

यही बात किसी को पसंद नहीं

लोगों को और पेरेंट्स को
वह लोग वह बच्चे पसंद आते हैं
जो बिना सवाल कि उनकी बातें बस सुनता रहें
जो वो कहे वही करता रहे


पर मैं वह नहीं हूं
इसलिए अनदेखा की जा रही हूं
इसीलिए प्यार से दूर हूं


यहां हर चीज में सौदावाजी है
आप अगर उनकी सुनते हैं
तभी आप प्यार की हकदार हैं
तभी आप स्नेह और देखभाल की हकदार हैं



मैं लोगों के लिए किसी काम की नहीं रही
इसीलिए मैं लोगों के दिलों में अपनेपन की हकदार नहीं रखती



क्योंकि मैं एक गुड़िया बिल्कुल नहीं


बड़ी दिलचस्प बात है
खुद को इंसान कहना ही भूल गई
लोगों की बदलती हुई व्यवहार को देखकर




मुझे शिकायत नहीं है
ना ही अफसोस है
लोगों के बदलने पर
या खुद को बचाने की कोशिश करने पर


बस तकलीफ हो रही है
सब कुछ जानकार भी
लगता है काश अनजान राहते


मैं औरों की तरह ही
एक कठपुतली बनी रहती

जो चाहे जैसे ना चाहता
थोड़ा स्नेह तो दिखता





बस मैं देख पा रही हूं
अपनों के बीच में बेगैरत खुद को
कुछ नहीं कहे रही
नहीं सवाल कर रही हूं
नहीं जवाब मांग रही हूं

मैं जानती हूं कोई फायदा नहीं
मेरे चिकने और चिल्लाने से

सब अपने कानों में रूई लगा ली है
मेरी आवाज सुनने से डरे हुए हैं


सब अपने-अपने काम में लगा हुआ है
उनके लिए उनके काम के लोग हैं
उनके अपने हैं
मैं भला बेगैरत मेरी बात कौन सुनता है
अच्छा है की इग्नोर करता फिरें
मेरे दर्द कौन समझता है


सच्चाई मेरी जुबान से भी ज्यादा कर्वी है
और इस सच्चाई को स्वीकार करना दर्दनाक है

और सच्चाई के साथ जीना
घायल दिल पर पत्थर रख देना जैसा है

और अंजान बनने की कोशिश करना
इस पत्थर नुमाऐ भार को और भी बढ़ा देना है






सच्चाई सचमुच में बहुत ही कड़वी होती है
जिसे हम कभी-कभी स्वीकार तो कर लेते हैं
पर
उसके साथ जीना बहुत ही भारी है

abhinisha

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात

जो भी जंतर मंतर की गालीबाज लडकियों को सपोर्ट कर रहे हैं,

भागवान सबके घर में ऐसी ही बेटी, बहू और पत्नी दें.

पर मुझे न दे
सावन सोमवार के व्रत रख लूंगा
पर मुझे न दे

anisroshan324329

https://www.instagram.com/reel/DbkcreKS4QL/?igsh=MWhnYzlzaTV4cXJoYQ==

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

दीप बनो

अँधेरों से मत घबराना,
खुद एक छोटा दीप बन जाना।
राह कठिन हो, काँटे बिछे हों,
फिर भी मुस्कुराकर आगे बढ़ जाना।

जीवन केवल अपना नहीं,
हर धड़कन में संसार बसा है।
जो आँसू किसी के पोंछ सके,
वही इंसान सच्चा बना है।

ज्ञान बाँटो, प्रेम लुटाओ,
सेवा को अपना धर्म बनाओ।
कर्म की राह पर चलते-चलते,
हर दिल में विश्वास जगाओ।

ना धन अमर है, ना वैभव,
ना ऊँचे महलों की पहचान।
अमर वही है इस धरती पर,
जिसने जीता हर एक इंसान।

यदि एक दीप जल सका,
तो लाखों दीप जल जाएँगे।
प्रेम, करुणा और सत्य के पथ पर,
नए सवेरे फिर आएँगे।

चलो ऐसा जीवन जी जाएँ,
जिसे याद करे हर इंसान।
कर्म बने पूजा की माला,
सेवा बने हमारी पहचान।

skptech

Radhe Radhe 🙏❤

sharmaa2

આજનો સુવિચાર

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#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

हर बार समझौता करने वाला इंसान कमज़ोर नहीं होता,
वह बस अपने रिश्तों को बचाने की आख़िरी कोशिश कर रहा होता है।

जब अपने ही कह दें—
"रहना है तो रहो, नहीं तो मत रहो।"
और बार-बार यह एहसास दिलाया जाए कि
"तुम्हारा इस घर पर कोई हक़ नहीं।"

तब दर्द शब्दों से नहीं, ख़ामोशी से बहता है।

सबके लिए सोचने वाले अगर अपने ही बीवी-बच्चों की ज़रूरतें भूल जाएँ,
तो सबसे ज़्यादा टूटता वही परिवार है,
जो उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करता है।

मैं किसी से शिकायत नहीं करूँगी,
न किसी का हक़ माँगूँगी।

बस हे ईश्वर, इतना सामर्थ्य देना कि
मैं अपनी मेहनत से एक-एक पैसा जोड़ सकूँ,
अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत बना सकूँ।

ताकि कल उन्हें कभी यह न सुनना पड़े कि
"तुम्हारा कोई घर नहीं।"

मेरी सबसे बड़ी जीत किसी से कुछ छीनना नहीं होगी,
बल्कि अपने दम पर इतना बना लेना होगा कि
मेरे बच्चों को कभी अपना सम्मान साबित न करना पड़े।

क्योंकि घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बनता,
घर वहाँ बनता है जहाँ सम्मान, अपनापन और सुरक्षा साथ रहते हैं। ❤️🏡
आज मेरी जेब खाली है...
लेकिन मेरे हौसले खाली नहीं हैं।
हाँ, अभी शुरुआत है, इसलिए मुझे दुआओँ और साथ की ज़रूरत है।
हे ईश्वर, बस इतना सामर्थ्य देना कि अपनी मेहनत से इतना कमा सकूँ
कि अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत खड़ी कर सकूँ।
मैं किसी से कुछ छीनना नहीं चाहती,
न किसी का हक़ माँगना चाहती हूँ।
बस इतना चाहती हूँ कि कल मेरे बच्चों को कभी यह न सुनना पड़े—
"तुम्हारा अपना कोई घर नहीं।"
मेरी मेहनत ही मेरी पहचान बने,
और मेरा आत्मसम्मान ही मेरी सबसे बड़ी दौलत। 🤍🏡

archanalekhikha

" તારો સહવાસ ઇચ્છું છું "

જિંદગીના હર મોડ પર, તારો સહવાસ ઇચ્છું છું,
સપ્તપદીના સાત વચનનો, અતૂટ વિશ્વાસ ઇચ્છું છું.

સુખનો ઊગે સૂરજ કે પછી ઘેરાય વાદળ દુઃખનાં,
રાહોમાં ભલે હોય કંટક, તારો સંગાથ ઇચ્છું છું.

આંગણે ખીલતા પેલા, પવિત્ર તુલસીના ક્યારા સંગ,
ઢળતી સાંજે હર આરતીમાં, તારો જ સાથ ઇચ્છું છું.

જીવન-ઉપવને સાથે ઉછેરેલાં વહાલાં પુષ્પો સંગાથે,
હરઘડી અને હરપળ તારા હાસ્યનો પ્રાસ ઇચ્છું છું.

મળી છે તું આ ભવમાં, થયું જીવન ધન્ય આ 'વ્યોમનું',
હર જનમના હર શ્વાસે, બસ તારો અહેસાસ ઇચ્છું છું

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અંજાર. મુ. રાપર

omjay818

⭐मिक्स डोसे⭐

⭐अर्धी वाटी तांदूळ
अर्धी वाटी राजगिरा पीठ
अर्धी वाटी ज्वारी पीठ
अर्धी वाटी बाजरी पीठ
अर्धी वाटी उडीद डाळ
चमचा भर मेथी

⭐दुपारी तांदुळ ,उडीद ,डाळ व मेथी एकत्र भिजवले
रात्री ते सरसरीत वाटून
त्यात बाजरी, ज्वारी व राजगिरा पीठ मिसळून
झाकून ठेवलें
सकाळी पीठ छान फुगले
चवी प्रमाणे मीठ घालून
तव्यावर डोसे घातले
छान कुरकुरीत झाले

⭐बटाटा उकडून नेहमीप्रमाणे कांदा घालून भाजी केली
चटणी
अर्धी वाटी खोबरे
अर्धी वाटी भाजके दाणे
मीठ, साखर ,चिंच, मिरची, जिरे, घालून
चटणी वाटली
#वृषालीच्या स्वयंपाकघरात

#चवदार_चविष्ट

#Vrishali

jayvrishaligmailcom

Divya Bhaskar newspaper 📰

niraliipatel.127808

phulchhab newspaper 📰

niraliipatel.127808

good morning 🌥️☔🌈
have a nice day 🌺 🌸

nikitavinzuda6548

🌶️🍋‍🟩🫚🍱 कविता का शीर्षक ह! चटनी
📙कवियत्री: ममता गिरीश त्रिवेदी ✍️

mamtagirishtrivedi740648

शिव,त्रिपुरेश्वर, शम्भु, महेश्वर, रुद्र ओंकारा,
बेल - पत्र और भाँग धतूरा प्रभु को है प्यारा ।।

पाप - काम संहारक प्रभु के नेत्रों की ज्वाला,
जगहित में जगदीश्वर पी लेते हैं विष प्याला,
नीलकण्ठ की जटा से निकली गंगा की धारा,
बेल - पत्र और भाँग धतूरा प्रभु को है प्यारा ।।

तन में भष्म भभूत लपेटे पहने मृगछाला,
हाथ त्रिशूल कमण्डल डमरू गले सर्प माला,
विश्वनाथ के द्वार लगाती दुनियाँ जयकारा,
बेल - पत्र और भाँग धतूरा प्रभु को है प्यारा ।।

वामभाग में सदा विराजें जग की कल्यानी,
सारी दुनियाँ कहती है प्रभु को औघड़दानी,
दर्शन पाकर हो जाता सबका जीवन न्यारा,
बेल - पत्र और भाँग धतूरा प्रभु को है प्यारा ।।

@सर्वाधिकार सुरक्षित-डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi