कुछ बुँदे है, बादल है...बारिशे और बातें तुम्हारी...
ये मौसम का असर है या इश्क़ की खुमारी...
अजीब सी छुअन है इस मौसम मे,
चाहतों का दौर कुछ यू खिलने लगा है, कोई मिला है हमसे, या कोई मिलने लगा है...
विरान पड़ी थी हसरतें किसी कोने में,
कोई अजनबी दस्तक दे गया है....
मुस्कुराने लगे है होठ, खिलने लगी है ये होठों की कलियां....
सुनी सी इन आँखों मे चमक कोई दे गया है....