“मुझसे नहीं होगा “……..
सबसे मज़बूत वो नहीं
जो कभी झुकते नहीं,
सबसे मज़बूत वो हैं
जो टूटते हुए भी
अपने टूटने को पहचान लेते हैं।
कठोर चेहरों के पीछे
अक्सर थके हुए कंधे छुपे होते हैं,
और जो थककर बैठना सीख ले,
वही सच में आगे चल पाता है।
अपनी पीड़ा को कहना कमज़ोरी नहीं,
अपने दर्द को बाँटना
ख़ुद से ईमानदारी है।
“अब मुझसे नहीं होगा”
यह हार नहीं,
यह इंसान होने की सबसे सच्ची आवाज़ है।
मेहनत ज़रूरी है,
पर याद रखना
मेहनत का बोझ
अगर साँस छीन ले,
तो वह कर्तव्य नहीं
सज़ा बन जाता है।
याद रखो,
तुम पुरुष हो,
पर उससे पहले इंसान हो।
तुम्हें रुकने की इजाज़त है,
रोने की इजाज़त है,
और हर बार सब कर पाने की
कोई शर्त नहीं है।
प्राची तंवर…….