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किसी एक शाम तुम्हारे पहलू में बैठेंगे,
ऐसे कि जैसे उठने की कोई जल्दबाज़ी न हो।।❤️

narayanmahajan.307843

🌙 ज़िंदगी की किताब 🌙

हर सुबह एक नया सवेरा है,
हर शाम कोई सुनहरा बसेरा है।
गिरकर जो फिर से संभल जाए,
असल में वही तो जीना सीख गया है।

ख़्वाब अगर टूट भी जाएँ कभी,
उम्मीद का दिया बुझने न देना।
रास्ते चाहे काँटों से भर जाएँ,
अपने हौसले को झुकने न देना।

वक़्त बदलता है, मौसम भी बदलते हैं,
दर्द के बाद ही फूल खिलते हैं।
जो मुस्कुराकर हर ग़म सह ले,
उसी के मुक़द्दर में उजाले मिलते हैं।

ज़िंदगी एक सफ़र है, रुकना नहीं,
मुश्किलों से कभी डरना नहीं।
मंज़िल उसी को गले लगाती है,
जो हारकर भी बिखरता नहीं।

✍️...Miss Khan

abdulsamad.297328

*बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -276*
11-7-26- शनिवार- *गुलरया* (मन में गाली देना)
संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

*प्राप्त प्रविष्ठियां :-*
*1*
धौंस गुलरया में गुँजा, खूब झाड़वें शान l
शाबाशी जिनखों हँसी, सुनबे लगतें कान ll
***
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
*2*
कुबढाइ जब जबर करै, कोऊ कछु ना केत।
अगर लरम साजी कबै, सबइ गुलरया देत।।
***
-विशाल कड़ा “मांझी”,बडोरा घाट
*3*
भनक लगी जब मंथरा, राजतिलक श्रीराम।
बता गुलरया कें दऔ, कैकइ सुत कौ नाम। ।
***
- रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां
*4*
खूब गुलरया रय बलम, दारू पी कें रोज।
धीरें-धीरें दव मिटा, पूरे घर कौ खोज।।
***
- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
*5*

पैसा रुपया लै भगे, राम लला के नाम।
गुलरयात सबरे फिरैं, भड़यन को जो काम।।
***
-डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल
*6*
उयै चिनूना काट रय, जांनत है सब गाँव।
धरो जनम कौ गलरया, कोई न लेबै नाँव।।
***
- डॉ. देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
*7*
कुबढ़ाई में जो फसौ,झंझट ऊके संग।
इक दिन उड़ ही जायगौ,मौड़े कौ सब रंग।।
***
-प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला
*8*
काम बनै नै जौंन सैं, मतलब होय न सिद्ध।
मौन गुलरया कैत सब, कउआ कुत्ता गिद्ध।।
***
- अमर सिंह राय, नौगांव
*9*
मन माँ देत गुलरया, बाहर हँसे सुहाय।
कपटी मन के चाल सों, नेह न कबहुँ निभाय॥।
***
- डॉ. महावीर पूर्णिया
*10*
अरे गुलरया छोड़ दै,आदत जा बेकार।
गुससां पूरौ गांव है,जलदीं करौ सुधार।।
***
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
*11*
खीज भरे छाती जला , दांतन खौं दे मीस |
गटा निकारत लाल है , भरत गुलरया हीस ||
***
-सुभाष सिंघई, जतारा
*12*
बुरौ गुलरया होत है, साप करौ सब बात।
मन मै जो खुन्नस भरी, बोलें सैं मिट जात।।
***
-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
*13*
बेइ जन गुलरया करें, तन धन तें कमजोर।
जे सशक्त मुँह में कहें, पटकें सकत मरोर।
***
-रामलाल द्विवेदी प्राणेश, कर्बी
*14*
कहौ काम की जो कजन, सुनें न एकउ बात।
नार गुलरया ढोलती, तुरत बायरें जात।।
***
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
*15*
दूर गुलरया सैं रओ, करहे मन बेचैन।
मुशकल से कटवै समव, ऐसे हों दिन रैन।।
***
-श्यामराव धर्मपुरीकर, गंजबासौदा
*16*
बुलयावें हंँस-हँस धना,बोल गुलरया बोल ।
गालन गड़कुलियाँ परैं,कहें दबा कें पोल ।।
***
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़

*©संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

rajeevnamdeoranalidhori247627

आंख्यां जद भी खोलसी,
म्हाने थारै साम्हणै ही पावसी।
थारै सूँ कदई दूर कोनी जासूं।
थाने भगवान ज्यूं पूजूं सूं,
अर थूं म्हारै माथै
आसमाण ज्यूं छायो रैवै।

parmarsantok136152

दो लफ्ज़
गजल


मीटा सही पर तकदीर है मेरा
आया नहीं पर जागीर है मेरा
मिला नहीं पर मंजिल है मेरा
हमें हासिल करना नहीं आता

नाहीं तो छिना
नाहीं अपनी मर्जी से अपना कह देना
हमें बस प्यार करना आता है
नाहीं रूठना आता है नाहीं मानना
हमें बस उसका इंतजार करना आता है

abhinisha

"म्हाने सब ज्यूं बनणो कोनी...
क्यूँकि भगवान नै म्हाने
अलग सोच,
अलग रूह,
अर अलग पहचान देई है।"

parmarsantok136152

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rajukumarchaudhary502010

मेरा भारत

ashuashu858439

મિત્રો,
ફરી હાજર છું, મારી નવી રચના સાથે, આશા છે આપ સહુ ને પસંદ આવશે

jiteshdattani024052

વૃંદાવન ની વાટે,,,🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

🙏🙏बढ़ रही 'बस्ती' से ज्यादा कम हो रही 'मानवता' डरा रही है,

हम रहे 'मुसाफिर' पर हम हमारे 'आशियानों' को संभाल रहे नहीं हैं।🦚🦚

parmarmayur6557

Omm namo bhagavate vasudevaya namaha
Radha Krishna jai jagannath

skptech

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

Do you know that where there’s positive vision, there is no vindictiveness, grudge, a mental note or any complaint inside? This is an important key to distinguish between positivity and negativity.

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dadabhagwan1150

new poem

vanshsingh118873

GUJARATMITRA NEWSPAPER 💫

niraliipatel.127808

कविता जीवन का मर्म

11/7/26

लिखा है क्या हाथों की लकीरों में
छुपा है क्या इन तकदीरों में
मिलता है वही, होता है जो नसीबों में
सिर्फ मेहनत करने से नहीं मिलती सफलता
खेल विधाता का कोई नहीं समझ सकता

होना था जिस दिन राम का राज तिलक
हुआ वनवास उसी दिन, लगा कैकेयी पर कलंक
होनी थीं हो गई टाल सका ना कोई
भविष्य की गर्त में राज छिपे हैं कई

चक्र है ये कर्मिक फल का
हिसाब है ये कई जन्म का
नहीं ज्ञात कौन सा कर्म
बदल देगा अगले जन्म का मर्म

रहता है इंसान इसी भ्रम
'मैं' करता ना समझता कर्म
कर्ता करे ना कर सके
बाल ना बांका होय

जिसकी किस्मत महाकाल लिखें
उसकी बिगाड़ सके ना कोई
कब किससे कैसे मिलना है
कर्मों का फल जरूर मिलना है

दीन सेवा ही परम धर्म है
अक्षर नाद ही परम ब्रह्म है
तप वाणी का जिसने किया
मोह छोड़ पर उपकार किया
सुधारा उसने अपना कर्म है
यही जीवन का मर्म है।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली
11/7/26

drvandnasharma8596

"थारो गुस्सो दो घड़ी रो है...
पण म्हारो प्रेम
जनम-जनम रो।

my Little Krishna ❤️

parmarsantok136152

🏵️ छोले कटलेट

🏵️साहित्य
एक वाटी छोले
दोन मिरच्या
आले
जिरे
बडीशेप
कोथिंबीर
काळे व पांढरे तीळ
मीठ चवीनुसार
तिखट
हळद
कसुरी मेथी
गरम मसाला
ओरिगानो (ऐच्छिक)

🏵️कृती
रात्री छोले भिजवुन ठेवावे
सकाळी त्यात मिरची आले घालून कमी पाण्यात भरड वाटावे

🏵️या वाटलेल्या मिश्रणात जिरे ,बडीशेप ,कोथिंबीर ,तिखट
हळद ,कसुरी मेथी ,गरम मसाला ओवा ओरिगानो (ऐच्छिक) घालून एकत्र मळून घ्यावे व साच्यातून बदामी आकारात शेप द्यावा
अर्धा तास फ्रीज मध्ये सेट करावे


🏵️ अर्ध्या तासानंतर
कढईत तेल घालून कडकडीत तापवावे
नंतर गॅसची आच मंद करुन हे कटलेट खरपूस तळून घ्यावेत

🏵️सोबत
कांद्याच्या रिंग
आणि टोमॅटो सॉस

jayvrishaligmailcom

ऋषभ जी के रचित श्रीराम आरती -
छन्द - चौपाई
आरती वर श्रीराम जी क ।
मङ्गल कीर्ति सीय स्वामी क ॥टेक॥
परब्रह्म लौकिक अवतारा ।
निराकार लेहन आकारा ॥
अद्भुत लीला से जग तारा ।
तिमिर पाप दूरी भक्तन्ह क ॥क॥
सन्त वेद पुराण गावेला ।
रामचरित मङ्गल फल देला ॥
सुघर पवित्र चरित्र सुहेला ।
जीवन दर्शन बा श्रीराम क ॥ख॥
गावा विधि हर मुनि जन नारद ।
शुक सनकादि पार्वती शारद ॥
व्यास वर कवि विज्ञान विशारद ।
ग्रन्थ शेष हनु सन्त वाल्मीक ॥ग॥
काकभुशुण्डि कीर्ति गावेला ।
दर्शन दे परम धाम देला ॥
सव मोह माया दुःख हरेला ।
माता पिता हर तरह ऋषभ क ॥घ॥

ऋषभ विश्वकर्मा

rishabhvishwakarma