Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

कौन कहता हैं कि खता
सिर्फ़ नज़रों कि होती हैं
नज़र तो बेचारी मज़बूर
हाथों ज़िगर के होती हैं

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Goodnight friends sleep well

kattupayas.101947

अंतहीन अकेलापन
कविता


अंतहीन अकेलापन
परी सुखा और बंजर जमीन
और आसमान में करारे के धूप
दूर दूर तक कोई हरियाली नहीं
कोई समुद्र नहीं
ना बारिश आने की कोई उम्मीद है

ऐसा लग रहा है कि रेगिस्तान में
भुखे प्यास गिरते पड़ते मुसाफिर चल रहा है
बिना कोई आश के
बस उम्मीद लिए

कही बंजर जमीन खत्म हो जाए
और हरियाली दिखे
कहीं रेत के किनारा मिले
और समुद्र देखें
कहीं मौसम बदले कढ़ी धूप को बादल ढक ले
और बारिश हो जाए

और इस बेजान शरीर में जाना आऐ गे
कहीं तो अनाज का एक निवाला भी
एक टुकड़ा भी मरते हुए आत्मा को नसीब हो

इस अंतहीन अकेलेपन में बस चलते रहना उम्मीद किए हुए डरावना लगता है
और इस डरावनी सफर से गुजरना नामुमकिन है

फिर भी यह जिंदगी है
बस नामुमकिन सफर पर चलते रहना
मंजिल का कोई ना किनारा पाना
बस अकेले अपने दर्द गम तन्हाई की बोझ को ढोते रहना

सबसे बड़ी नाइंसाफी है
जिंदगी मिलने के बाद एक प्राणी के लिए


फिर भी कुदरत अपनी फितरत नहीं बदलते
ना हीं किसी पे रेहेम दिखाते हैं
और हम बस जीते रहते हैं
इस अंतहीन आस लिए
जिसका कोई मतलब ही नहीं

abhinisha

🥭आंब्याचे सांदणे

आंब्याच्या मोसमात सांदणे खुप वेळा केले जाते
प्रत्येक वेळेस नविन कलात्मकता वापरायची 🙂

🏵️सव्वा वाटी केशरी रवा
अथवा थोडा जाडसर रवा
एक वाटीभर आंब्याचा रस थोडे केशर घालून
(केशर आपल्या आवडीनुसार वापरावे )
चवीनुसार मीठ
पांव चमचा सोडा
चार चमचे साखर (आंब्याच्या गोडी नुसार)


🏵️रवा कोरडाच भाजुन घ्यावा
आंब्याचा रस व रवा एकत्रित करून भिजवून घेणे
लागल्यास थोडे दूध वापरावे
दोन तासांनी पुन्हा मिश्रण थोडे घट्ट होते
परत लागेल तितके दूध घालून
सरसरित करून घेणे ..

🏵️आंब्याच्या गोडीच्या प्रमाणात साखर घालणे
गोड पदार्थात घालतो तसे थोडे चवी पुंरते मीठ घालणे
व मिश्रण पाव चमचा सोडा घालून चांगले फेटून घेणे
आमचा घरचा आंबा गोड असल्याने मी अजिबात साखर घातली नाही

🏵️कुकरच्या भांड्यात वाफवून याच्या बदामी आकाराच्या साच्यात वड्या पाडल्या

फोटो घरच्या बागेतील हिरवळी वर....

jayvrishaligmailcom

મોજેરીબા by Vishakha Mothiya | વેબ ગુર્જરી

અરુણાચલ પ્રદેશના એક એવા સ્વાતંત્ર્ય સેનાનીની વાત કરીશું, જેણે ભારત દેશની આઝાદીની લડતમાં ભાગ લેવા માટે પોતાનો વેપાર છોડી દીધો હતો.

લેખ વાંચવા અહીં લિંક પર ક્લિક કરો - https://share.google/7J57csqGvR9IRtgEi

Read & Share

#unsungheroes #indiaindependence #jaihind #gujaratiwriter #janvajevu

mothiyavgmail.com3309

jai shree ram.....

sonambrijwasi549078

kis chamgadad ne likha hai . sale kutte sab kutte hi hote hai waise mard sab usse bhi bade kutte hote hai. nibhana inke bas ki bat hi ni hai

hindbharat

हे प्रभु
कैसी है ये दुनिया बनाई
मुझे तो समझ ना आई
क्या सही क्या बुरा
सब कुछ तुमने ही रचाया
एक बीज से कैसे पौधा बनता
इंद्रधनुष आकाश में कैसे बनता
कहीं धरती मिलती आकाश से
कहीं नदियां मिलती समन्दर से
कहीं ऊँची-ऊँची इमारतें
कहीं टेढ़े-मेढ़े रास्ते
जितना मैं सोचूं, उतना ही उलझूं
कैसी ये रीत, कैसी परम्परा
अंत में सब राख हो जाना है
यही रह जायेगी सब माया
साथ नहीं कुछ जाना है
जीवन है क्षणिक बुलबुला जल का
कब फूट जाय किसने जाना है
पांच तत्व जल, भू, अग्नि, वायु, आकाश
प्राण है कहाँ, कहाँ चले जायेंगे
तेरा-मेरा, जीवन का सब फेरा
आए कितने और कितने सिकन्दर जायेंगे
ये दुनिया एक छलावा है
जान ले खुद को समय से पहले
आयेगा तेरा भी कल बुलावा है
न आदि है न अंत है
सब शून्य है, शून्य में ही यही सृष्टि है
एक चक्र है ये जीवन, दर्शन उसकी दृष्टि है

मैं कौन हूँ क्या है मेरा ध्येय
ले लो शरण मुझे अब अपनी
नहीं समझना मुझे कुछ भी,
शेष न रहे अब कुछ ज्ञान
तेरे दर्शन की प्यास है
अब तेरी ही आस है
परब्रह्म परमेश्वर तू मेरा विश्वास है
हे प्रभु आपको वंदन बारम्बार है।
।। जय महाकाल ।।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

बालकनी
हर घर में होती है
बालकनी
एक ऐसी जगह
जहाँ से खुलती है विचारों की खिड़की
दिखाई देता है सारा आसमां
मिलते हैं मेरे सपनों को पंख
बीतपाने आती है एक नन्ही चिड़िया
दूर पेड़ पर करतब दिखाती नन्ही गिलहरी
एक ऐसी जगह
जहाँ अक्सर आती हैं महिलाएं
अपने केश संवारने
युवा अपने फ़ोन पर बीतपाने
बुजुर्ग अपनी पोतों के किस्से सुनाने
बच्चे आते हैं नयी दुनिया को समझने
कुछ सामान बाहर फेंकते हैं
कुछ अन्दर तोड़फोड़ करते हैं
बालकनी से झाँक - झाँक कर
राहगीरों को आवाज़ लगाते हैं
कभी बन्दर, कभी चिड़िया
जीत - जीत चिल्लाते हैं
एक ऐसी जगह
जहाँ छिपाते हैं कुछ अपने आंसू
मिटाते हैं कुछ अपनी उदासी
जलाते हैं कुछ अपना क्रोध
जब शांत हो जाता है मन
हल्का सा मुस्काते हैं
और बीतपाते हैं
एक कप काफी लेकर
बीतपाती हैं साथ उनके बालकनी - - - ||
=============....

डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

धरती सी सहनशील माँ है
पिता आकाश से भी ऊँचे
मन तो पिता का भी करता है
खेलूँ अपने बच्चे के साथ
करूँ कुछ मस्ती ,कुछ पागलपन
सिखाऊं कुछ नया साथ रहकर
मारकर अपने मन को वो भविष्यसृष्टा पिता
जाता है अपने काम पर
खटता है रात -दिन ,सुनता है बॉस की
बीमारी में भी करता काम
कभी बयां न किया अपना दर्द
किसी के आगे ,रहता मजबूत
अपने परिवार के आगे. खटता है रात -दिन ,सुनता है बॉस की
बीमारी में भी करता काम
कभी बयां न किया अपना दर्द
किसी के आगे ,रहता मजबूत
अपने परिवार के आगे
थका -हारा घर जब वो लोटे
देख संतान को सोता चैन से
भूल जाता सारे गम ,सारी चिंता
करने पूर्ण बच्चों के सपने ,इच्छाएं
करता है तमाम कोशिशें
दुनिया ने पत्थर दिल कह तो दिया पिता को
पर सूखे आंसू ,दबे जज्बात ना देखे
पूरी ज़िंदगी संघर्ष में हवन कर दी जिसने
उस पिता को शत -शत प्रणाम डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

मायके की गलियां
आज बस यूं एक ख्याल आया
मैं हूँ अपनी माँ की परछाई
वो ममता भरा साया
ससुराल हो भले ही कितना प्यारा
अवचेतन मन में महकता हमेशा बचपन प्यारा
वो मायके की गलियां, वो शरारतें
साँझ होते ही लग जाती थीं छत पर बैठक
पापा सुनाते हमें अपने संघर्ष के किस्से
पर नटखट बचपन आया हमारे हिस्से
लड़की चाहे बूढ़िया भी हो जाए
मायके की याद ना दिल से जाए
क्योंकि वहाँ वो पापा की राजकुमारी थी
भाइयों की दुलारी थी, जिद्दी थी
बेफिक्र हँसती थी, नये ख्वाब बुनती थी
ना कोई जिम्मेदारी थी,
बस पढ़ना ही एक लाचारी थी
सभी के लिए मायका होता है सुहाना सपना
चाहे बाद में कोई प्यार न करे अपना
एक उम्र के बाद बस यादें रह जाती हैं
मायका शब्द सुनते ही, अधरों पर
मुस्कान आती है
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

Do you know that there is absolutely no need to continue feeling the way you do? Investigate and search for the causes which are contributing to the way you are feeling. If you are truly committed to finding a solution to your present dilemma, then things will most certainly resolve themselves.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/qUa3Ef5s

#facts #spirituality #spiritualfacts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🙏🙏किसी के दर्दको संवेदना से महसूस करना उसके दुःखों को समझना और हृदय से आश्वासन देने का काम एक "नर्स" बेहतर तरीके से निभातीं है।🦚🦚

parmarmayur6557

Good Morning 🌅

harshparmar8722

यूंही गिरते गिरते एक दिन सभंल जाऊंगी
बदला नहीं लूगीं किसी से बस बदल जाऊंगी

priya216447

मे मृत्यु से मोहित हु,
मुझे संसार की सुंदरता का मोह नहीं ।।।

taranaparnathi

प्रेम....❣️

dhra

एक ऐसी ऊंचाई,
जहां से दुनिया तो दिखे,
मगर दुनिया मुझे न देख पाए।

एक ऐसी भीड़,
जहां मैं मौजूद भी रहूं
और अनुपस्थित भी।

एक ऐसी धुंधली खिड़की,
जहां से शहर साफ़ दिखे,
मगर मेरी परछाईं
किसी को न मिले।

एक ऐसा मंच,
जिसकी रोशनी में मैं बोलती रहूं,
पर दर्शकों की आंखें
मुझ तक आने से पहले ही बुझ जाएं।

दुनिया रहे,
मगर उसका शोर
मेरे भीतर घर न बना पाए।
—# चंद्रविद्या उर्फ़ रिंकी

chandervidya

क्या आप भी दूसरों के व्यवहार से दुखी हैं? जानिए दादा भगवान का जादुई समाधान!"

“अक्सर हम दूसरों को अपनी तकलीफों का जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन जब नज़रिया बदलता है, तो जीवन बदल जाता है। दादा भगवान के विज्ञान से मिली इस अनमोल समझ को पढ़ें और साझा करें। 🙏✨”

“क्या कभी आपको ऐसा लगा है कि आपकी शांति की चाबी दूसरों के हाथों में है? कोई कुछ कह देता है और आप घंटों परेशान रहते हैं?”

अक्सर हम अपनी तकलीफों का दोष दूसरों को देते हैं, लेकिन दादा भगवान के ‘अक्रम विज्ञान’ ने मुझे एक ऐसी समझ दी है जिसने मेरे जीने का अंदाज़ा ही बदल दिया। कैसे हमारा अपना ‘कर्म’ और सामने वाला ‘निमित्त’ मिलकर काम करते हैं? कैसे एक छोटी सी प्रार्थना और माफी हमारे भारी से भारी कर्म को हल्का कर सकती है?

अपनी शांति वापस पाने और रिश्तों को एक नई गहराई देने के लिए, इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ें। यह आपकी सोच और आपके जीवन, दोनों को बदल सकता है। 👇

अक्सर जब कोई हमें दुःख देता है या हम पर बिना वजह चिल्लाता है, तो हमारा मन कहता है— “गलती उसकी है, वह कितना बुरा है।” लेकिन क्या वाकई ऐसा है? आध्यात्मिक विज्ञान (अक्रम विज्ञान) के अनुसार, जीवन के कठिन प्रसंगों को सुलझाने की एक अद्भुत चाबी मिली है, जो मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहती हूँ।

1. सामने वाला कौन है?
हमें लगता है कि सामने वाला व्यक्ति हमें दुःख दे रहा है, लेकिन हकीकत में वह सिर्फ एक ‘निमित्त’ (Postman) है। मेरे ही किसी पुराने कर्म का हिसाब चुकता करने के लिए कुदरत ने उसे एक साधन बनाया है। दादा भगवान कहते हैं— “भुगते उसकी भूल।” यानी जो आज दुःख भोग रहा है, गलती (हिसाब) उसी की है। जैसे ही हम सामने वाले को निर्दोष देखते हैं, हमारा आधा बोझ उतर जाता है।

२. बाहर से कड़क, अंदर से नर्म
अक्सर लोग पूछते हैं— “अगर हम सबको निर्दोष देखकर माफ करेंगे, तो लोग हमारा फायदा उठाएंगे।” यहाँ समझ की ज़रूरत है। हमें अंदर से सामने वाले को निर्दोष मानना है ताकि हमारा द्वेष खत्म हो, लेकिन बाहर से व्यवहार में हम ‘कड़क’ हो सकते हैं। जैसे एक माँ बच्चे को सुधारने के लिए नाटक की तरह कड़क होती है, वैसे ही हम अपनी सीमाएं तय कर सकते हैं, पर मन में कड़वाहट रखे बिना।

३. प्रार्थना और जागृति का जादू
रोजाना की एक छोटी सी प्रार्थना हमारे जीवन की दिशा बदल सकती है:

“हे अंतर्यामी परमात्मा! मुझसे मन, वचन, काया से किसी भी जीव को किंचित मात्र भी दुःख न हो, ऐसी मुझे शक्ति दीजिए।”

यह प्रार्थना हमारे भविष्य के नए कर्मों को बांधने से रोकती है। भले ही पुराना स्वभाव (गुस्सा) कभी-कभी बाहर आ जाए, लेकिन अगर हम तुरंत जान लेते हैं कि “यह गलत हुआ”, तो हमारी जागृति शुरू हो जाती है।

४. अपनी भूलों की सफाई (प्रतिक्रमण)
जब भी हमसे कोई गलती हो या मन में किसी के प्रति बुरे विचार आएं, तो तुरंत मन ही मन माफ़ी मांग लें:

“मैं आपके भीतर बैठे शुद्धात्मा से क्षमा मांगता हूँ, मुझसे गलती हो गई, ऐसा नहीं होना चाहिए।”

जब हम अपनी गलती का पक्ष लेना छोड़ देते हैं और दोबारा न करने का निश्चय करते हैं, तो कर्म की जड़ कट जाती है।

निष्कर्ष:
बदला लेने से हिसाब बढ़ता है, और माफ़ करने (प्रतिक्रमण) से हिसाब चुकता होता है। अपनी सोच बदलें, जीवन अपने आप शांत हो जाएगा।


यह मेरी अपनी समझ है जो मैंने आध्यात्मिक चर्चा के माध्यम से सीखी, उम्मीद है यह आपके भी काम आ

nityaoswal430745

किस्मत से मिलते हैं पार्ट 2
जो भी यहां मिलते हैं




दयावान वो किस्मत नहीं
जो किसी पे रेहमत बरसाए


ताकतवर वह लोग हैं
जो किस्मत को अपने मेहरून बनाए



झूठ है यह कहने को किस्मत से ही मिलता है
जो भी यहां मिलता है

किस्मत बस एक नाम है
अपने कायरता और नाकामयाबी को छुपाने के लिए


और यही तो है धर्म का धंधा
नाकामयाबी हर दुखी मन का फंडा


किस्मत को कोश कोश के बैठे
फिर लग जाते हैं
अंधविश्वास को भगवान बनाने
किसी सत्याग्रह के मूल्य धूप सुनने
किसी इंसान को भगवान बनाकर कर पूजने


या दिल के जज्बाते
गहरी जन्नत दिखा दे
और फिर नर्क में ले जाते हैं



नहीं पता क्यों दिल लगा के सब खाया
हम अपना भी ना कभी हो सका



मूल्य धूप सुनते त्याग दी मोह माया
वह मोह माया जिसमें बंध के कर्मकांड हमारे थे बढे

जब से छोड़ा मोह माया
करम कांड है
पर फिर भी हम दासी भगवान के



और बढ़ते क्रम कांड
और हम यह हमारे अभियान के


स्वयं भक्त हम महाकाल के
आचरन हमारे कितने भी हो मेले


हमने जब पहने हैं सफेद कपड़े की
चांद की मखमली जैसी रोशन कपड़े

दाग है यह वेदाग है
हम पुण्य आत्मा
हमारे लिए सब जायज है



किस्मत के भरोसे हम भी उनके रखते हैं
जो खुद से डरते ही रहते हैं

जो लाचार परे बेवस
हम उनकी भावनाओं की कीमत
खुद को ईशवर बात कर लगाते हैं



क्या पाप क्या पुण्य
पाप भी हमारे लिए पुण्य बन जाते हैं



और इससे सत्याग्रह में
झूठ को ही हम सच बताते हैं


नहीं बताते हम इंसान की डर है भरम
और हम उनके डर की ही फायदा उठाते हैं

नहीं बताते हम उनकी कमजोरी ही उनको खा जाता है
और उनकी कमजोरी ही हमे भगवान बनाते हैं



किस्मत की भरोसे उन्हें रखते हैं
हम अपने झूठ के ही भरोसे ही
दुनिया को खोखली कर जाते हैं



हां यह जानते हैं हम
हम जान किसी के लेकर
हम अजेय हो जाएं गे


अजय हो जाते हैं
अंतहीन समय के लिए
हम उनके लिए देवता बन जाते हैं


और उन्हें हम बताते हैं
यही किस्मत है
और हमें पूजना तुम्हारे धर्म है


और इस धर्म का पालन करो हमारे सुमीरन करो
हम तुम्हारे इशवर जसे ही पूजनेय हैं



हां हम तुम्हारे पूजनेय हैं

abhinisha

🫶🏻❤️💕

avinashgondukupe96025gmail.com5127

## **Important Update: Alfha Mater Pen Competition**
**Subject: URGENT: Action Required Regarding Your Competition Entry**
Dear Participant,
Thank you for your initial interest in the **Alfha Mater Pen Competition** hosted by **Alfha Production House**.
We are reaching out because our records show that while your entry form was successfully received, your final work was not submitted via the official portal by the **May 10th** deadline. As of today, **May 11th**, the portal is closed and your registration has been tentatively declined.
### **Late Submission Appeal Process**
If you still wish to participate and acknowledge that the delay was due to a personal oversight or technical issue on your end, we are offering a final **Appeal Window**.
* **How to Appeal:** Send an official email to the Alfha Support Team stating the specific problem or reason for your late submission.
* **Review:** If the support team finds your appeal valid and supportive, your submission will be considered for the competition.
* **Deadline:** You must act quickly. You have **only 3 days** (May 11th – May 13th) to submit your appeal.
If you choose not to appeal, we still appreciate the effort you put into the registration. We invite you to use this time for full preparation for our next major competition arriving this **September**.
We look forward to hearing from you soon.
Best regards,
**[Name]**
**Alfha Production House**

alfha202141