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India marks its Independence Day on August 15, commemorating the end of British colonial rule in 1947 and the birth of a free nation.
The main national celebration takes place at the Red Fort in New Delhi, where the Prime Minister hoists the national flag and addresses the country.

The independence movement was led by Mahatma Gandhi and figures like Jawaharlal Nehru, utilizing non-violent resistance and civil disobedience.

Happy independence day 🇮🇳
jai Hind..
vandhe mataram..
Bharat Mata ki Jay..

words.dilse

न पूछो ज़माने से कि क्या मेरी कहानी है, > हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिंदुस्तानी हैं। > आन देश की, शान देश की, देश की हम संतान हैं, > तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी यह पहचान है! 🇮🇳

ritukumari509471

happy independence Day 🇮🇳

heenagopiyani.493689

happy independence day 🫡🇮🇳🙏

anitasorte6489gmail.com190157

झूठ में क्या बुराई है
किसी सच्चे आदमी में पूछना

happy independence day

anisroshan324329

Happy independence day🇮🇳

mitra1622

बेटी?....

माँ वह, जो किसी और के बच्चों को भी ममता दिखाती है।
फिर क्यों मैय्या, जिस संतान को तोहे जन्म दिया,
उनके साथ तुमने क्यों भेद-भाव किया?
मैंने भी तोरी कोख से जन्म लिया,
उसी की तरह वही दूध पीया,
फिर भी यह भेद-भाव क्यों, मैय्या?
क्यों हर बात मुझे ही समझना पड़ता है मैय्या?
वह भी तो तोरी बात को समझ जाए ना मैय्या।
अगर मैं बेटी हूँ तोरी, तो वह बेटा है तोरा,
क्यों मैं ही तोरी पीड़ा का भार अकेले ले चलूँ?


क्या मेरे नाम से जन्म लिए यह तोरे शब्दों ने—
'तोहे जैसी बिटिया किसी को ना मिले, करम फूटे थे मेरे जो मैंने तुझे जन्म दिया'
आखिर क्यों मैय्या? यह भेद-भाव क्यों?
उसका नाम छोड़ो, वह तो कहे ऐसा ही है।
मैय्या तो ममता के लिए जानी जाती है,
फिर यह भेद-भाव क्यों मैय्या?
उसके भाग्य में तू मैय्या है, तो मेरे भाग्य में क्यों नहीं?


अगर वह 'राजा बेटा' है तोरा,
तो मैं भी तो तोरी बेटी हूँ।
फिर यह भेद-भाव क्यों आया?
वह वारिस है, तो मैं क्यों 'पराया धन' कहलाऊँ मैय्या?
मैं भी तो तोरी बेटी हूँ,
तूने ही तो जना है मुझे, तूने ही दूध पिलाया मुझे,
फिर आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?
आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?

mayahanchate855175

Bharat mata ki jai Radhe Krishna

skptech

तुम्हें होगा डर

मेरी वफ़ा से
मेरे इरादों से
मेरे इश्क़ से
मेरे प्यार से

मुझे तो बस ये डर है

तुम्हारे न होने का
तुम्हें खोने का
तुम्हारे दूर जाने का
तुम्हारे रोने का

anisroshan324329

ना देखना मेरी नज़र से...
खुद को कभी आईने में...
उम्र ही लग जानी है...
ना देखना मेरी नज़र से...
खुद को कभी आईने में...
उम्र ही लग जानी है...
फिर नज़र उतरवाने में... फिर नज़र उतरवाने में...

anisroshan324329

Aap sabhi ko 15 august ki hardik shubhkamnaye

sandeepadventurestories

do no frind the

virdeepsinh

मोहब्बत के चिरागों में नफ़रत को बसने न देना,

हँसता रहे ये हिंदुस्ताँ हमारा, इसे कभी बिखरने न देना ।।

anisroshan324329

🌿मोड आलेली नाचणी आणि मिश्र डाळ डोसे 🌿

🌿साहित्य
एक वाटी नाचणी
मूग मसूर उडीद डाळ एक वाटी

🌿कृती

एक वाटी नाचणी
रात्री भिजवून ठेवणे
सकाळी तिला मोड आणण्यास एका चाळणीत ठेवणे
ही चाळणी एका पातेल्यात पाणी घेऊन त्यावर झाकून ठेवणे
दोन दिवसात छान दरदरीत मोड येतात

उडीद, मूग, मसूर सर्व मिळून एक वाटीभर सकाळी भिजत ठेवणे
संध्याकाळी या डाळी आणि मोड आलेली नाचणी बारीक वाटून एकत्र करून ठेवणे

रात्र भर ठेवले की सकाळी पीठ छान फुगून येते
चांगले हलवून मीठ घालून डोसे घालणे

मोड आलेली नाचणी
सर्व डाळी
शिवाय आंबवलेले मिश्रण यामुळे
हा डोसा पौष्टिक व चवदार होतो
आपल्या आवडीच्या चटणी अथवा भाजी सोबत खायला घेणे

jayvrishaligmailcom

તારી પાસે બધો ખુલાસો કરવામાં બીક લાગે છે,તમને ગુમાવવાની.
હું તો ચાહું છું.તેટલું જ યાદ રાખું છું,એજ મારી મૂડી છે,ચાહવાની.

savdanjimakwana3600

शिव का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है,
‎बाकी सब तो समय का किनारा है।
हर हर महादेव 🌿🙏

anitasorte6489gmail.com190157

✨ MY DARK LIGHT — Upcoming BL Romance Novel
Meet Naveen, a brilliant prosecutor hiding a dangerous secret, and Vihaan, the feared king of the underworld. When justice collides with darkness, an unexpected love begins. But can love survive secrets, crime, betrayal, and a masked identity? 👀🔥
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Get ready for a story of love, mystery, crime & obsession. ❤️‍🔥
Written by Neha Banchhor ✍️💖

nehabanchhor331838

પાંખે સપનાં,
ટેરવે ક્ષણો વીધી,
મેટ્રો દોડતી.

suketu100

परदेश में तीज कैसे मनाऊं

आ गई तीज सखी, कैसे मनाऊं
ना पड़े झूले अमीया की डाल पे
वो झूले, वो अमीया की डाल कहां से लाऊं
आ गई तीज सखी कैसे मनाऊं

मेरा मन फंसा है पीहर गलियों में
मैं यहां परदेस में, कैसे जाऊं
फर्ज हमेशा मुझको पुकारे
कैसे तीज मनाऊं

सावन देखो बरस रहा है
मायके जाने को मन तरस रहा है
राह निहारे मां मेरी,
पर मैं छोड़ पिया का आंगन
तीज मनाने कैसे जाऊं

रच गई मेहंदी हाथ सखी
नेह की पींगे कैसे क बढ़ाऊं
शहर में अकेले पड़ गई मैं तो
बिन सखियों के तीज कैसे मनाऊं

चूड़ी खनके, खनके पायलियां
बिजली कड़के, बरसे बदलियां
मन रोये याद कर पीहर की गलियां

ना है झूले, ना है सखियां
कैसे गीत मिलन के गाऊं
सखी कैसे तीज मनाऊं

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

મારું દિલ નાજુક છે,તમારા કઠોર જવાબ સહન નથી કરી શકતું ત્યાં દિવસ રાત ઉજાગરો આખો.
હું ક્યાં માગું છું,કોઇ સ્થૂળ ચીજ! ફક્ત તમારો હસમુખો માસુમ ચહેરો રૂબરૂ જોવા તડપે છે,મારી આંખો.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

जिंदगी.,....

कभी धूप है, कभी छाँव है जिंदगी,
कभी हँसी है, कभी घाव है जिंदगी।
जो कल मिला था, आज दूर हो गया,
यही तो बदलता हुआ भाव है जिंदगी।
कभी अपने भी पराए हो जाते हैं,
कभी अजनबी दिल के करीब आते हैं।
जिसे हम समझते हैं अपना हमेशा,
वही अक्सर हमें सबक सिखाते हैं।
गिरना भी पड़े तो घबराना नहीं,
टूट जाओ मगर बिखर जाना नहीं।
रास्ते चाहे कितने भी मुश्किल हों,
अपने कदमों को पीछे हटाना नहीं।
वक्त किसी के लिए रुकता नहीं,
दर्द हमेशा दिल में टिकता नहीं।
आज अगर आँखों में आँसू हैं तो क्या,
हर मौसम हमेशा एक-सा रहता नहीं।
बस चलते रहो, चाहे राह कठिन हो,
उम्मीद रहे तो मंज़िल भी निश्चित हो।
जिंदगी ने जो दिया, उसे स्वीकार करो,
और जो नहीं मिला—उसका इंतज़ार करो।
क्योंकि जिंदगी नाम ही चलते रहने का है,
गिरकर फिर अपने पैरों पर खड़े होने का है।
हार मान लेना तो आसान है मगर,
असली मज़ा तो जिंदगी से लड़ने का है।

mannugujjar

"...ओ साजना..."

क्यों नहीं आए तुम पहले
जब शाम हो रही थी
सूरज टूट रहा था
बिखर रहा था
डूब रहा था बारिश में

क्या तभी तुम्हें दस्तक देनी थी?

प्रभात देखी है तुमने
मौसम कुछ अलग होता हैं
रौशनी पेड़ो के झुरमुट से
छलनी नहीं हो रही होती है
बल्कि आ रही होती है छलकर
आहिस्ता दबे पांव -
पिंजरे में कैद चिड़िया की तरह नहीं
वह गाती है मधुर विरह में गहराई से।

हां, तुम्हें उन दिनों ही आ जाना चाहिए था
जब उन्स की बूंदे बदन पर प्रेम लिखती थी।

पर आ ही गई हो न तुम
मैं तो अब भी तुम्हारे कूचे के
किसी किराना दुकान पर घंटों सिगरेट पीता
खड़ा रह सकता हु
उठे धुएं में तुम्हारे घर को उतनी ही देर निहार सकता हु
जितना उन दिनों देखा करता था
जब तुम थी; कही गई नहीं थी।

जामुनी सारी में किसी लकड़ी के ठेले पर
मुझे देखते हुए तुम
चाय का एक-एक घुट पीया करती थी।

क्या मेरी वह चूड़ियां
तुमने संभालकर रखी है
बैंक के किसी लॉकर में
या उन नजरों से छुपाकर
जो नजरे जानती थी
की तुम मुझे सिर्फ जानती नहीं हो जान।

और वह पायल?
अरे हां, कितनी मीठी याद है वो
जब तुम्हारे पैर मैले न हो
इसलिए तुमने मेरे हाथों पर
अपना मुलायम पांव रखा था
उसी दिन तो मैंने तुम्हें वह पायल पहनाई थी
अपने हाथों से।

ये वही मनहूस दिन था
तुम्हारे भाई ने मुझे देख लिया था
पायल पहनाते हुए,

और उसी दिन से
शाम होने लगी
सूरज टूटने लगा
बिखरने लगा ही था बारिश में -

के तुमने दस्तक दी
फिर एक बार
और मैं चल पड़ा
मचल पड़ा फिर एक बार।

अब तुम देखना प्रभात
ऊषा का मौसम ही कुछ अलग होता हैं
लेकिन अब पेड़ो के झुरमुट से नहीं
बल्कि आ रही है तुम्हारे हिस्से के हर रंध्र से।

मैं सतर्क हु
क्योंकि अब वे आंखे ज्यादा पैनी हो गई हैं
चुभने लगी है उनकी आंखों में तुम्हारी पायल।

आहिस्ता दबे पांव
कुछ भी हो सकता हैं
क्योंकि यहां लड़की के पैदा होते ही
उसके लिए सोने का पिंजरा तैयार किया जाता है।

कल तुमने मुझसे पूछा था कि
क्या मैं अब भी तुम्हारे साथ हु
और मैंने कुछ भी न सोचते हुए
हां, में सिर हिला दिया था

कुछ भी न सोचते हुए
अनकहे ही महसूस करते हुए
सामनेवाले को पढ़ लेना ही प्रेम है।

anupgajare819691