बेरहम है दुनिया
और चाहती है शांति
मतलबी इतनी है कि
बेमतलब किसी को न जानती।
जो हो रहा साथ अपने
क्या यह पहले से ही है लिखा
ऐसा ही अगर है
तो उसने सब फ़िज़ूल क्यों लिखा।
सूज गई हैं आँखें
ज़रा देखो तो आईना
सवेरा होकर गुजर गया
पर नींद आई ना।
सूरज निकलते देखा है
देखा है डूबते
जो संग इसी के चल दिए
वो भी क्या खूब थे।