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“भाभी, प्लीज़ मम्मी को मत बताना… भैया रात को चोरी-छिपे मेरे कमरे में आते हैं…”
ननद की ये बात सुनकर पूजा के हाथ से पानी का गिलास नीचे गिर गया। काँच टूटने की आवाज पूरे कमरे में गूंज उठी। सामने खड़ी उसकी ननद रिया घबराकर पीछे हट गई। उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। पूजा का दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि उसे लग रहा था अभी बाहर निकल आएगा। ऊपर कमरे में उसका पति आदित्य आराम से सो रहा था… और नीचे उसकी छोटी बहन ये कैसी बातें कर रही थी?
पूजा पिछले चार सालों से इस घर की बहू थी। शादी के बाद उसने इस परिवार को दिल से अपनाया था। आदित्य एक जिम्मेदार पति था, सास-ससुर अच्छे थे और रिया तो शादी के बाद से ही पूजा के सबसे करीब थी। दोनों ननद-भाभी कम और बहनों जैसी ज्यादा थीं। लेकिन आज… आज एक पल में सब बदल गया था। पूजा कुछ समझ नहीं पा रही थी। उसने कांपती आवाज में पूछा, “रिया… ये तुम क्या बोल रही हो?”
रिया की आंखों से आंसू बहने लगे। उसने जल्दी से पूजा का हाथ पकड़ लिया और बोली, “भाभी, आप गलत मत समझना… मैं बहुत डर गई हूं…”
“सीधे-सीधे बताओ आखिर बात क्या है?” पूजा की आवाज अब भारी हो चुकी थी।
रिया ने इधर-उधर देखा, फिर धीमे स्वर में बोली, “भैया पिछले दो महीने से रात को मेरे कमरे में आते हैं… लेकिन…”
“लेकिन क्या?”
रिया कुछ बोल पाती उससे पहले ही ऊपर से आदित्य के कदमों की आवाज आने लगी। रिया तुरंत चुप हो गई और तेजी से अपने आंसू पोंछने लगी। अगले ही पल आदित्य सीढ़ियों से नीचे उतरा। उसने दोनों को साथ खड़ा देखा तो कुछ पल के लिए उसके चेहरे का रंग बदल गया। मगर अगले ही सेकंड वो सामान्य बनते हुए बोला, “अरे, सुबह-सुबह तुम दोनों यहां क्या बातें कर रही हो?”
पूजा ने पहली बार अपने पति को ध्यान से देखा। क्या सच में वो उससे कुछ छुपा रहा था? पिछले कुछ महीनों से आदित्य का व्यवहार बदला-बदला जरूर था। वो देर रात तक फोन पर बात करता, कई बार अचानक रिया के कमरे के बाहर दिखाई देता, और जैसे ही पूजा वहां पहुंचती, दोनों चुप हो जाते। पहले पूजा ने कभी ध्यान नहीं दिया, लेकिन आज हर छोटी बात उसे जोड़ती हुई नजर आ रही थी।
उस दिन पूरे घर में पूजा चुप रही। रसोई में काम करते हुए भी उसका ध्यान बार-बार रिया की बातों पर जा रहा था। सास ने पूछा भी, “क्या हुआ बहू? तबीयत ठीक नहीं है क्या?”
पूजा मुस्कुरा दी, “हाँ मम्मी जी, बस थोड़ा सिर दर्द है।”
लेकिन असली दर्द उसके दिल में था।
रात को जब आदित्य कमरे में आया तो पूजा उसे लगातार देखती रही। आदित्य ने मुस्कुराकर पूछा, “क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रही हो?”
पूजा कुछ सेकंड चुप रही, फिर अचानक बोल पड़ी, “तुम रात को रिया के कमरे में क्यों जाते हो?”
आदित्य जैसे पत्थर का हो गया। उसके हाथ में पकड़ा फोन लगभग गिर ही गया।
“क्या मतलब?” उसने नजरें चुराते हुए पूछा।
“मतलब वही जो मैंने पूछा!” पूजा की आवाज इस बार ऊंची थी। “रिया ने खुद कहा है कि तुम रात को उसके कमरे में जाते हो… आखिर क्यों?”
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया। आदित्य कुछ पल तक पूजा को देखता रहा, फिर अचानक गुस्से में बोला, “तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या?”
“तो झूठ बोल रही है रिया?”
“तुम लोग हर बात को गलत क्यों समझते हो?” आदित्य चिल्लाया।
पूजा की आंखों में आंसू आ गए। “गलत? आधी रात को एक भाई अपनी बहन के कमरे में जाएगा और मैं सवाल भी ना करूं?”
इतना सुनते ही आदित्य अचानक चुप हो गया। उसके चेहरे पर गुस्से की जगह अजीब सी बेचैनी दिखाई देने लगी। उसने गहरी सांस ली और धीमे स्वर में कहा, “पूजा… कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें चाहकर भी किसी को नहीं बताया जा सकता…”
“तो मुझे भी नहीं?” पूजा टूटती हुई आवाज में बोली।
आदित्य ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा। वो चुपचाप बालकनी में जाकर खड़ा हो गया। पूरी रात पूजा सो नहीं पाई। उसके मन में हजारों सवाल घूम रहे थे। अगर बात गलत नहीं थी, तो फिर आदित्य सच क्यों नहीं बता रहा? और अगर सच में कुछ गलत था… तो?
अगले दिन सुबह पूजा की नींद देर से खुली। आदित्य ऑफिस जा चुका था। नीचे ड्रॉइंग रूम में सास-ससुर बैठे थे और रिया कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। पूजा चाय बनाकर ला ही रही थी कि तभी बाहर से किसी के रोने की आवाज आई।
दरवाजे पर रिया खड़ी थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा सूजा हुआ था और हाथ कांप रहे थे।
“रिया!” पूजा घबरा गई। “क्या हुआ?”
रिया अंदर आते ही सीधे पूजा से लिपटकर रोने लगी।
“भाभी… वो लोग मुझे छोड़ेंगे नहीं…”
पूजा का दिल बैठ गया।
“कौन लोग?”
रिया कुछ बोलती, उससे पहले उसकी नजर सास-ससुर पर गई। वो तुरंत चुप हो गई।
“मैं… मैं बाद में बताऊंगी…”
इतना कहकर वो तेजी से अपने कमरे में चली गई।
पूजा अब और डर गई थी। मामला सिर्फ शक तक सीमित नहीं था। जरूर कोई बहुत बड़ी बात थी जो इस घर में सबसे छुपाई जा रही थी।
उस रात पूजा ने सच जानने का फैसला कर लिया। करीब डेढ़ बजे उसकी आंख खुली तो उसने देखा—आदित्य बिस्तर पर नहीं था।
उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
वो धीरे से कमरे से बाहर निकली। पूरे घर में अंधेरा था। तभी उसे रिया के कमरे से धीमी आवाजें सुनाई दीं।
पूजा दबे पांव वहां पहुंची। दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। अंदर आदित्य और रिया दोनों थे। रिया रो रही थी… और आदित्य उसके हाथ में पैसों से भरा बैग दे रहा था।
“ये आखिरी बार है रिया,” आदित्य धीमी आवाज में बोला। “अगर इस बार भी उसने तुम्हें परेशान किया, तो मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा…”
पूजा के पैरों तले जमीन खिसक गई।
कौन था वो… जिसके लिए आदित्य आधी रात को अपनी बहन को पैसे दे रहा था?
और आखिर ऐसा कौन सा राज था… जिसे छुपाने के लिए पूरा परिवार डर रहा था?
तभी अचानक पूजा का पैर दरवाजे से टकरा गया।
आवाज सुनते ही आदित्य और रिया दोनों ने एक साथ पीछे मुड़कर देखा…
और अगले ही पल रिया चीख पड़ी—
“भाभी… प्लीज़ अंदर मत आइए… वरना सब बर्बाद हो जाएगा!” 😢
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beyond code and life part 8( सात दिन या मौत!) is live

alfha202141

બુદ્ધિપ્રકાશ સામયિકમાં પ્રકાશિત થયેલ મારો લેખ...

જે બિલાડીને આપણે બધાં અમુક અંશે અપશુકનિયાળ માનીએ છીએ એ જ બિલાડી ઇજિપ્શિયન માયથોલોજીમાં એક રક્ષક દેવી તરીકે પૂજવામાં આવે છે.

તો ચાલો જાણીએ - ઇજિપ્તના બિલાડી દેવી એવા બાસ્ટેટ વિશે.

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https://vishakhainfo.wordpress.com/2026/05/24/bastet/

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mothiyavgmail.com3309

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
https://www.instagram.com/reel/DYtvk2XK9WJ/?igsh=MTZwd25kdzI0YWY1MA==

mamtatrivedi444291

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताए
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mamtagirishtrivedi740648

From #158K to #46K : Turning recent momentum into real growth. 📈
I am thrilled to share a significant milestone for my book, "Woman and Society: A Modern Age Struggle Story", published by Rajmangal Prakashan.
In a very short window, the book jumped over 111,000 spots in the overall Amazon India charts, moving from #158,130 straight down to #46,286! Simultaneously, it climbed to #1,028 in the competitive Indian Writing category, placing it right on the doorstep of the Top 1,000.
For any independent author, tracking these algorithmic shifts is a lesson in real-time market dynamics. A sudden spike in organic sales velocity can instantly shift a title from a quiet niche listing to an actively trending book.
This story explores the evolving dynamics of modern female identity, personal agency, and the choices that define the modern era. Seeing it resonate and find its footing among readers is incredibly rewarding.
A massive thank you to everyone who has purchased, read, or shared a copy so far. We are just getting started! 🚀
If you haven’t had a chance to dive into the conversation yet, you can explore the book here:https://share.google/3MSM3bLcTDrQ6GLw6
Rajmangal Prakashan - Leading Hindi Book Publishers in India

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komal14699gmail.com7374

एक में ठहराव है,
तो दूसरे में गहराई…
एक दिल को सुकून देता है,
तो दूसरा हर डर में
ढाल बनकर खड़ा रहता है।
एक एहसास ऐसा
जो शांति सा लगे…
और दूसरा ऐसा
जो दुनिया से लड़ जाने की ताकत दे।
शायद इसी लिए
कुछ रिश्ते नामों से नहीं,
उनकी रूह की वाइब से पहचाने जाते हैं। 💙🌙

parmarsantok136152

“नखरे मेरे लाख हैं…
पर दिल सिर्फ एक के लिए soft है।” 😌

parmarsantok136152

આત્મચિંતન

ખરેખર જીવન સમજવા કરતાં જીવવામાં વધુ મજા છે.

જીવનનું મહત્વ એક શીખ છે, અને આ શીખવું એ એક પ્રક્રિયા છે.

એ કદાચ એક ઝટકા સાથે તરત મળે અથવા ઘણો સમય જાય પણ આપણે ઠેરના ઠેર રહીએ...

તો, મને પણ આવી કેટલીક શીખ મળી છે, જેના પરથી મારો જીવન વિશેનો દૃષ્ટિકોણ બદલાઈ ગયો છે...

એ અનુભવ હજુ પણ એવો જ અકબંધ છે...

મમ્મી ત્યારે વેન્ટિલેટર પર હતા, અને મારા જીવન વિશેના વિચારો ધરમૂળથી બદલાઈ ગયા...

એવું કશું જ હોતું નથી જે પળભરમાં આપણી પાસેથી છીનવાઈ ન શકે...

જેમકે આપણો શ્વાસ, આપણો આત્મા, આપણું શરીર, એ શરીર જે મૃત્યુ પછી ફક્ત એક ડેડ બોડી છે‌!

હોસ્પિટલમાં પણ મને આવા જ વિચારો આવતા. એ ચમત્કાર જ હતો કે તે બચી ગયા...

અને મને મારા સવાલોના જવાબ મળી ગયા...

અત્યારે મારા માટે આધ્યાત્મિકતા એ ખુલ્લું આકાશ છે જ્યાં આપણે આઝાદ છીએ ઉડવા માટે. અને ધરતી એ વાસ્તવિકતા. જે આપણી હકીકત ઉજાગર કરે છે કે આપણે શું છીએ... અને આ જ જીવન છે...

©નમ્રતા કંસારા 'નારાયણી'

kansaranamrata8gmail.com

આભાર માનો સરકારનો કે એમણે
"તેલ" ઓછુ ખાવાનુ કહ્યુ છે.
જો "ચા" ઓછી પીવાનુ કહ્યુ હોત તો,
અડધુ ભારત માથાના દુ:ખાવાથી
"પાગલ" થઈ ગયુ હોત....!
😜😜😂😂😂😂

jighnasasolanki210025

घर का दरवाजा खुला रक्खा है
अंदर मैं हूँ, कौन सा घर में हीरा छुपा रक्खा है

अश्क पीकर करना है गुजारा अब तो
उसनें दरिया पे पहरा लगा रक्खा है

क्या कोई मदारी नचाये बंदर अपना
क्यों रास्ते को, जमाना बना रक्खा है

ईद हो गयी राह चलते लोगों की
खिड़की पे चांद सजा बैठा है

डुब गया सुरज, चलों अब घर चलें
शायद, घर का चिराग भी बुझा रक्खा है

ferojkhan.536289

🙏🙏जिंदगी में 'दोस्त' रखना है तो 'कर्ण' जैसा रखना चाहिए,

और 'भाई' कुंभकरण जैसा होना चाहिए, विभिषण जैसा नही।🦚🦚

parmarmayur6557

—दिखावे का सफ़र—

​अब हम वो पहले जैसे नहीं हैं,
घर में हैं मौजूद, पर घर में नहीं हैं।

​हाथों में स्क्रीन है, नजरें झुकी हुई हैं,
अपनों के बीच भी बातें रुकी हुई हैं।

​दुनियाभर की खबरों से जुड़े हैं हम मगर,
पास बैठे शख्स की कोई खबर नहीं है।

​वर्चुअल दुनिया के रिश्तों में खो गए इस कदर,
कि अब असली रिश्तों की कोई कदर ही नहीं है।

​दिखावे की दुनिया में हम सब तो बढ़ रहे हैं,
मगर अपनों से दूर होने का ये कैसा सफ़र है।

​हम दुनिया को अपनी 'प्रोफ़ाइल' तो चमका कर दिखा रहे हैं,
पर अंदर झांकें, तो अपनी ही नज़र में धुंधले पड़ रहे हैं।

​ये हम क्या कर रहे हैं, खुद को ही कुचल कर,
चंद झूठी तारीफों पर, खुद पर गर्व कर रहे हैं।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

बस जीते रहना गुनाह है
कविता; भाग 2


अगर वक्त कुछ नहीं करने की है
तो थोड़ा वक्त खुद को सोचने के लिए निकालो
क्या तुम्हारे पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है


अगर तुम्हारे पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है
तो जरा सोचो
तुम क्या हो


एक इंसान यहां एक मशीन
जिसके पास खुद की इच्छा ही नहीं है
खुद की जज्बात नहीं है
खुद की दुनिया नहीं है
खुद का ख्याल नहीं है


जरा सोचो तुम वो जो कहते हो
तुम खुद से और दूसरों से भी प्यार है
जरा सोचो तुम खुद से कितना प्यार करती हो

क्या इतना प्यार करती हो
जो खुला आसमान देखकर उड़ जाए
बिना कतराऐ बिना सोचे अंजाम का



या फिर वेरिया पहन लेती हो
यह सोचकर
की
तुम सुरक्षित हो
मंदिर जैसे मुर्दा घरो में



जरा सोचो जहां तुम रहती हो
क्या वह जगह सचमुच में स्वर्ग है

अगर वह स्वर्ग है तो
तुमने उस स्वर्ग में रहने के लिए कीमत क्या चुकाया है


जरा सोचो
संने जैसी वरिया पावं में होगा
जिम्मेदारी जैसे हतकीयां हाथों में होगा


जरा सोचो तुम जैसे मोहब्बत कहती हो
क्या वह तुम्हें खुद से मोहब्बत करने देता है


जरा सोचो जिसे तुम जिम्मेदारी कहती हो
क्या वह जिम्मेदारी सच में तुम्हारी है


जरा सोच के देखो
क्यों कि
बस मोहब्बत करते रहना गुनाह है
बस जिम्मेदारी निभाना गुनाह है



और यह गुनाह तुम हर रोज कर रही हो
क्या आगे भी करते रहना चाहती हो
अगर करते रहना चाहती हो

तो ठेहरो
और जरा सोचो

तुम्हारी बाद नई जिंदगी की
क्या तुम चाहती हो कि वह भी
जिंदगी को बोझ समझ कर इन्हें डोते रहे
जीने की वजह

जरा सोचो
अपनी भावनाओं को अनदेखा करना गुनाह है
और तुम हर बार यही करते हो


तुम हर वक्त सोचती रहती हो कि
तुम खुश हो
पर क्या तुम खुश हो
जरा सोचो


खुद से झूठी बातें करना गुनाह है

और यह गुनाह भी तुम हर रोज करते हो



तो अब समहलो और आओ बोलो बदलो
थोड़ी खुद के लिए
और ज्यादा आने वाली जिंदगी के लिए

अगर तुम सोचना शुरू करोगी तो
शुक्रगुजा होंगे तुम्हारे आने वाले पीढ़ियां


हां तुम्हें कोशने की वजह
तुम्हारे शुक्रगुजार रहेंगे तुम्हारी आने वाली पिड़या

abhinisha

આજના દિવ્ય ભાસ્કરની શનિવારની પૂર્તિ: બાળ ભાસ્કરમાં પ્રકાશિત થયેલો મારો લેખ 🎉🎉🎉

સિસ્ટ્રમ : ઇજિપ્શિયન માયથોલોજીનું પવિત્ર વાજિંત્ર | વિશાખા મોઠિયા

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આ જગતમાં બે પ્રકારનાને ચિંતા મટે. એક જ્ઞાની પુરુષ ને બીજા પરોપકારીને. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

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tejendragodara639990

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पहेली

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