सावन का आना जैसे
धरती का श्रृंगार करना
नारी का खुद से प्यार करना
मायके से मिलन की
आस जगाना
झूले की पेंगें बढ़ाना
घेवर की खुशबू से
बाजार का महकना
सावन का आना जैसे
गर्मी से राहत मिल जाना
बगिया में फूलों का आना
कोयल का मीठा गाना
हरी चूड़ियां, हरी चुन्नरियां
पहन गौरी का इतराना
प्रेम की लहरों का ईठलाना
सावन का आना जैसे
बादल का घिर आना
बारिश का संगीत बजाना
मन की तपिश घुल जाना
कितना सुंदर है देखो
सावन का आना
कांवर की मस्ती भोले की भक्ति
बम भोले सबका गाना
मनोहारी है सावन का आना
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली