पर कब तलक उम्मीद रखें
कविता
उम्मीद उम्मीद कखते हुए लोग जींदा तो है
पर उम्मीदें एक झूठा सपना है
लोगों को तसल्लि दें कर जिंदा तो रकता है
पर कभी दर्द कम नहीं करता
बल्कि दर्द उम्मीद सो और वड़ जाती है
क्यों इंसान को पता होता है कि उम्मीद है
सब कुछ ठीक हो जाएगा
पर कव तक उम्मीद रखे
यह नहीं पता होता
और यह सबसे बड़ी बिड़मनां है
एक आसफल होने वाली वाखया।।। उम्मीद
कभी ना खत्म होने वाली दर्द की उम्मीद
झूठा सपना कल्पना लालच से भरी हुई बातें
सब कुछ ठीक हो जाएंगे
अच्छी दिन आएंगे
सारे कहने की बातें हैं
एक लंबा इंतजार बस दर्द को सेहत हुई उम्मीद
उम्मीद पर
हर दुख दर्द झेलते हुए
इंसान बस कल्पना करता है
अपनी खयाली दुनिया में
सब कुछ ठीक हो जाएंगे
और यह उम्मीद सदियों तक चलता है
कभी ना खत्म होने वाली चीज की तरह
उम्मीद है उम्मीद रखते हुए इंसान
जिंदा रहने के साथ समझे की
उम्मीद रखना हमेशा सही नहीं है
उम्मीद है कि मुझे अब कोई उम्मीद नही है
किसी से भी नहीं
ना इस दुनिया से ना अपने से
बस है थोरी सी उम्मीद खुद से
कि मैं थोरी और जियो गी