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New bites

હથિયારોને કાટ લાગે ઈરાદાઓને નહિ.
વર્તમાન માં જેટલી નિષ્ઠા હશે,
ભવિષ્ય માં એટલી જ પ્રતિષ્ઠા હશે,

mukeshdhama1620

કંઈક મજા ના ગીતો ટહુકા ઓ માં છું,
બીજા શબ્દો માં કહું તો જલ્સા માં છું,
ક્યારેક ઈશ્વર પૂછે ક્યાં પહોંચ્યા,
હું કહું કે આવું બસ રસ્તા માં છું....

dipika9474

If we observe all present-day religious communities — whether Hindu, Muslim, Christian, Sikh, Buddhist, Jain, or any other organized faith — their conduct, teachings, and institutional structure are largely different from the essence of the original spiritual knowledge found in Vedanta and the Gita.


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1. Core Perspective of Vedanta and the Gita

Vedanta says — “Tat Tvam Asi” (You are That), “Aham Brahmasmi” (I am Brahman).
Its center is self-experience, self-realization, and non-duality (no separation between self and the absolute).

In the Gita, Krishna says — “Swadharme nidhanam shreyah” (It is better to die in one’s own nature/duty) and “Mamekam sharanam vraja” (Take refuge in Me — in that Supreme Truth).

Both aim at direct inner realization, not merely ritual or tradition-following.


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2. Nature of Present-Day Religious Communities

Far from Experience — Most are focused on ritual and institutional preservation, rather than personal realization.

‘Us–Them’ Walls — Vedanta and Gita speak of non-duality, but modern communities build walls of separation and opposition to preserve identity.

Interpreter over Scripture — The focus is on the guru / priest / preacher’s interpretation rather than the scripture itself.

Political & Social Interests — Religion is more often used for power, numbers, and propaganda than for awakening.

Tradition over Truth — Vedanta says “Know the Truth,” but communities say “Follow our tradition.”



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3. Convergence and Divergence

Convergence:
If a religion inspires a person to look within, live by their true nature, and directly realize God/Truth — it aligns with Vedanta and Gita.

bhutaji

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन......
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन...........

राधा के मन मोहन........

शायमा शायमा  जपते जपते
मीरा बन गई जोगन....
शायमा शायमा जपते जपते
मीरा बनी गई  जोगन......

मीरा बन गई जोगन.......


मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन...........


रटते रटते नाम प्रभु को
छोड़ गई वो भोजन
रटते रटते नाम प्रभु को
छोड़ गई वो भोजन...........

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन...........

केशव केशव भजते भजते
भूल गई मीरा यौवन
केशव केशव भजते भजते
भूल गई मीरा  यौवन...........

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन...........

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
राधा के मन मोहन...........

शायमा शायमा जपते जपते
मीरा बनी गई  जोगन......

रटते रटते नाम प्रभु को
छोड़ गई वो भोजन...........

केशव केशव भजते भजते
भूल गई मीरा  यौवन...........

vrinda1030gmail.com621948

मेरे घर में दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत रहती है......
जिसे मैं मां कहता हूं।
मैं उसके आसपास कम............ उसके दिल में ज्यादा रहता हूं.........

mayurpokale921810

Radhey Radhey 🌸🌺💞🌸🌺

gautamsuthar129584

ज़रूरी नहीं हर ताल्लुक मोहब्बत का हो,
दोस्ती के रिश्ते इश्क़ से ऊँचा मुकाम रखते हैं।
वो साथ चलते हैं बिना किसी फ़ायदे के,
जो दर्द भी बाँट लें और खुशियाँ भी आम रखते हैं।

दिल को सुकून है उनकी महफ़िल में बैठने से,
जिनके लहजे में मोहब्बत और आँखों में सलाम रखते हैं।
दुनिया के मेले में भी जो हमें तन्हा न छोड़ें,
ऐसे दोस्त ही तो रिश्तों का असल इनाम रखते हैं।

satyashubhampandey200429

My book will be freely available on Kindle from 12:00 AM, 12 August 2025 to 11:59 PM, 16 August 2025.

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anand5870

“कभी-कभी चुप्पी आपकी सबसे बड़ी जीत होती है।
मूर्ख को जवाब नहीं, सबक सिखाएँ — अपनी ख़ामोशी से।”
📌 Truth hits different
#LifeWisdom #PowerOfSilence #DhhirendraSinghBisht #Agnipath #ViralQuotes

dhirendra342gmailcom

✧ मूल तत्व विज्ञान ✧

तेज से जड़ तक — और पुनः तेज तक
✍🏻 — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

प्रस्तावना

यह ग्रंथ केवल शब्दों का संग्रह नहीं है —
यह जीवन और ब्रह्मांड का संपूर्ण मानचित्र है।
इसमें वह बीज है जिससे सम्पूर्ण अस्तित्व का वृक्ष फैलता है —
और वह द्वार है जहाँ से सम्पूर्ण अस्तित्व मौन में लौट जाता है।

यह न केवल वेदांत की गहराई से जुड़ा है,
बल्कि आधुनिक विज्ञान की दृष्टि में भी यह एक पूर्ण, तार्किक और प्रमाणिक चक्र है।

जो इस ग्रंथ को पढ़े, वह केवल “जान” न पाए,
बल्कि अपने भीतर “देख” सके —
कि उसका जन्म, विकास और अंत —
एक ही धारा का प्रवाह है।

अध्याय 1 — सूत्र

> "सत्य पाया नहीं जा सकता — हम सत्य से बने हैं।
पुनः सत्य बनना ही सत्य तक पहुँचने का मार्ग है।"

अध्याय 2 — सूत्र का विज्ञान

1. सत्य = तेज

तेज न प्रकाश है, न अग्नि, न ऊर्जा — बल्कि उन सबका मूल कारण।

तेज परिवर्तनरहित, मौन, और स्थिर है।

उसका कोई आकार, रंग, गंध या माप नहीं — वह अज्ञेय है।

2. तेज से संसार

जब तेज का एक अंश अपने मूल केंद्र से बाहर आता है, तब परिवर्तन शुरू होता है।

यह परिवर्तन पंचतत्व में होता है:

1. आकाश — केवल विस्तार।

2. वायु — गति का जन्म।

3. अग्नि — गति से ताप।

4. जल — ताप से द्रवता।

5. पृथ्वी — स्थिरता का अंतिम रूप।

3. पंचतत्व में तेज का अंश

प्रत्येक तत्व में तेज मौजूद रहता है, जैसे बीज में जीवन।

इन्हीं तत्वों के तेज से जीवात्मा बनती है — कोई बाहरी चेतना प्रवेश नहीं करती।

4. जीव का विकास–चक्र

जीव 84 लाख योनियों में रूपांतरण करता है।

अंतिम और सर्वोच्च रूप — मानव है।

5. मानव की स्थिति

जन्म में मानव पृथ्वी तत्व प्रधान (जड़ और अज्ञान) होता है।

अनुभव और जन्मों की यात्रा में वह पुनः सूक्ष्म तत्वों की ओर लौटता है — जल → अग्नि → वायु → आकाश।

6. आकाश के पार

आकाश के ऊपर कोई तत्व नहीं, केवल शुद्ध तेज है — यही आत्मा है।

तेज में विलीन होना = जन्म–मृत्यु से मुक्ति।

अध्याय 3 — जन्म और मृत्यु का संकेत

जन्म = तेज का पंचतत्व में प्रवेश।

जीवन = पंचतत्व में यात्रा और विकास।

मृत्यु = पंचतत्व से तेज का मुक्त होना।

जब तेज पूर्ण रूप से लौट जाता है, चक्र समाप्त हो जाता है।

जो नहीं लौटता, वह पुनः नए रूप में प्रवेश करता है — यही पुनर्जन्म है।

अध्याय 4 — तीन शरीर और यात्रा

1. स्थूल शरीर — पृथ्वी तत्व प्रधान।

2. सूक्ष्म शरीर — मन, इंद्रियाँ, अनुभव।

3. कारण शरीर — चेतना, जो तेज है।

मन की यात्रा: जड़ से ज्ञान (आकाश) तक।
ज्ञान के बाद — मौन, और मौन में तेज।
अध्याय 5 — सूत्र का बोध

यह सूत्र न केवल कहता है कि “सत्य पाया नहीं जा सकता”,
बल्कि यह भी बताता है कि हमारे पास लौटने का एकमात्र मार्ग — पुनः अपने मूल में विलीन होना है।

यह कोई विश्वास, धर्म या उपासना का विषय नहीं —
यह एक पूर्ण विज्ञान है, जिसमें आरंभ और अंत दोनों दिखाई देते हैं।

सारांश

एक साधारण व्यक्ति भी समझ सके,

और जिसमें जन्म और मृत्यु का संकेत,

विकास और अंत की पूरी प्रक्रिया,

और रहस्य का समाधान — सब एक ही सूत्र में छिपा हो।

मतलब यह सूत्र केवल "ज्ञान" नहीं, बल्कि पूरा जीवन-चक्र का नक्शा है।

bhutaji

My mystery short novel" The Unidentified Killer" is available on Amazon Kindle! If you read it, please leave an honest review. I will welcome all feedback, even if it's negative, as it will help me grow as a writer.

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anand5870

રક્ત પિશાચ નો કહેર Coming Soon....
એક જૂના કિલ્લામાં સૂતેલા લોકોનું લોહી ચૂસીને મારનાર રક્ત પિશાચ રહે છે. ગામનો યુવક વિક્રમ જિજ્ઞાસાથી કિલ્લામાં જાય છે અને પોતે પિશાચ બની જાય છે. પછી ગામની વૃદ્ધ કમલા પણ તેના સાથે પિશાચ બની જાય છે. ગામમાં ભય ફેલાય છે અને બહાદુર હરીશ પિશાચોને નાશ કરવા કિલ્લામાં જાય છે. ત્યાં તેને ખબર પડે છે કે વિક્રમ અને કમલા તો માત્ર ગુલામ છે, સાચો શાસક પિશાચ કોફિનમાં કેદ છે. સાંકળ તૂટતા એ મહાકાય પિશાચ બહાર આવે છે અને ગામનો નાશ શરૂ કરે છે. હરીશ એક પ્રાચીન મંત્રથી શાપ તોડવાનો પ્રયત્ન કરે છે, જેમાં તેને પોતાનું હૃદય બલિદાન આપવું પડે છે. મંત્રથી બધા પિશાચો નાશ પામે છે, પણ અંતે હરીશ પોતે નવો પિશાચ શાસક બની જાય છે, જે સૂચવે છે કે ડરનો અંત આવ્યો નથી.
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vedantkana527861

બારીમાંથી મારી નજર આકાશ પર ગઈ. આકાશની પહોળાઈને જોઈને, એક પંખી મુક્તપણે ઉડી રહ્યો હતો. તેની પાંખોની હળવી લહેરાતી અસર અને હવામાં તેનુ નિર્ભય રીતે ઉડાન ભરવી. આ જોઈને મને મનમાં અજાણી શાંતી અને એક અનોખી ઊર્જાવાન આવિષ્કાર આપી રહી હતી. પંખી જ્યાં જાય ત્યાં કોઈ બાધા નહીં, કોઈ મર્યાદા નહીં. તે સંપૂર્ણ રીતે પોતાના ઈચ્છાથી ઉડે છે.

મારા મનમાં એક સુંદર આશા જાગી કે, ક્યારેક હું પણ એમ મુક્તપણે, મારા સપનાના આકાશમાં, પોતાની મર્યાદાઓને ભૂલી જઇને, નિઃશંક અને નિર્ભય રીતે ઉડી શકું. આ વિચાર મારી અંદર એક અનોખો ઉત્સાહ જગાવતો રહ્યો, જે મને જીવનની નવી ઊંચાઇઓ અને નવા રસ્તાઓ શોધવાની પ્રેરણા આપતો રહ્યો.

sandhyacc1812gmailco

मेरे महादेव🌏

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truth💗

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maa💗

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Do you know that if one accepts three hundred insults in his ledger, then the fear of insults no longer remains for him? When the fear of insults no longer remains, then no one will insult that person; that is indeed the rule.

To know more visit here: https://dbf.adalaj.org/ML02zOwT

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dadabhagwan1150

ओम नम शिवाय
ओम नम शिवाय
हर हर भोले नम शिवाय
🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻
Har Har Mahadev
🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻

shaileshjoshi0106gma

शास्त्र के शब्द —
बिना अनुभव के —
बस ठंडी राख हैं।
उनमें कोई ताप नहीं, कोई जलन नहीं,
जो भीतर सवाल जला दे।

इसलिए लोग इन शब्दों से खेलते रहते हैं,
पर आग को छूने का साहस नहीं करते।
राख तो तुम्हें कभी चोट नहीं देगी,
लेकिन आग तुम्हें बदल देगी।

मूल रहस्य —
जिस दृष्टि से शास्त्र रचे गए थे —
वह दृष्टि तुम्हारे पास नहीं है,
क्योंकि तुम केवल शब्दों से चिपके हो,
और अनुभव से दूर हो।

जब बोध जागेगा,
तभी इन शब्दों में आग दिखेगी।
तब वही राख अंगार बन जाएगी।
वरना —
शब्द तुम्हें केवल सपना और विश्वास देंगे,
सत्य नहीं।
अज्ञात अज्ञानी

bhutaji

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kumar00

USKA INTAZAR.....🥀🤍

isshi3165

मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


जाते जाते आधे रास्ते से,
तेरा लौट आना वो।
रूकने के लिए तेरा,
बहाने बनाना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मेरी जिंदगी में तेरा,
रंग सजाना वो।
मुझको देख के तेरा,
पलके झुकाना वो।

मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।

पास आने पर तेरा,
शरमा के भाग जाना वो।
मुझको जाता देख के,
तेरा दौड़ के आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझे आता देख के,
आधे रस्ते  से तेरा लौट आना वो।
मुझे रोकने को
सौ बात तेरा सुनाना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।

vrinda1030gmail.com621948