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यह कविता उन लोगों को समर्पित है जिन्हें अक्सर “लोनर” या अंतर्मुखी कहा जाता है।

वे लोग जो बहुत कुछ महसूस करते हैं, पर अपनी भावनाओं को सहजता से शब्द नहीं दे पाते। जिनके भीतर विचारों, स्मृतियों और जज़्बातों का एक गहरा संसार होता है, जो अक्सर उनके अपने हृदय तक ही सीमित रह जाता है।

मेरे जज़्बात

मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।
सफ़र हो दिल से दिल तक का
वो एक आवाज़ कैसे दूँ ।
घोंसला छोड़ जाने का
हौंसला ले भी आयें तो
बिखर कर टूट जाने को
मैं झूठी आस कैसे दूँ।
बोझ इनका उठा लें जो
सही अल्फ़ाज़ कैसे दूँ।
मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।

सियाह हैं, कुछ ये मैले से,
सुरख, उजले, सुनहरे से।
सभी रंगों में गहराकर,
वक्त की मार खा-खा कर,
इन्होंने गर्भ में अपने
कई तूफ़ान पाले हैं,
कई मोती उकेरे हैं।
गुज़रता वक्त जाता है
ये चुप सागर से ठहरे हैं।
हदों को तोड़ जाने को,
बहाकर सब ले जाने को,
बवंडर आज कैसे दूँ।
मेरे जज़्बात भारी हैं ,
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ ।


तराने बन के होठों पर,
ये मुस्कानें बिछाते हैं।
कभी नैनों से झर-झर कर,
तपिश दिल की मिटाते हैं।
महफिलों में, वीरानों में
यही तो साँसें थामे हैं।
इन्हें खुद से जुदा करके
तेरी सोहबत में लाने की
मेरे दिल के शहज़ादों को
तेरे दिल में इतराने की
जगह एक खास कैसे दूँ ।
मेरे जज़्बात भारी हैं
इन्हें परवाज़ कैसे दूँ !

#कविता #भावनाएँ #अंतर्मुखी #जज़्बात #आत्मचिंतम #Poetry #loners #self reflection

shilpy

दुनिया मुझे किसी भी नाम से बुला ले, मगर जिस नाम में उसका प्यार बसता है... मुझे वही नाम सबसे प्यारा लगता है — राधे।

parmarsantok136152

मेरे अल्फ़ाज़...!


एक एक हर्फ़, किसी की कहानी कहती है,
कई इबारते जिसमें छुप कर रहती है।।
मिलते कितने लोग इसके हर मोड़ पर,
लहर दर लहर जो हवा में बहती रहती है।।

पेड़ से झंडे पत्तों के मानिंद,
बिखरे रहते ये मेरी कॉपी के ओर-छोर पर।।
या फिर मैं खुद ही टाक देती इन्हें,
करीने से पन्नों के पोर पोर पर।।

By. Santoshi "Katha"

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santoshikatha858769

Lunch time.. my favorite time

kattupayas.101947

Good afternoon friends.. have a good day

kattupayas.101947

🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
दिलजलो से मुलाकात हो गई,
कमबख्त रात भी तूफानी हो गई।
हम तो जला देते दुनिया सारी,
अच्छा हुआ जो बरसात गई।
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂

jighnasasolanki210025

तुम क्या चाहती हो?

मुझसे कभी पूछा ही नहीं गया,
"बोल, तू क्या चाहती है?"
क्यों मेरी ज़िंदगी के फैसले,
हमेशा दूसरे ही बनाते हैं?

सपने तो मेरे हैं,
फिर भी किसी और के हाथों बुनते हैं।
मैं बस देखती रहती हूँ
खुद से पूछती हूँ,
"आखिर तू क्या चाहती है?"

हाँ, अगर सच में चाहने दिया जाए...
तो सुनो, मुझे क्या पसंद है

मुझे पानी की लहरों सा बहना पसंद है,
हर तालाब, हर नदी, हर समंदर की
गहराई को छूना पसंद है।

मुझे सूरज की किरणों सा चमकना पसंद है,
हर गली, हर गाँव, हर शहर के
अंधेरों से गुज़रना पसंद है।

मुझे टूटे सपनों को सीना पसंद है,
हर दर्द, हर दीवार, हर "ना-मुमकिन" को
जीत में बदलना पसंद है।

बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी,
कोई बड़ी बात नहीं
मुझे बस... मैं रहना पसंद है।
वोही जो मैं हूँ, वही बने रहना पसंद है।

प्राची तंवर

prachitanwar111

દિવસની શરૂઆત પૂજા-પાઠથી કરીએ જેથી મનમાં સારા વિચારો આવે, છતાં મન નેગેટિવિટી તરફ જતું રહે ત્યારે શું કરવું? કાયમ પોઝિટિવ રહેવા શું મનને કંટ્રોલ કરવું જોઈએ? ચાલો ઓળખીએ મનના વિચારો અને તેની અસરોને આ વિડીયોમાં.

Watch here: https://youtu.be/ApIcUtqxQfk

#selfhelp #selfimprovement #positivity #positivemind #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

मैंने ज़िंदगी को करीब से देखा है...
मोहब्बत भी, बिछड़ना भी, ज़िम्मेदारियाँ भी, और अकेले लड़ना भी।
फिर भी आज खड़ी हूँ उसी मुस्कान के साथ...
क्योंकि मुझे गिरना नहीं, हर बार पहले से मज़बूत होकर लौटना आता है।

parmarsantok136152

दिल देना आसान है...
मगर किसी एक नाम पर पूरी ज़िंदगी ठहर जाना, हर किसी के बस की बात नहीं।

parmarsantok136152

हमारी मोहब्बत का उसूल बड़ा सादा है...
एक बार जो दिल में उतर जाए, फिर उसे खोने का डर नहीं रखते, और छोड़ने का ख़याल नहीं रखते।

parmarsantok136152

​ "हुनर दिल तोड़ने का"

ये हुनर कहाँ से सीखा है तुमने,
किसी दिल को इतनी आसानी से तोड़ जाने का।
​हमसे तो एक ख़्वाब भी बदला नहीं जाता,
और तुम तजुर्बा लिये हो पल भर में बदल जाने का।
​सोचा न था इतनी वफ़ा दोगे तुम हमें,
कि तुम हक़ ही छीन लोगे हम से मुस्कुराने का।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

हम प्यार भी चुनकर करते हैं...
और फिर पूरी दुनिया के खिलाफ जाकर भी उसी एक इंसान का हाथ थामे रखते हैं।

parmarsantok136152

if you are a romantic movie lover don't miss this film. love is tragedy.

kattupayas.101947

Good morning 🌅

harshparmar8722

Had breakfast. this is just like a sleeping tablet

kattupayas.101947

हयग्रिव

हा एक वेगळा दाक्षिणात्य प्रकार
जो देवळात प्रसादाला केला जातो

पुरणाची डाळ नेहेमीप्रमाणे शिजवून घेतली
पाणी वेगळ करून
गुळ घालून शिजत ठेवली
त्यात भाजलेली खसखस
ओले खोबरे थोडे भाजुन
काजु बदाम बेदाणे तुपात तळून
घातले
व एकत्रीत मिसळून पाच मिनीटे शिजवले
शिजल्यावर वेलदोडे पूड मिसळली

jayvrishaligmailcom

Iam living with these playlists for so long. if you are a playlist lover pls share..

kattupayas.101947

Good morning friends.. have a nice day

kattupayas.101947

Good Night 🌃

harshparmar8722

"બાગમાં ગુલાબ ઘણા સુંદર ખીલે છે,પણ તારા હસતા ચહેરા જેવી કોઈ સુગંધ નથી,આ દિલ તો ક્યારનુંય તારા નામે થઈ ગયું છે,હવે તારા વગર જિંદગી જીવવાની કોઈ ઉમંગ નથી."

kukadiyaketankukadiya059954

એક નાની એવી એરર પણ આપણા દિવસોને અસ્તવ્યસ્ત કરી નાખે છે! એમાં પણ જ્યારે ગુસ્સો, ચીડિયાપણું, નિરાશા અને હતાશા ભેગાં થાય, ત્યારે જાણે એક નાનો એવો ડિપ્રેશનનો ફેઝ આવી જાય છે, જેને આપણે અજાણતાં જ ઇગ્નોર કરી દઈએ છીએ!

પરંતુ ઘણી વખત આ બધાનું કારણ પણ આપણે જ હોઈએ છીએ! એવી કોઈ પરિસ્થિતિ અથવા અન્ય કોઈ કારણસર આપણે એ એરરને શાંતિથી સમજવાનો પ્રયત્ન જ કરતા નથી! એરરનો અર્થ શું છે? એ આવી કેવી રીતે? અને જ્યારે અંતે આપણે ટર્મિનલમાં એ એરરને શાંત ચિત્તે વાંચીએ છીએ, ત્યારે ખબર પડે છે કે સોલ્યુશન તો કેટલું સરળ હતું! ક્યારેક તો માત્ર એક અલ્પવિરામ (COMMA) ડિલિટ(અથવા ઇરેઝ) કરવાથી પણ એરર સોલ્વ થઈ જાય છે! છતાં આપણે જ એને સતત ખેંચતા રહીએ છીએ, ભલે ટર્મિનલ કેટલીય વાર ચેક કર્યું હોય!

વેલ, આ તો પ્રોગ્રામિંગની વાત છે! પરંતુ જીવનમાં પણ કંઈક આવું જ બને છે! કેટલીક ક્ષણો અને કેટલીક ઘટનાઓના જવાબદાર આપણે જ હોઈએ છીએ, અને તેનો ઉકેલ પણ આપણા હાથમાં જ હોય છે! છતાં જાણતા કે અજાણતા આપણે એ વાતને ઇગ્નોર કરીએ છીએ અને એ જ વિચારોને, એ જ યાદોને અને એ જ ક્ષણોને મનમાં સતત વાગોળતાં અથવા ખેંચતા રહીએ છીએ!

ઘણી વાર તો આપણે પોતાના મનનાં વિચારોના લોગ્સ વાંચ્યા વગર જ જીવન નામના પ્રોગ્રામને સતત રન કરતા રહીએ છીએ, અને એ જ એરર વારંવાર સામે આવતી રહે છે અને કદાચ અજાણતા અથવા જાણ હોવા છતાં પણ આપણે હતાશા અથવા ડિપ્રેશનમાં જતા રહીએ છીએ!

જ્યારે વાસ્તવમાં સોલ્યુશન કદાચ એટલું જ સરળ હોય છે કે કેટલીક યાદો અને કેટલીક ક્ષણો અથવા ઘટનાઓને ડિલિટ કરવાની હોય છે! પરંતુ હૃદય એ ડિલિટનો કમાન્ડ સ્વીકારતું નથી, અથવા કદાચ આપણે જ નથી ઈચ્છતાં કે એ ડિલિટ થાય... અને એ જ એરર વારંવાર રિપીટ થતી રહે છે!!

-નીલકંઠ

neelkanthvyas3915

ना ताज चाहिए, ना तख्त चाहिए...
मुझे तो बस तुम्हारे साथ बिताया हुआ वक्त चाहिए।

parmarsantok136152