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New bites

सफलता पाने की उम्मीद में लिखती हूँ… ✍️
आँखों में सपने सजाकर जीती हूँ… ✨
ये उम्मीद ही है जो मुझे चलाती है…
वरना हर दिन बस यूँ ही कट जाता…
कभी लगता है शायद सफल हो जाऊँगी…
और कभी बस यही उम्मीद रह जाती है…
अगर सफलता मिली तो ज़िंदगी संवर जाएगी…
और अगर नहीं भी मिली…
तो ये उम्मीद ही मेरे जीवन को काट ले जाएगी…

archanalekhikha

Thanks to matribharti for the support of my Tamil novel நிழல் தரும் வசந்தம்.

kattupayas.101947

मोहब्बत तब और खूबसूरत हो जाती है,
जब दो लोग एक-दूसरे को बदलने नहीं,
बल्कि समझने की कोशिश करते हैं।
भरोसा हो तो गलतफहमियाँ भी रास्ता भटक जाती हैं।

parmarsantok136152

🙏🙏किसीने कहां 'मोहब्बत' में जुदाई दर्द देती है,

हा देती होगी,

उसकी 'चुभन' उस मोहब्बत को ओर 'गहरा' करती होगी।

जहां प्यार है वहां थोड़ी सी जुदाई का दर्द तो झेलना पड़ेगा।

वह तो कान्हा भी अपने जीवन वृतांत में दिखलाकर गये है।

मुझे लगता है कि राधा का विरह और विरह में भी एक संयम से ही कान्हा के नाम के आगे राधा का नाम पुकारने पर 'मुक्ति' मिलती होगी।

प्यार सही में मुक्ति देता है बंधन तो 'माया' का रुप है।

मोहब्बत में आयी जुदाई आंखों से आंसु की 'धारा' बहातीं है,

उस धारा में बहना या संभलकर दर्द झेलना वह व्यक्ति पर 'निर्भर' रहता है।

बहनें पर भी एक दर्द दिल को याद रखता है और संभलकर भी दो दिलों की धड़कन धड़कतीं रहतीं हैं।

मोहब्बत इश्वर की बनायीं हुई एक अलग ही कायनात है।🦚🦚

parmarmayur6557

तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और डिप्रेशन साइलेंट किलर बन चुके हैं। यह सिर्फ सामान्य उदासी नहीं, बल्कि एक गहरी मानसिक लड़ाई है जो किसी को भी तोड़ सकती है। लेकिन याद रखिए, डिप्रेशन आपकी कमजोरी नहीं बल्कि इस बात का संकेत है कि आप बहुत लंबे समय से अकेले मजबूत बने रहने की कोशिश कर रहे थे। अब वक्त हार मानने का नहीं, बल्कि एक शानदार शुरुआत करने का है।

यह लेख आपको निराशा के अंधेरे से निकालकर सकारात्मकता के उजाले में ले जाएगा जहां आप सामान्य मानसिक थकान और डिप्रेशन के बीच के छिपे हुए लक्षणों को पहचानना सीखेंगे। इसके साथ ही आप यह भी जान पाएंगे कि रोजमर्रा की जिंदगी का दबाव और हार्मोनल बदलाव हमारी मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित करते हैं। इस लेख में दिमाग को शांत करने वाली तकनीकों, योग, सही डाइट और ‘नो’ कहने की आदत जैसे अचूक उपायों को बहुत ही सरल तरीके से समझाया गया है। यह व्यावहारिक गाइड आपको रोजमर्रा की उन 3 आदतों से रूबरू कराएगा जो आपके खोए हुए आत्मविश्वास को वापस ला सकती हैं और आपको बिना झिझक के थेरेपिस्ट या अपनों से बात करने की ताकत देगी। यह सिर्फ एक आर्टिकल नहीं है बल्कि आपकी जिंदगी बदलने वाला एक जरिया है जो आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाना सिखाता है। उठिए, इस लेख को पूरा पढ़िए, अपने मन के बोझ को कम कीजिए और अपनी जिंदगी की कमान फिर से अपने हाथों में लीजिए।

https://www.matrubharti.com/book/19993939/tanaav-aur-depression-se-mukti-1

nityaoswal430745

Do you know that only the money you spend on others is yours? That much is the balance for the next life.

To know more, visit here: https://dbf.adalaj.org/SGSaL4IV

#humanity #lifelessons #helpothers #doyouknow #facts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🥭आंबा बर्फी किंवा वडी 🥭
आंब्याच्या दिवसात तीन चार वेळा आंबा वडी होतेच
घरच्या आंब्याचा रस घट्ट व रंग गडद केशरी असल्याने वड्या देखण्या व चविष्ट होतात 😊
कधी आपल्या सोबत घरी आला गेला पाहुणा खाऊन तृप्त होतो
तर कधी आपल्यालाच खायला शिल्लक उरत नाही
इतकी लोक येऊन खाऊन जातात 😀
कधी आप्तेष्टांना आठवणीने डब्यातून पोचवली जाते
या सगळ्या गोष्टीत सुद्धा एक समाधान असते
मात्र यामुळे फोटो काढायची संधी राहून जाते 😀
अखेर ती संधी मिळाली
ही माझ्या पद्धतीची आंबा वडी
🥭साहित्य
एक वाटी आंब्याचा रस
आंबा नसेल तेव्हा पल्प वापरता येतो)
एक वाटी ओले खोबरे
दोन मोठे चमचे चमचे मिल्क पावडर
साखर पाऊण वाटी
एक चमचा तूप

🥭कृती
आंब्याचा रस साखर व खोबरे सर्व एकत्र करून कढईत शिजायला ठेवणे
सतत हलवत राहणे
काही वेळाने गोळा होत आहे असे वाटले की दोन चमचे मिल्क पावडर
व चमचाभर तूप घालून चांगले घोटून घेणे
तूप लावलेल्या थाळीत मिश्रण ओतून
थाळी ठोकून घेणे
गार झाल्यावर आवडीच्या आकारात वड्या पाडणे
सजावट बदामाचे पातळ काप

jayvrishaligmailcom

मेरे हिस्से में फूल भी आए, और काँटे भी।
मैंने दोनों को संभाल कर रखा, क्योंकि फूलों ने मुस्कुराना सिखाया, और काँटों ने झुकना नहीं।
अब जो मुझे देखता है, उसे सिर्फ मेरी चमक दिखाई देती है, उसे यह नहीं दिखता कि मैंने खुद को कितनी बार राख से उठाया है।

parmarsantok136152

मैंने अपने दिल को मोहब्बत करना सिखाया है, और अपने सपनों को हकीकत में बदलना भी।
मैं फूलों-सी नर्म भी हूँ, और तूफ़ानों के सामने खड़ी रहने का हौसला भी रखती हूँ।
लोग मेरी मुस्कान देखते हैं, मगर उन्हें क्या पता, उस मुस्कान के पीछे कितनी दुआएँ, कितनी मेहनत और कितने अधूरे सफ़र छिपे हैं।
मैं किसी एक पहचान में बंधने नहीं आई, मैं अपनी कहानी खुद लिखने आई हूँ।

parmarsantok136152

Poem section:
बड़ा खराब लगता है ये जून का मौसम
सुबह तो जैसे होती ही नहीं, धूप चुभती है
हू... बजे ही दोपहर हो जाती है
गर्म हवाएं तन को झुलाएं
मन को झकझोर भी जो आए
एक अजीब सी बेचैनी मोहे दिन रात
कहीं आना-जाना सब बंद
बस घर में ही रहो बंद
पेड़-पौधे भी उदास रहे
बारिश को नैना तरस रहे
बंद कमरों में कैद बच्चे चिल्लाएं
माँ को भी गुस्सा आए
ये जून का मौसम ना मुझको भाए
क्या करूँ, क्या रखाऊँ कुछ समझ न आए
चुभती गरमी, आए पसीना, गर्म हवाएं
ऐसे में ऐसी भी कोई कब तक चलाए
हाय गर्मी हाय गर्मी हाय हाय हाय।

drvandnasharma8596

Good Morning 🌅

harshparmar8722

कबर और कदर में कोई फर्क नहीं दोनों मरने के बाद ही मिलती है...ये एक सच्चाई है ।
अर्थी जनाजे के पीछे चल रहे लोग उसकी अच्छाई बुराई के बारे आपको बता देते है ।


बात अच्छी लगी हो तो कॉमेंट करके बताई ।

लेखक भगवत सिंह नरुका ✍️✍️✍️✍️

mystory021699

छोड़ दी हमने े चालाकी करना वरना तुम जैस े कार्टून को पेंसिल से बना कर थूक से मिटाया करते थे...!!


लेखक भगवत सिंह नरुका ✍️✍️ बात अच्छी लगे तो कॉमेंट में बताओ

mystory021699

📗ममता गिरीश त्रिवेदी ✨की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

हर फूल गुलाब नहीं होता
हर नशा शराब नहीं होता
दिवाने डूब जाते हैं इसमे
जब इश्क का ये दरिया पार नहीं होता

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

सम्राट की अंतिम प्रार्थना ✧
(वेदांत 2.0 लाइफ़ महामंत्र)
हे नाथ नारायण, हे अनादि अस्तित्व,
आज तक मैं भिखारी बनकर तेरे दरबार में खड़ा रहा।
माँगा धन, माँगा पद, माँगा सुख, माँगी सुरक्षा।
माँगी भीड़, माँगी प्रशंसा, माँगे चमत्कार।
मक्खी-मच्छर की भाँति अपने छोटे-छोटे गट्ठर लेकर तेरे द्वार पर गिड़गिड़ाता रहा।
पर आज दिखता है— मैं कितना मूर्ख था।
जो पहले से ही मिला हुआ था, उसी को बार-बार माँगता रहा।
जो माँगना चाहिए था, उसे कभी माँगा ही नहीं।
आज समझ आया— तू कभी रोकता नहीं।
तू तो अनादि काल से निरंतर दे रहा है।
सूर्य दिया, साँस दी, धरती दी, आकाश दिया, चेतना दी।
तेरा देना कभी समस्या नहीं था।
समस्या केवल इतनी थी कि मैं उसी को माँगता रहा जो पहले से ही दिया जा चुका था।
इसलिए हे प्रभु,
आज मैं वह माँग माँगता हूँ जिसके बाद कुछ शेष न रहे।
न भोगं देहि, न योगं देहि।
न देहि सुखं, न दुःख-वियोगम्।
सद्बुद्धिं देहि केवलम् एकाम्, येन सत्यं पश्यामि, अहं-तमो भिन्द्याम्।
न भोग दे, न त्याग दे।
न सुख दे, न दुःख का नाश दे।
केवल सद्बुद्धि की एक किरण दे—
जिससे सत्य और असत्य का भेद दिखे।
जिससे ‘मैं’ नामक अंधकार कटे।
मुझे परिस्थिति बदलकर मत दे।
मुझे वह तेज दे जिससे हर परिस्थिति में तेरा ही दर्शन हो।
मुझे समाधान मत दे।
मुझे वह बोध दे जो जान ले कि समस्या कभी थी ही नहीं;
केवल दृष्टि पर धुंध थी।
हे अस्तित्व,
मेरी झोली मत भर।
मेरी झोली ही गिरा दे।
ताकि दिखे—
मैं कभी खाली था ही नहीं।
मैं स्वयं तेरे खज़ाने का अंश हूँ।
यह भिखारी की याचना नहीं,
यह सम्राट की अंतिम माँग है।
क्योंकि जिसने सद्बुद्धि माँग ली,
उसने सम्पूर्ण ब्रह्मांड की चाबी माँग ली।
उसके बाद जगत जैसा भी हो,
उसका आंतरिक सिंहासन अडोल रहता है।
हे नाथ,
सद्बुद्धिं देहि।
बस।
इति।
🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲
Independent Researcher & Philosopher
Vedanta 2.0 ©
ORCID: 0009-0000-8083-0685
परिचय:
वेदांत 2.0 एक आधुनिक दार्शनिक मॉडल है, जिसके माध्यम से वेद, उपनिषद, गीता, बौद्ध दर्शन, योग, तंत्र, धर्म, मनोविज्ञान, जीवन और चेतना को 0–9 Framework के आधार पर समझने का प्रयास किया गया है। यह एक स्वतंत्र शोध-परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य प्राचीन अनुभवजन्य ज्ञान और आधुनिक चिंतन के बीच संवाद स्थापित करना है।

bhutaji

કહેવાનું ઘણું પણ અધુરું રહ્યું......

તું નથી જિંદગીમાં પણ તોય તૂં જોયી મને.....

હૃદયને મનાવું પણ ઈ ક્યાં કોઈ નું માને....

હકદાર જિંદગીમાં નવા અમારે પણ હ્રદયે વસવાટ આજેય તમારો.....

✍️❤️‍🩹...સોનલ રાવલિયા...❤️‍🩹✍️

....

saturavaliya827405

કંઈક વાર્તા લખી નાખીએ પણ અફસોસ કે વાંચવા વાળા હાથ અમને સમજી નાં શક્યાં.....

કંઈક વાતો અમે થોભ્યા વગર કહી દયે પણ અફસોસ
વાતો સમજે કોણ...?

કંઈક કામ અમે કહ્યા વગર કરી દયે પણ અફસોસ
એ કામ ને જોઈ કોણ....?

કંઈક જિંદગી અમે કોઈ નાં હાટું જીવી લયે પણ અફસોસ ત્યાં અમે દેખાય ક્યાં...?

જિંદગી આખી બીજા માટે ઘસાયા પણ અફસોસ પાછું વળીને જોયું તો હું જ ખોવાઈ ગઈ...!

✍️❤️‍🩹 ....સોનલ રાવલિયા......❤️‍🩹✍️

saturavaliya827405

कितने ही पल गुजार लूं साथ तेरे,
सांसे यही कहती “दिल अभी भरा नहीं”...! ❤️😌

narayanmahajan.307843

अब कोई आवश्यकता नहीं है.....

abhi006

अजीब है ना –
जिसे छूने की इजाज़त तक नहीं,
वही रूह की सरहद तक महसूस होता है।
​शायद इसीलिए
फ़ासलों में पला इश्क़
वक़्त से भी गहरा होता है।

narayanmahajan.307843

सच्चे रिश्ते खामोशियों से नहीं टूटते, बस कभी-कभी उन्हें सांस लेने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए होता है। और जब भरोसा बाकी हो, तो इंतज़ार बोझ नहीं, उम्मीद बन जाता है।

parmarsantok136152

Why Modern Marriage is a Challenge for Women's IndependenceDescription: Is marriage inherently unequal?

📖 In my book, Woman and Society, I dive deep into the Time Use Survey results and the "dual burden" that stresses modern women. Discover the 3 different models of marriage prevalent today. #WomenEmpowerment #ModernMarriage #BookRecomendations #GenderEquality

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