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New bites

મિત્રો,
ફરી હાજર છું, મારી નવી રચના સાથે, આશા છે આપ સહુ ને પસંદ આવશે

jiteshdattani024052

વૃંદાવન ની વાટે,,,🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

🙏🙏बढ़ रही 'बस्ती' से ज्यादा कम हो रही 'मानवता' डरा रही है,

हम रहे 'मुसाफिर' पर हम हमारे 'आशियानों' को संभाल रहे नहीं हैं।🦚🦚

parmarmayur6557

Omm namo bhagavate vasudevaya namaha
Radha Krishna jai jagannath

skptech

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

Do you know that where there’s positive vision, there is no vindictiveness, grudge, a mental note or any complaint inside? This is an important key to distinguish between positivity and negativity.

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dadabhagwan1150

GUJARATMITRA NEWSPAPER 💫

niraliipatel.127808

कविता जीवन का मर्म

11/7/26

लिखा है क्या हाथों की लकीरों में
छुपा है क्या इन तकदीरों में
मिलता है वही, होता है जो नसीबों में
सिर्फ मेहनत करने से नहीं मिलती सफलता
खेल विधाता का कोई नहीं समझ सकता

होना था जिस दिन राम का राज तिलक
हुआ वनवास उसी दिन, लगा कैकेयी पर कलंक
होनी थीं हो गई टाल सका ना कोई
भविष्य की गर्त में राज छिपे हैं कई

चक्र है ये कर्मिक फल का
हिसाब है ये कई जन्म का
नहीं ज्ञात कौन सा कर्म
बदल देगा अगले जन्म का मर्म

रहता है इंसान इसी भ्रम
'मैं' करता ना समझता कर्म
कर्ता करे ना कर सके
बाल ना बांका होय

जिसकी किस्मत महाकाल लिखें
उसकी बिगाड़ सके ना कोई
कब किससे कैसे मिलना है
कर्मों का फल जरूर मिलना है

दीन सेवा ही परम धर्म है
अक्षर नाद ही परम ब्रह्म है
तप वाणी का जिसने किया
मोह छोड़ पर उपकार किया
सुधारा उसने अपना कर्म है
यही जीवन का मर्म है।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली
11/7/26

drvandnasharma8596

🏵️ छोले कटलेट

🏵️साहित्य
एक वाटी छोले
दोन मिरच्या
आले
जिरे
बडीशेप
कोथिंबीर
काळे व पांढरे तीळ
मीठ चवीनुसार
तिखट
हळद
कसुरी मेथी
गरम मसाला
ओरिगानो (ऐच्छिक)

🏵️कृती
रात्री छोले भिजवुन ठेवावे
सकाळी त्यात मिरची आले घालून कमी पाण्यात भरड वाटावे

🏵️या वाटलेल्या मिश्रणात जिरे ,बडीशेप ,कोथिंबीर ,तिखट
हळद ,कसुरी मेथी ,गरम मसाला ओवा ओरिगानो (ऐच्छिक) घालून एकत्र मळून घ्यावे व साच्यातून बदामी आकारात शेप द्यावा
अर्धा तास फ्रीज मध्ये सेट करावे


🏵️ अर्ध्या तासानंतर
कढईत तेल घालून कडकडीत तापवावे
नंतर गॅसची आच मंद करुन हे कटलेट खरपूस तळून घ्यावेत

🏵️सोबत
कांद्याच्या रिंग
आणि टोमॅटो सॉस

jayvrishaligmailcom

ऋषभ जी के रचित श्रीराम आरती -
छन्द - चौपाई
आरती वर श्रीराम जी क ।
मङ्गल कीर्ति सीय स्वामी क ॥टेक॥
परब्रह्म लौकिक अवतारा ।
निराकार लेहन आकारा ॥
अद्भुत लीला से जग तारा ।
तिमिर पाप दूरी भक्तन्ह क ॥क॥
सन्त वेद पुराण गावेला ।
रामचरित मङ्गल फल देला ॥
सुघर पवित्र चरित्र सुहेला ।
जीवन दर्शन बा श्रीराम क ॥ख॥
गावा विधि हर मुनि जन नारद ।
शुक सनकादि पार्वती शारद ॥
व्यास वर कवि विज्ञान विशारद ।
ग्रन्थ शेष हनु सन्त वाल्मीक ॥ग॥
काकभुशुण्डि कीर्ति गावेला ।
दर्शन दे परम धाम देला ॥
सव मोह माया दुःख हरेला ।
माता पिता हर तरह ऋषभ क ॥घ॥

ऋषभ विश्वकर्मा

rishabhvishwakarma

सर्द सूरत गुलाब हो जाए,
और आदत खराब हो जाए ।।

शाम को साथ बैठिए आ के,
एक प्याली शराब हो जाए ।।

बेखुदी के सवाल पर मेरे,
आपका भी जबाब हो जाए ।।

खर्च कितना किया पसीने पे,
आज इसका हिसाब हो जाए ।।

झाँक कर देखिए विजय दिल में,
राज सब बेनक़ाब हो जाए ।।

@सर्वाधिकार सुरक्षित - डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

have to varshi ja mehula

naranjijadeja7114

हमनें देखा हैं अपनीं आँखों से
इक दिल के टूटने का मंज़र
जब अपनें हीं उतार देते हैं
अपनों के हीं सीनें में खंजर

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

🫶🍁🫶

devakidevjeetsingh0819

मीठी मीठी बातों से दिल जीतकर
लोग ज़िंदगी उजाड़ देते है..
💔💯🥺

narayanmahajan.307843

जय श्री कृष्ण

naranjijadeja7114

डाॅ.विजय प्रताप शाही को "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय- रायबरेली" द्वारा "विद्या वाचस्पति मानद उपाधि " दिया गया -

११.०४.२०२६
गोरखपुर में आचार्य कुल के दो दिवसीय (१०-११ अप्रैल ) आयोजन के समापन के बाद गोरखपुर में सरल सहज व्यक्तित्व/वरिष्ठ कवि साहित्यकार डा. विजय प्रताप शाही जी आवास पर जाने का अवसर मिला।
जहाँ उन्हें "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय- रायबरेली" द्वारा "विद्या वाचस्पति मानद उपाधि " एवं "दिव्य गंगा सेवा मिशन- हरिद्वार" द्वारा "गंगा सेवी सम्मान" प्रदान किया गया। इस अवसर पर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति शिवनाथ सिंह "शिव" जी व कुलाधिपति आ इन्द्र बहादुर सिंह जी स्वयं, दी ग्राम टूडे के संस्थापक/संपादक आदरणीय शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी, वरिष्ठ साहित्यकार/धर्मावलंबी आ. नंदलाल मणि त्रिपाठी 'पीतांबर' जी, आ देव दीप के संस्थापक आ. दिनेश गोरखपुरी जी, आ. ईश्वर चन्द्र विद्या वाचस्पति जी आ. मुक्तिनाथ त्रिपाठी जी आदि ज्येष्ठ श्रेष्ठ मनीषियों का सानिध्य आल्हादित करने वाला रहा।
उक्त अवसर पर आ. शाही जी ने अपनी भक्ति रचना "श्री हनुमंत प्रकाश " की एक - एक प्रति सभी भेंट स्वरूप प्रदान कर गौरवान्वित किया।
इस विशेष अवसर का साक्षी बनने और एक साथ इतने वरिष्ठ जनों का सानिध्य, स्नेह आशीर्वाद मेरे लिए भी अविस्मरणीय है।
आ. शाही जी को उनकी उपलब्धियों/सम्मान के लिए बधाइयां शुभकामनाओं के स्वस्थ सानंद और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ सभी उपस्थित विभूतियों को नमन वंदन प्रणाम ।

vijaypshahi

Book review: शंभू बावनी
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छत्रपती संभाजी महाराजांवर मराठी भाषेत लिहिल्या गेलेलं काव्य तसं पाहिलं तर कमी प्रमाणात आहे. मात्र ओंकार पांडव यांनी हे कार्य उत्तमरित्या पेललं आहे. ह्या पुस्तकाचे नाव सार्थ ठरवत हे पुस्तक आपल्यासमोर श्री शंभूराजांची शौर्य गाथा काव्य रूपात मांडते. लेखकांनी ही रचना करताना शिवकालीन कवी भूषण ह्यांच्या छंदांची शैली वापरली आहे. त्यामुळे आपल्याला शिवकालीन काव्याचा भास होतो. अनेक श्लोक हे मराठीसह हिंदी भाषेत आहेत.

शंभूराजांचे पराक्रम, मुघल सत्तेला वाटणारी त्यांची भीती हे अत्यंत गीतमय पद्धतीने इथे मांडलेले आहे. ह्यातील वीररसाचा उत्तम वापर ही आणखी एक जमेची बाजू. ही शंभूगीते जर नव्या पिढीने आत्मसात केलीत तर शंभूराजांची कीर्ती आणखी दूर पसरेल ह्यात शंका नाही. शिवकालीन भाषा समजणे सामान्य लोकांना अवघड जाऊ शकते हे लक्षात घेऊन प्रत्येक श्लोकाचा मराठी अर्थ आणि भाव-विशेष मांडलेले आहेत. त्यामुळे पुस्तक अधिक वाचनीय होते.

पुस्तकातील भोसले कुल-वर्णन काव्य, छत्रपती शिवाजी महाराजांवर रचलेले “शिवराज अष्टक” अश्या इतर रचनांमुळे हे पुस्तक परिपूर्ण झालेले आहे. तेव्हा छत्रपती संभाजी महाराजांचे गुण-दर्शन करणारे हे पुस्तक नक्की वाचावे आणि संग्रही ठेवावे असे आहे.

लेखक: बाजी (ओंकार) पांडव
Insta: @baaji.pandav_writes
प्रकाशक: मुलुखगिरी प्रकाशन

mandarkulkarni

"श्री हनुमंत प्रकाश" से -

वंदउँ बारम्बार, गुरु पद पारस मनहिं मन ।
करहिं जगत उजियार, हे सत साधक सहज बढ़ि ।।

वंदउँ बारम्बार, श्री गणेश विघ्नेश अब ।
करहिं नमन् स्वीकार, आदि पूज्य प्रथमेश पुनि ।।

वंदउँ बारम्बार, विमला विद्या महाश्रया ।
विपुल ज्ञान भण्डार, जिन कर पावहिं मूढ़मति ।।

वंदउँ बारम्बार, गौरी शंकर सरस मुख ।
आदि शक्ति ओंकार, सकल सृष्टि आधार जेहि ।।

वंदउँ बारम्बार, अतुल युगल छवि धारि हिय ।
सत्य धर्म अवतार, सियाराम सुख धाम जेहि ।।

बंदउ बारंबार अब, चतुर सुवीर सुजान ।
पवन पुत्र अंजनी सुत, रामदूत हनुमान ।। (01)

हे हनुमंत बीर बलवंता ।
दानव दलन संत रिपुहंता ।।
मंगल मूर्ति महा बलवाना ।
संकट मोचन कृपानिधाना ।।
अंजनि पुत्र केसरी लाला ।
शंकर सुअन शुभंकर बाला ।।
महावीर बजरंगी वीरा ।
वायुपुत्र कपि शैल शरीरा ।।
हे रुद्रांश लोक हितकारी ।
राम सहाय धर्म ध्वज धारी ।।
रामदूत सियसुत कपिनायक ।
धर्म धुरंधर धर्म सहायक ।।
हे दुखभंजन हे जगबंदन ।
हे कपिचंदन मारुतिनंदन ।।
हे रणबीरा हे मतिधीरा ।
हरहुँ नाथ जन जन की पीरा ।।

करहुँ निवेदन नाथ पुनि, चंदन चरण पखारि ।
धरहिं विराजहिं पवन सुत, पुनः धर्म ध्वज धारि ।। (02)

स्वरचित
@ सर्वाधिकार सुरक्षित – डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

Ice Cream 1 Horror Game Story In Hindi Comming Soon By Speedy Gamer

vihanbakshi008153

કહેવાય છે ને કે સંઘરેલો સરપ પણ કામ આવે એમ અમારા ઘરમાં આઝાદી સમયનુ પણ ઘણુય સંઘરેલુ જોવા મળે. વરસમા ૨ વાર ધુહ-જારા ટાઈમે કાઢી,સાફ સફાઈ કરી પાછુ ઠેકાણે મુકી દેવાનુ એ આશાથી કે કયારેક કામ આવશે. એમાનો આ સિકકો બ્રિટિશ ઇન્ડિયા વન પાઈસ તાંબાનો સિક્કો છે જે ૧૯૪૩ અને ૧૯૪૭ ની વચ્ચે બનાવવામાં આવ્યો હતો.આ સિક્કાના મધ્યમાં એક વિશિષ્ટ છિદ્ર છે, જે યુદ્ધ દરમિયાન ધાતુ બચાવવા માટે રચાયેલ છે. આ એક રૂપિયાના ૧/૬૪મા ભાગ અથવા એક અન્નાનો ૧/૪ ભાગ બરાબર હતું.આ સિક્કાઓ ક્યારેક જ્યોતિષશાસ્ત્રમાં અથવા તેમના ઐતિહાસિક મહત્વને કારણે ઘરેણાંના પેન્ડન્ટ તરીકે ઉપયોગમાં લેવાય છે. ખુબ નસીબદાર સમજુ છુ હુ મારી કે મારા દાદા-પરદાદાની વીરાસત જોઈ-જાણી તથા આપણા અમુલ્ય વારસાને માણી શકુ છુ.

jeniagravatgmailcom