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New bites

Granny Game Horror Story

. ग्रैनी के परिवार का इतिहासएंजलीना (Angelina): ग्रैनी की एक बेटी थी जिसका नाम एंजलीना था।स्लेंडरीना (Slendrina): एंजलीना की शादी एक वैज्ञानिक (The Coffin Guy) से हुई, जो बाद में खुद एक वैम्पायर बन गया। उन दोनों की एक बेटी हुई, जिसका नाम स्लेंडरीना था (यानी ग्रैनी की पोती)।श्राप और मौत: स्लेंडरीना का पूरा परिवार एक प्राचीन श्राप की वजह से भूतों में बदल गया। कुछ समय बाद, एंजलीना और स्लेंडरीना की रहस्यमयी हालातों में मौत हो गई।

पोती (स्लेंडरीना) की मौत के बाद, उसकी आत्मा ने अपनी दादी (ग्रैनी) को बहुत सारी डार्क पावर्स (भूतिया शक्तियां) दे दीं। इन शक्तियों के कारण ग्रैनी एक क्रूर और अमर भूत (ज़ॉम्बी जैसी जीव) बन गई। ग्रैनी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने मृत पति, ग्रैंडपा (Grandpa) को भी एक ज़ॉम्बी के रूप में जिंदा कर दिया।

किडनैपिंग: ग्रैनी अब एक पुराने, सुनसान और डरावने घर में अकेली (या ग्रैंडपा के साथ) रहती है। रास्ते से गुजरने वाले किसी भी अनजान इंसान (प्लेयर) को वह किडनैप कर लेती है और अपने घर में बंद कर देती है。5 दिनों की मोहलत: ग्रैनी प्लेयर को अपने घर में कैद रखती है। प्लेयर के पास उस घर से भागने के लिए केवल 5 दिन का समय होता है。तेज़ सुनने की शक्ति: ग्रैनी अंधी नहीं है, लेकिन उसके सुनने की क्षमता बहुत तेज है। घर में अगर कोई भी चीज़ (जैसे कोई बर्तन या किताब) नीचे गिरती है, तो ग्रैनी तुरंत उस आवाज को सुनकर वहां पहुंच जाती है और अपने हाथ में मौजूद भारी डंडे (Bat) से मारकर प्लेयर को बेहोश कर देती है。

खतरनाक अंत: अगर प्लेयर 5 दिनों के भीतर घर के मुख्य दरवाजे (Main Door Escape) या कार (Car Escape) के जरिए भागने में असफल रहता है, तो ग्रैनी उसे बेरहमी से मार देती है。

vihanbakshi008153

mere khayalo kiaa gai ue paheli barish
bhgi sadke or pahad fir bhi hum lavarish

naranjijadeja7114

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hyltoncraigupshon.185547

I haved added my 7 short stories as a book. which includes the following stories. available on google play books.
ஸ்னேகாவும் புத்தகமும்
ப்ரவீனும் ஸ்வாமியும்
மதுமிதா வேலைக்கு போகிறாள்
வெயில் காலம்
இருளும ஒளியும்
அந்தி மாலை
சூர்யாவின் கதை

kattupayas.101947

" सुकून की तलाश "


कितने साल बीत गये ए दोस्तों, हमारी बात नहीं हो रही।
जब सजती थी हमारी भी महफिलें वो रात नहीं हो रही।

आज फिर से बचपन जीने की हो रही है तमन्ना दिल में,
पर क्या करें दोस्तों? आप से ही मुलाकात नहीं हो रही।

खो गइ कागज़ की कश्ती, थम गया अब बारिश का पानी,
जो भीगा सके इकठ्ठा हमें ऐसी अब बरसात नहीं हो रही।

कहा था सबने कि जुदा होकर भी मिलेंगे हर मोड़ पर,
मगर मिल सके एक दुसरे से वो इनायत नहीं हो रही।

कमा तो रहे हैं हम सब यहाँ शौहरत और पैसा, ए दोस्त,
मगर जो सुकून दे जाए दिलको वो खैरात नहीं हो रही।

मोबाइल की स्क्रीन पर अक्सर मिलने लगें हैं हम सब,
मगर गले लगकर जो हंस लें, वो कायनात नहीं हो रही।

चाय की वो टपरी आज भी हमारा इंतज़ार करती है,
मगर जहाँ ठहाके गूंजते थे, वो शुरुआत नहीं हो रही।

"व्योम" तन्हाई में अक्सर गुज़रने लगी हैं अब तो रातें,
जो सुबह सुकून देती थी, अब वो सौगात नहीं हो रही।

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

असाच एक रविवार....

#एक_fundu_ट्रीप ..😍

पन्हाळा !!

कोल्हापुर पासून अत्यंत जवळ असलेला पन्हाळगड प्रत्येक कोल्हापुर वासी माणसाच्या हृदय्यात मानाचे स्थान राखुन आहे !!
पाउस सुरु व्हायच्या दिवसात पन्हाळा गडावर ढग..उतरतात.तो “नजारा “अप्रतिम असतो .एका वर्षी माझी मैत्रीण
तिच्या कुटुंबां सह कोल्हापूरला आली होती .देवीचे दर्शन तिला घ्यायचे होते .मी तिला सहज पन्हाळा सहल सुचवली .
खरेतर घरच्या एका महत्वाच्या प्रोब्लेम मुळे तिचा अजिबात मूड नव्हता एन्जोय करायचा ...पण माझ्या आग्रहा मुळे ती तयार झाली
जून ..महिन्याचा दुसरा आठवडा होता तो .. अजून सुरवात नव्हती पावसाला .आम्ही पन्हाळ्यात पोचलो थोड फिरायला सुरु केले
तोवर अचानक हवा बदलली आणि सगळीकडचे ढग गोळा व्हायला सुरु झाले ढग आमच्या इतके जवळ होते की अगदी हातात धरावे वाट्त होते !!!!

आणि अचानक झूम झूम पावसाला सुरवात झाली आम्ही पळत पळत एका हॉटेल चा आश्रय घेतला .तिथे मस्त कांदा भजी तयार करीत होते .मग हॉटेल च्या लोबी मध्ये बसून बाहेरचा पाउस एन्जोय करीत आम्ही खमंग कांदा भजी आणि चहा चा आस्वाद घेतला .
हॉटेल उंचावर असल्याने संपूर्ण गडावर पडणारा पाउस दिसत होता .दोन तास आम्ही तो “समा “अक्षरशः एन्जोय केला .
मैत्रीण खुप खुश झाली ..माझ्या चिंतांचा मला खरेच विसर पडला ग ..असे तीने मला बोलून दाखवले .
तशा असंख्य आठवणी आहेत पन्हाळ्या च्या .कोल्हापुरच्या अगदी जवळ असल्याने कधी ही “मूड “झाला की निघतो
आम्ही तिकडे .एखाद दिवशी उठले की चहा घेवून नाश्त्याला पन्हाळ्यात ,तर कधी दुपारचे जेवण घेण्या साठी तिकडे जायचे .
कधी संध्याकाळी डिनर तिथे एखाद्या हॉटेल ला घ्य्यायचे असाही बेत असतो .जानेवारी महिन्या च्या आसपास तिकडे रस्त्यावर
गुऱ्हाळ पण चालू असतात .येता जाता ओळखीच्या लोकांनी बोलावलेल्या गुऱ्हाळात पण जाऊन गरम गुळ ,उसाचा रस मनसोक्त
पिता येतो
तीन दरवाजां जवळ बचत गटातील बायकांनी खाद्य पदार्थांची दुकाने थाटली आहेत
खमंग भजी चमचमीत बटाटे वडा आणि इतर अनेक पदार्थ अत्यंत कमी किमतीत इथे मिळतात
सर्वाचे आकर्षण ठरलेला तेथील जेवणाचा मेन्यू म्हणज#पिठले भाकरी
फक्त तीस रुपयात एक मोठी कुरकुरीत पातळ ज्वारीची भाकरी पिठले ,मिरची चा खर्डा ,दही आणि मसाले भात असा
हा फक्कड बेत असतो .आवडत असेल तर तिखट चमचमीत भरले वागे पण देतात .
तव्या वरची गरम भाकरी आणि स्वच्छ मोकळी गडावरील हवा !
चार घास जास्त च जातात पोटात ...शिवाय वाढणाऱ्या बायकांचा प्रेमळ आग्रह
काय लागल तर मागून घ्या हा खास “कोल्हापुरी आग्रह ...फार समाधान वाटत जेवताना ..
सर्व थरातील आणि सर्व गावातील लोकांच्या या मेन्यू वर अक्षरशः उड्या पडतात
असा हा पन्हाळा प्रत्येक कोल्हापूर वासीयाची “जान “आहे ..

jayvrishaligmailcom

#राधा कृष्ण संवाद 🥀

एक दिन कृष्ण ने राधा से पूछा....
‎" राधे, बताओ तुम्हारे लिए प्रेम क्या है....???
‎राधा ने भी मुस्कुराकर बड़ी सरलता से जवाब दिया।"दो दिलों का मिलना, दो रूहों का जुड़ना यहीं प्रेम हैं।"

‎इस बात पर कृष्ण मुस्कुरा दिए और बोले.....
‎"बस यहीं प्रेम की परभाषा हैं तुम्हारे लिए,
‎अगर दो दिलों का मिलना प्रेम हैं तो फिर कोई एकतरफा प्रेम करे, क्या वो प्रेम नहीं है....??? प्रेम तो तब भी प्रेम ही रहेगा, प्रेम तो प्रेम हैं वहां दिलों का मिलना या रूहों का जुड़ना मायने नहीं रखता।
‎"….... प्रेम तो मां के मातृत्व में भी हैं जो अपने बच्चे को नव महिने अपने पेट में रखती हैं वो दर्द पीड़ा सहती है, उस असहनीय प्रसंव पीड़ा को सहन करने के बाद भी जब वो अपने हाथों में अपने नवजात शिशु को लेती हैं तब उसके चेहरे पर दिखने वाले उस भाव को, उसके दिल में जागने वाले उस एहसास को प्रेम कहते हैं।
‎.....प्रेम वो हैं जो पिता पुरा दिन मेहनत कर के अपने परिवार के लिए कुछ खुशियां कमा कर लाता है और अपने बच्चों के चेहरे पर दिखने वाली उस खुशी को देख कर उसके मन को सुकून मिलता है वो प्रेम हैं।
‎.....प्रेम इस प्रकृति में हैं, इन बहती हुई नदियों में हैं झरनों में हैं.... प्रेम हर उस वस्तु में हैं जो हमें खुशियां देती हैं, प्रेम हर उस रिश्ते में है जो हमसे जुड़ा है....इस खिलती हुई कलियों में हैं जो बीना किसी स्वार्थ के सभी को खुशियां देती है जीवन देती है यह है प्रेम....
‎प्रेम की कोई सीमित परिभाषा नहीं है, प्रेम अथाह हैं, अविरल हैं अनंत है...अदभुत है। इसे कहां दो दिलों में सीमित कर पाओगी तुम....!!!"

‎कृष्ण के इस बात पर राधा ने भी कृष्ण के कांधे पर सर रख के और उनका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़ी सरलता से फिर से जवाब दिया....
‎"प्रेम की परिभाषा क्या है यह मैं नहीं जानती, मेरे लिए तो प्रेम सिर्फ़ तुम हों, तुम्हारा ये साथ हैं जब तक तुम मेरे साथ हों मेरे लिए सारी दुनियां प्यारी है जिस दिन तुम मुझसे दूर हो जाओगे तब ना ये प्रेम रहेगा और ना मैं, तो मेरे लिए प्रेम का मतलब सिर्फ कृष्ण और कृष्ण मतलब ही प्रेम हैं....!!!"

‎जय श्री कृष्ण 🙏🌹

anitasorte6489gmail.com190157

!! इच्छाएं पूरी हो या ना हों,
ईश्वर और प्रेम बदले नहीं जाते !!

narayanmahajan.307843

जरूरी नहीं इश्क में बाहों के सहारे मिले,
किसी को "जी" भर के महसूस करना भी इश्क है...!!

narayanmahajan.307843

लोग अभी बोल रहे हैं, खामोशी से सुन लेना तुम।
जब तुम्हारा वक्त आए,जो भी दिल में हो सब कुछ कह देना तुम, कि कैसे तुमने चलना सीखा, गिर कर खुद संभलना सीखा...

authorsahiba

थके हो तो सुनो
तुम अकेले नह ींहो
कविता


थके हो तो सुनो थोड़ा आराम कर लो
आराम करना आलस नहीं है

दिल में बहुत कुछ दबे है तो बोलो
दिल की बात बताना कमजोरी नहीं है

अगर रोना आता है तो रो लो जी भर रो लो
रोना कोई गुनाह नहीं है

तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हो
बस कहाँ एक बार मैं थक गया हूं
और मैं आराम करना चाहता हूं

मुझे गले लगाओ मैं तुम्हारे बाहों में सोना चाहता हूं

तुम्हारी कमजोरी को कोई नहीं जाचेगा
नहीं तो तुम्हारी गलती को कोई गिनबाने बैठेगा

बस वह तुम्हारे साग तुम्हारे गम में तुम्हारे हो ले गा
तुम्हारी गलतियों को भूल कर तुम्हें गले से लगाएगी

तुम्हें प्यार से गले लगाएगा कोई तो होगा

मत दिखाओ अपनी कठोर चेहरा हर बार
जो तुमसे प्यार करता है
उसके आगे थोड़ा नरम रहना कोई कमजोरी नहीं

abhinisha

તને જો હું ના પસંદ પડુ
તો સાફ ના કહી દેજે.
પછી કોઈ પણ બહાને પ્લીઝ
મારો પ્રાણ ના લેજે.

amiralidaredia175421

मन रे तू काहे न धीर धरे-Mann Re Tu Kahe Na Dheer Dhare-Live| Singer: Vanita Thakkar| Original: Rafi
https://youtu.be/I98zodrkJhw

मन रे तू काहे न धीर धरे …. Mann Re Tu Kahe Na Dheer Dhare …. Live

Such a beautiful song !! Great lyrics by Sahir Ludhiyanavi, perfect composition by Roshan and par excellence singing by the great Muhammad Rafi !!

Here, it is presented by,
Singer : Vanita Thakkar

Film : Chitralekha (1964)

Recorded Live on StarMaker on 8th May, 2026

vanitathakkar

मेरे दोस्त…..

कितने दोस्त हैं तुम्हारे?  
हाँ दोस्त... दोस्ती सबको पसंद है...  
मुझे भी है।  

पर मेरी दोस्ती मतलबी लोगों से नहीं।  
मेरी दोस्ती है अंधेरों से 
जो मुझे उजालों तक ले जाने के क़ाबिल बना रहे हैं।  
जो गिराते हैं, ताकि उठना सिखा सकें।  
जो डराते हैं, ताकि हिम्मत पहचान सकूँ।

मुझे बैठना पसंद है अपनी ख़ामोशी के साथ  
वो मेरी पक्की सहेली है।  
क्योंकि वो शोर नहीं करती, सिर्फ़ सुनती है...  
मेरे एहसास, मेरे आँसू, मेरी वो बातें  
जो लफ़्ज़ों से कहने लायक़ नहीं।  
वो डाँटती नहीं, बस समझती है।

मैं रोज़ अपने ख़ास दोस्त 'अकेलेपन' के साथ बैठकर खाना खाती हूँ।  
वो हर निवाले पर मुझे रिश्तों की अहमियत समझाता है।  
बताता है कि भीड़ में भी इंसान कितना तन्हा हो सकता है,  
और तन्हाई में भी कोई कैसे तुम्हारा अपना बन जाता है।

मेरे दोस्तों का कोई रूप नहीं, कोई रंग नहीं...  
अदृश्य हैं वो सब।  
पर रहते हैं मेरे अंदर, मेरी साँसों में, मेरी रग-रग में।  
हर क़दम पर मुझे संभालते हैं,  
जब दुनिया धक्का देती है, तो यही मुझे थाम लेते हैं।

लोग पूछते हैं, "तुम अकेली क्यों रहती हो?"  
मैं हँस कर कहती हूँ, "अकेली कहाँ... मेरे साथ मेरी पूरी महफ़िल है।"  

मेरा दर्द मेरा दोस्त है…..जो मुझे मज़बूत बनाता है।  
मेरी रातें मेरी दोस्त हैं …..जो मुझे सपने बुनना सिखाती हैं।  
मेरा सब्र मेरा दोस्त है …..जो मुझे टूट कर बिखरने नहीं देता।  

और हाँ,  
जब सब छोड़ जाएँ,  
तो यही अदृश्य दोस्त कंधे पर हाथ रख कर कहते हैं….
"चल... अभी सफ़र बाक़ी है। हम हैं ना तेरे साथ।"  

तो मेरी दोस्ती आम नहीं...  
वो ख़ास है, बेमिसाल है।  
क्योंकि मेरे दोस्त दिखते नहीं,  
पर ज़िंदगी के हर मोड़ पर मिल जाते हैं।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

📖 मजदूर का सपना: मेरी पत्नी IAS बनेगी

rajukumarchaudhary502010

ઝલક તારી મળે જો એક આ આંખને જોવા
મળે ટાઢક આંખોને જીગરને હાશ થઈ જાશે.
હજી ગઈ કાલ સુધી તો જેને કદી જોયા પણ નોતા
ખબર નોતી હૃદયમા ઉતરીને આજ એ ખાસ થઈ જાશે.

amirali3796

ख़ामोश जवाब……

ज़रूरी नहीं हर सवाल का जवाब हो...  
कोई जवाब न होना भी जवाब हो सकता है।

और अगर तुम पूछो कि "कहाँ तक जाना है?"
तो मैं फिर चुप हो जाऊँगी।  
क्योंकि कुछ मंज़िलों के नाम नहीं होते,  
बस एक एहसास होता है 
कि रुकना नहीं है।

मैंने सपनों को अब ताले में नहीं रखा,  
ना दीवारों पर टाँगा है।  
मैंने उन्हें अपनी थकान में बोया है,  
अपनी नींद में सींचा है।  
वो अब दिखते नहीं,  
पर उगते ज़रूर हैं 
हर उस सुबह में,  
जब मैं गिर कर भी उठ जाती हूँ।

लोग कहते हैं “बड़ा सोचो",
मैं कहती हूँ "सच्चा सोचो"  
क्योंकि बड़े सपने अक्सर दुनिया के लिए होते हैं,  
और सच्चे सपने... सिर्फ़ अपने लिए।

तो मेरा जवाब यही है   
कि मैं जवाब नहीं दूँगी।  
मैं बस चलती रहूँगी,  
उस रास्ते पर जो अनजान है,  
उन पैरों से जो थके हैं,  
उस उम्मीद से जो ज़िद्दी है।

एक दिन जब पहुँच जाऊँगी,  
तो तुम ख़ुद देख लेना...  
मेरी ख़ामोशी क्या कह रही थी।

क्योंकि कुछ कहानियाँ  
सुनाई नहीं जातीं,  
वो एक रोज़ सब को ख़ुद सुन जाती है ।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

उम्मीदें…..

मेरी कई उम्मीदें थीं 
दोस्तों से, अपनों से, खुद के सपनों से...  
कभी बेफिक्र होकर, बिना सोच-विचार,  
मैं उन उम्मीदों के पीछे भागा करती थी।  
न परवाह थी लोगों की, न समाज की, न किसी तंज की...  
बस इतना मालूम था कि "जो होगा, देखा जाएगा"।

फिर वक़्त ने आँखें खोलीं।  
कुछ सपने गिरे, कुछ अपने बिखरे,  
कुछ दोस्तों ने रास्ते बदले, कुछ मैंने।  
जिन बातों पर हँसा करती थी, उन्हीं बातों ने रुलाया।  
जिस "देखा जाएगा" पर ऐतबार था,  
उसने ही आईना दिखाया।

और अब जब देखने की बारी आई,  
जो हुआ उससे... अब मैं बहुत फ़िक्र करती हूँ।  
न जाने, न चाहते हुए भी,  
मुझे परवाह रहती है लोगों की, समाज की, और हर एक तंज की।  
मुझे अब मालूम है बेपरवाह होने की कीमत
वो हँसी से नहीं, नींदों से चुकाई जाती है।

अब हर कदम से पहले, करती हूँ मैं बहुत सोच-विचार।  
न जाने अब उम्मीदें चल पड़ी हैं किसी अलग दिशा में 
जो मेरी नज़रों से ओझल है,  
और अब मैं उनके पीछे भाग रही हूँ,  
थके हुए पैरों से, पर ज़िद्दी हौसलों के साथ।  

मैं अब भी भागती हूँ,  
बस अब गिरने से डरती हूँ।  
पहले उड़ती थी, अब संभल-संभल कर चलती हूँ।

शायद बड़े होना यही है   
कि सपने वही रहते हैं,  
बस उन तक पहुँचने के रास्ते बदल जाते हैं।  
और हम, उन रास्तों पर चलते-चलते,  
खुद को थोड़ा-थोड़ा खो कर,  
फिर से पा लेते हैं।

और शायद उम्मीदें भागती नहीं,  
हमारे साथ बड़ी हो जाती हैं।  
बचपन में दौड़ती थीं, अब साथ चलती हैं,  
हाथ थामे, धीरे-धीरे... पर रुकती नहीं।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

इंसान जब समझदार होता है
तो सबसे पहले दिखावा छोड़ता है

ganeshkumar6818

विस्तार और समृद्धि का अंक :३
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विस्तार का अर्थ है फैलाव, यह विस्तार कैसे होता है, यानी आप का विस्तार क्या है? आपका ज्ञान, आपका कुटुंब(पत्नी और बच्चे सहित), आपकी कीर्ति ,आपकी प्रतिष्ठा, आप का शिक्षण, आपका धन और वैभव ,आप का आत्मिक उद्धार । यह विस्तार आप के शरीर के मेद और वजन का भी हो सकता है, यदि आप शिक्षक है तो आप अपने शिष्यों द्वारा आने वाले समाज और पीढ़ी का विस्तार और विकास करते है।
अंक ३ का स्वामी गुरु है और सभी कारक जो ऊपर कहे गए है वह गुरु से संबंधित है।
जब अंक ३ की पुनरावृत्ति होती है ३३३ होने पर पारिवारिक समस्याएं, जल्दी से धन और प्रतिष्ठा की इच्छा यह सब बढ़ सकता है। ३३ आध्यात्मिक उन्नति देता है, यह कुछ सौम्य है। यह कॉम्बिनेशन सेफेरियल ग्रिड से देखा जाता है।

yashibc123gmail.com135615

શુદ્ધ જ્ઞાનથી મોક્ષ, સદ્જ્ઞાનથી સુખ ને વિપરીત જ્ઞાનથી દુઃખ. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/vRtj554M

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dadabhagwan1150

🌱हळदीच्या पानातील पानगी 🌱

🌱पानगी हा प्रकार केळी अथवा कर्दळीच्या पानांवर सुद्धा केला जातो
प्रत्येकाची आणि प्रत्येक ठिकाणी केली जाणारी पानगी वेगळी असते
ही पानगी मी हळदीच्या पानात केली आहेत
घरच्या बागेत भरपूर हळदीची पाने आहेत
उकडणे वाफवणे यासाठी ती भरपूर प्रमाणात वापरली जातात

🌱कधी कधी एखाद्या रस भाजीत सुद्धा य पानाचे एक दोन तुकडे मी टाकते
छान स्वाद येतो 😊

🌱हळद जंतुनाशक असते
शिवाय त्या पानांचा सुगंध आणि त्यामुळे पदार्थाला येणारा स्वाद अप्रतिम असतो
सगळे घर या खमंग सुगंधाने दरवळून जाते
अगदी बाहेर पर्यंत वास पसरतो

🌱य पानात मी केलेल्या पानगी साठी
प्रथम एक वाटी तांदूळ पिठीत
थोडेसे ताक, किसलेले आले, मीठ, किंचित हळद, जिरे व मीठ घालून सरसरीत भिजवून ठेवले
पंधरा वीस मिनिटे हे झाकून ठेवले
(ताक ऐच्छिक आहे नुसत्या पाण्यात पण भिजवू शकता)

🌱हळदीची पाने स्वच्छ धुवून पुसून घेतली
त्याचे चौकोनी तुकडे केले
जेणेकरून तव्यावर भाजायला बरे पडेल

🌱तवा गरम करायला ठेवला
पानांवर आतील बाजूला भिजवलेले तांदळाचे पीठ हाताने पसरून लावले
वरती हलकेच बाहेरच्या बाजूने दुसरे पान ठेवून हलकेच दाबले

🌱अशी सर्व पाने तयार केली
तवा कडकडीत तापल्यावर ही पाने ठेवून दोन्ही बाजूने खमंग भाजून घेतली
याला भाजताना तेल अथवा तूप अजिबात लागत नाही

🌱खाली काढून हलकेच दोन्हीकडची पाने काढली
गरम गरम पानगी तूप आणि घरच्या लिंबाच्या लोणचे सोबत खायला घेतली

🌱अतीशय चविष्ट झाली होती 😋
हळदीच्या पानामुळे ही पानगी खमंग आणि सुवासिक झाली होती 😊

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