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जरूरी नही है कि सब जगह तारीफ हो मेरी,
मेरे कुछ लोग है जो मुझसे किनारा करते है,
कुछ समझदार है जो जुबा पर ले आते है बात,
और कुछ बस मुस्कुराकर बहाना करते हैं.

mashaallhakhan600196

शिवाजी जयंती (19 फरवरी )
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मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। उनकी देशभक्ति और वीरता को बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। शिवाजी महाराज की जयंती पर सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है शिवाजी महाराज और गुरु रामदास जी की एक कहानी 🙏🙏

शिवाजी- रामदास
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बहुत समय पहले की बात है शिवाजी महाराज रामदास जी के पास विद्या अभ्यास करते थे। एक दिन शिवाजी महाराज ने गजानंद नाम के लड़के को उठाकर पटक दिया। इस कार्य को देखकर गुरु रामदास शिवाजी से अप्रसन्न हुए । उन्होंने शिवाजी महाराज को बुलाकर कहा कि, "आज मैं तुमसे अप्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने गजानन को पटक दिया है उसे चोट पहुँची है।" शिवाजी महाराज ने कहा कि, "गुरु जी , इसमें मेरा क्या दोष है? आप ने ही सिखाया है कि निर्बलों की रक्षा करनी चाहिए। गजानंद कमजोर बाल गोपाल को बुरे शब्द कह रहा था । बेचारे बाल गोपाल रो रहे थे । इसमें मेरा क्या अपराध है?" तब रामदास जी ने कहा कि पाठशाला में सब की रक्षा का भार मेरे ऊपर है। तुम्हें गजानंद को सजा देने का अधिकार नहीं है , यह अनुचित बात है। शिवाजी महाराज ने गुरु रामदास से माफी माँगी और भविष्य में ऐसा कार्य न करने की प्रतिज्ञा की। इस पर गुरु रामदास ने कहा कि, "मैं तुम पर प्रसन्न हूँ। मुझे तुमसे बड़ी आशाएँ हैं कि तुम देश की सेवा के लिए तन , मन, धन, कुर्बान करोगे। सारा जीवन देश के लिए अर्पण करोगे।" यह सुनकर शिवाजी महाराज ने गुरु के चरण छू कर प्रतिज्ञा की कि , "मैं जीवन भर अपना सब कुछ देश के लिए अर्पण करुँगा ।" यह सुनकर रामदास जी खुश हुए और उसे अपनी शुभकामनाएँ दी।

शिवाजी महाराज ने जीवन पर्यंत इस प्रतिज्ञा का पालन किया और अपना सर्वस्व देश पर न्यौछावर कर दिया।

संकलन/ प्रस्तुति
आभा दवे
मुंबई

daveabha6

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 न┤_★__
तुम अक्सर पूछती हो न कि क्या
       अहमियत है तुम्हारी.?

तो सुनो मैं एक सूखा हुआ शजर
था, जिसे  अपनी  ही छाँव से डर
                लगता था,

मेरी जड़ों में खारापन था और रूह
   में सिर्फ़ एक ख़ामोश पतझड़,

फिर तुमने छुआ  और मेरी रगों में
     लहू नहीं, वसंत दौड़ने लगी,

तुम मेरी अहमियत मत पूछो, तुम
बस  ये  देखो  कि,  तुम्हारी   एक
                 छुअन ने,

मेरे  अंदर के  उस  मरे हुए इंसान
  को फिर से ज़िंदा कर दिया है,

तुम वो नमी हो, जिसके  बिना मैं
              रेत हो जाता,

तुम वो  रोशनी हो, जिसके बिना
     मेरा हर रास्ता अँधेरा था,

जब तुम पूछती हो कि मैं कौन हूँ
        तो मुझे लगता है कि,

तुम अपनी  ही दी हुई  साँसों का
         हिसाब माँग रही हो,

तुम सिर्फ़ मोहब्बत नहीं हो, तुम
वो वजह हो जिसने मुझे ख़ुद से
              मिलवाया है,

अब  कभी  मत  पूछना  अपनी
जगह, क्योंकि आइना चेहरा तो
           दिखा सकता है,

पर वो रूह नहीं जो तुम्हारी रूह
    में घुल चुकी है...😌🫶❤️
╭─❀💔༻ 
╨──────────━❥
#Zakhmi -E-Zubani..✍🏼
#LoVeAaShiQ_SinGh
╨──────────━❥

loveguruaashiq.661810

थोड़ी देर के लिए ही सही, मेरे पास बैठ
ये लम्हा उधार ले ले, मेरे पास बैठ
शब्द थक गए हैं चलकर, ख़ामोशी बोल उठे
दिल को ज़रा सुला दे, मेरे पास बैठ
तू आए तो मौसम भी अपना रंग बदल ले
ये शाम सँवार दे, मेरे पास बैठ
ना वादों की ज़िद रख, ना कल की बात कर
आज को ही जीने दे, मेरे पास बैठ
आँखों में जो बचा है, वो सच कह जाए
झूठ से थोड़ी दूरी रख, मेरे पास बैठ
मैं दर्द कहूँ या हँसी—तू सुन ले बस इतना
मेरी हर बात समझ, मेरे पास बैठ

palewaleawantikagmail.com200557

आँखों से दूर हुआ पर दिल से ना हुआ दूर..
कोई काम तो मोहन तूने ढंग से किया होता..

momosh99

हम पुरानी सोच के हैं

आजकल प्रेम को
आज़ादी का नाम दिया जाता है।
प्रेमी बनना, फिर प्रेम छोड़ देना,
और बाद में किसी और का पति या पत्नी बन जाना —
इसे ही आधुनिक सोच कहा जाता है।
पर हम पुरानी सोच के हैं।
और इस पर हमें कोई शर्म नहीं।
हमने प्रेम के नाम पर
कभी अपने शरीर को
किसी की वस्तु नहीं बनने दिया।
न किसी को अधिकार दिया,
न किसी को छूने दिया —
सिवाय उस इंसान के
जो हमारा होने वाला पति होगा।
प्रेम करना गलत नहीं है,
लेकिन प्रेम के नाम पर
मर्यादा खो देना
हमें स्वीकार नहीं।
आज कहा जाता है —
“पहले प्रेमी बनो,
फिर पति या पत्नी बन जाना।”
लेकिन किसी का हक़ मारकर
अपना सुख बनाना
हमारी संस्कारों में नहीं।

हम अपने धर्म के मार्ग से नहीं हटेंगे
अगर हमारा होने वाला पति
या हम, उसकी होने वाली पत्नी—
कभी प्रेम के नाम पर
किसी और से जुड़ाव रख चुके हों,
तो वह उनका कर्म है।
उसे वे स्वयं सँभालेंगे,
या उसी का फल झेलेंगे।
हम किसी के अतीत पर
फैसला सुनाने नहीं बैठे।
हर इंसान अपने कर्मों का
खुद उत्तरदायी होता है।
लेकिन एक बात बिल्कुल साफ़ है—
हम अपने धर्म के मार्ग से नहीं हटेंगे।
प्रेम के नाम पर
गलत कदम उठाना
हमारी सोच नहीं।
किसी का अधिकार छीनकर
अपना घर बसाना
हमें स्वीकार नहीं।
आज अगर इसे
“पुरानी सोच” कहा जाता है,
तो कहते रहो।
कम से कम इतना सुकून तो है कि
हमने अपनी मर्यादा,
अपना आत्मसम्मान
और अपना धर्म
कभी नहीं छोड़ा।
अच्छा जीवनसाथी
न लव मैरिज से तय होता है,
न अरेंज मैरिज से।
सब कुछ परिस्थितियों,
कर्मों और भाग्य का खेल है।
हम अपने हिस्से का
धर्म पूरी निष्ठा से निभाएँगे।
बाक़ी, हर किसी को
अपने कर्मों का उत्तर
खुद देना होगा।

archanalekhikha

Do you know that you do not have to forget, you just have to remain in the present? Forgetting is a burden. You cannot forget even if you want to, and besides, the more you try to forget something, the more you will remember it.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/seKgL9WE

#liveinpresent #facts #trending #DadaBhagwan

dadabhagwan1150

જય શ્રી કૃષ્ણ

thakorpushpabensorabji9973

har har mahadev

rs1961948gmail.com080109

whenever I feel isolated.I imagine more and I think more. that didn't happened and that won't be done tooo.My imaginary world is different to this world.yep good night guysssss.

itzmeakki

Good night 🌃🌌

inkimagination

🗒️✍️❣️

mywrites

तू आया तो मुझको सूकं है मिला
दिल की धड़कन बड़ी और दिल को जनूं है मिला,

तेरी रहमत के हम हमेशा कर्जदार है
हमे आज भी तुमसे उतना ही प्यार है,

कोई वजाह ही होगी जो जुदा थे हम
वरना हम आज भी वफादार है,

और बस तुझसे मोहब्बत थी और कभी ना था गिला
बस तुझको बताने का वक्त ही ना मिला .

mashaallhakhan600196

નવ ગ્રહોના ગુણો અને સુખી જીવનના ઉપાયો
* સૂર્ય - સ્વાસ્થ્ય: (યોગ અને કસરત)
* ચંદ્ર - શાંતિ અને પ્રસન્નતા: (ધ્યાન અને પ્રાણાયામ)
* મંગળ - સાહસ: (રમતગમત)
* બુધ - વાકચાતુર્ય: (સંવાદમાં નિખાર/વાતચીતની કળા)
* ગુરુ - જ્ઞાન: (પુસ્તકો અને કોર્સ)
* શુક્ર - પ્રેમ અને આકર્ષણ: (સારી રીતે તૈયાર થવું/સુવ્યવસ્થિત રહેવું)
* શનિ - ધૈર્ય અને સંતોષ: (જે કાર્યો આંતરિક ખુશી અને શાંતિ આપે તેવા કર્મો કરવા)
* રાહુ/કેતુ - ભય અને વ્યસન મુક્તિ / પીડા મુક્તિ અને સહજતા: (પ્રસન્નતા અને ખુશી આપનારા વ્યક્તિઓ તથા વિચારોની સંગત કરવી)
> જે વ્યક્તિ નિત્ય આ નવ ગ્રહોના નવ ગુણોને નિખારે છે, તે હંમેશા સુખી રહે છે.

yashibc123gmail.com135615

એક વાત કહું તને
મા તું મને બહુ ગમે…
-કામિની

kamini6601

🌸🎀🦩💕🌷

नज़र को नज़र से नज़र ना लगे,
कोई अच्छा भी इस कदर ना लगे

तुझे देखा है इस नज़र से,
जिस नज़र से तुझे मेरी नज़र ना लगे𓏧🤍᪲᪲᪲ᥫ᭡⃝🧚🏻‍♀️

🩰˚˖𓍢 🦢✧˚.🎀

simplegirls9894823391

✔️💯

narendraparmar2303