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दिल की बात खामोशी के साथ✨✨

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दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

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निराशा को निराश करने हेतु 5 पॉइंट्स
(१) घर से बहार निकलते ही आपके सिर पर किसी ने ऊपर से कचरा डाला, क्या आप उस कचरे को साफ करेंगे या वैसे ही रहेंगे? अगर हा, तो निराशा भी उस कचरे की तरह है, जब तक सिर पर रहेगा उसकी बदबू आती रहेगी।

(२) दूसरों की मदद करने वाले कही पर भी है इस जहां में, तब तक कोई तकलीफ ऐसी कहा जिसकी पीड़ा कम न हो।

(३) आप निराश खुद से हो, तो भी इलाज खुद ही करोगे। और लोगो से हो तो भी इलाज खुद ही करोगे।

(४) दिल ने न धड़कना छोड़ा, फेफड़ों ने न साँस लेनी छोड़ी तो एक छोटी सी बात पर अपने खुशी और सुकून की मुस्कान क्यों छोड़ी?

(५) आप निराश कहा हो? जो चीजें आप से जुड़ी हुई है वह आप के अनुकूल नहीं है तो किसी और तरह से अनुकूल होगी, सही संगत, सही कर्म और सही विचार ही भाग्य बदल देंगे।

yashibc123gmail.com135615

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

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दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

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दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

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मेरे एहसास 🥀

anitasorte6489gmail.com190157

આ જગતમાં લઢવાડ ક્યાં હોય ? જ્યાં આસક્તિ હોય ત્યાં જ. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

पर्दा उठा प्रदर्श से, हुई तंद्रिका भंग ।
देख रंग बदरंग सब, विजय हो गए दंग ।।

राम तुम्हारे तीर्थ में, ये कैसा अपकर्म ।
दान - कोष को लूटते, मिले कई बेशर्म ।।

सबसे बड़े कुकर्म की, चर्चा चारो ओर ।
दान - सम्पदा राम की, रहे चुराते चोर ।।

करते थे जो आपकी, सेवकाई दिन - रात ।
भक्तों के विश्वास पर, किये कुठाराघात ।।

नैतिकता की आड़ में, हुआ अनैतिक कृत्य ।
गणना के गणितज्ञ थे, किये नग्नवत नृत्य ।।

vijaypshahi

#बाजार
#मार्केट
हे एक चविष्ट मार्केट
ब्रुसेल्स बेल्जियम
जर्मनी इथले
चॉकलेट्स आणि वॉफल्स यांचे
असंख्य प्रकारची आणि चवीची
चॉकलेट्स
अनेक रंगाची
अनेक आकाराची
किती घ्यावी किती खावी असा प्रश्न पडावा...
तसेच जवळचे वॉफल्स मार्केट
आत शिरताच खमंग गोड वास नाकात शिरतो..😋

मैदा अंड साखर आणि इसेन्स वापरून बटर मध्ये खरपुस भाजलेला हा चौकोन चौकोन असलेला हा चविष्ट पदार्थ 😋

पोटात नुसता गलबलाट होतो 😀

हे वॉफल्स पण अनेक चवी ढवी नी सजलेले
ज्याला पाहिजे त्याला त्या प्रकारात मिळणार
कुणाला फ्रूट घालून
कुणाला ड्राय फ्रूट घालून
कुणाला वर आईस्क्रीम हवे
ज्याच्या त्याच्या चवी प्रमाणे ताजे ताजे वॉफल्स ईथे मिळतात

jayvrishaligmailcom

उपवास स्पेशल.
रताळे कचोरी आणि कोथिंबीर चटणी..

चार रताळी उकडून सोलून चवीपुरते मिठ घालून छान हाताने बारिक करुन मळून घेतली
ओले खोबरे,काजु, बेदाणे, थोडी साखर,मीठ बारीक आले तूकडे ,लिंबू ,कोथिंबीर घालून
सारण करुन घेतले
रताळ्याची पारी करुन त्यात सारण भरले
सर्व कचोऱ्या तयार करुन चार तास फ्रिज मध्ये सेट केल्या
खाण्याच्या वेळी गरम तेलात खरपूस तळून घेतल्या
सोबत बारीक चिरलेली कोथिंबीर दाण्याचे कूट साखर मीठ जिरे घालून चटणी केली

jayvrishaligmailcom

मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
कविता


सब मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
मेरी थकी हुई आंखों को नहीं
सब मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे बेजान परे हुए जिस्मो को नहीं

कहते हैं बाल काटने के बाद
मैं अच्छी नहीं दिख रही
मेरी सुंदरता गायब हो गई है


लोग मेरी सुंदरता को देख रहे हैं
मेरे अंदर चल रही हलचल को नहीं


लोग मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे दर्द को नहीं


देखने का बहुत कुछ है
एक बदले हुए इंसान के अंदर
एक भटकते हुए रुह के अंदर

पर लोग वही देखना चाहते हैं
जो नारी के जिस्म में सजावट के काम करते हैं
काले घने बाल
सुंदर कपड़े सजी हुई चेहरे
पर जो नहीं देखते
रुह का तरपन


नहीं देखते थके हुए जिस्म को
नहीं देखते टूटती हुई हिम्मत को


नहीं देखते अटकती हुई सांसों को
नहीं देखते धक-धक धड़कते हुई धड़कनों को

नहीं देखते उसके कंपन को
जो हजारों उमिद टूट जाने के बाद होती है

जो हर जाने के बाद उठाती है
एक सेहरन सी पूरी बॉडी में
डर गुटन तरफ अकेलापन
हताशा निराशा नाउम्मीद


फिर भी ठेहरते हुए सांस धीरे-धीरे ले रहे हैं
कैसे वह जी रहे हैं

वह नहीं देखते एक इंसान जो चल रहा है
वह अंदर से जिंदा है
डरा हुआ है अकेला है
या कब की मर चुका है


वह कभी नहीं देखते
वह बस देखते हैं
रूप रंग चेहरे
हर ऊपरी बदलाव को
वह मन के अंदर की दुनिया को नहीं देखते

वो देखते हैं इस समाज में चल रही
उन औरतों को
जो खूबसूरती और लंबी वालों को सुंदरया मान चुके हैं



उन्हें नहीं भाता
वो औरतें जो खुद से परेशान होकर
खुद की ही बाल काट देती हैं
राहत पाने के लिए अपनी सर की बोझ थोड़ा कम कर देती है

पर अफसोस वह या नहीं देखते

abhinisha

"ठहरा हुआ पल"

कभी-कभी यूँ ही इंतज़ार अच्छा लगता है,  
जैसे शाम को ढलता सूरज सच्चा लगता है।

ना किसी के आने की जल्दी,  
ना किसी के जाने का डर।  
बस एक ख़ाली कुर्सी,  
एक कप चाय, और थोड़ा सा सब्र।

हवा में कोई आहट ढूँढना,  
दरवाज़े को यूँ ही तकना।  
घड़ी की टिक-टिक सुनना,  
और पलकों को धीरे से झपकना।

ये इंतज़ार मोहब्बत का नहीं,  
ये तो ख़ुद से मिलने का है।  
जो बीत गया उसको शुक्रिया,  
जो आएगा उसपे यकीन रखने का है।

कभी-कभी रुक जाना भी ज़रूरी है,  
भागती दुनिया में ठहरना ज़रूरी है।  
इंतज़ार सज़ा नहीं होता हमेशा,  
कभी-कभी ये दुआ सा लगता है।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111