मैं और मेरे अह्सास
माँ
माँ की बराबरी ईश्वर भी नहीं कर सकता हैं l
माँ की जगह कोई भी नहीं भर सकता हैं ll
माँ की ममता और छत्रछाया के बगैर यहां l
संसार समन्दर कोई भी नहीं तर सकता हैं ll
माँ के आँचल की छांव में पनाह हो तो कभी l
चैन ओ सुकून कोई भी नहीं हर सकता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह