मैं और मेरे अह्सास
इंतजार
एक पल तुम्हें देखे बिना गुजारा भी नहीं l
तुम्हारे बिना दूसरा मेरा सहारा भी नहीं ll
एक हम है सारी दयार को ठुकरा दिया l
एक तुम हो की रिश्ता निभाया भी नहीं ll
तेरी कायनात मेंने खुशबुओ से महका दी l
तुने एक गुल आंगन मेरे सजाया भी नहीं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह