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New bites

लघु कविता ✍🏻🤎

jigyasusaini2900

જય શ્રી કૃષ્ણ

thakorpushpabensorabji9973

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

Famous Clock Tower | Iconic Heritage Clock

બસની મુસાફરી દરમિયાન જ્યારે પણ આપણી બસ કોઈ નાનકડા શહેરની બજારમાંથી પસાર થાય, ત્યારે એ બજારની વચોવચ અથવા તો રોડની એકબાજુએ ઊભો જૂના જમાનાનો ડંકાવાળી ઘડિયાળનો ટાવર નજરે ચડશે. અત્યારે ભલે એ કદાચ ન ચાલતો હોય પણ એ 100 – 150 વર્ષ જૂની ઐતિહાસિક વિરાસત લઈને ઊભો છે. આ બ્લોગમાં આપણે જાણીશું, ઘડિયાળના ટાવરના ઇતિહાસ વિશે સાથે જાણીશું - વિશ્વના પ્રખ્યાત ટાવર્સ વિશે.

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mothiyavgmail.com3309

"🚀 बड़ी खबर! [ S C U ] की पहली ब्लॉकबस्टर आ रही है! 🚀
दोस्तों, इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं! मेरी नई और सबसे खूंखार Sci-Fi कहानी "VORTX - 1: द ग्रेट नथिंग" की रिलीज डेट फिक्स हो गई है।
📅 तारीख: 24 फरवरी 2026
📍 कहाँ: सिर्फ मातृभारती पर।
ब्रह्मांड में दरार पड़ चुकी है और डॉ. आरव के साथ एक नया रहस्य आने वाला है। तैयार रहिये इस महा-रोमांच के लिए! 🌌💥
#VORTX #SCU #ComingSoon #SureshSondhiya "

sondhiyasuresh51gmail.com700142

सोचा था मोहन इस होली पर मैं उसको खूब दूंगा रंग..
मगर होली के पहले ही देखो वो कैसा दिखा गया है रंग..

momosh99

વિવિધ રંગે નિખરી છે પ્રકૃતિ
મળી છે ચાહત તેને વસંતની…
-કામિની

kamini6601

मेरा वक्त खराब नही है मेरे दोस्त
ये तो आसलियत दिखा रहे है लोग,

पिछा किसी का ना कभी किया मैंने
वो अलग बात है मेरे गिरते ही मेरे पिछे
से जा रहे है लोग,

कभी मै सिर्फ सच ही बोलता था
अब मुझे ही झूठा बता रहे है लोग,

और खानदान के खानदान उजड़ गए
इस तरह रिश्ते निभा रहे है लोग .

mashaallhakhan600196

*पारस जइसन प्रेम*
भरल वसंत में बरसल सारस जइसन, प्रेम होखे ना सबके पारस जइसन।
मोह वास और काम के इच्छा भरल बा सबमें पैतृक जायदाद के जइसन,
होखे ना लोगवा प्रेम से परिचित, कऽ देला सब कुछ मवाद के जइसन।
जे जियेला उहे जानेला अमृत के हाल, मीरा से पूछऽ काहे लागेला अवसाद के जइसन।
softrebel

softrebel

Let's take a look at the Thane Pran Pratishtha 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/vrzToGzr

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dadabhagwan1150

મનુષ્યને વળાકો ગમતાં નથી, સીધા રસ્તાઓ વઘારે ગમતા હોય છે.
પણ આપણે જેવું વિચારીએ એવું જ થાય એવું કદીય વિધાતા કરતું નથી...

મનોજ નાવડીયા

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manojnavadiya7402

वेदान्त 2.0 — अर्थम अध्याय ✧

अद्वैत: जहाँ कोई माध्यम नहीं
अद्वैत कोई मान्यता नहीं है।
अद्वैत कोई धर्म नहीं है।
अद्वैत कोई मार्ग नहीं है।
जैसे ही अद्वैत को धर्म बनाया गया — द्वैत जन्म लेता है।
जैसे ही अद्वैत को संस्था बनाया गया — पहचान जन्म लेती है।
और जहाँ पहचान है, वहाँ मुक्ति नहीं।

1. माध्यम की सीमा

मूर्ति, मंदिर, मंत्र, गुरु, भगवान —
ये सब साधन हो सकते हैं, पर अंतिम नहीं।
माध्यम हमेशा दो बनाता है:
साधक
साध्य
और जहाँ दो हैं, वहाँ यात्रा है।
जहाँ यात्रा है, वहाँ समय है।
जहाँ समय है, वहाँ जन्म–मृत्यु का चक्र है।

2. अद्वैत — बिना माध्यम

अद्वैत में कोई बीच नहीं रहता।
न पहुँचने वाला, न पहुँचने की जगह।
जब साधन गिर जाता है —
साधना स्वयं जीवन बन जाती है।
यहाँ कुछ पाने की कोशिश नहीं होती,
क्योंकि जो है वही पूर्ण है।

3. धर्म और अद्वैत

धर्म समाज का ढाँचा है।
अद्वैत अस्तित्व का अनुभव है।
जब कोई कहता है — “यह मेरा धर्म है”,
तब बीज बो दिया जाता है।
बीज → संस्था
संस्था → पहचान
पहचान → पुनः चक्र
अद्वैत बीज नहीं बनता,
क्योंकि उसमें “मेरा” नहीं बचता।

4. घोषणा का भ्रम

यदि बुद्ध धर्म घोषित करते —
तो बौद्ध मुक्ति नहीं, परंपरा बनता।
यदि महावीर धर्म घोषित करते —
तो अनुभव नहीं, व्यवस्था बनती।
सत्य घोषणा नहीं चाहता।
घोषणा मन चाहता है।

5. वेदान्त 2.0 की पुकार

आज संसार साधनों में खड़ा है —
गुरु, विचार, पहचान, डिजिटल धर्म।

वेदान्त 2.0 कहता है

कोई मध्यस्थ नहीं।
कोई मार्ग नहीं।
कोई अंतिम पहचान नहीं।
सीधा होना।
सीधा देखना।
सीधा होना ही अद्वैत है।

घोषणा — बंधन

घोषणा सत्य नहीं होती,
घोषणा मन की आवश्यकता होती है।
सत्य को घोषणा की जरूरत नहीं,
क्योंकि सत्य स्वयं प्रकट है।
घोषणा तब जन्म लेती है जब अनुभव को पकड़कर पहचान बना ली जाती है।

1. घोषणा क्यों बंधन है

जैसे ही कोई कहता है —
“यह मेरा मार्ग है”,
“यह मेरा धर्म है”,
“यही सत्य है” —
वहीं द्वैत खड़ा हो जाता है।
घोषणा करने वाला और घोषणा मानने वाला —
दो बन जाते हैं।
और जहाँ दो हैं, वहाँ अद्वैत नहीं।

2. घोषणा से धर्म, धर्म से चक्र

घोषणा बीज है।
बीज → परंपरा बनता है।
परंपरा → संस्था बनती है।
संस्था → पहचान बनती है।
पहचान ही पुनः जन्म का कारण है।
इसलिए घोषणा मुक्ति नहीं देती —
घोषणा चक्र को स्थिर करती है।

3. अनुभव और घोषणा का अंतर

अनुभव मौन है।
घोषणा शब्द है।
मौन में कोई कर्ता नहीं रहता।
शब्द में कर्ता छिपा रहता है।
जहाँ कर्ता है — वहाँ सूक्ष्म अहंकार जीवित है।

4. अद्वैत घोषणा से परे

अद्वैत को कहा नहीं जा सकता।
कहा गया अद्वैत — विचार बन जाता है।
अद्वैत न सिद्धांत है, न शिक्षा।
वह सीधा होना है — बिना बीच के।

5. वेदान्त 2.0 की दृष्टि
न घोषणा।
न संगठन।
न पहचान।
केवल देखना।
जब देखने वाला भी गिर जाए —
वहीं अद्वैत है।

No Path. No Authority. Only Presence.-Vedanta 2.0 Life philosophy,

bhutaji

This story is True.
In late 2025, a Seattle-based artist and YouTuber known as Sunday Nobody documented the creation and sinking of a 3-meter (approx. 10-foot) bronze statue featuring the "Handsome Squidward" meme's face on the body of the ancient Greek Discobolus (Discus Thrower) statue.
Key Details of the Project:
* The Motive: The artist explicitly stated the goal was to "confuse future archaeologists" by leaving a high-quality, durable artifact that blends modern meme culture with classical antiquity.
* The Logistics: * The project reportedly cost around $25,000.
* The statue was cast in bronze, a material chosen specifically because it can survive underwater for over a thousand years.
* To ensure he wasn't committing an "environmental crime," the artist consulted a university archaeologist to confirm the materials wouldn't harm the marine ecosystem.
* The Location: The statue was submerged off the coast of Halkidiki, Greece, at a depth of about 9 meters (roughly 30 feet).
Context & Controversy:
While the stunt went viral for its "chaotic neutral" energy, it did spark a minor debate in the archaeological community. Some experts pointed out that intentionally planting "fake" artifacts can complicate future underwater heritage surveys, though most viewers saw it as a harmless, high-effort piece of performance art.

bkswanandlotustranslators

एक अनकही दास्तां तेरी और मेरी रह गई,
लबों तक आकर हर बात अधूरी रह गई।

नज़रों ने कह दिया जो ज़ुबां कह न सकी,
भीड़ में भी हमारी मुलाक़ात अधूरी रह गई।

वक़्त ने चाहा कि फ़ासले कुछ कम हों,
पर हर कोशिश के बाद दूरी रह गई।

तेरी ख़ामोशी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया,
मेरी हर शिकायत भी बेआवाज़ रह गई।

हम साथ थे, फिर भी साथ न हो पाए कभी,
क़िस्मत की लिखावट कुछ ऐसी रह गई।

नाम तेरा दिल ने हर दुआ में लिया,
मगर हर दुआ मुक़म्मल न हो सकी, अधूरी रह गई।

आज भी यादों में तेरी खुशबू बसती है,
इक अनकही दास्तां… जो तेरी और मेरी रह गई।

palewaleawantikagmail.com200557

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
कमाल है न तुम कहते हो कि बहुत
            छोटी है ये ज़िंदगी,

दो  पल  का  क़िस्सा, ज़रा  सी  ये    
                 कहानी है,

मगर  मैं  तो  ऊब   चुका  हूँ,  इस
         बे-मतलब के जीने से,

मेरे लिए तो ये हर सांस, एक भारी
              बोझ पुरानी है,

अजीब ज़िद है  इस  वक़्त का भी
जो गुज़रता नहीं बस सीने पर ठहर
             जाना जानता है,

थक चुका हूँ मैं खुद को ज़बरदस्ती
                  ढोते-ढोते,

थक गई हैं  आँखें  वही  मंज़र फिर
              से देखते-देखते,

जिसे तुम मुख़्तसर, कह कर डराते
               हो ज़ख़्मी को,

ज़ख़्मी उसे काट रहा है तिल-तिल
             कर जीते-जीते,

कमबख़्त ये ख़त्म होने का नाम ही
                 नहीं लेती,

ये शाम  ढलती  क्यों नहीं,  ये  रूह
             सोती क्यों नहीं,

अजीब मज़ाक है, सब कहते हैं कि
             वक़्त भाग रहा है,

पर मेरे आँगन  में तो ये  पाँव पसार
                 कर बैठा है,

अब और नहीं खिंचती ये थकी हुई
             साँसों की लकीरें,

ये  जर्जर  कश्ती  अब  बस  किसी
        अंधेरे किनारे लग जाए,

बहुत जी लिए, बहुत देख लिया ये
               तमाशा हमने,

अब तो  बस ये  साँस थमे, और ये
    सफ़र यहीं थम जाए…🥀🔥
╭─❀💔༻ 
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
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loveguruaashiq.661810

सुना है तुम,हर पल का हिसाब लगाते हो
फिर भी मोहब्बत को इतना आजमाते हो!
-डॉ अनामिका-

rsinha9090gmailcom

The Path to Balance
2022: The Awakening – I identified my mistakes and faced my flaws.

2023: The Trial – I gained the experience of knowing what to pursue and what to leave behind.

2024: The Pivot – I didn't just learn; I took action and changed my ways.

2025: The Realization – I accepted that not everyone shares my heart or my nature.

2026: The Equilibrium – This is the year of Balance.

The Core Philosophy
"Do not love too fiercely, do not hate too deeply. Do not be overly sensitive to the world, and do not give until you are empty. Find the middle ground in all things. Remember: Not everyone is like you."

writerscaste

थोड़ा सा ऐटिट्यूड़ लगा देता है तुम्हारी सुंदरता में चार चाँद..
हद से बढ़कर ये एट्टीट्यूड़
सुंदरता में लगा देता है ग्रहण..

momosh99

केंद्र और परिधि: सच्ची आस्था की परीक्षा

भगवान का मतलब वह केंद्र है, हम उसकी परिधि हैं। केंद्र कभी परिवर्तन नहीं करता। जब हमने उस केंद्र को अपना भगवान या गुरु बना लिया, तभी सच्ची संभावना का द्वार खुलता है।

जिसने केंद्र को समझ लिया, उसे भगवान की फोटो, गुरु की तस्वीर, गीता के श्लोक या शास्त्रों के किसी प्रमाण की कोई जरूरत नहीं पड़ती। वह जानता है कि सत्य स्वयं प्रकाशमान है। लेकिन जो अभी तक केंद्र को पक्का नहीं कर पाया, वह निरंतर खोज में रहता है। वह बार-बार सबूत मांगता है, भीड़ से पुष्टि चाहता है।

इसीलिए सोशल मीडिया पर भगवान, गुरु, धर्म, शास्त्र और मंत्रों का इतना प्रचार होता है। लोग फोटो शेयर करते हैं, श्लोक पोस्ट करते हैं, क्योंकि उनके भीतर अपने केंद्र पर गहरी आस्था और विश्वास नहीं टिका है। वे दूसरों को मनाने की कोशिश करके खुद को मनाने की कोशिश करते हैं। जितने ज्यादा फॉलोअर्स, लाइक्स और शेयर होंगे, उतना ही उनका अपना केंद्र मजबूत साबित होगा — यही उनका प्रमाण बन जाता है।

देखिए ना, अपनी माँ, अपने बाप या अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास हो तो क्या आप उन्हें साबित करने के लिए प्रचार करते हैं? नहीं। क्योंकि सच्चा विश्वास अंदर से आता है, बाहर से थोपा नहीं जा सकता।

जिस दिन आपके भीतर अपने भगवान, अपने धर्म, अपने गुरु, अपने मंत्र और अपने शास्त्र के प्रति अटूट श्रद्धा जाग जाएगी, उस दिन आपको कोई फोटो, कोई श्लोक या कोई धर्म का प्रचार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रचार दरअसल खालीपन का प्रमाण है। जो व्यक्ति प्रचार करता है, उसे खुद भी नहीं पता होता कि वह क्यों कर रहा है। वह बस भीतर के शून्य को आवाज देकर भरने की कोशिश कर रहा होता है।

व्यापार की तरह सोचिए। अगर दुकान अच्छी है और प्रोडक्ट उत्तम है, तो प्रचार की कोई जरूरत नहीं पड़ती — ग्राहक खुद आते हैं। लेकिन अगर प्रोडक्ट में खामी है या दुकान ठीक से नहीं चल रही, तब भारी-भरकम विज्ञापन और प्रचार की जरूरत पड़ती है।

आज सोशल मीडिया पर भगवान, धर्म, ईश्वर, गुरु, शास्त्र और मंत्रों का जो 24×7 प्रचार हो रहा है, वह इसी बात का संकेत है कि 99% लोगों के भीतर इन पर सच्चा विश्वास नहीं है। वे प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें खुद पर, अपने केंद्र पर भरोसा नहीं है।

सच्चा साधक चुपचाप केंद्र में स्थित हो जाता है। वह प्रचार नहीं करता — वह उदाहरण बन जाता है।

जब आस्था अंदर से पक्की हो जाती है, तब बाहर का कोई प्रमाण, कोई लाइक, कोई शेयर, कोई फॉलोअर की जरूरत नहीं रहती।
वह केंद्र अटल रहता है — और परिधि स्वतः शांत हो जाती है।

bhutaji

લાગણી એ મનનો મીઠો સ્પર્શ,
નિઃશબ્દ હોવા છતાં કરે ઘણો હર્ષ.
આંખોમાં છુપાયેલી એક ભાષા,
જે કહે દિલની અનકહી આશા.

urmivala940395