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New bites

I think you never see this is the life lesson and no one tell you.

vanshsingh118873

when you read please tell me what's on your mind

vanshsingh118873

रिश्ते जो दिल से जुड़े हों 🥀

anitasorte6489gmail.com190157

🙏🙏जो अन्य व्यक्ति के दुःख, दर्द को 'सुनता'है और समझता है,
उसकी 'प्रार्थना' ईश्वर भी 'सुनता' है।🦚🦚

parmarmayur6557

बेमतलब के रिश्तों से बेहतर
बेगाना बनकर जीना हैं।
खाकर दो निवाले गिनकर
पेटभर के पानी पीना हैं।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

लक्ष्य प्राप्त होगा एक दिन, बस मेहनत में लगे रहना होगा। दूसरों के बोली ना सुनकर श, खुद का भविष्य रचना होगा।
especially for Neets and Upse student

ashuashu858439

जल्द ही नई कहानी आने वाली है। दो दुश्मनो की प्रेम कहानी । तो तैयार रहिए — आई स्टिल लव यू के लिए। इसका सारांश यहा बता रही हूं।
**दो ख़ानदानों की विरासत बनी नफ़रत के बीच,
दो दिल अनजाने ही मोहब्बत के बंधन में बंध गए।
एक ने पिता के प्यार की ख़ातिर प्रेम का विश्वास तोड़ दिया,
तो दूसरे ने टूटकर भी प्रेम करना नहीं छोड़ा।
जब अहंकार हार गया और पश्चाताप जीत गया,
तब किस्मत ने फिर वही सवाल दोहराया—
क्या सच्चा प्रेम, विश्वासघात से भी बड़ा होता है?
यह कहानी है प्रेम, पीड़ा, क्षमा और उस एहसास की...
जो हर दूरी, हर शिकायत और हर टूटन के बाद भी बस इतना कहता है—
"I Still Love You."

gautamreena712gmail.com185620

नमस्कार रसिक हो-

arunvdeshpande

🖤 #SneakPeek |

हुक्म और हसरत | अध्याय–15🌸

अर्जुन एक कदम आगे बढ़ा...

सिया अनजाने में एक कदम पीछे हट गई।

यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक उसकी पीठ दीवार से नहीं लग गई।

कमरे में अजीब-सी खामोशी थी...

दोनों की धड़कनों की आवाज़ जैसे उसी सन्नाटे में गूँज रही थी। 💓

अर्जुन की नज़र सिया के जुड़े में उलझी एक छोटी-सी गुलमोहर 🌺 की पंखुड़ी पर ठहर गई।

वह बेहद नर्मी से उसके करीब आया...

सिया की साँस जैसे एक पल को थम गई।

अर्जुन ने बड़ी सावधानी से वह पंखुड़ी उसके बालों से निकालते हुए धीमे से कहा—

"क्या सोच रही थीं... राजकुमारी?" 🖤👑

सिया के पास कोई जवाब नहीं था...

सिर्फ़ धड़कनों का शोर था... ❤️

✨ बाकी कहानी... अध्याय–15 में।

#HukmAurHasrat #ArSia #SlowBurnRomance #RoyalRomance
"कुछ बातें लफ़्ज़ों से नहीं... सिर्फ़ नज़रों से कही जाती हैं। 🖤🌸
अध्याय–15 जल्द आ रहा है..."

dikshaparashar.699046

तो माई डियर प्रोफेसर का भाग चाहिए? अगर चाहिए तो कमेंट करो भाग 29 पर। वरना मै कहनी को पुरी नही करूंगी। यहा लेखक को अपने लिखने के बदले कूछ नही मिलता। और मै मुफ्त मे तो अपनी कहानी नही पढने दुंगी। अगर माई डियर प्रोफेसर के आगे के भाग पढने है तो कमेंट करो। भाग मैने ड्राफ्ट मे लिख रखे है। जैसे ही दस कमेंट हो जाएंगे मै माई डियर प्रोफेसर के भाग अपलोड करना शुरू कर दुंगी। इस समय लेखक गुस्सा है।

gautamreena712gmail.com185620

उलझा हुआ,,,🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

અષાઢી બીજ અને જગન્નાથ રથયાત્રાની ખુબ ખુબ શુભેચ્છાઓ, 🌹🌹🙏🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

वो बचपन कितना प्यारा था

वे चारों हमेशा साथ रहते
खाना भी ना खाते, एक-दूजे के बिना
बीती कितनी मस्ती भरी दोपहरियां सोय बिना
चोट एक को लगती थी,
दर्द सभी को होता था

शाम को अंताक्षरी सजती थी
जीतने के लिए शब्दकोश रटते थे दिन भर
कैरम, लूडो भैया ने सिखाए
खूब चाट पकौड़ी भैया ने खिलाए

अपने हिस्से का भी दीदी मुझे खिलाती थी
नींद खराब कर अपनी
रात को रोज पढ़ाती थी

जब मम्मी बाजार जाती थी
ऊधम बहुत मचाते थे
तोड़-फोड़ कर घर की चीजें
भोले बन पढ़ने बैठ जाते थे

पापा जब घर आते थे
बहुत सारी चीजें लाते थे
दिनभर की आपबीती सुनाते थे

वो बचपन कितना प्यारा था
हम एक साथ रहते थे

क्यूं हम इतने बड़े हो गए
एक-दूजे के लिए मेहमान हो गए
अब तो राखी पर भी नहीं मिलते
सब अपनी जिंदगी जीते
भाई बहन चारों जुदा हो गए

---dr वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली

drvandnasharma8596

आषाढी निमित्ताने-
वारी निघाली पंढरपूरी
-------------------------------
विठू राहे पंढरपूरी
मंदिर चंद्रभागे तिरी
आली आली आषाढी
वारीत चाले वारकरी ।।

पाहण्यास श्री विठ्ठला
भाव अंतरी हो दाटला
टाळ- चिपळ्या वाजवी
हरिनाम तेओठावरी ।।

वीणा-टाळ ,मृदंग वाजे
रामकृष्ण हरी नाम साजे
आनंद अनिवार हो अंतरी
जयघोष करी वारकरी ।।

पंढरपुरी जाती वारकरी
पाहण्या सावळा श्रीहरी
म्हणे कवी अरुणदास
नाम गोड श्रीहरी श्रीहरी ।।
----------------------------------------------
कवी अरुणदास"अरुण वि.देशपांडे-पुणे
9850177342
-------------------------------------------------

arunvdeshpande

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#photogallery #photooftheday #picoftheday #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

#उपवास स्पेशल..

🍂राजगिरा बटाटा थालिपीठ

🍂साहित्य
राजगिरा पीठ एक वाटी
दाण्याचे कूट अर्धी वाटी
एक बटाटा
जिरे,
मीठ,
साखर (ऐच्छिक)
बारीक चिरलेली मिरची,
कोथिंबीर (उपासाला चालत नसेल तर घेऊ नये)

🍂कृती
बटाट्याचा सालासकट कीस करून घ्यावा
बटाटा कीस व सर्व साहित्य एकत्रित करून पीठ भिजवावे
अर्धा तास झाकून ठेवावे
यानंतर तव्यावर तूप सोडून
थालिपीठ लावावे
बोटांनी मध्ये मध्ये गोल करून
त्यात तूप सोडावे

🍂झाकण ठेवून दोन्हीकडून चांगले भाजुन घ्यावे
हे थालीपीठ कुरकुरीत व चविष्ट होते

🍂सोबत घरचे ताजे लोणी🙂

🍂उपासाला चालत नसल्याने अथवा इतर तब्येतीच्या कारणामुळे काही लोक साबुदाणा खात नाही त्यांच्यासाठी हे थालिपीठ चांगले आहे

jayvrishaligmailcom

#उपवास स्पेशल..

🍂राजगिरा बटाटा थालिपीठ

🍂साहित्य
राजगिरा पीठ एक वाटी
दाण्याचे कूट अर्धी वाटी
एक बटाटा
जिरे,
मीठ,
साखर (ऐच्छिक)
बारीक चिरलेली मिरची,
कोथिंबीर (उपासाला चालत नसेल तर घेऊ नये)

🍂कृती
बटाट्याचा सालासकट कीस करून घ्यावा
बटाटा कीस व सर्व साहित्य एकत्रित करून पीठ भिजवावे
अर्धा तास झाकून ठेवावे
यानंतर तव्यावर तूप सोडून
थालिपीठ लावावे
बोटांनी मध्ये मध्ये गोल करून
त्यात तूप सोडावे

🍂झाकण ठेवून दोन्हीकडून चांगले भाजुन घ्यावे
हे थालीपीठ कुरकुरीत व चविष्ट होते

🍂सोबत घरचे ताजे लोणी🙂

🍂उपासाला चालत नसल्याने अथवा इतर तब्येतीच्या कारणामुळे काही लोक साबुदाणा खात नाही त्यांच्यासाठी हे थालिपीठ चांगले आहे

jayvrishaligmailcom

न्याय मांगना वहीं शोभा जाता है,
जहां न्याय की सच्ची,
परिभाषा मालूम हो।

यदि उल्लू को पुछेंगे कि,
सूर्य कैसा होता है?

तब वह अंधकार की,
वाहवाही करने लगेगा।

parmarmayur6557

“पत्थर की यात्रा”

एक दिन  
रास्ते पर मेरा पाँव एक पत्थर से टकराया।  
मैंने देखा नहीं।  
बस ठोकर मार दी।  
एक बार, फिर बार-बार।  

और वह मेरे साथ चलता रहा।  
मुझे लगा मैं खेल रही हूँ।  
शायद उसे भी यही लगा।  

जब मेरी मंज़िल आ गई,  
मैं भीतर चली गई।  
वह वहीं छूट गया  
धूल में, खरोंचों से भरा।  
उस पर मेरे पैरों के निशान थे।  
और दुनिया की मिट्टी।  

फिर कोई और आया।  
फिर कोई और ठोकर।  
फिर कोई और सफ़र।  

शायद कुछ पत्थरों की तक़दीर में  
चलना नहीं लिखा होता।  
सिर्फ घिसटना लिखा होता है।  

पर हर रास्ता एक-सा नहीं होता।  

एक दिन एक ज़ोर की ठोकर ने  
उसे सड़क से उठाकर नदी में फेंक दिया।  
वह डर गया।  
वह तो रास्ते का था, पानी का नहीं।  

नदी ने कुछ नहीं पूछा।  
बस बहती रही।  
और उसकी देह से धूल धोती रही।  
सालों की खरोंचों में  
ठंडा पानी भरती रही।  

वहाँ उसे अपने जैसे और पत्थर मिले।  
कोई पहाड़ से टूटा था,  
कोई मंदिर से।  
सबके पास अपनी टूटन थी।  
इसलिए किसी ने किसी का दर्द नहीं पूछा।  

वक़्त बहता रहा।  
नदी बहती रही।  
वह भी बहता रहा।  

और एक दिन  
जब उसने पहली बार समुद्र देखा,  
तो भूल गया कि कभी वह  
किसी की ठोकर था।  

अब वह धूल से खाली था।  
खरोंचों से मुक्त था।  
शांत था।  
चमकता हुआ।  
अपनी ख़ामोशी में पूरा।  

तब समझ आया  
हम भी पत्थरों जैसे होते हैं।  

कुछ लोग हमें रास्ते में  
ठोकर समझकर साथ रखते हैं।  
और मंज़िल आते ही छोड़ जाते हैं।  

उस वक़्त लगता है यही अंत है।  

पर अक्सर…  
वहीं से नदी शुरू होती है।  

जो रास्तों पर छूट जाते हैं,  
वही एक दिन  
समुद्र तक पहुँचकर  
मोती नहीं बनते,  
पर अपनी चमक ज़रूर पा लेते हैं।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

good morning 🌅😊

nikitavinzuda6548

it's tea time..

kattupayas.101947