New bites

rgposhiya2919

जख्मो भरे सृजन सदा,सृजनकारे नाश।
साहित्ये जीवन अदा,सृजनकारे पाश।

manjibhaibavaliya.230977

हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं
दिल हमेशा उदास रहता है

ganeshkumar6818

एक ही रोग होता तो करता दवा
क्या करूं मैं दवा जब कई रोग है

साथ में चलने वाला तो कोई नहीं
मसवरे देने वाले बहुत लोग हैं...!!!

rohittalukdar171132

अरमान तो बहुत होते हैं जिंदगी में
मगर चाहने से हर चीज अपनी नहीं होती
कभी वक्त खराब होता है तो
कभी क़िस्मत अच्छी नहीं होती है।
शुभ रात्रि।

rachnaroy7150

manishapatel9548

આનંદ આશ્રમ પાલડી અમદાવાદ

mayurraval.339113

aartijoshi878

navyajaiswal6866

anjurani6431

gautam0218

gautam0218

gautam0218

gautam0218

gautam0218

navyajaiswal6866

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rakeshsolanki1054

Ishani Morya लिखित कहानी "दो दिलों की कहानी प्यार - part -3" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19961256/do-dilo-ki-kahaani-pyaar

ishanimorya525gmail.com192047

मैं एक जिंदगी हूं।

जिसमें भूख है, प्यास है,

इच्छायें हैं, आशायें हैं,

अभिलाषायें हैं, आकांक्षायें हैं,

तड़प है, कसक है, घुटन है,

टूटन है, बिखराव है, पिघलाव है,

रास्ते हैं, मोड़ हैं, रूकाव हैं,

ठहराव है, पड़ाव हैं,

लेकिन मंजिल नहीं है।


मैं एक जिन्दगी हूं।

जिसमें सांस है, मांस है,

मन है, तन है, बदन है,

आवश्यकतायें हैं, नीरसतायें हैं,

दुख है, दर्द है, टीसन है,

घाव हैं, अभाव हैं,

खामोशी है, मदहोशी है,

कहानी है, कवितायें हैं,

लेख हैं, उपन्यास हैं,

क्रान्ति है, अशान्ति है,

लेकिन शांति नहीं है।


मैं एक साज भी हूं,

और आवाज़ भी हूं,

मैं एक फूल हूं और पत्थर भी हूं,

प्रेम हूं और नफरत भी हूं,

एक दोस्त हूं और दुश्मन भी हूं,

मैं एक बहार हूं और खिज़ा भी हूं,

एक नम़ी भी हूं और

रेगिस्थान भी हूं,

मैं वीरान भी हूं और

आबाद भी हूं,

मैं एक जंगल भी हूं

और उजाड़ भी हूं,

क्योंकि मैं एक जिन्दगी हूं।


मेरी आंखों में झांक कर देखो,

इनमें अच्छाई भी मिलेगी

और बुराई भी मिलेगी,

अनभिज्ञता भी मिलेगी

और पहचान भी मिलेगी,

दर्द भी मिलेगा और

खुशी भी मिलेगी,

दास्तां भी मिलेगी

और शून्यता भी मिलेगी,

इनमें रिहाई भी मिलेगी

और कैद भी मिलेगी,

तस्वीर भी मिलेगी और

परछाई भी मिलेगी,

उथलाव भी मिलेगा

और गहराई भी मिलेगी,

क्योंकि मैं एक जि़न्दगी हूं।

जीती जागती जि़न्दगी,

इसे अपनत्व चाहिये,

इसे टूटन नहीं, बिखराव नहीं,

समेटने के लिये बाहें चाहिये,

तिरस्कार नहीं सहारा चाहिये,

खामोशी नहीं झंकार चाहिये,

दूरी नहीं नज़दीकी चाहिये,

मुझे सहारा चाहिये,

अनुपम अनुराग का,

भरे पूरे, ईमानी इकरार का,

ताकि, जिसके सहारे,

मैं टूट न सकूं, घुट न सकूं,

और बिखर न सकूं,

झुलस न सकूं, तड़प न सकूं,

मुझे तिरस्कार नहीं, लगाव चाहिये,

प्रेम चाहिये; चकोर जैसा,

क्योंकि मैं मृत्यु नहीं,

एक जि़न्दगी हूं।

-शरोवन

समाप्त।

sharovanksingh2769

* કડવુ સત્ય *

jighnasasolanki210025

शायर बहुत देखे, शायरा भी मिलीं
शेर भी सुने, शायरियां भी सुनी,
पर जो तेरी शिकायतें सुनीं,
वह किसी भी शायर/शायर से बढ़कर ही सुनीं।

Sharovan.

sharovanksingh2769

સ્મૃતિ મંદિર થી આગળ વનદેવી બંગલો પાસે

bhavnabhatt154654