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"मालूम है ये मुझको कि... ख़्वाब झूठे हैं और ख़्वाहिशें अधूरी हैं...+

जानकर भी ये अनजान बन जाने में... झूठे को ही सही... हसरतें कुछ नई जगाने में...

मज़ा ही कुछ और है..."

ज़िंदगी का हर ख़्वाब हक़ीक़त नहीं बनता, लेकिन उम्मीदें हमें जीने की वजह ज़रूर दे जाती हैं। कभी-कभी अधूरे सपनों के साथ मुस्कुराना भी एक खूबसूरत सफ़र होता है।

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anisroshan324329

दिल का notification #05
माँ के हाथ का स्वाद... ❤️

भूख तो हर जगह मिट जाती है...

कभी होटल में,
कभी दोस्तों के साथ,
और कभी अकेले भी...

पर पता नहीं क्यों,
जब भी घर जाता हूँ,
रसोई से आती वो खुशबू
फिर से बच्चा बना देती है।

वो मेरी रोज़ की तय थाली,
वो माँ के हाथ की मेरी पसंदीदा सब्ज़ी...
हम्म्म...

माँ की थाली में
दाल, रोटी और सब्ज़ी ही तो होती है...
फिर भी,
उसमें एक स्वाद ऐसा होता है...

जो दुनिया के किसी खाने में नहीं मिलता।

बाहर खाकर
पेट तो हर जगह भर ही जाता है...

बस...
एक दिल है...

जो आज भी...
नहीं भरता।

धड़कते रहिए..❤️
✍️ जिगर अशोक पंड्या

-----------*---*****--------
अगर आपको भी माँ की याद आई होतो उन्हें फोन या मैसेज जरूर कीजिए गा।

{ 💌अगला नोटिफिकेशन:
"प्यारमे नाराजगी जायज़ है"}

pandyajigar

“मैं बड़ी कब हो गई?”
पता ही नहीं चला…
कब बचपन की वो छोटी-सी लड़की
सबकी नज़रों में “बड़ी” हो गई।
शायद उस दिन,
जब मैंने रोने से पहले ये सोचना सीख लिया
कि मेरे रोने से घर में किसी को परेशानी तो नहीं होगी।
शायद उस दिन,
जब अपनी पसंद से पहले
दूसरों की ज़रूरतें समझने लगी।
शायद उस दिन,
जब लोगों ने कहना शुरू किया—
“तुम तो समझदार हो, तुम संभाल लोगी।”
और मैं हर बार मुस्कुरा दी…
क्योंकि किसी ने पूछा ही नहीं
कि मैं संभालना चाहती भी हूँ या नहीं।
दूसरों की नज़रों में मैं कब बड़ी हुई,
ये आज तक समझ नहीं आया…
बस इतना पता है—
जिस उम्र में मुझे किसी का हाथ पकड़कर चलना था,
उस उम्र में मैंने खुद अपने कदम संभालना सीख लिया।
और शायद यही वजह है…
कि आज भी कभी-कभी
दिल करता है कोई प्यार से कहे—
“तुम बड़ी नहीं हुई हो…
आज भी हमारी छोटी-सी बच्ची हो।” 🥺❤️
#bydiksha

dikshaparashar.699046

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#humanity #charity #donation #selfhelp #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं

एक उम्र पर आकर
शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं
अक्सर बहुत बोलने वाले
मौन क्यों हो जाते हैं

आसमां वही है, वही है धरती
मौसम के मायने बदल क्यों जाते हैं
जिसको पाने की जिद में उम्र गुजारी
उसको पाकर भी हाथ खाली रह जाते हैं

खुशी एक छलावा है क्षणिक पल भर का
वो पल बीतते ही भाव खुशी के
नीरस हो जाते हैं

जाने किस अंधी दौड़ में
दौड़ रही है दुनिया सारी
जब सब कुछ खो जाए
कुछ पाने के अर्थ व्यर्थ हो जाते हैं

कभी जिससे बात करने को
तरसता था मन सारे दिन
सामने पाकर उसे अपने
लब खामोश क्यों हो जाते हैं

चारों तरफ मेला है भीड़ का
फिर भी क्यों हम खुद को
भरे मेले में अकेला पाते हैं

गलत कहते हैं लोग अक्सर
अज्ञानता दुख का कारण है
मैंने तो देखा है अक्सर
सब जानकर रिश्ते टूट जाते हैं।

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

" એક જિદ્દ "

જિદ્દ બસ એમને પામવાની છે.
દિલના ધબકારાને થામવાની છે.

ટકી શકે છે દરેક સંબંધો પણ,
અપેક્ષાઓને જરા ડામવાની છે.

બહુ દિવસ થયા તને જોઈ નથી,
વાત મોસમને હવે જામવાની છે.

નજર ન લાગે જમાનાની ક્યાંક,
દુઆ ઈશ્વર સામે નામવાની છે.

આ સાદગી ખેંચે છે તારા તરફ,
વાત ક્યાં આભને આંબવાની છે.

મનની મનમાં રાખીને કરવુંય શું?
'વ્યોમ' જિંદગી તો માણવાની છે.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અજાર. મુ. રાપર.

omjay818

अख्खा मसुर

अख्खा मसूर कोल्हापूरचा अत्यंत लोकप्रिय प्रकार😊
कोल्हापूर मध्ये याची अनेक हॉटेल आहेत
आता बाकी शहरात पण हा प्रकार फेमस झालाय
अनेक पद्धतीने हा प्रकार बनवला जातो
वेगवेगळे मसाले वापरून... अनेक प्रकारची वाटणे लावुन 😊..
ही माझी पद्धत सोपी चविष्ट आणि चमचमीत 😊😋

साहित्य
एक वाटी मसुर
एक कांदा बारीक चिरून
आले लसुण बारीक करून
एक 🍅 टॉमेटो बारीक चिरून
कोल्हापुरी कांदा लसुण चटणी
(ही कोल्हापुरी मसाल्याची खासियत आहे ❤️)
तिखट मीठ चवीनुसार
कसुरी मेथी
कोथिंबीर
क्रीम.. आवडीनुसार

कृती
प्रथम मसुर कमी पाण्यात शिजवून घ्यावी
मसुरचा आकार सलग अख्खा राहिला पाहिजे
तेलात हिंग मोहरी फोडणी करुन
कांदा छान मऊ आणि गुलाबीसर करून घ्यावा
त्यावर आले लसूण घालून
जरा परतून
त्यावर दोन चमचे तिखट आणि एक चमचा कोल्हापुरी कांदा लसूण चटणी घालावी
थोडे परतून टोमॅटोच्या फोडी घालाव्यात
त्या मऊ झाल्या की शिजलेली मसुर घालून
चवी प्रमाणे मीठ, कसुरी मेथी व बारीक कोथींबीर घालावी
झाकणं ठेवून चांगलीं वाफ आणावी
चमचमीत अख्खा मसूर वर
क्रीम ची सजावट करावी 😊
पोळी भात पराठा यासोबत खावे

jayvrishaligmailcom

समय की बात है सारी कुछ ही सालों में

पावों में गिर गया है हाथ नहीं आने वाला

उसके जन्मदिन पर हम भी नहीं जाने वाले

हमारी मौत पर वो भी नहीं आने वाला..!!

HAPPY birthday 🎂 Anis 👌👌💜

anisroshan324329

ममता गिरीश त्रिवेदी 🌹 की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

चंद टुकड़ों की बात न थीं
बिखरे मेजपर पड़े काग़ज़ की
टुकड़ों की शकल में मोहोब्बत
मेरी तार तार हो गई थी
गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

जी भर के कैसे देखूँ उसको, जब भी देखा, जी भरा
ही नहीं कभी उसे देखकर....💞

narayanmahajan.307843

रुसवा कर मोहब्बत में दगा दे दे,
कुबूल है मेरी जात पर,
तेरी रुसवाई भी, तेरी तन्हाई भी,
प्रिया अरविंद ।

priyaarvind

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priyaarvind

सरकारी नौकरी में
ऐसे पहलवान ज्यादा चलते हैं

मैने सच कहा है ना

anisroshan324329

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samarsamar425449

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samarsamar425449

“वीरों की धरती को मेरा प्रणाम” ❤️🇮🇳

skptech

बोझ 🥀💔 बचपन में मेरा बचपना कम,
घर में मार-पिटाई ज्यादा देखा।
कभी कोई पूछे मेरा सबसे अच्छा समय,
तो जवाब देने में समय लगता,
क्योंकि लगता कुछ हुआ ही नहीं।

जो अच्छा समय था,
वहां कहना मुश्किल था,
माँ की कोख पर भी संकोच होता।

घर में प्यार से ज्यादा,
मैंने सिर्फ रोकटोक देखी।
हर बात पर लड़क़ी होने का अहसास दिलाया गया,
और मैं चुप बैठी रही।

हर बात उनकी सिर हाँ में मिलती थी,
जैसे कठपुतली हूँ कोई।
मन कुछ करने को चाहता,
तो डर मुझे भूत सा घूरता।

पिता के प्यार से ज्यादा,
मैंने सिर्फ उनका गुस्सा देखा।
माँ की खुली हँसी में भी,
मैंने हर वक्त डर देखा।

शादी की उम्र हो गई,
कहा जा रहा—“ये हमारे सिर से उतर जा।”
जैसे कोई करज़ मैं हूँ,
मुझे बताया जा रहा कि फ़र्ज़ निभाओ।

बेटी होने का फ़र्ज़,
उनके पसंद के लड़के के साथ बंधन में।
मना किया, तो याद दिलाया गया,
हर निवाला जो माँ ने अपने हाथों से खिलाया।
‌✍️sana sayyad

sanasayyad341859

प्रश्न : क्या जन्म की तारीख में अच्छे अंक आने से संघर्ष से मुक्ति मिलती है?
उत्तर : अंकशास्त्र के अंक विभिन्न ग्रहों से जुड़े हुए है ,और ग्रह जीवन के विभिन्न आयामों से जुड़े है। जो भी लोग जीवन को समझते है वह जानते है कि जो वस्तु या व्यक्ति जीवन में आते है वह अच्छे और बुरे दोनों अनुभव देते है , यानी कि ग्रह के जो भी कारकत्व है वह बुरे और अच्छे दोनों परिणाम देते है। जब माता और पिता अजन्मे बच्चे के लिए सर्वश्रेष्ठ जन्म तारीख चुनना चाहते है तो उसके पीछे यह माता पिता की भावना और इच्छा होती है कि जो संघर्ष और कठिनाइयाँ उन्होंने बर्दास्त की है,वह संघर्ष उन बच्चों को न भोगना पड़े। कभी कभी यह भी हो सकता है कि बच्चों को मिला हुआ आराम ही उनके लिए संघर्ष हो जाए। बच्चा जिस भी तारीख को पैदा हुआ है, उसको, परिवार,शिक्षा,धर्म,समाज,सरकार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति , अर्थव्यवस्था सब कुछ प्रभावित करता है, जिस भी वातावरण में वह पलता है, उसके अनुभव उसके प्रारब्ध का निर्माण करते है। यह बात न भूले। हा जन्म तारीख में अच्छे योग बनने से उसके गुणों के बारे में जान कर उसको उचित मार्ग पर लाया जा सकता है। और यह भी संभव है कि बुरे अंक भी सावधानी के लिए तैयार कर सकते है तो फिर चिंता क्यों?
अंकशास्त्री आपको बच्चे की जन्म तारीख देते हुए , अंक ४, अंक ८ ,अंक २ के पुनरावर्तन, अंक १,८ के योग , अंक २,८,६ के योग से बचने को कहेंगे। अब सर्जरी से जो बच्चे पैदा होंगे वह इस संभावनाओं से बचे रह सकते है।

yashibc123gmail.com135615

"ठहरा हुआ पल"
[मुखड़ा] ढलती शाम और शांत हवा,
दिल में छुपा है एक ख़ामोश समां।
लहरों की धुन पर बहता जाए,
मन का यह पंछी, ढूंढे नया रास्ता।
[अंतरा 1] उम्मीदों के रंगों से सजी है यह राह,
हर मुश्किल में छुपी है एक नई चाह।
सपनों के पन्नों पर लिखी है दास्तान,
कोशिशों से ही बनता है इंसान।
[अंतरा 2] सब्र की राहों पर कदम बढ़ते जाएं,
जो देखे हैं ख्वाब, वो पूरे हो जाएं।
आज का अंधेरा कल रोशनी लाएगा,
हर बहता दरिया अपनी मंज़िल पाएगा।

ritukumari509471

लकीरें कागज़ पर खिंचीं और तराना बन गया,
दो दिल जब पास आए तो अफ़साना बन गया।
ना होंठ हिले ना बातें हुईं, बस नज़रें टकराईं,
पेंसिल की हर एक रंगत में मोहब्बत मुस्कुराई।
रंगों की ज़रूरत किसे, जब शेड्स में इतनी गहराई हो,
लगता है जैसे हर सांस में सिर्फ़ उसी की परछाई हो।
हुनर की इस कलाकारी ने जादू ऐसा चलाया है,
मैंने अपनी ही लकीरों में पूरा जहां बसाया है।

ritukumari509471