Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

🍃रव्याचे मेदू वडे

🍃साहित्य
एक वाटी जाड रवा
(इडली रवा सुध्दा वापरू शकता)

मीठ जिरे
मिरचीचे बारीक तुकडे

🍃कृती
प्रथम रवा भाजून घ्यावा
तीन वाट्या पाणी उकळत ठेवावे
पाण्यात चवीप्रमाणे मीठ
जीरे व बारीक मिरच्यांचे तुकडे घालावे
पाणी उकळताच त्यात रवा घालावा
व चांगला हलवुन घ्यावा
गुठळी होऊ देऊ नये

🍃नंतर त्यावर झाकण ठेवावे
पाच मिनिटे शिजून झाल्यावर
त्यातली वाफ मुरू द्यावी.

🍃पाच मिनिटानंतर झाकण काढून
गरम असतानाच हे मिश्रण चांगले मळून घ्यावे
व हातावर थापून त्याला मेदु वड्याचा आकार द्यावा

🍃कढईत तेल घालून
कडकडीत तापल्यावर गॅस मध्यम करावा
हे वडे दोन्हीं बाजूने कुरकुरीत तळुन घ्यावे
🍃
सोबत हिरवी चटणी

ओला नारळ ,हिरवी मिरची, कोथिंबीर, साखर जीरे ,मीठ घालून सरसरीत चटणी वाटावी

हे वडे छान कुरकुरीत होतात
आतून चांगले पदर सुटतात
अगदी चवीला उडीद वड्या प्रमाणे लागत नसले तरी एक वेगळा प्रकार म्हणून
कधीतरी करून पाहायला हरकत नाहीं 🍃

jayvrishaligmailcom

“बेटी “
जिसने जितना चाहा,
उतना मुझसे लिया गया,
और जब पहली बार
अपने लिए कुछ चाहा
तो वही चाह
मेरी सबसे बड़ी गलती बना दी गई।

देना मेरा फ़र्ज़ था,
माँगना मेरा गुनाह।

मैं पूछती हूँ
अपने लिए खड़ा होना
कब से बदतमीज़ी हो गया?
और “ना” कहना
कब से बदचलन होने की पहचान बन गया?

मेरी काबिलियत
चूल्हे की आँच पर परखी गई,
मेरे सपनों को
घर की दीवारों में
धीरे-धीरे गाड़ दिया गया।

हक़ की बात की
तो इज़्ज़त याद दिला दी गई,
जैसे इज़्ज़त
सिर्फ़ मेरी ज़िम्मेदारी हो,
और सहना
मेरी किस्मत।

यह समाज
बेटियों से पहले
उनकी आज़ादी छीन लेता है,
फिर कहता है
“हमने तुम्हें सब कुछ दिया।”

क्यों हर बार
इज़्ज़त के नाम पर
बेटियों को ही
कम समझा जाता है?
क्यों उनका चुप रहना संस्कार
और बोलना अपराध कहलाता है?

मैं बग़ावत नहीं लिख रही,
मैं बस वो सच लिख रही हूँ
जो हर बेटी
अपनी साँसों में दबा कर
ज़िंदगी जीती है।
प्राची गुर्जर

prachitanwar111

"Hum Yahi Hai"

arnagvanshi051673

આ જીવનને જેમ સમજવુ મુશ્કેલ છે
એવી તુ પણ છો તને હું ના સમજી શક્યો.
દેખાડો હતો તારી મુહબ્બતમાં અને ઝેર હતુ તારા દાંતમાં
તુ માશૂક નહી નાગણ હતી તને હું ના સમજી શક્યો.

amirali3796

ખુશીઓ સૌ સાથે વહેંચવાનો આનંદ અનુભવું છું.

મારું ત્રીજું પુસ્તક શોપિઝનની મદદથી આજરોજ પબ્લિશ થયું છે.

પુસ્તક મેળવવા માટેની લીંક આ રહી.

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આભાર 😊

kansaranamrata8gmail.com

आसमान
मुझे पसंद है
खुले आसमान को देखना,
उसके बदलते रंगों को महसूस करना।
सुबह
पानी-सा साफ़,
निश्छल, ठहरा हुआ।
आधा गुज़रा दिन
चमकता नीला,
उम्मीदों की तरह उजला।
ढलती शाम
कभी केसरिया,
कभी सुनहरी उदासी में लिपटी।
और रात
जब चाँद उतरता है,
तो अँधेरी चाँदनी में
ख़ामोश रौशनी बिखर जाती है।
पर इन सब से ज़्यादा
मुझे पसंद है ये जानना
कि इतने रंग बदलने के बाद भी
आसमान
सदियों से
एक ही जगह ठहरा है।
न भागता है,
न थकता है,
बस रहता है…
सब कुछ सहते हुए।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

बड़ा होने की जल्दी थी...

बड़ा होने की बहुत जल्दी थी बचपन में,

लगता था...

बस एक बार बड़े हो जाएँ,

फिर ज़िंदगी अपनी होगी।

न कोई डाँटेगा,

न पढ़ाई का डर होगा,

न सुबह-सुबह स्कूल जाने की जल्दी होगी।

सोचते थे...

जेब में पैसे होंगे,

दोस्त होंगे,

घूमेंगे,

जो मन करेगा वो करेंगे।

लेकिन...

किसे पता था,

बड़ा होने का मतलब

सिर्फ़ उम्र का बढ़ना नहीं होता।


---

जब स्कूल में था,

तो लगता था कॉलेज की ज़िंदगी सबसे खूबसूरत होगी।

नई दुनिया होगी,

नए दोस्त होंगे,

और मेरे पास भी एक Ranger साइकिल होगी।

जिसे चलाकर मैं पूरे शहर में घूमूँगा।

लेकिन कॉलेज आया...

और साइकिल नहीं आई।

कुछ सपने रास्ते में ही रह गए।


---

फिर सोचा...

कॉलेज खत्म होगा,

तो नौकरी मिलेगी।

अपनी कमाई होगी।

माँ-बाप को खुश रखूँगा।

घर की हालत बदल दूँगा।

लेकिन...

डिग्री हाथ में आई,

और नौकरी नहीं आई।

सपने फिर थोड़े छोटे करने पड़े।


---

फिर घर से दूर जाना पड़ा।

उन लोगों से दूर,

जिनके साथ बैठकर खाना खाता था।

जिनके साथ हँसता था।

जिनसे लड़ता था।

जिन्हें छोड़ने का कभी सोचा भी नहीं था।


---

अब कमरा है,

चार दीवारें हैं,

और एक मोबाइल है।

जिसमें घर की तस्वीरें हैं।

और उन्हीं तस्वीरों को देखकर

कभी-कभी आँखें भर जाती हैं।


---

बचपन में लगता था

पैसे होंगे तो खुश रहेंगे।

आज पैसे कमाने निकल पड़े हैं,

पर खुशी कहीं पीछे छूट गई है।


---

अब समझ आता है,

पापा इतने चुप क्यों रहते थे।

माँ रात को देर तक जागती क्यों थी।

घर चलाना कितना मुश्किल होता है।

और ज़िम्मेदारियाँ

कितनी भारी होती हैं।


---

बचपन में

बीस रुपये खो जाएँ,

तो पूरी दुनिया खत्म लगती थी।

आज हजारों खर्च हो जाते हैं,

फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है।


---

पहले दोस्त बिछड़ते थे,

तो रो लेते थे।

आज अपने बिछड़ जाते हैं,

और रोने का भी वक़्त नहीं मिलता।


---

बचपन में

जल्दी बड़ा होना चाहते थे।

आज दिल करता है

कोई वापस उस स्कूल की घंटी बजा दे।

कोई फिर से होमवर्क दे दे।

कोई फिर से कह दे—

"बेटा, अभी तुम छोटे हो..."


---

क्योंकि अब समझ आया है,

बड़ा होना कोई उपलब्धि नहीं थी।

बड़ा होना तो

धीरे-धीरे अपने सपनों का छोटा होते जाना था।


---

कुछ सपने पूरे नहीं हुए।

कुछ लोग साथ नहीं रहे।

कुछ रिश्ते छूट गए।

कुछ इच्छाएँ अधूरी रह गईं।


---

लेकिन फिर भी...

हर सुबह उठकर

हम मुस्कुरा देते हैं।

क्योंकि हम लड़के हैं।

हमें बचपन से सिखाया गया है—

दर्द छुपाना,

ज़िम्मेदारियाँ उठाना,

और चलते रहना।


---

और शायद...

हर लड़के की कहानी कहीं न कहीं

यही होती है।

बचपन में बड़ा होने का सपना,

और बड़े होकर...

बस थोड़ा सा बचपन ढूँढते रह जाना। 🖤🥀

— आकाश गुप्ता ✍️
Insta || witha_kash

brokenboy190253

IN GUJARATMITRA NEWSPAPER..

niraliipatel.127808

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी
ख्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल
किताबों में मिले...!! 🍁🍂

narayanmahajan.307843

ડોક્ટરની ડાયરી..
ડૉ. શરદ ઠાકર..

ઘણા બધા પોતાના અને બીજા ડૉક્ટરના...
જીવનમાં બનેલા ઘટનાના અનુભવો
રજૂ કરતી ખૂબ જ સુંદર બુક છે...
જો કે ઘણી બુકો મે આ લેખકની વાચી છે.
એમ મને માણસો કરતા બુકો સાથે વધુ લગાવ છે...
સારા માણસો મને મળ્યા નહીં...
તો સારી બુકો સાથે મારી દોસ્તી છે..
મારે ધણી બધી વાર કોઈની જરૂર હોય ..ને...
ત્યારે કોઈ વ્યક્તિ કરતા બુક મારી નજીક હોય છે..
તે પણ ઘણા વર્ષોથી..
મને બુક સમજાવે છે..
ધણી બધી વાતો..☺️

chiragvora055249

🫵

shivrajbhokare342239

"Sirf tum aapne"

arnagvanshi051673

📚 Vedanta Life – Agyat Agyani (@bhutaji)
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मात्र 1 वर्ष (12 मास) की यात्रा में —
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"ऋग्वेद, उपनिषद और गीता ज्ञान के ग्रंथ नहीं, चेतना के दर्पण हैं; उनमें व्यक्ति शास्त्र को नहीं, स्वयं को पढ़ता है।"
वेदांत, आत्मबोध, चेतना, जीवन-दर्शन और Vedanta 2.0 से जुड़ने के लिए पढ़ें:
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— अज्ञात अज्ञानी (Agyat Agyani)
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"प्रेम: पाना या तपना?"

मैं सोचती हूँ... प्रेम क्या है?
पा लेना?
या उसकी चाह में खुद को जला देना?

सूरज से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
रोशनी से, जो उसी की है...
या अँधेरे से,
जिसकी एक झलक पाने को
वो पूरा दिन आसमान में तपता है?

चाँद से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
अँधेरे से, जो उसका घर है...
या रोशनी से,
जिसे चुरा कर लाने को
वो पूरी रात दर्द में चमकता है?

नदी से पूछो
उसे प्रेम किस से है?
अपनी लहर से, जो उसी का नाच है...
या समुंदर से,
जिसमें मिलने की आस में
वो हर रोज़ पत्थर से टकराती है,
रास्ता भटकती है,
पर रुकती नहीं?

शायद प्रेम पा लेना नहीं...
शायद प्रेम है
किसी एक झलक के लिए,
किसी एक मिलन के लिए,
उम्र भर तपते रहना,
चमकते रहना,
बहते रहना।

और अगर मिल भी जाए...
तो क्या सूरज अँधेरे में बसा रहता है?
क्या चाँद रोशनी को क़ैद कर लेता है?
क्या नदी समुंदर होकर बहना भूल जाती है?

नहीं।
प्रेम पाने का नाम नहीं।
प्रेम उस आग का नाम है
जो बुझती नहीं... मिल जाने पर भी।
प्राची गुर्जर ……

prachitanwar111

लसूणी पालक बटाटा काचऱ्या..

साधी सोपी आणि अत्यंत पौष्टिक...
एक छोटी कोवळ्या पालकाची गड्डी
बारीक कापलेला लसूण
मिरी पावडर
चवीनुसार मीठ
गरम मसाला पावडर
प्रथम बटाट्याचे पातळ काप करुन घ्यावेत
पॅन मधे तूप घालून
लालसर होस्तोवर परतून घ्यावे
वर मीठ आणि मिरपूड घालून प्लेट मधे काढावे
आता पालक पेंडी थोडे देठ ठेवून निवडावी
पॅन मधे तुप घालून त्यावर थोडे जिरे घालावे
चिरलेला लसूण घालून
खमंग होई पर्यन्त परतून घ्यावा
लगेच पालकाची पाने टाकावी
थोडे परतावे
झाकण ठेवण्याची गरज नाही
पाच मिनिटात पालक शिजतो
थोडे मीठ व गरम मसाला पावडर घालून प्लेट मध्ये काढावे
लोह व्हिटॅमिन आणि मिनरल
ही डिश जीवनसत्वांचा मोठाच खजिना 💗

jayvrishaligmailcom

*"बदलते वक़्त का चेहरा"*

जो कहता था, "वक़्त आए तो भी कभी न बदलूंगा मैं"
वक़्त के करवट लेते ही, सबसे पहले बदलते उसे देखा मैंने...

जो लम्हा भी जुदाई न सहता था कभी,
वही दूरी के बहाने ढूँढते देखा उसे मैंने...

उसे मालूम था, उसके बिना ख़ाक हो जाऊँगी मैं,
फिर भी मेरे जज़्बातों का सौदा करते देखा उसे मैंने...

मैं तो टूट कर बिखरी उसकी जुदाई में,
और महफ़िल में यारों के, जाम-ए-जश्न पीते देखा उसे मैंने...
प्राची गुर्जर ……

prachitanwar111

मैंने देखा तो वो मेरे ख़िलाफ़ खड़ा था,
फिर पता चला वो मेरी तरफ़ से लड़ के गया।

लगा कि उसने मुझे बीच राह छोड़ दिया,
वो मुझको मेरे ही पैरों पे खड़ा कर के गया।

मैंने सोचा था कि वो जीत कर खुश होगा बहुत,
वो मेरी हार पे चुपचाप रो के गया।

nihalsinghsingh.134307

उसनें अनजाने में मुझसे अपनें
प्यार का इज़हार किया था
मुझको रखकर पेशोपेश में
दिल किसी और को दिया था

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

एक नई रचना ,
दिल से दिल तक

vanshsingh118873

बस एक और गहरी बात......💔

abhi006

19/06/2026
मेरी आज एक चप्पल कार से गिर गयी उसके लिए

brokenboy190253

दृश्य
मुरझाए हुए फूल

एक बड़ा सा बगीचा
और सूखी धरती पर कुछ छोटे-छोटे फूल खड़े हैं
उनकी पंखुड़ियाँ कमजोर हैं
और वह पूरी तरह से निराशा में डूब चुकी है
उन फूलों की खुशबू लगभग खत्म हो चुकी है
वे आसमान की ओर देख रहे हैं
बारिश के इंतजार करते हुए
और कुछ फूल बगीचे के गेट की तरह देख रहे हैं
माली की कदमों की आहट सुनने के लिए
उन्हें नहीं पता कि माली लौटेगा भी या नहीं
फिर भी वे जड़ों को छोड़े बिना खड़े हैं

उन्हें नहीं पता की बारिश होंगे या नहीं फिर भी
वह बारिश के इंतजार करते हुए
जिंदा रहने की उम्मीद बना रहे हैं

पर हैरानी के बात यह है कि
उसके साथ-साथ पूरा दुनिया सुख कर रहे हैं

ना हवा ना पानी ना कोई देख भाल
फिर भी पलके खोल कर
आसमान की तरफ देखते हुए एक लंबा इंतजार





कविता
फूल तो खिले हैं


बगीचों से खुशबू उड़ता जा रहा है
फूल तो खिल रहे हैं
पर वह फूल खिलते ही मुरझा जा रहा है


अब पहले की तरह बगिया में सुगंध नहीं
अब पहले की तरह बगिया की धरती हरी भरी नहीं
अब पहले की तरह फूल खिल रहे नहीं


ना अब भवर आता है
फूलों की महक से
बगिया में


ना अब फूल भवरा को रिझाता है
खुशबू बिखोर कर



हरी भरी धरती सुख गए


अब ना माली अपने बगिया निहारने तक आता है
अब ना माली उन पौधों में पानी दे दिया आता है
अब ना माली उन फूलों के पौधों को पोषण देने आता है


अब ना माली दूर खड़े रह कर
फूल को खेलते देखा मुस्कुराता है
अब ना माली फूलों के सुंग को महसूस करते हुए
आनंद से भर जाता है


अब कुछ भी नहीं पहले की तरह
सब बदल गया है


हवा पानी के बिना धरती बंजर हो गई
और माली के देखभाल के बिना सारे फूल मुरझा गऐ


जो बचा खुचा फूल है उसकी आयु कम हो गया है

वह बस किसी तरह
अपने जरो से धरती को जकड़ रख कर
उगाने की कोशिश करते हैं
वह बस किसी तरह थोड़ी सी खेलने की कोशिश करते हैं


वह खुशबू बिखोना चाहते हैं
किस लिए की
फिर से माली का ध्यान उस पर जाए
और वह मंत्र मुक्त हो जाए


फूलों की सुगंध महसूस करके भबरा भी आ जाऐ
और उसके प्यार में पड़ जाए

और हरी भरी धरती देखकर
और सभी पंछी आए
जो उसे थोड़ी और पोषण देने में मदद करें


पर ऐसा अब नहीं होता
अब बंजर जमीन हो चुकी है
अब फुल बस रो रही है
खुद को बचाने के लिए
बारिशों से उम्मीद कर रही है

वह बारिश जिसे अब भरोसा नहीं

abhinisha