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मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय मेरे।
मैं लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़के से नहीं, जिससे मैंने बचपन से प्यार किया था।
“दुल्हन जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिए…” फोटोग्राफर ने कहा।
मैंने हल्की-सी मुस्कान देने की कोशिश की, मगर आँसू आँखों से ज़िद कर रहे थे।
सामने मंडप में बैठा था — अर्जुन सिंह राठौड़।
शहर का सबसे रौबदार, घमंडी और अमीर बिज़नेसमैन।
जिसके नाम से लोग डरते थे… और आज वो मेरा पति बनने वाला था।
लेकिन यह शादी मेरी मर्ज़ी से नहीं हो रही थी।
तीन महीने पहले…
पापा का बिज़नेस बुरी तरह डूब गया था। कर्ज़ इतना बढ़ गया कि घर तक बिकने की नौबत आ गई। उसी वक्त अर्जुन ने मदद का हाथ बढ़ाया… मगर एक शर्त पर।
“आपकी बेटी की शादी मुझसे होगी,” उसने ठंडे स्वर में कहा था।
उसकी आँखों में कोई भावना नहीं थी। बस एक अजीब-सी ठंडक थी… जैसे उसे किसी की परवाह नहीं।
पापा मजबूर थे।
और मैं… मैं खामोश।
क्योंकि जिस लड़के से मैं प्यार करती थी, वह मुझे छोड़कर जा चुका था।
उसने आखिरी बार कहा था, “मीरा, मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ… तुम्हें भूल जाओ।”
उस दिन के बाद मेरा दिल खाली हो गया था।
और आज… उसी खाली दिल के साथ मैं किसी और की दुल्हन बनने जा रही थी।
“फेरे शुरू कीजिए,” पंडित जी की आवाज़ आई।
मैं और अर्जुन अग्नि के सामने खड़े थे। उसका हाथ मेरे हाथ को छू रहा था… लेकिन उसमें अपनापन नहीं, बस औपचारिकता थी।
सात फेरे… सात वचन…
हर फेरे के साथ मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी ज़िंदगी मुझसे दूर जा रही हो।
फेरे खत्म हुए।
अब मैं मीरा नहीं रही… मीरा अर्जुन सिंह राठौड़ बन गई थी।
शादी के बाद जब मैं उसके घर पहुँची, तो उसकी हवेली देखकर मैं दंग रह गई।
बड़ी-बड़ी दीवारें, सन्नाटा और अजीब-सी ठंडक।
“यह तुम्हारा कमरा है,” उसने दरवाज़ा खोलते हुए कहा।
मैं अंदर गई। कमरा बहुत सुंदर था… मगर उसमें भी वही सन्नाटा था।
मैंने धीरे से पूछा, “क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूँ?”
वह रुका।
“जल्दी बोलो।”
“आपने… मुझसे शादी क्यों की?”
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था… लेकिन दर्द जरूर था।
“क्योंकि मुझे किसी पर भरोसा नहीं है,” उसने सख्त आवाज़ में कहा।
“और मुझे एक ऐसी पत्नी चाहिए थी… जो सवाल कम करे।”
मेरे दिल में चुभन हुई।
“और प्यार?” मैंने धीमे से पूछा।
वह हल्का-सा हंसा।
“प्यार…?”
“वो शब्द मेरी ज़िंदगी में नहीं है, मीरा।”
यह सुनकर मेरे अंदर कुछ टूट गया।
वह दरवाज़े की तरफ बढ़ा और जाते-जाते बोला,
“मेरे कमरे में आने की कोशिश मत करना। हमारी शादी सिर्फ नाम की है।”
दरवाज़ा बंद।
मैं अकेली।
उस रात मैंने बहुत रोया।
शायद किस्मत को मुझसे यही मंज़ूर था।
अगली सुबह…
मैं नीचे आई तो नौकर-चाकर सब मुझे “मालकिन” कहकर बुला रहे थे।
लेकिन अर्जुन वहाँ नहीं था।
“साहब सुबह ही ऑफिस चले गए,” एक नौकरानी ने बताया।
मैंने सोचा, शायद यही अच्छा है।
दिन गुजरने लगे।
अर्जुन मुझसे कम ही बात करता।
घर में रहता, तो भी अपने कमरे में बंद रहता।
लेकिन एक बात अजीब थी…
हर रात 2 बजे के करीब वह किसी से फोन पर बहुत धीमे स्वर में बात करता था।
कभी-कभी उसकी आवाज़ ऊँची भी हो जाती।
एक रात मैं पानी लेने उठी, तो उसके कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
अंदर से आवाज़ आ रही थी—
“नहीं! मैंने कहा ना, वह लड़की इस सब में शामिल नहीं होनी चाहिए!”
मैं चौंक गई।
वह किस बारे में बात कर रहा था?
कौन-सी लड़की?
तभी अचानक दरवाज़ा पूरी तरह खुला।
हमारी आँखें टकराईं।
उसकी नज़रें सख्त हो गईं।
“तुम यहाँ क्या कर रही हो?” उसने गुस्से में पूछा।
मैं घबरा गई।
“मैं… वो… पानी लेने आई थी।”
वह कुछ पल तक मुझे देखता रहा… जैसे मेरे चेहरे पर कोई सच पढ़ने की कोशिश कर रहा हो।
फिर उसने धीरे से कहा—
“मीरा, मेरी ज़िंदगी में बहुत अंधेरा है। उससे दूर ही रहो… वरना पछताओगी।”
यह कहकर उसने दरवाज़ा बंद कर दिया।
मैं वहीं खड़ी रह गई।
उसकी बातों में डर था… लेकिन साथ ही एक अजीब-सी चिंता भी।
क्या वह सच में मुझसे नफरत करता था?
या मुझे किसी खतरे से बचा रहा था?
उस रात नींद नहीं आई।
मेरे मन में सवाल ही सवाल थे।
अगली सुबह जब मैं नीचे आई, तो टीवी पर न्यूज़ चल रही थी—
“शहर के बड़े बिज़नेस घराने पर गैर-कानूनी डीलिंग का शक…”
स्क्रीन पर अर्जुन की कंपनी का नाम फ्लैश हो रहा था।
मेरे हाथ से कप गिर गया।
क्या मेरा पति किसी गैर-कानूनी काम में शामिल है?
उसी वक्त दरवाज़ा खुला।
अर्जुन अंदर आया।
उसके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था।
हमारी नज़रें मिलीं।
मैंने हिम्मत करके पूछा—
“यह सब क्या है?”
वह कुछ पल चुप रहा।
फिर धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ा।
इतना करीब… कि मैं उसकी धड़कन महसूस कर सकती थी।
उसने मेरी ठुड्डी हल्के से ऊपर उठाई और कहा—
“तुम्हें जितना दिख रहा है… सच उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है, मीरा।”
मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
“और अगर तुमने मेरे बारे में सच्चाई जानने की कोशिश की…”
वह रुका…
“तो शायद तुम्हारी ज़िंदगी बदल जाएगी।”
मैंने डर और जिज्ञासा के बीच काँपते हुए पूछा—
“कैसी सच्चाई?”
उसने मेरी आँखों में सीधे देखते हुए कहा—
“मैं वो इंसान नहीं हूँ… जो तुम समझ रही हो।”
उसी वक्त बाहर से गोलियों की आवाज़ गूँजी।
धड़ाम!!!
घर के गेट पर हमला हो चुका था।
अर्जुन ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और कहा—
“अब तुम्हें सच जानना ही पड़ेगा…”
और अगले ही पल, उसने अलमारी के अंदर से एक बंदूक निकाली।
मैं स्तब्ध खड़ी थी।
मेरा पति…
एक बिज़नेसमैन नहीं…
कुछ और था।
और शायद मेरी शादी…
सिर्फ एक सौदा नहीं…
बल्कि किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
(जारी रहेगा…

rameshvargadiya502037

होली की कहानी

“रंगों में छिपा सच”

गाँव प्रसौनी में होली का दिन था। सुबह की हल्की धूप में पूरा गाँव जैसे रंगों की चादर ओढ़े खड़ा था। ढोल की थाप, बच्चों की हँसी, और हवा में उड़ता गुलाल हर तरफ बस उत्सव ही उत्सव था।

लेकिन इस बार होली सिर्फ रंगों की नहीं थी… यह सच और रिश्तों की भी होली थी।

1. अधूरा रिश्ता

आरव और राधा बचपन के दोस्त थे। हर साल होली पर दोनों सबसे पहले एक-दूसरे को रंग लगाते थे। लेकिन इस बार दो साल बाद आरव शहर से लौटा था। वह अब बदल चुका था कपड़ों में स्टाइल, बातों में आत्मविश्वास, और आँखों में एक अनजाना फासला।

राधा ने जब उसे देखा, तो मन में पुरानी यादें ताजा हो गईं। पर आरव ने बस हल्की-सी मुस्कान दी और आगे बढ़ गया।

राधा के हाथ में गुलाल था… पर उसका मन सूना था।

2. छुपी हुई बात

दोपहर तक पूरा गाँव रंगों में डूब चुका था। तभी चौपाल पर ढोलक बजने लगी। सब लोग इकट्ठा हुए। आरव भी आया। अचानक उसने सबके सामने बोलना शुरू किया—

“आज मैं एक सच कहना चाहता हूँ…”

गाँव में सन्नाटा छा गया।

“मैं दो साल पहले शहर इसलिए गया था क्योंकि मुझे लगा कि मैं यहाँ रहकर कुछ नहीं कर पाऊँगा। मैं अपने सपनों के पीछे भागा… लेकिन मैंने एक गलती की।”

राधा की धड़कन तेज हो गई।

“मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को बिना बताए छोड़ दिया।”

सबकी नजरें राधा पर टिक गईं।

3. रंगों की सच्चाई

आरव आगे बढ़ा। उसके हाथ में गुलाल था।

“राधा, क्या तुम मुझे माफ करोगी?”

राधा की आँखों में आँसू थे, लेकिन वह मुस्कुरा दी।

“होली माफ करने और गले लगाने का त्योहार है, आरव। अगर रंग मिटा सकते हैं नाराज़गी, तो मैं क्यों नहीं?”

इतना कहते ही उसने आरव के गाल पर गुलाल लगा दिया।

पूरा गाँव तालियों से गूंज उठा। ढोल फिर से बजने लगा। दोनों की दोस्ती फिर से रंगों में खिल उठी।

4. असली होली

शाम को होलिका दहन के समय आरव ने कहा—

“आज मैंने समझा कि होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है। यह रिश्तों की आग में अहंकार को जलाने और नए सिरे से शुरुआत करने का दिन है।”

राधा मुस्कुराई।
“और जो सच दिल में छुपा हो, उसे कह देने का भी।”

आग की लपटों में जैसे उनके पुराने गिले-शिकवे जल गए।


🌈 संदेश

होली सिर्फ चेहरे पर रंग लगाने का नाम नहीं, बल्कि दिल के रंगों को साफ करने का अवसर है।
कभी-कभी एक सच्ची माफी और एक छोटा सा गुलाल का टीका… रिश्तों को फिर से जीवित कर देता है।

rajukumarchaudhary502010

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भारत को अगर किसी एक से सहयोग लेना पड़े रूस और अमेरिका के बीच, तब उसे किसे चुनना चाहिए और क्यों?
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[A] इस समय भारत 2 देशो के निशाने पर है :
चीन (+/रूस)
अमेरिका (+ब्रिटेन-फ़्रांस)
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(1) यदि हम अमेरिका से बचने के लिए रूस की शरण में जाते है तो रूस एवं चीन अमेरिका को रोक देंगे, किन्तु इसके एवज में रूस एवं चीन हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण कर लेंगे !! (किन्तु धार्मिक नहीं)
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(2) यदि हम अमेरिका की शरण में जाते है (जो कि 30 साल पहले ही जा चुके है) तो आर्थिक-सामरिक के साथ साथ अमेरिका हमारा धार्मिक अधिग्रहण भी करेगा। यानी अमेरिका पूरे भारत को ईसाई देश में भी कन्वर्ट कर देगा।
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(3) यदि अमेरिका, चीन एवं रूस में भारत को लेकर समझौता हो जाता है तो भारत को एक दुसरे से बचाने के एवज में ये तीनो देश भारत का बाजार एवं प्राकृतिक संसाधन आपस में बाँट लेंगे।
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आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण से मायने है कि अमुक देश (अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस+रूस+चीन) :
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हमारी स्थानीय इकाइयों को तबाह कर देंगे ताकि अमुक देश की कम्पनियां हमारे बाजार पर कब्ज़ा कर सके।
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वे हमारी गणित-विज्ञान के स्तर को तोड़ देंगे, ताकि तकनिकी वस्तुओं के उत्पादन में आवश्यक मानव संसाधन में कमी आये।
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वे जमीन की कीमतों को बढ़ाते जायेंगे ताकि स्थानीय इकाइयों की स्थापना करना मुश्किल हो जाए।
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और सबसे महत्त्वपूर्ण - वे सरकारी विभागों, अदालतों एवं पुलिस का डिजाइन इस तरह का बनाकर रखेंगे कि यदि रसूखदार / अमीर आदमी क़ानून तोड़ता है तो वह पैसा फेंककर क़ानून को बुत्ता दे सके, और जजों-नेताओं का इस्तेमाल करके छोटी इकाइयों को बंद करवा सके।
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वे भारत की स्वदेशी हथियार निर्माण इकाइयों का बचा खुचा बेस तोड़ देंगे और यहाँ पर हथियार निर्माण इकाईयां लगायेंगे, ताकि भारत सैन्य रूप से अमुक देश पर पूरी तरह से निर्भर हो जाए।
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तो हम चाहे चीन से बचने के लिए अमेरिका की शरण में जाए या अमेरिका से बचने के लिए रूस+चीन की शरण में जाए, दोनों ही स्थितियों में अमुक देश हमें बचाने के एवज में हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण करेगा। मतलब कोई देश हमें मुफ्त में नहीं बचाएगा, हमें बचने के एवज में यह कीमत चुकानी ही होगी।
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इन देशो का जो इतिहास रहा है उस आधार पर हम कह सकते है कि यदि हम रूस+चीन की शरण में जाते है तो वे हमारा धार्मिक अधिग्रहण नहीं करेंगे। अमेरिका या रूस+चीन जब किसी देश का अधिग्रहण करते है तो इससे निम्नलिखित अंतर आता है :
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धर्म : रूस एवं चीन जिस देश का अधिग्रहण करते है उनके धर्म के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करते, किन्तु अमेरिकी जिस देश पर आर्थिक-सामरिक नियंत्रण बना लेते है, वहां पर धार्मिक नियंत्रण भी अवश्य बनाते है। मतलब वे स्थानीय धर्म को ख़त्म करके ईसाई धर्म थोप देते है।
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जातीय, वर्गीय, धार्मिक, लैंगिक अलगाव : अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार कम्पनियां समाज को बांटने में माहिर है, और वे इस तरीके का इस्तेमाल पिछले 200 सालों से कर रहे है। अत: अमेरिकी कम्पनियों का प्रभुत्व बढ़ने से भारत में जातीय, वर्गीय, साम्प्रदायिक अलगाव में वृद्धि होगी। इसके अलावा नारीवाद आदि के नाम पर लैंगिक संघर्ष भी बढ़ेगा। रूस एवं चीन समाज / परिवार को काटने की दिशा में काम नहीं करते।
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संस्कृति : अमरीकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माता जिस भी देश में जाते है वहां की संस्कृति का रूपांतरण करने में काफी निवेश करते है, ताकि कन्वर्जन की जमीन तैयार की जा सके। तो पेड मीडिया द्वारा अपसंस्कृति को सार्वजनिक बढ़ावा मिलेगा, और इसे “सामाजिक स्वीकार्यता” भी मिलेगी। AIB , बिग बॉस, सेकेर्ड गेम्स आदि इसी कड़ी के हिस्से है। पारिवारिक धारावारिको में भी अश्लीलता, नग्नता, फूहड़ता, समलैंगिकता, गाली गलौज का स्तर बढ़ेगा और इन्हें “सामाजिक स्वीकार्यता” मिलेगी। किन्तु रूस एवं चीन संस्कृति को नष्ट करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम नहीं करते।
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माताओ के एजेंडे के बारे में अन्य विवरण के लिए ये जवाब पढ़ें – https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1074199619619781/
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[B] वैसे यह प्रश्न 67 वर्ष पुराना है, और यह प्रश्न लगातार सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण एवं सबसे ज्यादा प्रासंगिक बना रहा है।
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(1) जब भारत आजाद हुआ तो जवाहर लाल के पास 2 विकल्प थे :
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भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करे ताकि हम अमेरिका एवं चीन को रोक सके।
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हम खुद को बचाने के लिए ऐसे किसी देश की शरण में जाए जो निर्णायक हथियारों ले उत्पादन में आत्मनिर्भर हो। (यानी या तो रूस या अमेरिका)
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यदि जवाहर लाल ने बिंदु (1) की नीति पर काम करते तो रूस एवं अमेरिका से उनका संघर्ष बढ़ जाता और वे उन्हें अपदस्थ कर देते। अत: उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम से “गुट निरपेक्षता, पंचशील, समाजवाद” आदि के रैपर लगाकर चिंगमें लांच की और अगले 15 वर्षो तक भारत के कार्यकर्ताओ / नागरिको / बुद्धिजीवियों को ये चिंगमें चबाने के काम में उलझाए रखा।
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1962 तक चीन भारत की तुलना में काफी ज्यादा हथियार बनाना सीख चुका था अत: उन्होंने भारत पर हमला कर दिया। तब अगले 24 घंटे में ही भारत को अमेरिका के सामने अपने घुटने तोड़ कर बैठना पड़ा। अमेरिका की शरण में जाने के कारण चीन ने बढ़ना रोक दिया और हम बच गए -- Pawan Kumar Sharma का जवाब - सन 1962 के भारत चीन युद्ध में चीन ने युद्ध विराम क्यों मान लिया था?
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(2) बाद में इंदिरा जी ने सैन्य दृष्टी से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित हथियारों का उत्पादन करने के प्रयास किये, और इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। इंदिरा जी और पेड मीडिया के प्रायोजको से टकराव के बारे में विवरण आप इस जवाब में पढ़ सकते है -https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/
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परमाणु बम एवं मिसाइले बनाने में हम सफल हुए किन्तु टैंक एवं फाइटर प्लेन का इंजन बनाने में हम फ़ैल हो गए। प्लेन एवं टैंक के इंजन बनाने में हम क्यों असफल रहे, इस बारे में मैंने अन्य जवाब में बताया है।
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(3) 1990 में सोवियत रूस के टूटने के बाद भारत की सभी मुख्यधारा पार्टियों एवं शीर्ष नेताओ ने अपनी खाल बचाने एवं राजनैतिक कैरियर बनाए रखने के लिए अमेरिका की शरण में जाने का फैसला कर लिया था। 1991 से अमेरिका ने भारत का अधिग्रहण करना शुरू किया और कारगिल के बाद 2001 के बाद से इसमें बेहद तेजी से इजाफा हुआ।
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आज हमारा पूरा देश अमेरिकी ही चला रहे है। यदि हमें रूस की तरफ जाना है तो हमें पहले संवेदनशील क्षेत्रो में काम कर रही अमेरिकी कम्पनियों को भारत से निकालना पड़ेगा। भारत की मुख्यधारा की सभी पार्टियाँ अमेरिकियों द्वारा पोषित है, और भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी के किसी नेता में इतना साहस नहीं है कि वह इस बारे में सोच भी सके। यदि हम अमेरिकी धनिकों से प्रतिरोध लेने जायेंगे तो अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच भारत में इतने ज्यादा ताकतवर हो चुके है कि वे बिना युद्ध लड़े ही हमें हरा देंगे।
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यहाँ तक कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी पिछले 20 वर्षो से उन सभी कानूनों का समर्थन कर रहे है जिससे अमेरिकी कम्पनियों का नियंत्रण भारत में बढ़े। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओ ने 2004 में अमेरिकियों के पाले में जाना शुरू कर दिया था, और 2014 आते आते वे पूरी तरह अमेरिकियों के हाथो बिक चुके थे।
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जहाँ कार्यकर्ताओ की बात है, चूंकि भारत का पेड मीडिया पूरी तरह अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के नियंत्रण में है अत: पेड मीडिया द्वारा दी गयी फीडिंग पर निर्भर भारत के ज्यादातर में से ज्यादातर कार्यकर्ता / नागरिक अब पूरी तरह इस बात पर सहमत है कि हमें अपना देश अमेरिकियों के हवाले कर देना चाहिए।
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[C] समाधान ?
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(1) यदि भारत को अमेरिका / चीन से बचना है तो हमारे पास सिर्फ 1 रास्ता है --
भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने की क्षमता जुटाने के लिए आवश्यक कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करें।
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मेरा सुझाव इन 4 कानूनों को गेजेट में छपवाने का है :
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धनवापसी पासबुक
रिक्त भूमि कर
जूरी कोर्ट
वोइक
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यदि उपरोक्त क़ानून गेजेट में आ जाते है तो मेरा आकलन है कि हम अगले 5-6 वर्षो में इतने ताकतवर हथियार बना सकते है कि अमेरिका एवं चीन की सेनाओं को अपने बूते पर रोक सकेंगे और हमें किसी की शरण में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन कानूनों के गेजेट में आने से कैसे हम अमेरिका की सेना से लड़ने की सैन्य क्षमता जुटा लेंगे इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने अन्य जवाबो में लिखा है, उन्हें पढ़ें।
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यदि हम ऊपर दिए गए क़ानून देश में लागू करते है तो एक संभावना यह है कि अमेरिका/चीन/रूस आदि देश मिलकर हम पर सीधा हमला कर दें या पाकिस्तान / बांग्लादेश का इस्तेमाल करके हमें युद्ध में घसीटे।
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उस स्थिति से निपटने के लिए हमें एक क़ानून की और जरूरत होगी – सज्जन नागरिको को बंदूक रखने का अधिकार देने के लिए जनमत संग्रह। तब सिर्फ यह क़ानून ही हमें बचा सकेगा। और यदि हम यह क़ानून भी लागू कर देते है तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका-चीन-पाकिस्तान आदि हम पर हमला करने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
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(2) भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ (बीजेपी-कोंग्रेस-आपा-सपा-बसपा-कम्युनिस्ट) एवं इनके सभी शीर्ष नेताओ (सोनिया जी, केजरीवाल जी एवं मोदी साहेब) का स्टेंड :
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पेड मीडिया पर निर्भर ये सभी नेता उपरोक्त कानूनों के खिलाफ है
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साथ ही वे अपनी तरफ से भी इस बिंदु पर हमेशा खामोश रहते है कि, भारत को स्वदेशी पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम बनाने के लिए वे किन कानूनों का सुझाव देते है।
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और अमुक बिंदु पर खामोश रहते हुए वे लगातार ऐसे क़ानून छाप रहे है जिससे भारत की निर्भरता लगातार अमेरिकी कंपनियों पर बढती जाए।
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उदाहरण के लिए अभी महीने भर पहले मोदी साहेब ने रक्षा में विदेशी निवेश की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% किया था, और अब रास्ता साफ़ होने के बाद बड़े पैमाने पर अमेरिकी-ब्रिटिश-कम्पनियां भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी। और सोनिया जी एवं केजरीवाल ने मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया !! और यहाँ तक कि कोंग्रेस-आपा के कार्यकर्ताओ ने भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया। इससे हमें निम्नलिखित नुकसान होंगे :
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74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक हो जाएगा। अत: भारत में स्थापित होने वाले हथियार कारखानों पर उनका उनका नियंत्रण होगा।
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वे नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे।
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हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद पेड मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी।
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हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी।
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ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब हमारा डॉलर संकट में इजाफा होगा।
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अब पेड मीडिया के प्रायोजक भारत के खनिज, संसाधन, जमीन का इस्तेमाल करके भारत में हथियार बनायेंगे। दरअसल, वे बनायेंगे नहीं, बल्कि असेम्बल करेंगे। उसके बाद 5 गुना दाम में वे ये हथियार भारत की सेना को बेचेंगे। इसके बाद वे भारत के पीएम (उस समय जो भी पीएम होगा) को धमकाएंगे कि वे चीन / पाकिस्तान पर हमला करें, और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नागरिको को चीन / पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए तैयार किया जाएगा।
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भारत की सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करके वे चीन / ईरान को ख़त्म करेंगे और फिर उनकी सेनाएं भारत में तब तक रहेगी जब तक वे भारत के मिनरल्स नहीं लूट लेते। जब भारत के मिनरल्स ख़त्म हो जायेंगे तो वे भारत के 5-7 टुकड़े करके हमें एक अफ़्रीकी देश से बदतर देश बनाकर निकल जायेंगे।
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यदि युद्ध टल जाता है तो पेड मीडिया के प्रायोजक हमारे मिनरल्स लूटते हुए भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देंगे। पिछले 200 साल में पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसा पचासों देशो के साथ कर चुके है। यही उनका बिजनेस मॉडल है।
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sonukumai

hello namaste friends

rajukumarchaudhary502010

होलिका दहन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏🌹

drbhattdamayntih1903

Happy Holi 🫟

mitra1622

Happy Holi 🫟

mitra1622

अब किसकी कैसी मोहन होली..

जब वो किसी और की हो ली..

momosh99

प्रिय Subscribers और Followers,
रंगों का पावन पर्व Holi आप सभी के जीवन में
नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नई सफलताओं के रंग भर दे।
जैसे हर रंग की अपनी पहचान होती है,
वैसे ही आप सभी मेरी रचनात्मक यात्रा के अनमोल रंग हैं।
आपका प्रेम, समर्थन और विश्वास ही मेरी लेखनी की ताकत है।
ईश्वर करे
🌸 आपके जीवन में खुशियों का गुलाल उड़े
🌿 सफलता की हरियाली छाए
🔥 संघर्ष की अग्नि आपको और मजबूत बनाए
💖 रिश्तों में प्रेम और विश्वास बना रहे
इस पावन अवसर पर मैं दिल से धन्यवाद देता हूँ
कि आप मेरी हर कहानी, हर शब्द और हर प्रयास के साथी बने।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
रंगों की तरह मुस्कुराते रहिए, चमकते रहिए।
स्नेह सहित,
Raju Kumar Chaudhary

rajukumarchaudhary502010

ફફડે છે જેમ પર્ણ ડાળી એ એમ જ યાદ પણ તારી હૈયે આવતી હોય છે...

મન પાછું મને જ સવાલ કરતું હોય છે, એ તારા ન હોવાથી ખુશ છે તું શું કામ પજવતો હોઈશ એમને......

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

વક્તનો આ માર છે, જિંદગી બદલાય છે,
કસોટી કરે છે ઈશ્વર, શું નૈયા પાર થશે?
બદલાવ આવે જીવનમાં, સુખશાંતિ ક્યાં છે?
ગુમાવી દીધેલાની યાદોમાં જ, જિંદગી જ જાશે?
- કૌશિક દવે

kaushikdave4631

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🙏

होलिका दहन
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फाल्गुन मास की पूर्णिमा
लेकर आई होली का त्यौहार
छुपा हुआ है इसमें पौराणिक कथा का सार
होलिका -प्रहलाद की कहानी बन गई अमिट निशानी
बुराई पर अच्छाई की विजय सुनाती ये कहानी
मनाते सभी होलिका दहन का त्यौहार
थाली में सजा के सिंदूर रंग ,गुलाल
और अग्नि को अर्पण करते फूल, माला ,अनाज
सूत , रोली, अक्षत , बताशे, मीठे पकवान
सभी को प्रेम से गले लगा कर करते सबका सम्मान
ईश्वर पर रख आस्था करते उसका गुणगान
होलिका दहन की बात ही निराली है
उसकी खुशी में ही होली मतवाली है ।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

Happy Holi 2026!

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dadabhagwan1150

तुम्हारे होंठों पर रख अपने होंठ..!
मैं इनका रूखापन मिटा देना चाहता हूं..!!

narayanmahajan.307843

कभी कभी
मन में सवाल उठता है
कोई इतना भी आवश्यक क्यों हो जाता है ..?

वो न मिले तो लगता है जैसे
कुछ भी तो नही मिला
जैसे उसके बिन सब अधूरा है
यहां तक की चलती हुई सांसें भी थमी थमी सी नजर आती हैं,
और ऐसे में वो कहीं से मिल जाए तो
मन करता है थोड़ा सा और
पा लूं उसे
जो पाया है कहीं छुपा लूं उसे
मृत पड़ती देह के लिए
उससे बस एक मुलाकात ही
संजीवनी बन जाती है,
बताओ ना आखिर क्यों कोई इतना आवश्यक हो जाता है..!!

narayanmahajan.307843

આહુતિ અર્પી
એષણાઓની
હોળી પર્વે…
-કામિની

kamini6601

Dear matrubharty friends
होलिका दहन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

sonishakya18273gmail.com308865

Thank you so much my dear friends😘😘😘

ziya07