Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

...प्रवास...."..*
.........नाते"आपल्या..दोघांचे..
.जगरहाटी..च्या.ही."पल्याड"...!
..वेगवेगळ्या..प्रकारे..मी ते जपत.असते."जीवापाड"..
.दुर..दुर.खुप ..एकमेकापासुन....
..पण वाटते.आहोत."आसपास".....!!
..माझ्या.मनात."तु"
..तुझ्या..ह्रुदयात.पण मीच..असते.."खास"..!
...भेटत..तर असतो.रोजच..फोनवर.दिवसभर..!
.तरीही.मन भरत नसते.....!!
.दोन..मनांची.."जवळीक".ईतकी.कशी झाली..?
.हेच,,खरेतर.उमगत.नसते...!!!
.."मागणे"काहीच...नसते...या "नात्यातुन"दोघास...!!
.."फक्त"..चालत रहावासा....वाटतो.....
.निरंतर...असाच.प्रवास"....

......*..**..**....**..**व्रुषाली*..**..**

jayvrishaligmailcom

“अधूरे हिसाबों में हूं”

ए सच कहूं कि आजकल मैं मुश्किलों में हूं,
बस खाली ये वक़्त गुज़रने के प्रयासों में हूं।

कभी हौसला था जो आसमां को छू लेने का,
वो बिखरे हुए एहसासों की टूटी किताबों में हूं।

न रास्ता कोई साफ़ है, न ही मंज़िल का पता,
मैं धुंधले से सफ़र और अधूरे हिसाबों में हूं।

कभी जो अपने थे, वही अब अजनबी से हुए,
मैं रिश्तों की भीड़ में सबसे तन्हा नक़ाबों में हूं।

न अब शिकवा, न शिकायत किसी मोड़ पर,
बस अपने सवालों के अनसुने जवाबों में हूं।

कभी रोशनी थी, वो भी अब सिमट सी गई,
मैं अंधेरों के शहर और खामोश सराबों में हूं।

मैं अपनी ही कहानी का टूटा हुआ हूं, “प्रसंग”,
हर मोड़ पर बिखरा मगर फिर भी यादों में हूं।

प्रसंग
प्रणयराज रणवीर

advpranayrajranveer8815

અક્ષર મારા રિસાઈ ગયાં,
શબ્દોમાં કેવી રીતે લખું?
વિચારોનો ઉપવાસ છે,
જળમાંથી મોતી કેવી રીતે શોધું?

મનના દરિયામાં મૌન છે,
તરંગોને કેવી રીતે બોલાવું?
હૃદયમાં સૂકી ગયેલી વેદના,
આંસુઓને કેવી રીતે વહાવું?

કલમ હાથમાં થંભી ગઈ છે,
સ્વપ્નોને કાગળ પર કેવી રીતે લાવું?
ભાવનાઓ બંધ છે અંતરમાં,
એને શબ્દોમાં કેવી રીતે ગૂંથું?

શૂન્યમાં ખોવાઈ ગયું છે કંઈક,
ખુદને જ હવે કેવી રીતે શોધું?
અક્ષર મારા રિસાઈ ગયાં,
શબ્દોમાં કેવી રીતે લખું?

kaushikdave4631

माई डियर प्रोफेसर क भाग 13 प्रकाशित हो चुका है। आप लोग पढ सकते है। और पढकर कमेंट और रेटिंग कर दे।.

gautamreena712gmail.com185620

जिंदगी की खूबसूरती इसी में है
की कुछ भी हमेशा एक जैसा नहीं रहता.....

ganeshkumar6818

May every home be graced with the idol and blessings of Simandhar Swami.

On the auspicious occasion of Shree Simandhar Swami Janma Kalyanak, download the wallpaper available in both mobile and desktop sizes: https://dbf.adalaj.org/s65rV0Bj

#livinggod #simandharswami #tirthankar #Janmakalyanak #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

Good morning friends.. have a great Sunday

kattupayas.101947

**“कुछ लोग बुरे नहीं होते…
बस उनके दिल ने भरोसा करना छोड़ दिया होता है।
डर उन्हें रोकता नहीं…
धीरे-धीरे उनसे उनका असली रूप छीन लेता है।
हर नया इंसान, पुरानी कहानी नहीं होता…
पर ये बात दिल तक पहुँचने में वक्त लगता है।
अगर तुम भी ऐसे हो…
तो लड़ो अपने डर से—किसी और से नहीं।
क्योंकि सही लोग तुम्हें hurt करने नहीं…
समझने के लिए आते हैं।
और याद रखना…
डर से भागोगे तो हर रिश्ता अधूरा लगेगा…
डर से लड़ोगे तो खुद से मिल जाओगे।”** ✨💙

parmarsantok136152

Good morning friends..Thanks for your support. 100k downloads

kattupayas.101947

स्वर्ग की अप्सरा तुम, दिव्य रूप धारी
नृत्य करतीं स्वर्ग में, अप्सरा तुम्हारी
गंधर्वों के साथ में, सुरों की ताल पर
नाचतीं तुम स्वर्ग में, अद्भुत सौंदर्य धार

तुम्हारे बालों में, फूलों की माला
तुम्हारे चेहरे पर, मुस्कान की लहर
तुम्हारे नृत्य में, स्वर्ग की झलक
तुम्हारी सुंदरता, हृदय को छू ले

स्वर्ग की अप्सरा, तुम्हारी कहानी
एक अद्भुत कथा, जो हृदय को छू जाए
तुम्हारी सुंदरता, स्वर्ग की शोभा
तुम्हारा नृत्य, हृदय को मोह ले।

rajukumarchaudhary502010

“वक़्त और हम"

जिसे समझना था उसे कभी हम समझ न पाए,
साँसे तो चलती रही पर एक पल हम जी न पाए।

वक़्त के धागों में उलझ कर रह गई हर बात यहाँ,
दिल तक पहुँचा सच मगर होंठ उसे कह न पाए।

दौर था समझदारी का फिर भी फ़ासले बढ़ते रहे,
हम क़रीब होकर भी रिश्तों से रिश्ते जोड़ न पाए।

हर तरफ़ शब्दों का शोर था मगर यहाँ सन्नाटा रहा,
हमें जो महसूस हुआ वो भी किसी से बता न पाए।

ख़ामोशियों ने भी कई राज़ सीने में दफ़न किए,
हम जो थे अंदर से वह चेहरा कोई देख न पाए।

जिसको समझा था अपना वो भी अपना न हुआ,
हम ही “प्रसंग” थे जो खुद को भी समझ न पाए।

प्रसंग
प्रणयराज रणवीर

advpranayrajranveer8815

😄❤️🫶🏻

avinashgondukupe96025gmail.com5127

इश्क आज भी सादगी और
मर्यादा में शोभा देता हैं...।। 🥺🥀 #love #eshk #trending

sharmaa2

মানুষ নিজের ভুল দেখে শিক্ষা নেই
এদিকে আমি নিজের ভুল দেখে শিক্ষা নিয়ে
নতুন করে আবার ভুল করি 🫠🫠

হেহেহে we're not same bro 🤧

surjomukhi

**“हे कान्हा…
अब मैं लोगों से नहीं उलझती,
मैंने सब आपके हवाले कर दिया है।
जो मेरे लिए सही होगा, वो आप रखोगे…
और जो नहीं, उसे खुद दूर कर दोगे।
अब मैं नहीं लड़ती हालातों से…
क्योंकि मुझे पता है,
मेरे पीछे आप खड़े हो।”** 👑🙏🔥

parmarsantok136152

जिन्हें प्रेम मिला
उन्होंने प्रेम में कविताएं लिखी
जिन्हें नहीं मिला
उन्होंने कविताओं में पीड़ा लिखी ...✍️🍁💞🩷

narayanmahajan.307843

“I gave chances, I stayed patient, I tried…
but I won’t lose myself trying to fix someone else.
Some endings aren’t failures—
they’re self-respect.” 👑✨

parmarsantok136152

तुम बिन, मैं एक बूँद हूँ,
तुम मिलो तो सागर बन जाऊँ।

तुम बिन, मैं एक धागा हूँ,
तुम मिलो तो चादर बन जाऊँ।

तुम बिन, मैं एक कागज हूँ,
तुम मिलो तो किताब बन जाऊँ।

तुम बिन, मैं केवल शब्द हूँ,
तुम मिलो तो प्रेमग्रंथ बन जाऊँ।

तुम बिन, मैं एक दुआ हूँ,
तुम मिलो तो इबादत बन जाऊ।

narayanmahajan.307843

जीवन में कभी कभी हम, बड़ी बड़ी परेशानियों से यूंही निकल जाते हैं,मानो कोई हर छण हमारा साथ दे रहा हो..उसी अदृश्य शक्ति का नाम ही.... ईश्वर है..🙏

narayanmahajan.307843

मोहब्बत की अनसुनी दास्तां

aradhnarajshettygmail.com814621

पहचान।

तुम इतने गिरो कि उठाने वाला मिल जाए,
टूटे हालात हो! अपना पराया सब खुल जाए।

मुश्किल राहों में जब अँधेरा बहुत घना हो,
कौन साथ है, ये हक़ीक़त उजागर हो जाए।

अपनेपन के दावों में अक्सर फ़रेब छुपा रहता,
सच की आँच में हर रिश्ता साफ़ नज़र आए।

जिसे अपना समझा, उसी ने दगा कर दिया,
दिल ही नहीं, जीने का सहारा भी टूट जाए।

रातों की वो तन्हाई में जब सन्नाटा गहरा हो,
आवाज़ों के बीच में सच्चा चेहरा उभर आए।

अब न शिकायत, न कोई उम्मीद दिल में रहे,
तजुर्बों का हर ज़ख्म सबक बनकर रह जाए।

'प्रसंग' सफ़र-ए-ज़िंदगी इतना समझ आया,
गिरने पर ही इंसान की पहचान निखर जाए।

- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर

advpranayrajranveer8815

हां मैं जीने लगी हूं
कविता



थोड़ा-थोड़ा आज कल मैं जीने लगी हूं
थोड़ा-थोड़ा खुद को बचाने लगी हूं


मुझे परवाह नहीं दुनिया के लोगों की
अब मैं खुलकर मुस्कुराने लगी हूं



जो चाहे मन में वही करने लगी हूं
पागलपन मस्ती अब सब मुझ में आने लगी है


जिद होनेका जज्बा है जोश भरी जवानी है
आंखों में उत्साह है दिल में नादानी है
और थोड़ी-थोड़ी समझदारी भी आने लगी है





खुलकर जीना जिंदगी है
अपनी लिखनी मुझे एक नई कहानी है
अब मुझे में मेरे लिए ही दीवानगी है



थोड़ा-थोड़ा खुद से प्यार करने लगी हूं
थोड़ा-थोड़ा खुद पर मरने लगी हूं



धीरे-धीरे दिल के दर्द को दफनाने लगी हूं
धीरे-धीरे इस दर्द भरी जिंदगी से
आजाद होकर जीने लगी हूं




इस दुनिया में होकर
इस दुनिया से दूर सपना
अपने सजने लगी हूं



आजकल मैं खुद में मुकम्मल होने लगी हूं
हां मैं हंसने लगी हूं
हां मैं खेलने लगी हूं
हमें सीखने लगी हूं



अब अपनी जिंदगी की रेत
सांसो डोर अब मैं अपने हाथों में पकड़ने लगी हूं
दिल पर हाथ रख कर
धड़कन की आवाज अपनी सुनाने लगी हूं



आंखों को छूट दे दी है सपने देखने की
और हाथों को इजाजत दे दी लिखने की
और होठों को आदत लगा दी है हंसने की
और पैरों को रहत दे दी है बेहकने की




धीरे-धीरे राहत भरी सांस लेने लगी हूं
आजकल मैं जीने लगी हूं
हां आजकल मैं जीने लगी हूं





यह कविता आप सबको अच्छी लगे तो
आग ेपढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभीनिशा ❤️🦋💯

abhinisha