Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

"साथ क्यों चाहिए?"

चुपचाप बैठी थी,
तभी मन में एक बात आई...
मैंने ख़ुद से पूछा
यार, ये 'साथ' इतना ज़रूरी क्यों होता है?

सुबह को सूरज का साथ चाहिए,
वरना दिन ही नहीं चढ़ता।
रात को चाँद का साथ चाहिए,
वरना अँधेरा अच्छा नहीं लगता।

बारिश को बादल चाहिए,
वरना वो गिरेगी कहाँ?
दिल को धड़कन चाहिए,
वरना वो जिएगा किसके लिए?

हमेशा से सुना है
"अकेले आए हो, अकेले जाना है।
यहाँ कोई किसी का नहीं होता।"

फिर भी क्यों?
जब हम रोते हैं,
तो कंधा ढूँढते हैं।
जब हम डरते हैं,
तो हाथ पकड़ना चाहते हैं।

शायद इसलिए...
कि अकेले तो बस
हम साँस लेते हैं।
साथ में ही हम
सच में जीते हैं।

सूरज भी अकेला नहीं रहता,
उसे आसमान चाहिए।
चाँद भी अकेला नहीं रहता,
उसे तारे चाहिए।

हम भी अकेले आए ज़रूर,
पर इंसान बनने के लिए
हमें एक-दूसरे का साथ चाहिए।

क्योंकि अकेले तो बस
दिन कट जाते हैं...
साथ में ही
यादें बन जाती हैं।

तो हाँ,
साथ ज़रूरी है
उतना ही,
जितना जीने के लिए
धड़कन।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

खुशी कहाँ है? खुशी में उच्च समाज और हाइलाइट शैली या बचपन की यादें शामिल हैं।

vanshsingh118873

विपरीत परिस्थितियां ही नए जीवन की शुरुआत हैं! ✨🌱

जब जीवन में हर तरफ से असफलता, मानसिक तनाव या अकेलापन घेर ले, तो निराश न हों। प्रकृति का एक नियम याद रखिए— “एक बीज को भी नया जीवन पाने के लिए सबसे पहले मिट्टी के गहरे अंधकार में टूटना पड़ता है।”

★आज का आध्यात्मिक विचार: हमारे जीवन में आने वाले दुख केवल हमारे पुराने कर्मों का हिसाब चुकता करने आते हैं। दुख का आना इस बात का संकेत है कि पुराना हिसाब ख़त्म हो रहा है और अब एक नया, सुंदर अध्याय शुरू होने वाला है।

★परम पूज्य दादा भगवान का सूत्र: “जो हो गया सो न्याय।”भूतकाल को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान को संभालकर भविष्य को दिव्य बनाया जा सकता है।

आज का संकल्प: मैं अपने बीते हुए कल (Past) का कैदी नहीं हूँ। मैं ईश्वर का अंश हूँ, और हर परिस्थिति से बाहर निकलने की शक्ति मेरे भीतर है।

#SpiritualAwaking #InnerStrength #Positivity #DadaBhagwan #MentalPeace #NewBeginning

nityaoswal430745

"मैं ऐसी ही हूँ"

मैं उम्र के उस पड़ाव पर हूँ
जहाँ दिल का लगना लाज़मी है मुझे।
हक़ीक़त में जीना सीखा ही नहीं
मेरा लगाव जो है, थोड़ा कागज़ी है मुझे।

मैं नहीं चाहती
मेरी उँगलियों में हीरा सजा हो कोई।
उठाकर घास का तिनका,
उम्र भर का वादा पहनाए मुझे
बस इतना काफ़ी है।

महँगे तोहफ़े, बड़ी-बड़ी बातें,
इन सबसे मेरा कोई लगाव नहीं।
अपने हाथों से ख़त लिखकर,
पढ़े कोई मेरे लिए
इससे बड़ी सौगात नहीं कोई।

हाँ, मैं ऐसी ही हूँ
थोड़ा बचपन, थोड़ी ज़िद हूँ।
न दुनिया जैसी, न दुनिया से अलग,
बस अपने जैसी हूँ।

मुझे तारे तोड़कर लाने वाले नहीं चाहिए।
मेरे साथ बैठकर
तारों को देखने वाला चाहिए।
बड़े-बड़े वादे नहीं,
एक छोटा सा भरोसा चाहिए
जहाँ मैं बिन डरे
ख़ुद को रख सकूँ।

तो आना,
अगर आ सको तो
ख़ाली हाथ आना।
बस एक कागज़,
एक कलम,
और साथ रहने का
सच्चा इरादा लाना।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

ना जाने कैसा रिश्ता है इस दिल का तुमसे,🫀
धड़कना भूल सकता है पर तुम्हारा नाम नहीं।❤️❤️

narayanmahajan.307843

दृश्य के साथ गजल

बारिश के दिन चांदनी अंधेरी रात
और सड़कों के किनारे दौड़ते हुए लाइट
कुछ घरों से दूर एक घर

एक लड़का जो बैठा है
अपनी जिंदगी की खुशनुमा पलों में
वो अपने बरांदे मे चेयर पर
अपने वाऐ पाऊ पे दाई पाऊ रखते हुए बढ़िया आराम से बैठा है
वही बाहर तेज बारिश हो रही है

वह चेयर पर बैठते हुए
अपने हाथों में रखी हुई पेन से
कॉपी की तरह देखते हुए कुछ लिख रहा है


और अभी अचानक वह नजर उठा कर बारिश की तरह देखा है और वह बारिश की तरह दिखते ही
वो मुस्कुराता है


और वह अचानक से उस पेन को उसी कॉपी के बीच में
रखते हुए
उठ खड़ा होता है
वही सामने रखी टेबल पर एक और कॉपी होती है
जिस पर उसकी नजर जाता है
और हल्के झुकते हुए
वह धीरे-धीरे अपने हाथ नीचे करता है
और उसकॉपी और पेन को उसी टेबल पर साइड में रखता है

और अचानक हल्के हाथ बढ़ाकर
उसी टेबल पर रखी हुई एक और
कॉपी को उठना है
और उठते ही उस कॉपी को पलटते हुए
उस कॉपी से एक पन्ना फार कर निकलता है
और फिर इस कॉपी को वही रखते हुए
वो और खुशी-खुशी उस पाने से एक नाऊ बनता है

और नाऊ बनते ही
वो चलकर बरांडे के किनारे आता है
और वो वहां बैठते हुए
तेज बारिश में अपने हाथ बड़ाते हुए
अपने बनाए हुए नाऊ को बारिश की पानी में वहां देता है


बिना सोचे कि उसने उसे पन्नों में क्या लिखा था
उसने देखा भी नहीं
बस वह खुश था उस वक्त नाऊ को पानी में बहते देखा


वह मुस्कुराते हुए
आपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए
अपनी नाऊ को अपने द्वारा से बेहे कर सड़क की तरफ जाते हुए देख रहा है



गजल


थी कहां तुम्हारे जिंदगी में मैं
हमसफर की तरह
थी बस एक ग़ज़ल की तरह

किसी शाम बैठकर तुमने लिखा था
एक डायरी में मुझे


एक मदहोशी सी धड़कन ने मुझे छुआ था
एक एहसास हूं मैं
जो कभी तुम्हें हुआ था

आदतें नहीं मैं तुम्हारी
जो मैं तुम्हारे संग रह जाऊं




किसी दिन भूलकर तुमने डायरी से वही पन्ना फार कर
कागज के नाऊ बनाकर बारिश में बहा दिया


बस तुम खुश थे
छोटे बच्चों की तरह कागज की नाऊ से बारिश में खेलते हुए

तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल
तो शिकायत मैं तुमसे क्या करता ग़जल

जो दे तू मुझको गम
शौक से ले जाऊं
मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं


हा मैं बारिश में नाऊ बनकर तेरे ख्यालों से बहें जाऊं





ऊपर लिखी गई दृश्य
बस एक नाटक्या
इस ग़ज़ल की असली कहानी नहीं


गजल के अंदर कोई है जिसे दर्द हो रहा है
पर वह शिकायत नहीं कर रही
वह खुश है उसे खुश देख कर

पर वो गजल नहीं है
उसकी जिंदगी में ग़ज़ल की तरह ही है

abhinisha

जूठ क्या है?

मैं सोचती हूँ, जूठ क्या है...
कब, क्यों, कौन बोलता है ये जूठ?

सब हक़ीक़त के आँचल में जीना चाहते हैं,
फिर भी होंठों पर क्यों पलता है ये जूठ?

शायद ये वो बच्चा है,
जिसे हर बात पर डाँटा गया,
सुना कभी गया ही नहीं
तो चुप रहने के डर से उसने बोल दिया जूठ।

शायद ये वो लड़की है,
जिसके सपनों पर ज़माने ने पहरे बिठा दिए,
रिवाज़ों की बेड़ियों से डरकर,
उसने मुस्कुराकर कह दिया जूठ।

या शायद ये वो लड़का है,
जिसके कंधे ज़िम्मेदारियों से झुक गए,
"मैं ठीक हूँ" का बोझ उठाते-उठाते,
उसने थक कर बोल दिया जूठ।

तो क्या जूठ सच में जूठ है?
या बस एक ज़ख़्म है,
जो सच बोलने से डरता है...
या एक ख़्वाब है,
जिसे दुनिया की नज़र लग जाती है?

शायद जूठ, जूठ नहीं है
वो बस एक पर्दा है,
जिसके पीछे कोई सच साँसें गिन रहा है।
वो एक मजबूरी है,
जो सच्चाई की क़ीमत चुका नहीं पाती।
वो एक दुआ है,
जो होंठों से उतरकर दिल में ही रह जाती है।

तो अगली बार कोई जूठ बोले,
उसे परखने से पहले,
उसकी ख़ामोशी को सुन लेना...
क्योंकि हर जूठ के पीछे,
एक अधूरा सच बैठा रोता है।
प्राची गुर्जर …..

prachitanwar111

महाराणा सांगा : मेवाड शिखर पर व खानवा की महान विजय
(1508-1528 ईसवी)

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पटल पर महाराणा संग्राम सिंह यानी महाराणा सांगा का नाम एक ऐसे अद्वितीय महायोद्धा के रूप में अंकित है, जिनका अदम्य हौसला और राष्ट्रप्रेम उनकी समस्त शारीरिक सीमाओं से कहीं ऊपर था। अपनों के आपसी संघर्ष में अपनी एक आंख खोने और फिर युद्ध की विभीषिका में अपना एक हाथ व एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने कभी शस्त्र नहीं डाले। उनके क्षत-विक्षत शरीर पर तलवारों और भालों के अस्सी से अधिक गहरे घाव थे, जिसके कारण महान इतिहासकार कर्नल टॉड ने उन्हें ‘सैनिकों का भग्नावशेष’ (खंडहर) कहा था। वे एक ऐसा जीवंत भग्नावशेष थे, जिसके भीतर अखंड भारत को स्वतंत्र देखने की अमर आत्मा निवास करती थी। डॉ. ओमेंद्र रत्नू की सुप्रसिद्ध पुस्तक “महाराणा: सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध” के प्रकाश में सांगा जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि मेवाड़ का संघर्ष कोई सामान्य सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को बचाने का एक पवित्र धर्मयुद्ध था। वे मध्यकाल के एकमात्र ऐसे राजा थे, जिनके एक आह्वान पर भारत के समस्त राजा विदेशी आक्रांताओं को खदेड़ने के लिए एक ही भगवा ध्वज के नीचे एकत्र हो गए थे।
दुर्भाग्य से, कुछ वामपंथी इतिहासकारों और विचारकों द्वारा राजनीतिक दुर्भावना के तहत महाराणा सांगा पर बाबर को भारत बुलाने का एक बेहद शर्मनाक और झूठा आरोप लगाया जाता है, लेकिन यह पुस्तक अकाट्य प्रमाणों के साथ इस मनगढ़ंत नैरेटिव की धज्जियां उड़ाती है। इस मनगढ़ंत आरोप का एकमात्र आधार ‘बाबरनामा’ में बाबर का एकतरफा और स्वार्थी बयान है, जिसका कोई अन्य समकालीन ऐतिहासिक प्रमाण दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलता। सत्य तो यह है कि महाराणा सांगा उस समय संपूर्ण भारत के सबसे शक्तिशाली शासक थे, जिन्होंने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को खतौली और धौलपुर के युद्धों में अकेले अपने दम पर धूल चटाई थी। जो योद्धा दिल्ली सल्तनत को खुद कई बार परास्त कर चुका हो, उसे काबुल के एक साधारण लुटेरे को बुलाने की भला क्या आवश्यकता थी? ऐतिहासिक रूप से यह पूरी तरह प्रमाणित है कि बाबर को पंजाब के सूबेदार दौलत खान लोदी और इब्राहिम लोदी के सगे चाचा आलम खान लोदी ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए भारत आमंत्रित किया था। खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा के भीषण पराक्रम से बाबर के सैनिक इस कदर थर-थर कांप उठे थे कि वे युद्ध छोड़कर भागने की भीख मांग रहे थे, जिसके बाद मजबूर होकर बाबर को अपने सैनिकों को रोकने के लिए उस युद्ध को ‘जिहाद’ यानी मजहबी जंग घोषित करना पड़ा था। क्या कोई देशद्रोही राजा विदेशी आक्रांता के खिलाफ पूरे देश को एकजुट करके सनातन धर्म की रक्षा के लिए युद्धभूमि में अपना सर्वस्व न्योछावर करता? महाराणा सांगा देशद्रोही नहीं बल्कि भारतीय अस्मिता के वह अमर गौरव हैं जिन्होंने सिखाया कि पराजय शरीर की नहीं, केवल मन की होती है और यह गाथा हर देशवासी के भीतर छिपे राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान को जगाने के लिए काफी है।
https://www.matrubharti.com/book/19994640/part-01-maharana-thousand-years-of-crusade-8

hindgaurav710743

એમેઝોન પર ૨૨૪૦ પેજનું 'દરેક ક્ષેત્રમાં સફળતા' નામનું સંપૂર્ણ પુસ્તક ઈબુક સ્વરૂપે પબ્લીશ થઈ ગયું છે.
આભાર...
https://www.amazon.in/dp/B0H37MG1G3/ref=sr_1_1?crid=T6ASKOHYUMW4&dib=eyJ2IjoiMSJ9.sWy8rEPKHVBWaEy94O1-hw

amitparmar170646

One sided love may be like this.
Which remains only a memory.. 😅
Never forget one sided love...

writer.ray

દૂર જઈને તુ ફરી મારી પાસે તો તુ આવી
પણ જીંદગીને બદલે હવે મોતને છો લાવી.

amirali3796

"લોકોને મારી સ્માઈલ દેખાય છે,
મારી અંદરની લડાઈ નહીં…
જિંદગી બહારથી સુંદર લાગે છે,
પણ અંદરથી કેટલી ઊંડી છે એ કોઈ નથી જાણતું."

mahinikalam

It is during our darkest moments that we must focus to see the light.

niyaskn

Success is not final, failure is not fatal: It is the courage to continue that counts.

niyaskn

Don’t think of cost. Think of value.

niyaskn

प्रेम और प्रतिशोध
​यह सृष्टि एक कहानी है पुरानी,
जहाँ पे प्यार और नफ़रत का मेला।
कभी है मोम सी चाहत दीवानी,
कभी प्रतिशोध का चलता है खेला।
​जहाँ ज़हरीले काँटे उग रहे हैं,
वहीं पर फूल भी कलियाँ खिलाता।
दिलों में घाव जो गहरे रहे हैं,
उन्हें फिर वक़्त का मरहम सुहाता।
​न मिटती है मोहब्बत इस जहाँ से,
न नफ़रत का कभी अंत होता,
उलझती ज़िन्दगी हर एक यहाँ से,
कोई हँसता यहाँ, कोई है रोता।
​इसी ताने-बाने में जग है चलता,
जहाँ हर रोज़ नया सूरज निकलता।

cosmicstar

जिस दिन तुम्हें लगे कि

कोई तुम्हें समझ नहीं रहा...

उस दिन एक खाली पन्ना उठाना।

और जो दिल में है लिख देना।

यकीन मानो,

दुनिया से पहले

कागज़ तुम्हें समझ लेगा।

— आकाश गुप्ता Insta || @witha_kash

brokenboy190253

પ્રિય વાચકો.

આપ સૌને એ જણાવતાં આનંદ અનુભવું છું કે સ્વતંત્ર લેખિકા તરીકેનું મારું બીજું પુસ્તક 'સફળતાનાં સોપાનો' તારીખ 15 જૂન 2026નાં રોજ મારા હાથમાં આવ્યું છે.😊

આપ સૌ વાચકોનો હ્રદયપૂર્વક આભાર કે જેઓ મને સતત લખવાની પ્રેરણા આપતાં રહે છે. આમ જ વાંચતાં રહેજો અને પ્રોત્સાહન પૂરું પાડતાં રહેજો.😊

સાથે સાથે આભાર માનીશ 'પેન પીપલ પબ્લિકેશન' અને એનાં સંચાલક શ્રી જયદીપભાઈ પંડ્યાનો. હરહંમેશ નવોદિત લેખકોને એમનાં પુસ્તકોમાં સહલેખક/લેખિકા તરીકે લખવાની તક આપે છે. ઉપરાંત નવોદિતોને પણ સ્વતંત્ર રીતે પોતાનું પુસ્તક પ્રકાશિત કરી આપવા તૈયાર રહે છે.

ફરીથી સૌનો અંતઃકરણપૂર્વક આભાર.😊🙏

s13jyahoo.co.uk3258

'જેમ છે તેમ' તેનાથી ઊંધું દેખાય, તેનું નામ જગત. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/C2dyLh31

#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

-पड़ोस की छत पर एक चाँद -

आज पड़ोस की छत पर एक चाँद देखा मैंने,
आसमाँ का नहीं था वो, जिसे पहली बार देखा मैंने।

बयान कैसे करूँ वो कितना हसीन और दिलकश है,
उसके चेहरे पर सिमटा, ये सारा आसमाँ देखा मैंने।

दिल में उतर जाए इतनी कशिश है उसमें,
हर धड़कन को उसकी तरफ बढ़ता देखा मैंने।

कुछ दीवारें, कुछ मकान रोक देते हैं रास्ता मेरा,
वरना उसकी आँखों में, मेरे लिए भी एक अहसास देखा मैंने।

अब हर रोज़ उसी छत पर ठहर जाती हैं नज़रें मेरी,
अपनी तक़दीर को उस चाँद की चौखट पर बार-बार देखा मैंने।

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

new voice

vanshsingh118873

तर्जुमा-ए-दर्द



किस भी ख़बर में कोई मर्सिया नहीं मिलता,
हमें तो इस शहर में अपना पता नहीं मिलता।

सफ़्हों पे दर्ज हैं तामीर के हज़ारों बयाँ,
मगर मकानों में अब आसरा नहीं मिलता।

अजब निज़ाम है, अहल-ए-सुख़न भी ख़ामोश हैं,
किसी सवाल का खुलकर जवाब नहीं मिलता।

तमाम उम्र जिसे ढूँढ़ते रहे हम लोग,
वो एक सच है जो दस्तावेज़ में नहीं मिलता।

फ़क़त नज़र का नहीं, ज़ेहन का भी है मसअला,
हर एक शख़्स को यहाँ आईना नहीं मिलता।

'निहाल' किससे करें अह्द-ए-वक़्त का शिकवा,
यहाँ तो दर्द का भी तर्जुमा नहीं मिलता।
✍🏻 — Nihal Singh

nihalsinghsingh.134307

"ज़िंदगी: एक किताब"

बैठे-बैठे आज मैं अपनी किताब के पन्ने पलट रही थी...
कुछ समझ आया तो आगे बढ़ी, न आया तो
फिर समझने को उन्हीं पन्नों को उलट रही थी...

तभी दिल में एक ख़याल आया
क्या जीवन भी एक किताब है?
जिसे पढ़ने के लिए आगे बढ़ना पड़ता है...
और बढ़ जाएँ आगे, तो समझने को
कभी-कभी पीछे मुड़ना पड़ता है...

फिर सोचा, ये जो स्याही है इन पन्नों पर,
ये किस की निशानी है?
क्या ये मेरे ही अश्क़ हैं जो लफ़्ज़ बन गए?
या वक़्त ने अपने हाथों से लिखी कोई कहानी है?

कुछ पन्ने हवा के झोंके से खुद ही पलट जाते हैं,
कुछ को ज़बरदस्ती मोड़ना पड़ता है।
कुछ पर उँगली फिसल जाती है,
कुछ पर रूह अटक जाती है।

हर अध्याय में एक रिश्ता है,
कोई पहला प्रेम, कोई आख़िरी अलविदा।
कुछ पन्ने फट गए, कुछ जले हुए हैं,
पर सबसे खूबसूरत वही हैं
जिन पर अब भी मेरी उँगलियों के निशान हैं।

और आख़िर में समझा...
मैं हूँ इस किताब की लेखिका।
पर सब पन्ने मेरे लिखे नहीं।
कुछ तक़दीर ने लिखे, कुछ लोगों ने,
कुछ उन लम्हों ने जो लौट कर नहीं आएँगे।

फिर भी रोज़ सुबह एक नया पन्ना खुल जाता है,
कोरा, बिना स्याही के।
और क़लम मेरे हाथ में है |
प्राची गुर्जर ….

prachitanwar111