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मरते दम तक… एक अधूरी मोहब्बत की कहानी

बारिश की उस शाम में शहर की सड़कें खाली थीं। आसमान में बादल थे और हवा में एक अजीब सी उदासी थी। उसी शाम आरव और मीरा पहली बार मिले थे।

मीरा एक साधारण लड़की थी, जिसकी आँखों में बड़े सपने थे। आरव एक जिम्मेदार लड़का था, जो अपने परिवार के लिए हर खुशी कुर्बान कर सकता था। दोनों की दुनिया अलग थी, लेकिन दिलों का रिश्ता धीरे-धीरे जुड़ने लगा।

हर दिन की छोटी-छोटी बातें उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी बन गईं। सुबह का पहला संदेश, शाम की लंबी बातें और भविष्य के सपने… सब कुछ एक खूबसूरत कहानी जैसा लगने लगा।

मीरा ने एक दिन पूछा,
"आरव, अगर जिंदगी में कभी मुश्किल समय आया तो क्या तुम मेरा साथ छोड़ दोगे?"

आरव मुस्कुराया और बोला,
"साथ छोड़ना तो दूर की बात है मीरा… मैं तुम्हारा साथ आखिरी सांस तक निभाऊंगा।"

लेकिन जिंदगी हमेशा सपनों के हिसाब से नहीं चलती।

कुछ समय बाद आरव के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी। परिवार की जिम्मेदारियों और समाज के डर के बीच आरव टूटने लगा। वह मीरा से दूर होने लगा।

मीरा ने पूछा,
"क्या हमारा प्यार इतना कमजोर था कि हालात के सामने हार गया?"

आरव की आँखों में आँसू थे।
"नहीं मीरा… मेरा प्यार कभी कमजोर नहीं था। मैं बस अपनी जिम्मेदारियों में फंस गया।"

मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा,
"प्यार पाने का नाम नहीं होता आरव… कभी-कभी किसी की खुशी के लिए खुद को खो देना भी प्यार होता है।"

समय बीत गया। दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन दिल के एक कोने में वह प्यार हमेशा जिंदा रहा।

कई सालों बाद आरव को पता चला कि मीरा ने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की मदद करने में लगा दी। उसने शादी नहीं की, क्योंकि उसके दिल में एक वादा आज भी जिंदा था।

आरव मीरा से मिलने पहुंचा। दोनों ने एक-दूसरे को देखा तो आंखों में हजारों बातें थीं।

आरव ने धीरे से कहा,
"मैं तुम्हारा साथ जिंदगी भर नहीं दे पाया… लेकिन मेरे दिल में तुम्हारा स्थान कभी कोई नहीं ले सका।"

मीरा मुस्कुराई और बोली,
"कुछ रिश्ते साथ रहने के लिए नहीं, हमेशा याद रहने के लिए बनते हैं।"

उस दिन दोनों ने कोई शिकायत नहीं की। बस पुराने प्यार को सम्मान दिया।

क्योंकि सच्चा प्यार हमेशा साथ रहने से साबित नहीं होता…
कभी-कभी वह मरते दम तक दिल में जिंदा रहकर भी अपनी कहानी लिख देता है।

समाप्त।

skptech

हमारे बाबा ने बगिया बनाई,
चार बरगदों की छाँव सजाई।
हर रिश्ते को प्यार से सींचा,
ममता की खुशबू घर-घर आई।

अभी तो माली साथ हमारे,
खाद-पानी दिल से डाला।
प्यार की जड़ इतनी गहरी,
हर मौसम ने फूल संभाला।

न आए कभी पतझड़ इसमें,
रिश्तों का ये प्यार बना रहे।
बाबा की दी इस बगिया में,
हर आँगन यूँ ही हरा रहे।
DHAMAK

heenagopiyani.493689

जादूगर का रहस्य

एपिसोड 1: रहस्यमयी पुस्तक

घने जंगल के बीचों-बीच एक प्राचीन खंडहर था। गाँव के लोग उसे "मृत जादूगर का मंदिर" कहते थे। उनका विश्वास था कि जो भी उस मंदिर में गया, वह कभी वापस नहीं लौटा।

लेकिन 20 वर्षीय आरव इन कहानियों पर विश्वास नहीं करता था।

आरव एक गरीब अनाथ युवक था। वह अपनी बूढ़ी दादी के साथ एक छोटे से गाँव में रहता था। लकड़ियाँ काटकर और जड़ी-बूटियाँ बेचकर किसी तरह उनका गुज़ारा चलता था।

एक दिन दादी की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई।

वैद्य ने कहा, "अगर तीन दिनों के भीतर चंद्रमणि जड़ी नहीं मिली, तो इन्हें बचाना मुश्किल होगा।"

वह दुर्लभ जड़ी केवल उसी रहस्यमयी जंगल में मिलती थी।

अगली सुबह आरव कुल्हाड़ी और एक मशाल लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा।

जंगल में अजीब सन्नाटा था। पक्षियों की आवाज़ भी नहीं थी। अचानक तेज़ हवा चली और उसे लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो।

वह डरते हुए आगे बढ़ता रहा।

तभी उसकी नज़र एक विशाल टूटे हुए पत्थर के मंदिर पर पड़ी। मंदिर के द्वार पर प्राचीन भाषा में कुछ लिखा था—

"जो ज्ञान चाहता है, उसे पहले अपने भय पर विजय पानी होगी।"

आरव ने गहरी साँस ली और अंदर चला गया।

मंदिर के भीतर अंधेरा था। दीवारों पर जादूगरों, ड्रैगन और रहस्यमयी प्राणियों की विशाल मूर्तियाँ बनी थीं।

अचानक पूरा मंदिर काँप उठा।

फर्श के बीचों-बीच एक गोल पत्थर धीरे-धीरे खुलने लगा।

उसके भीतर से सुनहरी रोशनी निकल रही थी।

आरव ने झुककर देखा।

वहाँ एक प्राचीन पुस्तक रखी थी, जिसके ऊपर सुनहरे अक्षरों में लिखा था—

"सर्वोच्च जादू का ग्रंथ"

जैसे ही उसने पुस्तक को छुआ, पूरा मंदिर नीली रोशनी से भर गया।

उसके हाथों के चारों ओर चमकते हुए जादुई चिन्ह घूमने लगे।

तभी एक गूँजती हुई आवाज़ पूरे मंदिर में सुनाई दी—

"एक हज़ार वर्षों बाद... मेरा उत्तराधिकारी आ चुका है।"

आरव घबरा गया।

उसी क्षण मंदिर के बाहर आकाश काले बादलों से ढक गया। बिजली चमकने लगी।

दूर, अंधकार के राज्य में बैठा एक भयानक काला जादूगर अचानक अपनी आँखें खोलता है।

वह मुस्कुराता है और कहता है—

"आख़िरकार... वह पुस्तक जाग चुकी है। अब समय आ गया है कि मैं उसकी शक्ति अपने अधिकार में कर लूँ।"

उधर, आरव को अभी तक यह पता भी नहीं था कि उसने केवल एक पुस्तक नहीं उठाई, बल्कि ऐसी शक्ति को जगा दिया है जिसके लिए पूरी दुनिया में युद्ध छिड़ सकता है...

एपिसोड 1 समाप्त।
अगले एपिसोड में: पुस्तक का पहला रहस्य और आरव की पहली जादुई शक्ति प्रकट होगी।


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rajukumarchaudhary502010

કદાચ ખોવાઈ જાઉં ભરસભામાં હું તારા વિચારમાં તો ઢંઢોળજે મને.
ભરીસભા છે એટલે,બાકી તારી યાદ તનમાં સદાય તરફડે છે.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

अधूरी मोहब्बत !

क्यों कहा तुमने
हमारी मोहब्बत अधूरी है?
क्या जीवन भर साथ रहने को ही,
पूर्ण होने की निशानी माना जाएगा?

अधूरा प्रेम नहीं,
हमारा उसके प्रति विश्वास हो जाता है
यदि मोहब्बत सच्ची और गहरी है
वो दूर रहकर भी बनी रहती है।

By. Santoshi " katha"

( लाइन पसंद आए तो लाइक जरुर करे और अपने विचार कमेंट में बताए। यदि आपने हमें फॉलो नहीं किया है तो कर लिजिए। धन्यवाद!! )

santoshikatha858769

Global Forgiveness Day

Forgiveness brings inner freedom.

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#forgiveness #forgivenessday #spirituality #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

स्वर्ग की अप्सरा तुम, दिव्य रूप धारी
नृत्य करतीं स्वर्ग में, अप्सरा तुम्हारी
गंधर्वों के साथ में, सुरों की ताल पर
नाचतीं तुम स्वर्ग में, अद्भुत सौंदर्य धार

तुम्हारे बालों में, फूलों की माला
तुम्हारे चेहरे पर, मुस्कान की लहर
तुम्हारे नृत्य में, स्वर्ग की झलक
तुम्हारी सुंदरता, हृदय को छू ले

स्वर्ग की अप्सरा, तुम्हारी कहानी
एक अद्भुत कथा, जो हृदय को छू जाए
तुम्हारी सुंदरता, स्वर्ग की शोभा
तुम्हारा नृत्य, हृदय को मोह ले।



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rajukumarchaudhary502010

🙏🙏यह महंगी 'भेंट सौगातों की,
दुनिया भले रहे एक तरफ,

मुझे एक 'चोकलेट' से,
खुश हो जाता 'बचपन' ज़ीना है।🦚🦚

parmarmayur6557

हर पति एक जैसा नहीं होता। पत्नी के प्रति उसका व्यवहार अक्सर तीन तरह का देखने को मिलता है—

पहला पति वह होता है जो समझदारी से पत्नी का साथ देता है। अगर घर वाले पत्नी से नाराज़ हों, तो वह बिना किसी का अपमान किए, बड़े धैर्य और बुद्धिमानी से पत्नी का पक्ष रखता है। वह ऐसा संतुलन बनाता है कि न पत्नी का सम्मान कम हो और न ही परिवार को बेवजह ठेस पहुँचे। ऐसे पति घर को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।

दूसरा पति वह होता है जिसे हमेशा यही डर रहता है कि कहीं परिवार वाले नाराज़ न हो जाएँ। इसलिए वह पत्नी की भावनाओं की परवाह कम करता है। चाहे पत्नी का दिल टूट जाए, उसकी आँखों में आँसू आ जाएँ, लेकिन वह परिवार वालों के सामने कभी पत्नी के लिए नहीं बोलता। ऐसे रिश्तों में पत्नी धीरे-धीरे अकेली महसूस करने लगती है।

तीसरा पति सबसे उलझा हुआ होता है। पत्नी के सामने तो उसकी हाँ में हाँ मिलाता है और परिवार वालों के सामने परिवार की तरफ हो जाता है। इतना ही नहीं, जब बात रिश्तेदारों, पड़ोसियों या समाज तक पहुँचती है, तो अपनी पत्नी को ही गलत साबित कर देता है ताकि उसकी अपनी छवि अच्छी बनी रहे। ऐसे पति किसी के भी सच्चे नहीं होते, क्योंकि वे हर जगह सिर्फ अपना फायदा देखते हैं।

रिश्ता तभी मजबूत बनता है जब पति सच का साथ दे, चाहे गलती पत्नी की हो या परिवार की। न्याय और सम्मान ही हर रिश्ते की सबसे मजबूत नींव होते हैं।

चौथा पति
चाहे पत्नी अपनी जगह पूरी तरह सही हो, फिर भी वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने उसी की गलतियाँ गिनाते रहते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनका किसी और से संबंध हो, तो उस रिश्ते को छिपाने के लिए भी पत्नी को ही दोषी ठहराते हैं।
वे कहते हैं, "तुम्हारे साथ मुझे कभी सुकून नहीं मिला... घर में हमेशा क्लेश रहता था... इसलिए मैं किसी और के पास चला गया।"
लेकिन सच यह है कि किसी रिश्ते में समस्या होना और किसी का विश्वास तोड़कर अफेयर करना, दोनों अलग बातें हैं। अपने फैसले की जिम्मेदारी लेने के बजाय जब कोई अपनी बेवफाई का ठीकरा हमेशा पत्नी के सिर फोड़ देता है, तो यह जिम्मेदारी से बचने और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश होती है।
एक अच्छा जीवनसाथी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है। हर गलती का दोष केवल पत्नी पर डाल देना न तो न्याय है और न ही एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी।

archanalekhikha

हर पति एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ पति ऐसे भी होते हैं जो अपनी पत्नी को हर जगह गलत साबित करने की कोशिश करते हैं।

चाहे पत्नी अपनी जगह पूरी तरह सही हो, फिर भी वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने उसी की गलतियाँ गिनाते रहते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनका किसी और से संबंध हो, तो उस रिश्ते को छिपाने के लिए भी पत्नी को ही दोषी ठहराते हैं।

वे कहते हैं, "तुम्हारे साथ मुझे कभी सुकून नहीं मिला... घर में हमेशा क्लेश रहता था... इसलिए मैं किसी और के पास चला गया।"

लेकिन सच यह है कि किसी रिश्ते में समस्या होना और किसी का विश्वास तोड़कर अफेयर करना, दोनों अलग बातें हैं। अपने फैसले की जिम्मेदारी लेने के बजाय जब कोई अपनी बेवफाई का ठीकरा हमेशा पत्नी के सिर फोड़ देता है, तो यह जिम्मेदारी से बचने और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश होती है।

एक अच्छा जीवनसाथी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है। हर गलती का दोष केवल पत्नी पर डाल देना न तो न्याय है और न ही एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी।

archanalekhikha

दोस्ती एक अनमोल खजाना है इसकी कोई सीमा नहीं होती कि कौन कब तक निभाएगा और ये जब तक निभाएगा जा सकता है जब दोस्तों में प्यार और विश्वास हो

vanshsingh118873

good morning

rupex

अपना होना ही जीवन है

"जो हुआ, अच्छा हुआ।
जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है।
जो होगा, अच्छा होगा।"

इन वाक्यों का अर्थ यह नहीं कि हर घटना सुखद होती है, बल्कि यह है कि अस्तित्व अपने नियमों से चलता है। अस्तित्व किसी व्यक्ति की इच्छा, अहंकार या कल्पना के अनुसार नहीं चलता। जो संभव है, वही घटित होता है।
समस्या अस्तित्व में नहीं है। समस्या मनुष्य के भीतर है।
मनुष्य स्वयं को जैसा है, वैसा स्वीकार नहीं करता। वह हमेशा किसी और जैसा बनना चाहता है—अधिक पवित्र, अधिक महान, अधिक ऊँचा, अधिक विशेष। यहीं से तुलना जन्म लेती है। तुलना से ऊँच-नीच पैदा होती है, ऊँच-नीच से अहंकार और हीनता, और इन्हीं से संघर्ष, हिंसा और दुख का विस्तार होता है।
अस्तित्व किसी को ऊँचा या नीचा नहीं बनाता। वह केवल विविधता को प्रकट करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वभाव में पूर्ण है। लेकिन जब मनुष्य अपने स्वभाव को छोड़कर किसी कल्पित आदर्श के पीछे दौड़ता है, तब वह स्वयं से कट जाता है। यही वास्तविक त्रासदी है।
कर्म अपने आप में न पाप है, न पुण्य। कर्म तो केवल कर्म है। पाप और पुण्य हमारे निर्णय, मान्यताएँ और सामाजिक व्याख्याएँ हैं। जब हम कर्मों पर अपने मानसिक लेबल चढ़ा देते हैं, तब उन्हीं लेबलों के बंधन में बँध जाते हैं। बंधन कर्म नहीं बनाता; बंधन हमारी व्याख्या बनाती है।
इसलिए समस्या धार्मिक नहीं, अस्तित्वगत भी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत है। प्रश्न यह नहीं कि अस्तित्व क्या कर रहा है। प्रश्न यह है कि मैं स्वयं अपने बारे में क्या मानता हूँ। मेरा भ्रम ही मेरा बंधन है।
ज्ञान का सार बहुत छोटा है—
अस्तित्व को समझो, और स्वयं को समझो।
यदि मनुष्य अपने वास्तविक परिचय में खड़ा हो जाए—न स्वयं को छोटा माने, न बड़ा; न पवित्र बनने का अभिनय करे, न अपवित्र होने का भय रखे; केवल जैसा है वैसा स्वयं को स्वीकार कर ले—तो अधिकांश संघर्ष उसी क्षण समाप्त हो जाएँ।
जहाँ स्वीकृति है, वहाँ तुलना नहीं रहती।
जहाँ तुलना नहीं रहती, वहाँ अहंकार नहीं रहता।
जहाँ अहंकार नहीं रहता, वहाँ बंधन नहीं रहता।
और जहाँ बंधन नहीं रहता, वहीं जीवन पहली बार खिलता है।
मनुष्य को बदलने की आवश्यकता नहीं है; उसे स्वयं को देखने की आवश्यकता है। स्वयं का स्पष्ट बोध ही मुक्ति है। मुक्ति अर्थ मृत्यु नहीं स्वतंत्र जीवन खुला आकाश अन्नत संभावना है।
Independent Researcher & Philosopher
Vedanta 2.0 ©
ORCID: https://orcid.org/0009-0000-8083-0685
(इंटरनेशनल रजिस्टर्ड – विज्ञान और वेदांत का संश्लेषण)परिचय:
वेदांत 2.0 “न मार्ग, न साधना, न नियम –
केवल समझ।
जो देख लिया, वही मोक्ष;
जो समझ गया, वही साधना, तो अभी जी लिया वही ईश्वर जीवन ही ईश्वर है।"

bhutaji

Good morning friends.. have a beautiful day

kattupayas.101947

મિત્રો,
લેખન ના આ નવા સફર માં આપ સહુ જ્ઞાની , જાણકાર, અને સંવેદનશીલ લોકો માટે પ્રસ્તુત છે મારી નવી રચના.
આપ ને આ કેવી લાગી જણાવશો તો આભારી થઈશ.
અસ્તુ....

jiteshdattani024052

Welcome to SKP Divine Creation
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skptech

एक ऐसे इंतजार जो खत्म हो चुकी है
फिर लौट है कोई उसके इंतजार करने


गीत पार्ट 1
वह इंतजार जी

हु। हु हु। हु हु।

प्यार में जो घड़ी-घड़ी होती है
वह इंतजार जी




हु। हु। हु। हु हु हु। 2



आया मेरे बाद। आया मेरे बाद
आया मेरे बाद दीवाना। आया मेरे बाद मेरा दीवाना


आ। या मेरे बाद करने मेरा इंतजार जी

करने मेरे इंतजार। जी




हु।


तन्हा हमने उन्हें छोड़ कहां
तनहा तो हम थे लम्हा लम्हा रहा



आया वक्त वही हालत की
मैंने प्यार किया था
और कमी था उनकी इसी प्यार की


पेमहाल तो हो गई थी मैं
आपा में उसके भी कुछ ना रहा आज



हु हु। हु हु। हु। हु

वह दिन मेरे कल
यह दिन उसका आज
बराबर की लगी है दोनो तरफ आग


हां इसमें फर्क है बरसों की
जज्बातों की और जिंदे आशो की



हु। हु। हु। हु
लेनी आई फिर से मजाक पे गुमान से
तन्हाई जिंदगी मेरे बाद मेरे इंतजार जी




हा आ। हा। आ। हा आ

प्यार में जो घड़ी घड़ी होती है
वह इंतजार जी

हा हा। हा हु। हु। हु।


वे एतबार जी
आया मेरे दीवाने आया मेरे दीवाने
मेरे बाद करने मेरा इंतजार की


खुदा की खैर करूं
या उसके दर्द की दवा दूं

दर्द से भरा हो है खाक में मैं भी हूं



हु। हु। हु। 2
क्या फायदा एसी इंतजार की
जब उमरा वित ही गई तन्हा अकेली



आया सो साल बाद वे करने मुझे ही प्यार जी


आया 100 साल बाद वे




हु। हु। हु। हा आ। हा। आ। हा आ

जीवन वही वादा वही कसम वही खाए हजारों बार जी

होगा तुम्हें भी एक दिन मुझे जानिसार जी
आया मेरे बाद आया मेरे बाद
आया मेरे बाद मेरे दीवाने
आया मेरे बाद मेरा दीवाना करने मुझे से ही प्यार


हु। हु। हु। हु। हु। हु

abhinisha

શુભસંધ્યા
જય શ્રી રાધેકૃષ્ણ🙏🏻

falgunidostgmailcom

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rajukumarchaudhary502010

दिल की इस बेचैनी को सुकून के धागों में पिरो गई,,
आज ये शाम भी जाते जाते कितनी हसींन हो गई।।
❤️

nandiv

હું પૂછુ છુ સતત આ મારા દિલને
જે સુખ હું તને ના આપી શક્યો
એ સુખ તે બીજે થી શોધ્યું
તો એમા ખોટુ શુ છે?
હા જલન તો થાય છે પણ કરુ તોય શુ
જેવુ મેં કર્યું તેવુ જ મેં પણ પામ્યુ
તો એમા ખોટુ શુ છે?

amirali3796