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New bites

कोमलताविहीन है जैसे कोई पेड़ बिना हरी पतिया और डाली के,
जैसे कोई बाप अपने पुनर्जन्म की दादीअम्मा बनके डांटने वाली कै..!🌻🫂

desaipragati1108gmail.com102305

Do You Know that everything is simply an interplay of scientific circumstantial evidences? No one has even the slightest authority or power in this world, so who is going to get away with anything?

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#doyouknow #facts #spirituality #spiritualfacts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

उसको खुद खुशी की आदत है
उसे बस खुशी की चाहत है,
सुबह निकलता है घर से
ताने सुन सुन के
दर दर भटकता
फाइल के ढेर के साथ
हर जगह निराशा पाकर
शाम को उसी पिंजड़े में वापस
वो ऐसा काठ का पुतला है
जो अभी तक उसी पिंजड़े से
बंधा हुआ हताश हो लौटे
दो रोटी की आशा में
थाली तो परोसी सब्जी दाल से
पर एक थाली कानों में भी खनखनाती सुनी
पेट भरकर वापस कमरे में
सुबह निकलने की तैयारी
फिर एक मुस्कान और हताशा की नींद
अगले दिन फिर वही
खुद खुशी की राह
ये वो आदमी है
जो खुद ही खुद
जिम्मेदारी से बांधे हुए है
चाह कर खुद को आजाद
नहीं कर पाता किसी
बंधन से कैसे करे
खुद खुशी जो रोज कर
रहा अब उसी से
खुद को खुश रखें हुए है


जय जिनेन्द्र

jainashish0014

My experience 😉

manishakumari419144

#दूसरों_द्वारा_डाली_गई_मिट्टी_से_दफ़न_नहीं_होना_है
. . . ओशो की कलम से।

एक बार किसी गाँव में एक किसान का बैल एक सूखे कुएँ में गिर गया। बहुत देर तक वह बैल वहाँ पड़ा चिल्लाता रहा, लेकिन किसान ने कोई कदम नहीं उठाया। किसान उसकी चिल्लाहट सुनता रहा और सोचता रहा कि वह क्या करे और क्या नहीं ?
अंततः किसान ने विचार किया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चुका है और वह उसके लिए अनुपयोगी है, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है इसलिए बैल को इसी सुखे कुएँ में दफ़न कर देना चाहिए। किसान ने अपने कुछ परिचितों को बुलाया और उन सब के साथ मिलकर एक-एक फावड़ा मिट्टी कुएं में डालनी शुरू कर दी।
बैल का रूदन अभी तक जारी था, लेकिन जल्दी ही उसे स्थिति का आभास हो गया। और उसके बाद वह अचानक आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। कुछ देर उसकी आवाज न सुनाई देने पर जब उन लोगों ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गए।. . .
अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था, वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर नीचे गिरी मिट्टी पर चढ़ कर उस पर खड़ा हो जाता था। बरहाल जैसे-जैसे वे लोग उस बैल पर फावड़ों से मिट्टी गिराते गए, वैसे-वैसे वह हिलहिल कर उस मिट्टी को गिरा कर; उसकी एक सीढी सी बनाकर ऊपर चढ़ता गया और जल्दी ही आश्चर्यजनक ढंग से वह ऊपर तक पहुंच गया और अंततः बाहर कूदकर भाग गया।

●●●
दरअसल हमारे जीवन का सच भी यही है; जिनके लिए हम उपयोगी नहीं होते, वे हमारे जीवन में बहुत तरह की मिट्टी फेंकतें हैं। हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में हमारी आलोचना करता है, कोई हमारी सफलताओं से ईर्ष्या के कारण बेकार में ही भला बुरा कहता है, कोई हमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता है जो हमारे आदर्शों के विरुद्ध होते हैं। ये सब एक तरह से फेंकी हुई मिट्टी ही है।
ध्यान रहे. . . ऐसे में हमें हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की मिट्टी को गिराकर उससे सीख ले कर; उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किए आगे बढ़ना है।
. . . V€€R 💝

veermehta

कुछ शब्दों, विचारों या व्यक्ति,
सुर्य के भांति होते हैं।

जैसे सुर्य के उजाले से पुरी धरती पर,
प्रकाश फैलता है।
नवजीवन का संचार होता है।

बस उसी तरह कुछ शब्द, विचार या व्यक्ति,
मन भीतर के अंधकार को दूर करके नवचेतना का संचार करते हैं।

parmarmayur6557

અહીં ફક્ત એ માણસના ઓળખની વાત છે,જે તમારી સમીપ છે. જીવનમાં ઘણા લોકો આપણી નજીક હોય છે,પણ તેમાંથી સાચા અને જૂઠા લોકોને ઓળખવા kayi રીતે તેના વિશે કાવ્યમાં જણાવ્યું છે.

maheshpatel.606781

જય શ્રી કૃષ્ણ,સુપ્રભાત

thakorpushpabensorabji9973

The duty of being a doctor earns me both prayers and curses my destiny will be shaped by my own karma.

manishakumari419144

My heart like ocean version 1 is out now.
https://youtu.be/7KjKC2YBPXI?si=39Uq8sWHEOvLRL5V

rj99002893

"यह फोटो मेरी Botany Lab के बाहर बने उस छोटे से तालाब की है। एग्जाम के दिनों में जब भी मैं कॉलेज जाती, यह तालाब मेरा स्वागत एक नए खिले हुए कमल के साथ करता था। रोज़ एक नया फूल, एक नई उम्मीद और एक प्यारी सी मुस्कान। 🌸 बस उसे निहारना, उसकी फोटो क्लिक करना और एक सुकून के साथ घर लौट जाना। क्या आपके कॉलेज में भी ऐसी कोई जगह थी जो आपको सुकून देती थी? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!"

leoleo315756

good night..

nikitavinzuda6548

energy for living

kattupayas.101947

Story behind everyone

kattupayas.101947

Thanks to music.. still iam alive

kattupayas.101947

Music a beautiful concept

kattupayas.101947

Thinking about music

kattupayas.101947

पानी और जीवन
जाने कितने ही
आकार बदलता है
जब ये आसमान
से आता है तो
कई प्यासे मन
को खुशियाँ दे
कर जाता है
कभी ये पिघल
कर बह जाता हे
जब यह फुब्बारे
में सजता है
तो छोटी बूंदों
सा चमकता है
और जब जाता
है तो भाप सा
सूरज की किरणों
जा खोता है
गम गिन माहौल
पे यह तड़प सा
काला बदल बन
मंडराता है पर
जब ये बरसता है
तो खुशहाली की
खुसबूदार लता सी
बन कर फ़ैल जाता
जीवन और पानी
यही कहानी
कितनो को तरसाता
हा कितनो को तडपता
पर दुःख और खुशियाँ
सच ये हमे बरस
के दिखता है

आशीष जैन (श्रीचंद)

jainashish0014

कलम आज फिर हुयी
शांत किसी शब्द के
लिखने पर स्याही हुयी
फिर आज ख़तम के
कुछ शब्दों को हमने
मोड़ना चाहा पर
कलम हुयी आज फिर
शांत के मंजर आज
जुबान पर था वो मंजर
जो तड़पाता था हमको
हरपल जिसकी याद
हमको है रुला जाती
गला है हमारा रुंधा
पड़ा हाथ में कम्पन
भरा पड़ा कुछ और
अगर हम याद करे
दिल शीशे सा बिखर गया
के काश हमे तुम मिल जाते
तो ये रात की बेचेनी न होती
के काश तुम जो मिल जाते तो
यूँ हम शायद करवटे न लेते
हाँ तेरी ही यादो ने हमको
बहुत बहुत तडपाया है
हाँ तेरी ही सूरत ने हमको
कितना हमे रुलाया है
आजा के जीवन है छोटा
है दुनिया तेरी भी छोटी
आजा के याद है आती
याद से आँखों में मोती

आशीष जैन (श्रीचंद्रजी)

jainashish0014

खड़े हो यूँ हाथों में गुलदस्ता लिए तुम,
अभी तो रगों में ज़हर उतरना बाकी है,
जलकर ख़ाक होना है अभी, ठहर जाओ तुम,
अभी तो उनका दुल्हन बनते देखना बाकी है।

nileshrajput842gmail.com162713

You're Not Alone
You're Just Disconnected

ziddiceo

Everyone Dreams

ziddiceo

दोस्तो मेरी पहली रचना प्रकाशित हुए हैं l आप सभी मेरी रचना पढ़िए और Comment,rating करे l
उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी l

apki Abantika 🌸✨️🦋

leoleo315756

​थॉमस एडिसन का अंधेरा: हजार असफलताओं की रौशनी

​यह 1870 के दशक की बात है, जब न्यूयॉर्क की सड़कों पर गैस लैंपों की मद्धिम रौशनी ही रात का सहारा थी। इसी शहर की एक छोटी-सी प्रयोगशाला में थॉमस एडिसन नाम का एक व्यक्ति दिन-रात एक धुन में लगा रहता था। उसका सपना था, बिजली से जलने वाला ऐसा बल्ब बनाना जो हर घर को रोशन कर दे।

​एक दिन शाम को, एडिसन अपनी प्रयोगशाला में तार और कांच के बल्बों के ढेर के बीच बैठा था। उसके सहायक, जेम्स, ने झुँझलाहट भरे स्वर में कहा, "थॉमस, हमने फिर कोशिश की, यह फिलामेंट भी टूट गया! यह हजारवीं बार है जब हम फेल हुए हैं।"

​एडिसन ने मुस्कुराते हुए जेम्स की तरफ देखा। उसकी दाढ़ी पर कार्बन के निशान थे और आँखें नींद से लाल थीं, लेकिन चेहरे पर हार का कोई भाव नहीं था। "जेम्स," एडिसन ने कहा, "हम फेल नहीं हुए हैं। हमें बस यह पता चला है कि 999 ऐसे तरीके हैं जिनसे बल्ब नहीं जलता।"

​जेम्स ने गहरी सांस ली, "लेकिन हम कब तक ऐसे ही प्रयोग करते रहेंगे? बाजार में लोग हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। वे कहते हैं, 'यह सनकी आदमी अंधेरे में रौशनी ढूंढ रहा है!'"

​एडिसन उठ खड़ा हुआ। उसने एक पुराना टूटा हुआ फिलामेंट उठाया और उसे अपनी उंगलियों के बीच घुमाया। "जेम्स, इतिहास में कोई भी महान आविष्कार आसानी से नहीं हुआ है। क्या तुम्हें लगता है ग्राहम बेल ने एक बार में टेलीफोन बना दिया होगा? या राइट बंधुओं ने पहली उड़ान में ही सफलता पा ली होगी?"

​"पर हमें आगे क्या करना चाहिए?" जेम्स ने पूछा।

​"हमें सिर्फ एक बार सही तरीका खोजना है," एडिसन ने दृढ़ता से कहा, "एक बार। और जब हम उसे ढूंढ लेंगे, तो पूरी दुनिया रोशनी से जगमगा उठेगी।"

​अगले कुछ हफ्तों तक, एडिसन ने हर संभव सामग्री पर प्रयोग किया। प्लैटिनम, लकड़ी के रेशे, धातु के तार—वह कुछ भी छोड़ने को तैयार नहीं था। उसकी टीम थक चुकी थी, लेकिन एडिसन का जुनून कम नहीं हुआ था।

​एक रात, जब सब सो रहे थे, एडिसन को एक विचार आया। उसने बांस के बारीक रेशों को कार्बन से उपचारित किया। उसने अपनी धड़कनें रोके हुए उस फिलामेंट को बल्ब में लगाया और स्विच ऑन किया।

​एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर, एक हल्की पीली रौशनी पूरे कमरे में फैल गई। वह रौशनी लगातार जलती रही—एक घंटे, दो घंटे, चार घंटे... चालीस घंटे तक!
​जेम्स और बाकी सहायक दौड़ते हुए आए। उनकी आँखों में अविश्वास और खुशी के आँसू थे।
​"हमने कर दिखाया!" जेम्स चिल्लाया।

​एडिसन ने उस जलते हुए बल्ब को देखा, उसकी आँखों में गहरी संतुष्टि थी। "हाँ, जेम्स। हमने कर दिखाया। और इस बार हमें यह भी नहीं पता चला कि कितने और तरीके थे जिनसे यह काम नहीं करता।"
​थॉमस एडिसन की इस जीत ने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। यह सिर्फ एक बल्ब का आविष्कार नहीं था, यह इस बात का प्रमाण था कि 'असफलता' सिर्फ एक कदम है सफलता की सीढ़ी पर, बशर्ते आप हार न मानें। उसका अंधेरा अब दुनिया की रौशनी बन चुका था

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