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New bites

"नफ़रत बाँटने वाले इसलिए नहीं जीतते कि वे बहुत ताक़तवर हैं, बल्कि इसलिए जीतते हैं कि अच्छे लोग समय आने पर चुप रह जाते हैं।"

lukmankhan626159

Do you know that the prime reasons behind husband and wife causing hurt to each other through anger are expectations from each other, opinions and lack of understanding.

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dadabhagwan1150

भीड़ का हिस्सा बनने का कोई चाव नहीं,
सबको खुश कर पाऊँ, ऐसा मेरा स्वभाव नहीं।
दुनिया के तराजू में खुद को तौलने नहीं आए,
हम यहाँ किसी और की बोली बोलने नहीं आए।

ज़िंदगी जीने आए हैं, कोई जंग जीतने नहीं,
सपनों के रंगों से भरने आए हैं, यूँ ही बीतने नहीं।
साँसों की इस रवानी को खुद से सँवारना है,
हर एक लम्हे को जी भरकर निहारना है।

दूसरों की उम्मीदों की गठरी क्यों कंधों पर उठाएँ?
खुदा ने पंख दिए हैं, तो क्यों न खुलकर उड़ जाएँ?

सपनों के कुछ अधूरे पन्ने पूरे करने आए हैं,
हौसलों की स्याही से अपनी तकदीर लिखने आए हैं।
शिकायतें लाख करे ये ज़माना तो करने दो,
हवा का रुख चाहे जो हो, हमें बस उड़ने दो!

palewaleawantikagmail.com200557

काकडी ची तंबळी

🥬काकडीची तंबळी आणि भात

🥬तंबळी" हा एक पारंपरिक मराठी खाद्यपदार्थ आहे. विशेषतः, ती एक प्रकारची चटणी किंवा रस्सा आहे, जी नारळ, दही किंवा ताक आणि मसाल्यांपासून बनवतात. ती भातासोबत खाल्ली जाते. असे गुगल सांगते
कांदा, ओव्याची पाने, टोमॅटो असे अनेक पदार्थ वापरून करता येते
उन्हाळ्यात थंड आणि पचनास हलके असल्यामुळे तंबळी खूप खाल्ली जाते.
कर्नाटक आणि महाराष्ट्रात ती खूप लोकप्रिय आहे.
'तंबळी' भातासोबत एक उत्कृष्ट साइड डिश आहे.

🥬साहित्य
एक काकडी साले काढून फोडी करून
अर्धी वाटी ओले खोबरे
कोथिंबीर
एक मिरची
अर्धा इंच आले
मीठ चवीनुसार
लाल सुकी मिरची
कढीलिंब
जिरे हिंग
वाटीभर ताक
फोडणी साठी दोन मोठे चमचे तूप

🥬कृती
प्रथम काकडीच्या फोडी, खोवलेले खोबरे, आले, मिरची, मीठ व भरपूर कोथिंबीर घालून सरसरीत वाटण करून घेणे
वाटण एका भांड्यात काढून घेऊन
जेवढी घट्टसर तंबळी हवी असेल तितके ताक घालून मिसळून घेणे
एका कढल्यात तूप घालून
जिरे हिंग व कढीलिंब आणि लाल सुकी मिरची घालून फोडणी करून घेणे
ही फोडणी तंबळी वर ओतून परत एकदा तंबळी हलवून घेणे

🥬ही तंबळी भाता सोबत चांगली लागते
उन्हाळ्याच्या दिवसात फ्रीज मध्ये थंडगार करून खायला घेतल्यास आणखीन चविष्ट लागते😋

jayvrishaligmailcom

*Aakarshan hi Vinash"

arnagvanshi051673

झोली उसकी ख़ाली थी लेकिन
फ़िर भी मुस्कुरा रहा था वह इंसान
बेशक़ सबकुछ गँवाया था उसनें
मगर गँवाया नहीं था अपना ईमान


गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

ou Provide the Synopsis... I’ll Craft a Masterpiece!"
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​Name: [ravi chendra
​WhatsApp: 74835 80626
​Email: [ravichendrasunnkari@gmail.com

ravichendrasunnkari901711

మీరు సినాప్సిస్ (Synopsis) ఇవ్వండి... దాన్ని అద్భుతమైన కథగా నేను మారుస్తాను!"
​సబ్-హెడ్డింగ్:
​మీ ఆలోచనలకు అక్షర రూపం... పాఠకులను కట్టిపడేసే హై-లెవల్ కంటెంట్!
​నా ప్రత్యేకతలు (Bullet Points లో):
​రోజువారీ కంటెంట్: ప్రతిరోజూ కొత్త కథ లేదా సీరియలైజ్డ్ ఎపిసోడ్స్ రాత.
​వివిధ జానర్లు: ఉత్కంఠభరితమైన థ్రిల్లర్స్, హారర్-యాక్షన్ మరియు యాక్షన్-ఫాంటసీ కథలు.
​క్వాలిటీ: ప్రొఫెషనల్ స్క్రీన్ ప్లే మరియు ఎంగేజింగ్ నరేషన్.
​హైలైట్ బాక్స్ (చిన్న బాక్స్‌లో హైలైట్ చేస్తూ):
​"రోజుకో కొత్త కథ రాసివ్వబడును!"
​సంప్రదించాల్సిన వివరాలు (కింద భాగంలో):
​పేరు: [ravi chendra ]
​ఫోన్ / వాట్సాప్: [+91 74835 80626
​ఈమెయిల్: [ravichendrasunnkari@gmail.com

ravichendrasunnkari901711

📖 सफलता की कीमत

Episode 1: सपना जो भूख से बड़ा था

सुबह के पाँच बजे थे।

नेपाल के पर्सा जिले के एक छोटे से गाँव में सूरज की पहली किरणें धीरे-धीरे धरती को छू रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी, लेकिन एक टूटी हुई झोपड़ी के अंदर अभी भी सन्नाटा था।

झोपड़ी की छत जगह-जगह से टूटी हुई थी। बरसात में पानी टपकता था और गर्मियों में धूप सीधे अंदर आ जाती थी।

उसी झोपड़ी में रहता था एक लड़का—आरव।

उम्र लगभग सोलह साल।

चेहरा साधारण था, लेकिन आँखों में कुछ असाधारण था।

एक ऐसा सपना, जो उसके गाँव के किसी भी लड़के ने कभी नहीं देखा था।

आरव की आँख खुली।

उसने सबसे पहले अपनी माँ को देखा।

माँ कोने में बैठी पुरानी साड़ी सिल रही थीं।

उनकी उंगलियों में सुई चुभ रही थी, लेकिन चेहरे पर दर्द नहीं था।

क्योंकि गरीबी में दर्द महसूस करने की भी फुर्सत नहीं होती।

"माँ, आप सोई नहीं?" आरव ने पूछा।

माँ मुस्कुराईं।

"अगर मैं सो जाऊँगी तो घर कैसे चलेगा बेटा?"

आरव चुप हो गया।

यह वही जवाब था जो वह बचपन से सुनता आया था।

उसने इधर-उधर देखा।

घर में खाने को कुछ नहीं था।

बस एक खाली डिब्बा रखा था जिसमें कभी चावल हुआ करते थे।

आरव का दिल भारी हो गया।

वह जानता था कि माँ ने कल रात खाना नहीं खाया था।

लेकिन फिर भी उन्होंने उससे कहा था—

"मुझे भूख नहीं है बेटा।"

गरीब माँएँ अक्सर यही झूठ बोलती हैं।

ताकि उनके बच्चे चैन से खा सकें।

आरव बाहर निकल आया।

गाँव के बच्चे खेल रहे थे।

कुछ लोग खेतों की ओर जा रहे थे।

कुछ लोग चाय की दुकान पर बैठे राजनीति की बातें कर रहे थे।

लेकिन आरव की दुनिया अलग थी।

वह सीधे गाँव के पुराने स्कूल की ओर चल पड़ा।

स्कूल की दीवारें टूटी हुई थीं।

खिड़कियों के शीशे नहीं थे।

लेकिन आरव के लिए वही दुनिया की सबसे बड़ी जगह थी।

क्योंकि वहीं से उसके सपनों की शुरुआत हुई थी।

स्कूल के मैदान में पहुँचकर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

उसने अपना पुराना बैग खोला।

उसमें सिर्फ तीन किताबें थीं।

बाकी किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे।

अचानक उसकी नजर जमीन पर पड़ी एक पुरानी पत्रिका पर गई।

शायद किसी ने फेंक दी थी।

उसने उठाकर देखी।

कवर पर एक बहुत बड़ी कंपनी के मालिक की तस्वीर थी।

उस आदमी के पीछे ऊँची-ऊँची इमारतें थीं।

महंगी गाड़ियाँ थीं।

और हजारों लोग उसके लिए काम करते थे।

आरव उस तस्वीर को देर तक देखता रहा।

फिर धीरे से बोला—

"एक दिन मैं भी ऐसा बनूँगा।"

तभी पीछे से आवाज आई—

"अरे सुनो, अरबपति साहब!"

पूरी क्लास हँसने लगी।

वह उसका सहपाठी रोहित था।

"पहले अपने फटे जूते तो ठीक कर लो।"

सभी बच्चे जोर-जोर से हँसने लगे।

आरव ने अपने जूतों की तरफ देखा।

सचमुच वे जगह-जगह से फटे हुए थे।

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

उसने सिर्फ पत्रिका को अपने सीने से लगा लिया।

क्योंकि कुछ सपने मजाक से बड़े होते हैं।

कुछ देर बाद शिक्षक कक्षा में आए।

उन्होंने बच्चों से पूछा—

"तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?"

किसी ने कहा डॉक्टर।

किसी ने कहा पुलिस।

किसी ने कहा शिक्षक।

फिर शिक्षक ने आरव की ओर देखा।

"और तुम?"

पूरी कक्षा उसकी ओर देखने लगी।

आरव धीरे से खड़ा हुआ।

फिर बोला—

"मैं देश का सबसे सफल बिजनेसमैन बनना चाहता हूँ।"

कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।

फिर पूरी कक्षा ठहाकों से गूँज उठी।

"ये?"

"सबसे बड़ा बिजनेसमैन?"

"इसके घर में खाना नहीं होता!"

हँसी बढ़ती गई।

लेकिन आरव शांत खड़ा रहा।

शिक्षक भी उसे आश्चर्य से देख रहे थे।

"क्यों बनना चाहते हो?" शिक्षक ने पूछा।

आरव की आँखें भर आईं।

उसने कहा—

"क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी माँ भूखी सोए।"

पूरा कमरा अचानक शांत हो गया।

अब कोई नहीं हँस रहा था।

उस दिन पहली बार सबने आरव की आँखों में सपना देखा।

एक ऐसा सपना जो मजाक नहीं था।

एक ऐसा सपना जो उसकी जिंदगी बन चुका था।

शाम को वह घर लौटा।

लेकिन घर पहुँचते ही उसे कुछ अजीब लगा।

माँ बाहर नहीं थीं।

वह अंदर भागा।

माँ जमीन पर बैठी थीं।

उनके चेहरे पर कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी।

"माँ!"

आरव घबरा गया।

"क्या हुआ?"

माँ मुस्कुराईं।

"कुछ नहीं बेटा।"

लेकिन पड़ोस की एक बूढ़ी महिला बोली—

"दो दिन से ठीक से खाना नहीं खाया है।"

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसे लगा जैसे किसी ने उसके सीने पर पत्थर रख दिया हो।

उसने पहली बार खुद को असहाय महसूस किया।

उस रात वह सो नहीं पाया।

बार-बार उसे माँ का चेहरा दिखाई दे रहा था।

रात के करीब बारह बजे वह झोपड़ी से बाहर निकला।

आसमान तारों से भरा हुआ था।

वह खेतों की ओर चला गया।

वहाँ खड़े होकर उसने आसमान की तरफ देखा।

उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

लेकिन उसी समय उसके अंदर कुछ बदल गया।

उसने अपने आँसू पोंछे।

और पहली बार खुद से एक वादा किया।

"मैं गरीबी से हार नहीं मानूँगा।"

"मैं सफल बनूँगा।"

"चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े।"

हवा तेज चलने लगी।

मानो किस्मत उसकी बात सुन रही हो।

उसे नहीं पता था कि यह रास्ता आसान नहीं होगा।

उसे नहीं पता था कि सफलता उसे मिलेगी जरूर...

लेकिन उसके बदले उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

और वह कीमत सिर्फ पैसे की नहीं होगी...

बल्कि उन लोगों की होगी जिन्हें वह सबसे ज्यादा प्यार करता था।

उस रात आरव ने जो कसम खाई...

वही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी शुरुआत बनने वाली थी।

जारी रहेगा...

अगले एपिसोड में:

"भूख और किताबों का सौदा"

जब आरव अपनी पढ़ाई बचाने के लिए अपनी सबसे प्रिय चीज बेचने का फैसला करेगा, तब उसकी जिंदगी में एक ऐसा व्यक्ति आएगा जो उसके भविष्य की दिशा बदल देगा। 💔📚�

rajukumarchaudhary502010

उसकी आँखों में एक अजब उदासी थी,
लेकिन होठों पर एक धीमी हंसी थी।
ऐसे लग रहा था मानो कुछ तो है,

आंखें कहीं और ही घूमती,
लेकिन फिर भी मुझे देख रही थी,
जैसे मैं कोई हीरा हूं,
और वह मुझसे बहुत दूर है।

मानो एक कसक सी थी
उसके चेहरे पर,
लेकिन फिर भी वह दिल से खुश थी।

क्या था यह अजीब सा संगम,
मुझे समझ ही नहीं आया
वह इतनी खुश थी..!

या फिर वह मुझे बता ही नहीं पाई
कि वह कितनी खुश है ?

अजीब मुस्कान थी,
जैसे थोड़ा दर्द हुआ,
थोड़ी चोट लगी,
लेकिन मीठा भी लगा,
थोड़ा तीखा
और थोड़ा तेज सा लगा।

लेकिन कुछ तो था…
बात तो थी उसमें,
पता नहीं क्या बात थी
मैंने पूछा नहीं,
और वह बता नहीं पाई...🫠

manvikashveta451717

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rajukumarchaudhary502010

सांसे गहरी गहरी सांसे
गीत


अल्फाज

मेरी दुनिया रंगीन हो गई किसी के आने से
मेरी आंखें एक इसी चेहरे पर ठेहर गई
जिसे देखकर मेरी सांसे गहरी हुई

अब दिल बस कर रहा है
उसकी बाहों में समा जाने को
उम्र भर उसके हो जाने को

हां सांस गहरी


गीत



मेरी दुनिया दुनिया में रंग भरी
सारी दुनिया से दूर जाकर मेरी नजर तुम पर ठेहरी
और हुई सांसे गहरी


गहरी सांसे सांसे गहरी



आ जा मेरी जाने जिगर आके मेरी बाहों में समा
गहरी सांसे सांसे गहरी





सांसे गहरी सांसे गहरी
तेरे संग घूमु मैं घूमु दिन दुपहरी

दु। पहरी


तुझे मांगा है दुआओं में
ऐ मेरे साथिया मेरे साथ चल दिन से रात तक

साथिया बनके मेरे साथ चल
चल दिन रात तक


तक दिन रात तक तेरे साथ भटकु खुले आसमान के नीचे
हरी धरती के बीचों-बीच

मैं भटकु सारी उम्र तेरे पीछे पीछे




ओ ओ ओ ओ ओ ओ 3


साथिया मांग ले मुझसे मेरी उम्र सभी
दे दूंगी तुझे अपनी जिंदगी
साथ तेरे चलने को हूं मैं बेताब बड़ी




मैं हूं कहां। हूं यहां
तेरी बाहों में समाऐ तेरी राहों में बंके तेरे साऐ

सांसे गहरी गहरी सांसे
सांसे गहरी गहरी सांसे


हु हू हु हु।



मैं दुनिया भूल गई तेरी बाहों में आके
मेरी दुनिया में रंगीन हुई तेरे साथ पा के


सांसे गहरी गहरी सांसे
तेरे संग चल दूं मैं कहीं भी जब भी कहे तु
दिन हो या रात



ऐ मौसम ऐ हवा ऐ चांदनी सब गवाह है
मेरे मेरे इश्क


मैंने किया है वादा
मेरे ढलते उम्र तक मैं निभाऊंगी
ढलती उम्र तक तुम्हें चाहूंगी




दूर तेरी बाहों से और कहीं ना जाऊंगी
हां कहीं ना जाऊंगी

सांसे गहरी गहरी सांसे

मैं मुकम्मल हो गई तेरी बाहों में आ के
सांसे गहरी गहरी सांसें


अब ऐ निगाहें तुम पर ही ठहर ठेहरी उम्र भर आ के
सांसे गहरी गहरी सांसे

हु। हु हू हू। हु हु

सांसे गहरी गहरी सांसे

हु। हु। हु। 2





अगर यह गीत आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा ❤️🦋💯

abhinisha

"मेरे दिल को भा जाए"

मिलने जब भी आओ, तोहफ़ा एक नहीं… दो लाना तुम,
एक ईमानदारी, और दूसरी वफ़ा लाना तुम…

मैं वो लड़की नहीं, जो भारी चकाचौंध में खो जाए,
मुझे तो बस ऐसा महबूब चाहिए, जो मेरे दिल को भा जाए…

न झुमके, न चूड़ियाँ, न काजल मेरा दिल चाहता है,
कोई अदा-ए-तहज़ीब ऐसी हो, जो मेरे दिल को भा जाए…

जिसमें लफ़्ज़ों से ज़्यादा ख़ामोशियाँ बात करें,
जिसमें आँखें ही दिल का पैग़ाम सुनाएँ…

जो साथ दे सिर्फ़ ख़ुशी में ही नहीं, ग़म में भी,
और मेरी रूह तक को अपना बना जाए…

मुझे दौलत, शोहरत, या शान-ओ-शौकत नहीं चाहिए,
बस एक मोहब्बत हो जो हर इम्तिहान में रास आ जाए…
प्राची गुर्जर …….

prachitanwar111

तुम्हारे बाद कोई मनोकामना नहीं है मेरी
मेरी मनोकामनाओं का पूर्ण विराम हो तुम!!

narayanmahajan.307843

"What do you think is more important—the Chair (Position) or the Person sitting on it?"


I believe both hold their own power. A chair provides the stage, but the person defines the performance. Without the person, the chair is just an empty seat; without the chair, the person’s authority remains invisible. True power is the harmony between the two."

vanshsingh118873

"काश मुझे कोई ख़त लिखता"

काश मुझे भी कोई ख़त लिखता,
तन्हाई, दर्द, हाल-ए-दिल सब लिखता…

पढ़ती यादों में तन्हा जब ख़त मैं,
प्रियतम मेरा जुदाई का सबब लिखता…

गिरते जो आँसू ख़त पर मेरे,
मेरी फ़िक्र का ज़िक्र महबूब हर पल लिखता…

आँखों से बार-बार, हज़ार बार चूमती जो ख़त मैं,
महबूब मुझसे मिलने का पल लिखता…

काश मुझे भी कोई ख़त लिखता…
प्राची गुर्जर …….

prachitanwar111

विश्व योग दिवस के हार्दिक बधाई।,🌹🌹🙏😊🌹

drbhattdamayntih1903

विश्व संगीत दिवस की हार्दिक बधाई।🌹🌹🌹🙏😊

drbhattdamayntih1903

बड़ी शिद्दत से जिया है हर लम्हा तेरे साथ
यूँ ही खूबसूरत नहीं लगती मुझे तेरी यादें..!! ❤️

narayanmahajan.307843

🙏🙏 अपने चेहरे को हंसता हुआ रखीऐ,
वह दिनभर "योग" की तरह तरोताजा रखता है।🦚🦚

parmarmayur6557

🙏🙏खुद को कष्ट देकर भी खरीदीं हुई खुशियां ख़ुश रह कर अपने बच्चे और परिवार के बीच बांटने का हुनर एक पिता से बढ़कर किसी को नहीं आता है।🦚🦚

parmarmayur6557

जब जब लगता है मैं भूल रहा हूं उसे,
वो उसी रात मेरे ख़्वाबों में आ जाती है...!!!

narayanmahajan.307843