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सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
कविता


सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे

आने वाले कल की
अच्छे दिनों की
पूरे होने वाले सपनों की


सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजा रहे



तुम्हारे तुम्हारे साथ रहने की
तुमसे प्यार करने की



सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे


वह इंतजार झूठी ही सही
पर उस झूठे इंतजार पर एतबार रहे


बस यही एक जीने का तरीका है
सच से अगर कभी हुई मैं रूबरू
शायद खत्म कर लु मैं खुद को


इस सबसे अच्छा है कि
झूठ पर ही गुजार लु मैं अपनी जिंदगी


हां तकलीफ होगी
पर शायद मैं झूठी सहारे के साभ जिंदा रह लूंगी


सच हमेशा आईने की तरह साफ रहा मेरे सामने
फिर भी मैंने झूठ को चुना
सांस लेने के लिए
वह झूठ जो मुझे बचाए रखा



मुझ में हिम्मत नहीं थी
सच को स्वीकार करने की
ऐसा कुछ भी नहीं था


बस मुझ में ताकत नहीं थी
इस झूठ से लड़ने की
इसीलिए सच के आगे मोटी परते बिछा दी झूठ की


कि सच मुझे कभी ना दिखे
ना मैं खुद से सवाल करूं
कि तू झूठ को अपनी सांस बना ली है




सब कुछ खत्म होने से अच्छा हो
की उम्मीद रहे
शगुन से सांसे लेने की
बिना दर्द के जीने की
जो चाहे जी करने की


सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
अच्छे दिनों की




अगर एक कविता अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯

abhinisha

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kzस्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
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यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

तू था तो सब कुछ था,
अब सब कुछ है… पर तू नहीं।
ये जो खालीपन है न मेरे अंदर,
ये किसी एक दिन में नहीं आया,
ये धीरे-धीरे तेरे जाने के बाद
हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा बढ़ता गया।
तेरी हँसी, तेरी बातें, तेरी वो छोटी-छोटी आदतें,
सब कुछ आज भी मेरे आसपास घूमता है,
जैसे तू कहीं गया ही नहीं,
बस थोड़ी देर के लिए छुप गया हो।
मैं आज भी तेरे पुराने मैसेज पढ़ता हूँ,
हर शब्द में वही एहसास ढूंढता हूँ,
जो तूने कभी मुझे दिया था।
रातें सबसे ज़्यादा मुश्किल होती हैं,
जब चारों तरफ सन्नाटा होता है,
और दिल में सिर्फ तेरी आवाज़ गूंजती है।
नींद तो आती है, पर ठहरती नहीं,
हर ख्वाब में तू होता है,
और हर बार मैं तुझे खो देता हूँ।
तूने कहा था—“हमेशा साथ रहेंगे,”
मैंने उन लफ़्ज़ों को अपनी ज़िंदगी बना लिया।
शायद मेरी गलती यही थी,
कि मैंने तुझसे ज़्यादा तेरे वादों पर भरोसा किया।
तू वक़्त के साथ बदल गया,
और मैं तेरे साथ बिताए पलों में ही अटक गया।
अब भी जब कोई तेरा नाम लेता है,
तो दिल एक पल के लिए ठहर जाता है।
आँखों में वही पुरानी चमक आ जाती है,
पर अगले ही पल वो आँसू बनकर गिर जाती है।
तू शायद अब खुश है कहीं और,
किसी और के साथ अपनी दुनिया बसा रहा है,
और मैं यहाँ तेरी यादों के शहर में
अकेला ही भटक रहा हूँ।
मैंने बहुत कोशिश की तुझे भुलाने की,
नए लोगों से मिलने की,
नई शुरुआत करने की,
पर हर बार तेरी याद
सब कुछ पीछे छोड़ देती है।
जैसे तू मेरे दिल में नहीं,
मेरी रूह में बस गया हो।
कभी-कभी सोचता हूँ,
क्या कमी रह गई थी मुझमें?
क्या मेरा प्यार कम था,
या मेरी कोशिशें अधूरी थीं?
फिर खुद को समझा लेता हूँ,
कि कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं,
क्योंकि अगर वो पूरे हो जाते,
तो शायद उनकी खूबसूरती खो जाती।
तू अगर कभी ये पढ़े,
तो बस इतना जान लेना,
कि मैंने तुझे सच्चे दिल से चाहा था।
मेरे लिए तू सिर्फ एक इंसान नहीं था,
तू मेरी आदत था, मेरी ज़रूरत था,
मेरी हर खुशी की वजह था।
अब मैं तुझे रोकूँगा नहीं,
न ही तुझसे कोई शिकायत करूँगा।
तू जहाँ भी रहे, खुश रहे,
बस यही दुआ करता हूँ।
क्योंकि सच्चा प्यार कभी बांधता नहीं,
वो तो आज़ाद करता है।
पर अगर कभी तेरे कदम थम जाएँ,
और तुझे मेरी याद आए,
तो लौट आना… बिना किसी वजह के।
मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ,
उसी मोड़ पर,
जहाँ तूने मुझे आखिरी बार देखा था।
शायद वक्त के साथ सब ठीक हो जाए,
शायद ये दर्द भी एक दिन कम हो जाए,
पर तेरी यादें…
वो कभी नहीं जाएँगी।
क्योंकि कुछ लोग ज़िंदगी में आते हैं,
और फिर हमेशा के लिए
दिल का हिस्सा बन जाते हैं। 💔

knownwriter605308

હ્રદયસ્પર્શી વાર્તા

https://www.facebook.com/share/p/1AmSsqtUyz/

ronakjoshi2191

My Tamil novel "நிழல் தரும் வசந்தம் "part 9 is going to be published@7pm.17/4/26 tommorow.

kattupayas.101947

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947

hasthar aayega.. and the cry continues

kattupayas.101947

Greediness is always dangerous. this movie is most memorable one

kattupayas.101947

water 💧 in many forms we tasted and wasted now only available in canes

kattupayas.101947

Now everything is changed. but the love and affection given by small vendors always remember my childhood is awesome. it's only 50p

kattupayas.101947

The bell sound and the pink cotton candy awesome

kattupayas.101947

Thankyou icecreamwala uncle for everything

kattupayas.101947

तू हमें क्या सिखायेगा इश्क़ करने का सलीका मोहन..
हम तो उस पर फ़िदा रहे जो कभी हमारा था ही नहीं..

momosh99

आज मैने अपनी "पूर्व प्रेमिका" को देखा....
साथ में उसके पति को देखा....
मैने उसकी लाल साड़ी देखी....उसके पति की लंबी गाड़ी देखी...साथ में उसके एक बच्चे को देखा.... पापा से पिज्जा की करते जिद्द को देखा,,,,,,

फिर उसने मुझको देखा मैने देखी उसकी आँखें..... आंखों में उसकी डर को देखा खुशी में ग्रहण न लगा दे उस भय को देखा....अब मैने मोबाइल में मैसेज नोटिफिकेशन को देखा मम्मी द्वारा भेजी राशन की लिस्ट को देखा....मैने देखा अपना बटुआ उसमें पड़े 1740 रुपयों को देखा....आधा सामान ले जाकर देख खुद को आईने में.........
*सोचा देख लेता हूं उन किताबों को जिन्हें नहीं देखा है 6 महीनों से........*

*सच कहा है जीवन मे सफल होना है तो पढ़ना होगा ही,फिर आपको वो सब कुछ मिल सकता है जो आप हासिल करना चाहते है।*

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writer bhagwat singhnaruka ✍️🙏

mystory021699

*सुनों साथी*

मन अब प्रेम से ज्यादा
*नौकरी के लिए चिंतित है..!!*

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writer bhagwat singhnaruka ✍️

mystory021699

ગુજરાતી વાચકો માંથી ભાગ્ય જ કોઈ એવા જે ચંદ્રકાંત બક્ષી સાહેબ ને ન ઓળખતા હોય..
બક્ષી. સાહેબ.ની મેં મોટાભાગની
નિબંધ લેખન બુકો ગણી બધી વાંચી છે...
કટ્ટર લેખક અલગ અલગ વિષયો ઘણું બધું લખ્યું છે..
ઈગો .. આ બુક અલગ અલગ બુકો માંથી
લેવાયેલ બ્લોગ ટાઇપની ફોટો બુક છે..
તમારી પાસે સમય ન હોય તો ટૂંક સમયમાં વેચાય તેવી...

બધું પસાર થઈ જાય છે જીવનમાંથી.
સંબંધો સળગી જાય છે ચિતાઓ પર.
ધુમાડો રહી જાય છે.
પછી વાસ રહી જાય છે.
પછી વાસ પણ ચાલી જાય છે.
પછી સ્મૃતિ રહી જાય છે, પછી
સ્મૃતિઓ પણ ઓગળતી જાય છે.
યાદદાશ્તની એકાદ મૌસમ આવે છે,
એકાદ સ્મૃતિ ભડકીને બુઝાઈ જાય છે –
એમાં તણખલા, આગ, ગરમાહટ કંઈ જ હોતું નથી.
વરસાદ પછી રડતા એકાદ
ખૂબસૂરત શહેરની શૂન્યતા હોય છે એમાં-

-ઈગો
-ચંદ્રકાંત બક્ષી

chiragvora055249

कहते लोग के मौत के आने से
में मर जाऊँगा
में तो उसिके नूर से आया हू फिर से
उसीमे मिल जाऊँगा

amiralidaredia175421

જય શ્રી રાધેકૃષ્ણ 🙏🏻

falgunidostgmailcom

લોક રચના

વિખરાતા વાણાંમાં નીજ ફેકાણા,
અંતરની એરણે હથોડે ટીપાણા.

જોબન જુવે નહીં કોઈ,જરાના વાયે વેરાણા.
પહોંચવા મુકામ લગી,ચોમેર તેજ રસે રેલાણા.

એજ બની ફેરિયા ના સાદે, સુવાસ બની વહેચાણા.
સફાઈ વાળાના વેશમાં ઘંટ નાદે સંભળાણા.

માગણ ના વેશ માં ઘર ઘર એ જ મંગાણા,
ભંગાર બની ને અસ્તિત્વના ભંગારે ભંગાણા.

પશુ પક્ષી ને જીવ જત સ્વ બની ને પોષાણા.
મનરવ ની મહેકતી દુનિયા માં શબ્દ બની શોષાણા.

મનજીભાઈ કાળુભાઇ મનરવ

manjibhaibavaliya.230977

નિમિત ઓઝ એક એવા લેખક ટૂંકું અને ❤️‍🩹 આરપાર સીધું ઊતરી આવે...
આપણે એવા ઘણા સબંધો માંથી આગળ નીકળવા ઈચ્છીએ છીએ જે આપણ ને પીડા આપતા હોય...
તેમ ઇચ્છતા હોવા છતાં આપણને
તે સબંધ છોડી નથી શકતા ... કારણકે તે
વ્યક્તિ વિશે આપણી અપેક્ષાઓ હોય જે છૂટતી નથી..
તેવા સબંધો ને છોડીને આગળ વધવા આ બુક ખૂબ ઉપયોગી છે..
તેમ છતાં બીજી પણ જીવન ઉપયોગી વાતો છે..
મેં નિમિત્ત ઓઝાની શરૂવાતમાં એક બુક વાંચી હતી ..
સરસ લેખક લગ્યા તો તેની જ 8 ઉપર બુક વાંચી..
1) પ્રિય સેલ્ફી
2) મનના મોનોલોગ
3) અજવાળાનો ઓટોગ્રાફ
4) શ્વાસની સેરેન્ડિપિટી
5) માટીનો માણસ
6) એને મૃત્યુ ન કહો
7) રેસ્ક્યુ બુક
8) રીહેબ બુક... બધી ખૂબ સરસ છે...

chiragvora055249

महिला सशक्तिकरण के नाम पर क्या गलत हो रहा है?
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(1) भारत सरकार ने 2017 में गेजेट में छापा कि - यदि कोई व्यक्ति 20 कर्मचारियों से अधिक की कम्पनी चला रहा है और यदि उसकी महिला कर्मचारी गर्भ धारण कर लेती है. तो कम्पनी का मालिक अमुक महिला को 6 महीने की छुट्टी देगा और इन 6 महीनो के दौरान उसे पूरा वेतन भी देगा !!
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इस क़ानून के 2 उद्देश्य थे :
छोटी इकाइयों के प्रोडक्ट की लागत एवं उनके झमेले बढ़ाना
देश की प्रोडक्टिव युवतियों के अवसरों को कम करना
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बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको ने यह क़ानून छापने के लिए लॉबीइंग की थी। 50 से 500 स्टाफ की छोटी इकाइयां सीमित बजट में काम करती है, और यदि उन पर 1-2 एम्प्लोयी को मुफ्त में सेलेरी देना पड़ जाए तो उनकी लागत बढ़ जाती है। किन्तु बड़ी एवं विशालकाय कम्पनियां इस भार को आसानी से उठा सकती है।
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नतीजा :
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छोटी स्टार्ट अप इकाइयों ने ऐसी महिलाओं को किसी न किसी बहाने से नौकरी से निकालना शुरू किया जिनके बारे में सम्भावना थी कि वे गर्भ धारण कर सकती है। मैं किसी भी संस्था द्वारा किये गए सर्वे वगेरह में नहीं मानता हूँ, क्योंकि ज्यादातर सर्वे फर्जी होते है, और सर्वे में उन्ही नतीजो को दिखाया जाता है, जो नतीजा दिखाने के लिए सर्वे के स्पोंसर ने भुगतान किया है।
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किन्तु मेरी स्वयं की जानकारी में ऐसे 7-8 मामले है जिनमे मालिक ने महिला एम्प्लोयी को नौकरी से निकाल दिया था। और सर्वे वालो की माने तो 2 साल में लगभग 6-7 लाख महिलाएं इस क़ानून की चपेट में अपना जॉब गँवा चुकी है। और ऐसी कितनी ही महिलाएं है जिन्हें यह पता नहीं है कि उन्हें इस नए क़ानून वजह से रिजेक्ट किया जा रहा है !!
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कुछ स्टार्ट अप्स ने काबिल महिलाओं से कांट्रेक्ट साइन कराने शुरू किये कि वे अमुक अमुक अवधि तक गर्भ धारण नहीं करेगी। और इस तरह उन्हें स्थायी नौकरी की जगह कांट्रेक्ट पर काम करना पड़ा।
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उल्लेखनीय है कि अमेरिका में प्रसव कालीन अवकाश के एवज में नियोक्ता पर एक रूपये का भी अतिरिक्त भार नहीं डाला जाता है, और नियोक्ता उसे अन पेड लीव देता है। प्रसव के बाद महिला फिर से नौकरी पर आना शुरू कर सकती है। और इस वजह से न तो छोटी इकाइयों के मालिक महिलाओ को नौकरी देने से कतराते है, न ही महिलाओं को नौकरी गंवानी पड़ती है !!
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आप इस उदाहरण को अपने ऊपर लागू करके देख सकते है कि, यदि आप एक 50 एम्प्लोयी की इकाई खोलते है, जिसमें 8 से 10 महिलाएं है और इनमें से सभी 22 वर्ष से 32 वर्ष के बीच की आयु की है, तो क्या आप इन्हें नौकरी पर रखने का जोखिम उठाएंगे ? मेरे विचार में आप यह जोखिम उठाने से बचेंगे।
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तो महिला सशक्तिकरण के नाम पर क्या गलत हो रहा है ?
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इस क़ानून को महिला सशक्तिकरण का टैग लगाकर लागू किया गया, और महिला अधिकारों पर लिखने वाले पेड विशेषज्ञों और फुरसतियों ने इसके पक्ष में मुहीम चलायी !! इन महिला अधिकार कार्यकर्ताओ की तरफ से इस क़ानून के कारण नुकसान उठा रहे कारखाना मालिक और युवा महिलाएं चाहे तो भाड़ में जा सकते है !!
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इसके अलावा पेड मीडिया ने दंगल जैसी गलीज़ फिल्म को महिला सशक्तिकरण से जोड़ा और सरकार ने इस फिल्म का प्रमोशन किया !!
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मतलब सरकार की महिला सशक्तिकरण की नीति है कि महिलाओं को स्टार्ट अप्स, कारखानों, कम्पनियों में काम करने की स्किल जुटाने की जगह पर पहलवानी करनी चाहिए !! और महिला अधिकार कार्यकताओ ने इस फिल्म को प्रोत्साहित करने में भी कोई कसर नहीं रखी !! यह सामान्य समझ की बात है कि यदि 500 लड़कियां पहलवानी करेगी तो उनमे से सिर्फ 1–2 को ही रोजगार मिल सकता है, और शेष को कोई रोजगार नहीं मिलने वाला है। और ज्यादातर सम्भावना है कि स्टेराइड वगेरह लेने की वजह से उनका शरीर भी ख़राब हो जाए।
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समाधान ?
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मेरे प्रस्ताव इस तरह है :
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काम काजी महिला यदि आयकर दाता है तो प्रसव कालीन स्थिति में सरकार उसे वेतन के बराबर की राशि की आयकर में छूट देगी। इस छूट को उसके एवं उसके पति के आयकर में तब तक समायोजित किया जाएगा, जब तक उसके 6 महीने के वेतन के बराबर राशि समायोजित न हो जाए।
नियोक्ता पर कोई भार नहीं होगा। महिला प्रसव के बाद जब फिर से ज्वाइन करती है तो उसके सेवा वरिष्ठता के लाभों में नियोक्ता कटौती नहीं कर सकेगा।
यदि काम काजी महिला आयकर दाता नहीं है तो सरकार उसे 6 माह तक X रूपये माँहवार देगी।
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(2)
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2011 में सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने यह रूलिंग छापी कि -

बलात्कार के मामले में पीड़ित लड़की का बयान हर हाल में सच माना जाएगा, और आरोपी को सजा देने के लिए पीड़ित लड़की के बयान को पर्याप्त सबूत माना जाएगा !!
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हाँ आपने सही पढ़ा है !! इसे फिर पढ़िए -
बलात्कार के मामले में पीड़ित लड़की का बयान हर हाल में सच माना जाएगा, और आरोपी को सजा देने के लिए पीड़ित लड़की के बयान को पर्याप्त सबूत माना जाएगा !!

Rape victim's testimony sufficient for conviction: SC
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यह पंक्ति बॉलीवुड के किसी स्क्रिप्ट रायटर की नहीं है, यह रूलिंग सुप्रीम कोर्ट के जजों ने दी थी।
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आपने नोटिस किया होगा कि पिछले कुछ वर्षो से अचानक यौन शोषण / बलात्कार के मामलों के दर्ज होने और इसके मीडिया में आने की संख्या में इजाफा हो गया है। इसकी असली वजह यह रूलिंग थी। इस रूलिंग ने महिलाओ / युवतियों को यह मौका दिया कि वे अपने बॉस, मैनेजर, वरिष्ठ सहकर्मियों, मालिक, नियोक्ता या किसी बड़े आदमी को अदालत में घसीट सके।
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कुछ अवसरवादी महिलाओं ने इसका इस्तेमाल पुरुष साथियों को ब्लेकमेल करने में किया और पेड मीडिया द्वारा इन्हें जमकर कवरेज दिया जाने लगा। नतीजा, नियोक्ताओ को लगने लगा कि महिलाओं के साथ एक निश्चित दूरी बनाकर रखना जरुरी है, और उन्होंने भीतरी दायरे में महिलाओं को नियुक्तियां देना बंद कर दिया !!
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नियोक्ताओ ने उन महिलाओं को भी निकालना शुरू किया जहाँ कई पुरुषो के बीच काफी कम महिलाएं काम कर रही है। उन्हें लगा कि यदि मेरा कोई पुरुष कर्मचारी महिला के साथ कोई गड़बड़ कर देता है तो मामला मीडिया में रिपोर्ट हो गया तो मैं झमेले में आ जाऊँगा।
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बाद में नेताओं ने अपने प्रतिद्वंदियों को भी फंसाने के लिए इस क़ानून का इस्तेमाल करना शुरू किया, और हिन्दू धर्म के सभी संतो को महिला अपराधो के आरोप में जेल में डालने के लिए इसी रूलिंग का इस्तेमाल किया गया।
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अब भारत में जिस तरह का पुलिस सिस्टम एवं अदालतें है उस हिसाब से आप साफ़ तौर पर देख सकते है कि इस रूलिंग का इस्तेमाल करके कोई भी अपेक्षाकृत छोटा आदमी किसी बड़े एवं बहुत ताकतवर आदमी को फंसा नहीं पायेगा, किन्तु बहुत बड़ा आदमी किसी लड़की का इस्तेमाल करके अपने से कमतर प्रतिद्वंदी को आसानी से गिरा देगा।
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उदाहरण के लिए एक मंत्री किसी भी कारखाना मालिक या विधायक आदि को गिरा सकता है, किन्तु ये लोग मंत्री को नहीं फंसा पायेंगे। और सामान्य मामलो में हर बार वो आदमी फंस जायेगा जिसके पास ज्यादा पैसा है। मलतब वह सेटलमेंट करके मुकदमे से तो बच जाएगा किन्तु बदले में पुलिस, नेता एवं जज उससे अच्छा ख़ासा पैसा खींच लेंगे। भ्रष्ट जजों और भ्रष्ट नेताओं ने इस रूलिंग का इस्तेमाल करके अपने काफी प्रतिद्वंदियों को यौन शोषण के मामलों में फंसाया और उनसे पैसा खींचा !!
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नतीजा यह हुआ कि महिलाओं के क्लोज़ सर्किल में एपोइंट होने के अवसर सिकुड़ गए। पिछले 3 साल में मेरे खुद के सामने ऐसे दर्जन भर वाकये गुजर चुके है जब महिलाओं को इस वजह से नौकरियां गंवानी पड़ी है। और विडम्बना यह है कि उन महिलाओं / लडकियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस रूलिंग की वजह से वे नौकरियां गँवा रही है !! ऐसे सैंकड़ो वाकिये है जब महिलाओं ने समृद्ध पुरुषो / नियोक्ताओ को इस रूलिंग का सहार लेकर धमकाया और उनसे पैसा वसूल किया। और इन 0.1% मामलों को पेड मीडिया द्वारा इस तरह कवरेज दिया गया कि शरीफ लोग महिलाओं को नियुक्तियां देने से कतराने लगे !!
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तो महिला सशक्तिकरण के नाम पर क्या गलत हो रहा है ?
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भ्रष्ट जजों की इस रूलिंग को महिला अधिकार कार्यकर्ताओ और पेड विशेषज्ञों ने महिला सुरक्षा से जोड़ा और इसे महिला सशक्तिकरण की तरह प्रचारित किया !!
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समाधान ?
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यदि महिलाओ की सुरक्षा का लिए प्रावधान नहीं बनाए गए तो पुरुषो द्वारा उनके शोषण के मामलों में वृद्धि हो सकती है, और यदि महिलाओं को गलत रूप से अतिरिक्त फायदे दिए गए तो कुछ 0.1% महिलाएं इसका बेजा फायदा उठाएगी और शेष महिलाएं आइसोलेट होने लगेगी। इस स्थिति से निपटने के लिए हमें संतुलन बनाने की जरूरत है। और जूरी कोर्ट के अलावा मैं इस संतुलन का कोई मार्ग नहीं देखता !!
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मेरा प्रस्ताव है कि —
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महिलाओं से सम्बंधित सभी प्रकार के अपराधो की सुनवाई करके का अधिकार महिलाओं की जूरी को दिया जाए। इस जूरी में सिर्फ महिलाएं होंगी।
महिलाओं का चयन मतदाता सूची से किया जायगा और उनका आयु वर्ग 25 वर्ष से 55 वर्ष होगा।
जूरी मंडल में 12 महिलाएं होंगी, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जायेगी।
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(3)
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दहेज़ वाला क़ानून : दहेज़ वाले क़ानून की वजह से भी काफी गदर मची हुयी है। इस क़ानून को खतरनाक बनाने के लिए इसमें यह प्रावधान जोड़ा गया था कि, लड़की के बयान में लड़की जितने भी सदस्यों के नाम लिखवा देती है, पुलिस को एक बार उन सभी को अरेस्ट करना पड़ता है, और बाद में जमानत शेषन कोर्ट एवं कुछ मामलो में हाई कोर्ट से होती है।
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तो लड़की परिवार के सभी सदस्यों के नाम लिखवा देती थी, और पुलिस परिवार से हफ्ता वसूलने पहुँच जाती है। आज की तारीख में दहेज का क़ानून सबसे ज्यादा कमाई का क़ानून बन गया है, और महानगरो में दहेज़ के मामलो से एक Dysp सर्किल साल के 2 से 5 करोड़ बना लेते है। बाद में यह पैसा जजों समेत उच्च अधिकारियों तक बंट जाता है। यह क़ानून काफी पुराना है (शायद 1985 के आस पास का ) किन्तु बाद में वे इसे धीरे धीरे कठोर बनाते गए।
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इस क़ानून को भी महिला सशक्तिकरण से जोड़ा जाता है !!
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इस क़ानून की वजह से महिलाओ को फर्स्ट राउंड में फायदा होता है किन्तु सेकेण्ड राउंड में बेहद नुकसान होता है। एक बार मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला अदालत में जाकर फंस जाता है, और सालों तक महिला का भविष्य अधर में लटका रहता है।
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लाखों परिवारों को लूटने के बाद जब यह बात नागरिको की कॉमन नोलेज में आ गयी कि यह क़ानून लोगो की जिंदगियां बर्बाद कर रहा है तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने इस समस्या का समाधान करने का ड्रामा किया। उन्होंने इस आशय की रूलिंग छापी जिसमे — जमानत देने का जिम्मा स्थानीय जज को दे दिया और गिरफ्तारी होगी या नहीं यह फैसला करने के लिए प्रत्येक जिले में एक 5 सदस्यीय कमेटी बनाने की अनुशंषा की।
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इस कमेटी में एक रिटायर्ड जज भी होता है और जज द्वारा नियुक्त कुछ उनके आदमी होते है। इस रूलिंग के आने के बाद अभी दहेज़ के छोटे मोटे मामलो में तत्काल गिरफ़्तारी एवं जमानत को लेकर राहत मिली है, किन्तु बड़े मामलों में कमेटी के लोग गिरफ़्तारी ना होने देने के एवज में पैसा खींच रहे है।
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छोटे मोटे मामलो में भी राहत थोड़े समय के लिए है, और किसी भी समय वे फिर गदर मचाना शुरू कर देंगे। क्योंकि उन्होंने इसका स्विच अपने हाथ में रखा हुआ है।
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यह क़ानून युवतियों / युवको / तलाक शुदाओ / अदालत में फंसे दम्पत्तियों को लिव इन रिलेशन शिप की और धकेल रहा था। किन्तु लिव इन का क़ानून न होने की वजह से समस्या हो रही थी।
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तो अभी पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने बिना शादी के लिव-इन में रहने को कानूनी बनाने के लिए रूलिंग छापी जो कहती है कि -
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1. Two adults have the right to live together even if they have not attained marriageable age.
2. A domestic cohabitation between an adult unmarried male and an adult unmarried female.
3. A domestic cohabitation between a married man and an adult unmarried woman (entered mutually).
4. A domestic cohabitation between an adult unmarried man and a married woman (entered mutually).
5. Partners living together for a long time may have kids together.
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1. दो वयस्कों को एक साथ रहने का अधिकार है, भले ही उन्होंने विवाह योग्य आयु प्राप्त नहीं की हो।
2. एक वयस्क अविवाहित पुरुष और एक वयस्क अविवाहित महिला के बीच एक घरेलू सहवास वैध होगा।
3. एक विवाहित पुरुष और एक वयस्क अविवाहित महिला ( आपसी सहमती के साथ ) के बीच एक घरेलू सहवास वैध है।
4. एक वयस्क अविवाहित पुरुष और एक विवाहित महिला के बीच एक घरेलू सहवास जायज होगा (आपसी सहमती )।
5. लंबे समय तक साथ रहने वाले पार्टनर संतानोत्पत्ति भी कर सकते हैं।

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दहेज़ के क़ानून की वजह से शादी करने में जोखिम बढ़ गया है। अत: युवक अब लिव-इन को तरजीह देने लगे है !! साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ़ कर दिया है कि यदि लिव इन में रहते हुए संतान हो जाती है तो यह मान्य होगी !! तो अभी कुछ सालो बाद आपको इन सब गेजेट नोटिफिकेशन के साइड इफेक्ट देखने को मिलेंगे।
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और तब तक आपका ध्यान इन कानूनो से हटाने के लिए पेड विशेषग्य अपने अखबारों में महिला सशक्तिकरण के बारे में लिखते रहेंगे और "जागरूक नागरिक" अन्य लोगो को जागरूक करने लिए उन्हें बताते रहेंगे कि देखो भारत की संस्कृति को क्या हो गया है, और हम कहाँ जा रहे, च्च च्च !! और इसी टाइप की ज्ञान और उपदेश की बातें !! उनके हिसाब से च्च च्च करना, लानत भेजना और उपदेश करना ही समाधान है !! मेरे हिसाब से से समाधान से ध्यान हटाने का नुस्खा है, ताकि समस्या पनपती रहे !!
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समाधान ?
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दहेज़ और घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई महिलाओं की जूरी द्वारा की जाए। दहेज़-घरेलू हिंसा की शिकायत आने पर जूरी का गठन होगा रोजाना सुनवाई के कारण हफ्ते दो हफ्ते में फैसला आ जाएगा। जूरी कोर्ट के आने से अगले 6 महीने में भारत की अदालतों में लंबित सभी दहेज़ के मुकदमो का निस्तारण हो जाएगा। ( जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट जूरी मंच में देखें। )
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अब यदि आपको Hypocrisy at its Best देखनी हो तो किस भी नारी वादी विशेषग्य से पूछ सकते है कि, क्या महिला सम्बन्धी अपराध की सुनवाई करने का अधिकार महिलाओं की जूरी को दिया जाना चाहिए ?
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वे आपको एक बहुत ही फैला हुआ किन्तु परन्तु से युक्त बौद्धिक जवाब देंगे, लकिन इसका निचोड़ यही होगा कि -- नहीं !! नहीं !! नहीं !! महिलाओं के खिलाफ मुकदमो की सुनवाई का अधिकार महिलाओं की जूरी को नहीं दिया जाना चाहिए !!
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और यही जवाब आपको दहेज़ वाले क़ानून पर भी मिलेगा। उनका हमेशा से यही स्टेंड रहता है, कि दहेज़ के मामलो की सुनवाई का अधिकार महिलाओं की जूरी को नहीं दिया जाना चाहिए।
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जहाँ तक महिला आयोग की बात है, मेरा स्टेंड है कि महिला आयोग का महिला सशक्तिकरण से कोई लेना देना ही नही है। असल में बहुधा नारीवादी संगठन संवेदनाएं बेचने के कारोबार में है और जिस नीति पर काम कर रहे है वह नीति महिलाओं को सशक्त होने से रोकने का काम करती है। इनकी नीति महिलाओं को उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाने की जगह उन्हें अनुत्पादक बनाती है।
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sonukumai

Do You Know that in everything that we give opinions, duality is created and from this duality the mind is created? So when opinions come to an end, the mind too will come to an end.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/onXbHIoD

#lifelessons #lifelearning #facts #doyouknow #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

।। …सूखे की देह में बचा हुआ मनुष्य… ।।

तुम
जब भी आते हो—
अपने साथ महुआ नहीं,
सूखे की एक लंबी दरार ले आते हो।

तुम्हारी हथेलियों पर
इमली नहीं होती अब,
बस उसकी खटास बची होती है—
जैसे जीवन
धीरे-धीरे अपने ही स्वाद से कटता जा रहा हो।

तुम कहते हो—
मराठवाड़ा में इस बार
बारिश आई थी थोड़ी-सी…
पर उस “थोड़ी-सी” में ही
पूरा एक अधूरा सावन छिपा होता है।

यहाँ
धरती खेत नहीं रही,
एक फटी हुई हथेली है—
जिसमें बीज नहीं,
बस इंतज़ार बोया जाता है हर साल।

कपास के फूल
अब सफ़ेद नहीं लगते,
वे किसी अधूरी चिट्ठी जैसे हैं—
जिसे किसान
हर मौसम में लिखता है
और हर बार
बिना जवाब के जला देता है।

तुम
जब ज्वार की बात करते हो,
तो लगता है—
हर दाने में
एक सूखी नदी की दरार है।

और उन दरारों के किनारे
बैठे हैं लोग—
जिन्होंने पानी से ज़्यादा
कर्ज़ का स्वाद चखा है।

फिर भी—
पोला आता है
तो बैल सजते हैं,
दीवाली आती है
तो मिट्टी के घरों में दीये जलते हैं।

जैसे
जीवन हार मानना नहीं जानता,
चाहे भीतर कितना भी सूखा क्यों न हो।

पर उसी रोशनी के पीछे
एक लंबी अँधेरी रात है—
जहाँ कई नाम
सुबह तक
ख़ामोश हो जाते हैं।

तुम कहते नहीं—
पर मैं जानती हूँ
कि अब
रस्सी और कीटनाशक
सिर्फ चीज़ें नहीं रहीं,
वे धीरे-धीरे
निर्णय बनती जा रही हैं।

और फिर
घोषित कर दी जाती है
“सामान्यता”—

जैसे
सब कुछ ठीक है,
जैसे
मरना भी
अब इस मिट्टी की आदत हो।

तुम लौटते हो—
खाली हाथ,
थकी हुई देह,
और आँखों में
उबलता हुआ पानी
जो बरस नहीं पाता।

तुम रोते नहीं—
क्योंकि यहाँ
आँसू भी
संभालकर रखने पड़ते हैं
अगले सूखे के लिए।

मैं तुम्हें रोकती नहीं—
बस इतना कहती हूँ—

उस सूखी धरती से कहना,
मैंने तुम्हें निहत्था भेजा है।

क्योंकि
यहाँ
हथियार सिर्फ बंदूक नहीं होते—

कभी-कभी
सूखा,
कर्ज़
और चुप्पी—
मिलकर
मनुष्य को
सबसे ख़तरनाक हथियार बना देते हैं।

anupgajare819691

☘️भरली कारली

कारली आमच्या घरातला अगदी आवडत पदार्थ ..
मी थोडीशी अपवाद आहे त्याला .. 😀
ही भरली कारली मात्र अतिशय हीट आहेत

☘️साहित्य
चार पांढरी कारली (हिरवी शक्यतो नको )
ओले खोबरे . दाण्याचे कूट ,काळा मसाला ,गूळ ,थोडा लिंबू रस
☘️कृती
कारली बुडखा व देठ काढून त्यावर चाकूने एक खोल चीर
करून घ्यावी जेणे करून कारले उघडले जाईल .
चमच्याने आतील सर्व बिया व गर काढून टाकणे .
आता या बिया व गर काढलेल्या संपूर्ण खोल भागात
एका कारल्यात दोन मध्यम चमचे अशा अंदाजाने
मीठ पसरून भरून घेणे .

☘️ही सर्व कारली एका ताटलीत ठेवून त्यावर काही जड वजन ठेवणे जेणे करून कारली थोडी चपटी होतील
व आतील कडवटपणा बाहेर पडण्यास मदत होईल .
(माझ्याकडे एक बत्ता आहे तो मी वापरते )

☘️रात्री कारल्यात मीठ भरून सकाळपर्यंत ठेवायचे आहे
आता आत भरायचे सारण पण चार पांच प्रकारचे करता येते
फक्त एकच लक्षात ठेवायचे कारल्यात मीठ भरले असल्याने
जरी कारली नंतर धुवून घेतली तरी मिठाचा अंश राहातोच .
त्यामुळे सारणात मीठ बेताने घालणे

1)..बारीक कांदा ,ओले खोबरे , कांदा लसूण चटणी

2).. ओले खोबरे . दाण्याचे कूट ,काळा मसाला ,गूळ ,थोडा लिंबू रस

3)..बारीक चिरलेला कांदा परतून घेणे ,कांदा मऊ झाला की
त्यावर बारीक चिरलेला टोमॅटो घालणे . त्यानंतर गरम मसाला तिखट घालणे

4)..बारीक कांदा ,उकडलेला बटाटा ,आले लसूण

5) ..किसलेले पनीर, बारीक कांदा,बारीक मिरची ,कोथिंबीर

अथवा इतर कोणतेही तुमच्या आवडीचे सारण ..

☘️सकाळी ही कारली काढून आतील मीठ धुवून घेणे .
या कारल्या मध्ये सारण गच्च भरून वरुन ही कारली दोऱ्याने गुंडाळून घ्यावीत .

☘️कुकरच्या भांड्यात पाणी न घालता कोरडीच वाफवून घेणे
एक शिट्टी पुरेशी आहे
फार शिजवायची नाहीत .

☘️कारली थंड झाली की एका पॅन मध्ये तेल घालून सोनेरी
रंगावर शालो फ्राय करून घेणे
खायला घेताना दोरा काढून तुकडे करून घेणे

jayvrishaligmailcom