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હું, તું અને આપણી વાતો!

kaushikdave4631

भीड को कुछ अपनों कि
मेरी दुनियाँ मैं समझ रहा था
मैं भी कितना नादान था यारों
हसीन धोखा खुदको दे रहा था

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

रम गया मन मेरा भक्ति में
ना रहा यकीन अब किसी शक्ति में
मेरे महादेव बस तुम्ही हो मन में
आस तुम्ही, विश्वास तुम्ही
है समर्पित भाव मेरे, हो आराध्य तुम्ही
टूटने ना देना प्रभु आए भले ही दुःख कितने सही
मेरी किस्मत तुम्हारे हाथ, मेरे खेवैया तुम्ही
इतनी तो कृपा करना भगवान
हर सांस गाए नाम तेरा, हो मंजिल तुम्ही
माता तुम्ही, हो पिता तुम्ही
भ्राता तुम्ही, हो सखा तुम्ही
बनी रहे कृपा आपकी
घड़ी ना आये कोई अब संताप की
पकड़ लो हाथ मेरा, अरदास यही
मेरे महादेव आस तुम्ही, विश्वास तुम्ही
अपनों ने बहुत रुलाया है
बस तुमने मुझे अपनाया है
टूट गई मैं बिखर गई मैं,
अब ना लो और परीक्षा मेरी
अब शरण तुम्हारी हूँ
जीत मेरी लिख दो तुम
दुनिया से मैं हारी हूँ
मेरे महादेव आस तुम्ही, विश्वास तुम्ही
Vandna
-dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

लड़खड़ाते कम और दिल की जुबां.....

abhi006

एक वाक्य बस _ ( मॉं )

abhi006

**ગીત : “મનની વાત”**

તારા મનની વાત કહી દિયા કર મને,
હું તને કમજોર નહીં, મજબૂત પણ નહીં કહું…
તારી આંખોમાં જે ચુપચાપ વરસે છે ને,
એ વરસાદને બસ શાંતિથી સાંભળું…

તારી વાતોને હું સંગીત નહીં કહું,
ને નહીં કોઈ શોરનો નામ આપું…
તું જેવું દિલથી બોલી જાય એક વાર,
હું એ દરેક શબ્દને દિલમાં રાખું…

આ દુનિયામાં તું આડશુ બનીને ફરજે,
લોકો સામે પથ્થર જેવો દેખાતો રહેજે…
પણ મારી સામે બસ બાળક બની જાજે,
હસજે, રડજે, ને નિખાલસ રહી જાજે…

ક્યારેક ખામોશી પણ થાકી જાય છે,
દિલ અંદરથી ધીમે ધીમે તૂટી જાય છે…
એ પહેલા તું મારી પાસે આવી જાજે,
તારા મનનો ભાર થોડો વહેંચી જાજે…

હું ઉપદેશ નહીં આપું તને,
ને નહીં તારાં દુઃખનું કારણ પૂછું…
બસ તું એકવાર દિલ ખોલીને બોલજે,
હું તારી ખામોશીને પણ સમજું…

તારા મનની વાત કહી દેજે મને…
બાકી દુનિયાને જે સમજવું હોય સમજવા દેજે…
તું બસ મારી સામે પોતે બનીને રહેજે…
મને એટલું જ પૂરતું છે…

હીના ગોપીયાણી

heenagopiyani.493689

मैं ऐसी क्यूँ हूँ
मैं ऐसी क्यूँ हूँ
नहीं पसंद है मॉल मुझे
ना ही ऊँची इमारतें
मुझे पसंद है खुला सा आसमां
फूलों की बगिया, चाँद और तारे
हो नदिया का किनारा,
जहाँ झूमे मन आवारा
मैं ऐसी क्यूँ हूँ,
मैं ऐसी क्यूँ हूं
भीड़ से मुझको डर लगता
अकेलापन अच्छा लगता
कभी चहकती चिड़िया सी
कभी शांत जल नदिया का
ना सजना पसंद ना सँवरना पसंद
मुझे मेरे ख्वाबों में बिखरना पसंद
जैसी भी हूँ, खास हूँ
लाजवाब हूँ, अलग हूँ सबसे
सब मेरे अपने हैं और
मैं तन्हा हूँ अपनों में सबसे
किसी का दुःख भी बहुत रुलाए
कोई मीठी याद भी बहुत हँसाए
खोई रहती हूँ यादों में
सुहाने सपने बुनती हूँ
मैं अलग मेरी दुनिया अलग
क्यूँ ऐसा क्यूँ
मैं ऐसी क्यूँ हूँ
कोई तो बताए, मुझको समझाए
मैं ऐसी क्यूँ हूँ
-dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️
कविता का शीर्षक है 🌹अधुरी चाहते

mamtagirishtrivedi740648

क्या आप जानते हैं कि चिलचिलाती धूप में बूंद-बूंद पानी के लिए तड़पते बेजुबानों को अनदेखा करना हमारी इंसानियत पर कितना बड़ा सवाल है? हमारे वेदों के परम ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ सिद्धांत और गरुड़ व स्कंद पुराण के उन पवित्र सत्यों को उजागर करता यह लेख, सीधे आपकी चेतना को झकझोर देगा कि क्यों हमारे पूर्वजों ने ‘भूत यज्ञ’ को हर गृहस्थ के लिए एक अनिवार्य कर्तव्य बनाया था। यह सिर्फ एक लेख नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में दम तोड़ते मूक प्राणियों की मर्मस्पर्शी पुकार और साक्षात ईश्वर की सेवा का वह दिव्य मार्ग है जिससे हर मनुष्य को जुड़ना चाहिए। चिलचिलाती धूप के इस दौर में आपका एक छोटा सा संवेदनशील प्रयास कैसे किसी बेजुबान के लिए जीवनदान और आपके जीवन के लिए अक्षय पुण्य का वरदान बन सकता है, यह जानने के लिए इस विशेष प्रस्तुति को पूरा पढ़ें और बेजुबानों के मददगार बनें।

https://www.matrubharti.com/book/19992956/n-a

nityaoswal430745

#ચિંતનાત્મક લેખ....
શું આપણે ખરેખર આપણું જીવન જીવી રહ્યા છીએ કે પછી માત્ર એક અભિનય કરી રહ્યા છીએ? સમાજ વચ્ચે પહેરાતા 'મુખોટા'ની પાછળ છુપાયેલી એક કડવી વાસ્તવિકતા. એકવાર જરૂર વાંચજો અને તમારા વિચારો કમેન્ટમાં જણાવજો.

મુખોટા પાછળનો ચહેરો: આપણે સતત અભિનય કેમ કરવો પડે છે?", ને માતૃભારતી પર વાંચો :,

https://www.matrubharti.com

વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!

missschhotti

જીવનનો આધાર પરિવાર...
જીવવાનું કારણ પરિવાર...
ફરજ કે જવાબદારી નહીં,
લાગણીનું બંધન છે પરિવાર...
શ્વાસમાં લેવાતો ઑક્સિજન,
લાગે ઝેર સમાન વિના પરિવાર...
હ્રદયનાં સંભળાતા ધબકારા,
બની રહે માત્ર અવાજ વિના પરિવાર...
આંખોમાં ઉમટી રહેલ હેત,
જોવા માંગે સદાય ખુશ પરિવાર...
કામથી થાક્યા શરીરને દોરી જતાં પગ,
અટકે ત્યાં જ હોય જ્યાં પરિવાર...
થતાં રહે છે નાનાં મોટાં મનદુઃખ,
ક્યારેય ન છોડીએ પરિવાર...
'આંતરરાષ્ટ્રીય પરિવાર દિવસ'ની
શુભેચ્છાઓ💐

s13jyahoo.co.uk3258

आज अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस है।
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस प्रतिवर्ष 15 मई को मनाया जाता है ताकि समाज की मूलभूत इकाई के रूप में परिवारों के महत्व को उजागर किया जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1993 में की गई थी और इसे पहली बार 1994 में मनाया गया था।

सभी को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🙏💐💐💐💐

परिवार /कुटुंब
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जी तो लेते हैं सभी यहाँ पर अकेले
पर बिना परिवार के नहीं यह मेले ।

माँ की गोद में बीतता है बचपन सभी का
परिवार के संग ही बच्चे सब हैं खेले ।

कैसे भुला दें बचपन की वो सारी यादें हमारी
माँ -पिता ने बच्चों की खातिर दुख सहे अकेले।

परिवार ही होता है दुनिया ये सारी लगती न्यारी
सुख-दुख में सभी साथ आते हैं हरदम पहले।

स्वस्थ और कुशल रहे सभी का कुटुंब-परिवार
चारों दिशाओं में फैले उसके निर्मल उजाले ।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

પોતે કોણ છે ને કોણ નથી' એ જાણવું, એનું નામ 'જ્ઞાન'. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/4f7dwX1E

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dadabhagwan1150

मिट्टी के सीवा मेरी कब्र मे कुछ और ना था,
वो जाने किस खजाने की तलाश मे कब्र खोदने आ गये!

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

🙏🙏हम खुद के लिए जीते हैं,
ज़ीना भी चाहिए पर एक हद तक सही है।

हमारे जीवन में आ रही खुशियां, ग़म, दर्द ए सब हमारे समय का एक हिस्सा है।

जिसे हमे समझना चाहिए पर उसे समझकर खुद के लिए ही जीने का लगाव अच्छी बात नहीं है।

कभी हमें हमारे 'अहम्' को त्याग कर किसी ओर के लिए भी जीना चाहिए,

किसी की खुशी में ख़ुद की खुशी बन जानीं चाहिए, किसी के दर्दको दूर करने की वज़ह बन जाना चाहिए।

हमें ख़ुद को इस तरह जीना चाहिए कि हमारी हिफाजत की दुआएं सब करे, सही है,,.?🦚🦚

parmarmayur6557

🙏🙏अपने परिवार के लिए 'सुदामा' बनना पड़े तो बन जाना चाहिए और दोस्त के लिए 'कृष्ण' की तरह झुकना पड़े तो भी झुक जाना चाहिए।🦚🦚

parmarmayur6557

Good Morning 🌄

harshparmar8722

आती है उसकी आवाजें
मगर नजर वो आती नहीं
लाख कोशीश करने पर भी
दिल से वो मेरे जाती नहीं

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

A Love In The Shadows - By Princy Tiwari

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anand5870

આપનાં વ્હીકલની સંતોષ પૂર્વક સર્વીસ કરી આપવામાં આવશે..
મોડીફાઈ કરી આપવામાં આવશે..

bhavnabhatt154654

पत्थर का बुत है तू, पिघलता क्यूं नहीं
कमी क्या है मेरी इबादत में, कहता क्यूं नहीं

ssatish

ssatish

Capital 'I'

'હું' ની આગળ પણ દુનિયા છે. મારી ખુશી, મારી પ્રાથમિકતા, મારું દુઃખ વગેરેની બહાર આવવું જરૂરી છે. Capital 'I' એ આપણા દેશની સંસ્કૃતિ નથી. આપણી સંસ્કૃતિ આપણી આજુબાજુના લોકોને સાથે લઈને ચાલવાનું શીખવે છે. No doubt જાતની સંભાળ રાખવી આપણી જવાબદારી છે પણ આપણા લોકોની સંભાળ રાખવી આપણી ફરજ છે. બરાબર ને..!?
©Shefali Shah

shefalishah