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मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌹🌹🙏🌹🌹

drbhattdamayntih1903

Happy Mother's Day 🌹

falgunidostgmailcom

HAPPY MOTHER'S DAY... 💖✨

inglepratik544gmail.com503499

મા - માત્ર એક અક્ષરનો શબ્દ.
ના ના. આ તો એક શબ્દનું આખું વાક્ય.
અરે ના ના! "મા" એટલે એક શબ્દનો
આખોય મોટો દળદાર ગ્રંથ!
જેટલી સરળતાથી એક મા આપણને સમજે છે,
એટલી જ સરળતાથી આપણે માને
સમજી શકતાં નથી, અને એ શક્ય પણ નથી.
એક અક્ષરનો શબ્દ હોવા
છતાંય એમાં દરેક બાળકની
આખી દુનિયા આવી જાય છે.
હસતાં, રમતાં, રડતાં, કામ કરતાં,
નિષ્ફળતા મળતાં, સફળતા મળતાં,
જીવનનાં કોઈ પણ તબક્કે સૌથી પહેલાં
જો કોઈ યાદ આવે તો એ "મા" છે.
પણ ક્યારેક કોઈ મા એટલી સારી હોય
છે ને કે ભગવાનને પણ એ માનાં બાળકથી
ઈર્ષ્યા થાય છે અને એ માને પોતાની પાસે
બહુ જ જલદી બોલાવી એક અપરિપક્વ
બાળકને મા વિના જીવવા માટે
આ દુનિયાને હવાલે કરી દે છે.
'એકાદ વાર તો વાત કર મા'😢


Miss you MAA🙏

s13jyahoo.co.uk3258

🙏🙏 Happy Mother's Day 🙏🙏

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ghanshyampatel1130

दिल्लगी करना किसीसे भी
आदत में तुम्हारी शुमार है।
मासूम तुम्हारी सूरत पर
आता हमको तो प्यार है।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

थामकर तुम्हारा हाथ,
सफ़र पर निकले हैं हम।
झील का ये शांत किनारा,
और महलों का ये साया,
कही अनकही सी बातें,
और प्यार का ये गहरा नशा।
शाम के रंगों में घुला,
हमारा ये सुनहरा लम्हा।

rammake323039

शाम की झील में जब चाँद उतरता है,
तेरे करीब होने का अहसास उभरता है।
यूं ही थामे रखना उम्र भर हाथ मेरा,
तेरे साथ ही मेरा हर दिन सँवरता है।

rammake323039

शाम की सुनहरी धूप और तेरी प्यारी सी मुस्कान,
जैसे मिल गया हो मुझे मेरा सारा जहान
यूं ही थामे रखना हाथ मेरा उम्र भर के लिए,
तेरे साथ ही मुकम्मल है मेरी हर एक दास्तान।

शायरी जो इनकी आँखों के प्यार को बयां करती है:
इन ढलती हुई किरणों में तेरा चेहरा गुलाब सा लगता है,
तेरे साथ बिताया हर पल एक खूबसूरत ख्वाब सा लगता है।
झील सी खामोशी और मेरे हाथों में तेरा हाथ,
अब तो उम्र भर चाहिए बस तेरा ही साथ।

rammake323039

🙏🙏'मां' एक शब्द ही काफी है,
रिश्तों की पुरी डिक्शनरी में,
स्नेह, ममता का महत्व समझाने के लिए,

जिस घर में बच्चों के लिए मां-बाप ही दुनिया है और मां-बाप के लिए बच्चे ही दुनिया है,

बस उस घर में फिर एक अलग ही खुशी, शांति और परस्पर प्रेम की भावनाएं होगी।🦚🦚

parmarmayur6557

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rajeshmaltii418166

**"જમીન ગઈ, ઘર ગયું ને ગઈ હાથની મૂડી,**
> **દીકરાના સુખમાં મા-બાપે પોતાની હાર્ય સ્વીકારી લીધી.**
> **પણ હવે જોવાનું એ છે કે શહેરની ઝાકઝમાળમાં,**
> **આ લોહીના સંબંધો ટકશે કે પછી સ્વાર્થની જીત થશે?"**

> 📖 **નવલકથા: માટીના મોહ, લોહીના શોષ (પ્રકરણ-૨)**

> 🔗 **વાંચવા માટે:** https://www.matrubharti.com/book/19992768/bloodthirsty-folk-chapter-2

> **(વાર્તા વાંચીને તમારો પ્રતિભાવ (Review) જરૂર આપજો આપનો પ્રતિભાવ પ્રેરણા રૂપ થશે અને આગળના પ્રકરણ માટે મને Follow કરજો 🙏)**
#drama #social #matrubharti #like #comments #imosnal

jadejaashoksinh111

मैं दिखूँ न दिखूँ बस मुझे अहसासों में महसूस कर लेना....!
मैं लिखूँ न लिखूँ बस मुझे शब्दों में ही पढ़ लेना....!
नजदीक हूं मैं तेरे दिल के इतना कि अपनी धड़कन मे मेरी धड़कन सुन लेना.......🍁🍂💞

narayanmahajan.307843

"मनाने रूठने के खेल में ,
हम बिछड़ जाएंगे ये सोचा नहीं था...!!"🥺💔

narayanmahajan.307843

"दिल पर लगी बातें ,
अक्सर चेहरे की रौनक छीन लेती है...!!"🥺❤️

narayanmahajan.307843

09/05/2026
विषय -अलग अलग कितने,

अलग-अलग कितने रूप होते हैं नारी के।
माता बनकर स्नेह लुंटाती है बच्चों पर।।

पतिव्रता बनकर हर धर्म-कर्म निभाती है।
परिवार को संजोए रखने के लिए समर्पित है।।

बेटी बनकर मात-पिता का ख्याल रखती है।
एक शिक्षीत नारी से दो कुलों सु-शोभित है।।

स्वरचित एवं मौलिक
©® डॉ दमयंती भट्ट

drbhattdamayntih1903

"અમુક વાર્તાઓ પૂરી નથી થતી કારણ કે જો એ પૂરી થઈ જાય, તો એ માત્ર મનોરંજન બનીને રહી જાય. પણ જો એ અધૂરી રહે, તો એ કાયમ માટે જીવતી લાગણી બની જાય છે."

વાંચો મારા ફેસબુક પર સુંદર વાર્તા.

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ronakjoshi2191

आज वीरता, स्वाभिमान और राजपूती आन-बान-शान के प्रतीक Maharana Pratap जी की जयंती है।
उनका जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था।
आज उनकी जयंती को पूरे 486 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनका साहस, त्याग और स्वाभिमान आज भी हर राजपूत के दिल में जिंदा है। ❤️‍🔥
उन्होंने हमें सिखाया कि
“हालात कितने भी कठिन क्यों न हों,
लेकिन अपने सम्मान और मातृभूमि के आगे कभी झुकना नहीं चाहिए।” ⚔️
महाराणा प्रताप ने जंगलों में रहना स्वीकार किया, घास की रोटी खाई, कठिन जीवन जिया…
लेकिन कभी भी मुगल सम्राट Akbar की अधीनता स्वीकार नहीं की।
हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक युद्ध नहीं था,
वो राजपूती स्वाभिमान की पहचान था। 🚩🦁
एक राजपूत होने के नाते आज दिल गर्व से भर जाता है कि
हम उस वीर भूमि और उस इतिहास से जुड़े हैं
जहाँ सम्मान के लिए लोग अपना सब कुछ कुर्बान कर देते थे। ❤️
“हम उस वंश से हैं
जहाँ तलवारें सिर्फ युद्ध नहीं,
सम्मान की रक्षा के लिए उठती थीं। ⚔️”
“राजपूत होना सिर्फ एक जाति नहीं,
यह साहस, स्वाभिमान और वफादारी की पहचान है। 👑”
“आज भी हमारे खून में वही जुनून बहता है,
जो कभी महाराणा प्रताप की तलवार में बहता था। 🔥”
“ना झुके थे, ना झुकेंगे…
क्योंकि हमारे इतिहास में महाराणा प्रताप जैसे वीर बसते हैं। 🚩”
“जिस मिट्टी ने महाराणा प्रताप जैसे शेर को जन्म दिया,
उस मिट्टी को मेरा बार-बार प्रणाम। 🙏”
आज के दिन हर राजपूत को अपने इतिहास, अपने संस्कार और अपने स्वाभिमान पर गर्व होना चाहिए। ❤️‍🔥⚔️
जय महाराणा प्रताप 🚩
जय मेवाड़ 🦁
जय राजपूताना ⚔️

aarushisinghrajpute

महाराणा प्रताप (9 मई 1540 - 19 जनवरी 1597) आज महाराणा प्रताप जी की जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। महाराणा प्रताप जी की वीरता और त्याग की गाथा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप जी का जन्म उत्सव उनकी वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो आज भी प्रेरणा प्रदान करता है।

महाराणा प्रताप जी मेवाड़ (राजस्थान) के सिसोदिया राजवंश के एक महान राजपूत योद्धा थे, जिन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने 1572 में गद्दी संभाली। 1576 के हल्दीघाटी युद्ध और बाद में छापामार युद्ध नीति से उन्होंने मुगलों को कड़ी टक्कर दी और मेवाड़ के स्वाभिमान की रक्षा की।

महाराणा प्रताप द्वारा घास की रोटी खाने की कहानी उनके अदम्य साहस और मुगलों के सामने न झुकने के संकल्प का प्रतीक है। हल्दीघाटी युद्ध के बाद, जब वे जंगलों में थे, तब उन्होंने मुगलों से लड़ने के लिए राजसी सुख त्यागकर जंगली घास (कोदो/रागी) के बीजों से बनी रोटियां खाई थीं।

महाराणा प्रताप जी को सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है श्याम नारायण पांडेय जी द्वारा रचित रचना 🙏 🙏

स्वर्गीय श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित "चेतक की वीरता" हल्दीघाटी के युद्ध पर आधारित कविता वीर रस की कालजयी रचना है, जो महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, चेतक की स्वामी भक्ति और मेवाड़ के स्वाभिमान को दर्शाती है।

चेतक की वीरता
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रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर,चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से,पड़ गया हवा को पाला था॥

गिरता न कभी चेतक-तन पर,राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर,या आसमान पर घोड़ा था॥

था यहीं रहा अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा था यहाँ नहीं
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं

जो तनिक हवा से बाँग हिली,लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं,तब तक चेतक मुड़ जाता था॥

कौशल दिखलाया चालों में,उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में,सरपट दौड़ा करवालों में॥
फँस गया शत्रु की चालों में
बढ़ते नद-सा वह लहर गया
फिर गया गया फिर ठहर गया
विकराल वज्रमय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया।

भाला गिर गया गिरा निसंग
हय घोड़ा टापों से खन गया अंग
बैरी समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग।

संकलन / प्रस्तुति
आभा दवे

चित्र गूगल से साभार 🙏

daveabha6

Happy Mother's Day!

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dadabhagwan1150