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Mother's Day — माँ के नाम
माँ
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— १ —
जब भी थकान ने आँखें मूँद लीं,
माँ की लोरी ने नींद सजाई थी।
अँधेरे में जो दीप जलाया था,
वो माँ की ही उँगली थी, वो माँ की ही रोशनाई थी।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— २ —
आँचल में जो सुकून मिला करता था,
वो दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलता।
झुलसती धूप में छाँव बनी रही,
माँ का प्रेम हर मौसम में खिलता।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ३ —
जब पाँव लड़खड़ाए राहों में,
माँ की दुआ ने थामा हर बार।
गिरने से पहले हाथ थे तेरे,
माँ, तू ही मेरा हर आधार।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ४ —
रोटी में तेरे हाथों की महक थी,
भोजन नहीं, वो प्रेम का भोग था।
दुनिया के हर स्वाद से ऊपर,
माँ के हाथों का अपना ही योग था।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ५ —
जब रोया मैं चुपके-चुपके रात को,
तू बिन बोले पास आ जाती थी।
आँसू पोंछने को शब्द नहीं चाहिए,
माँ की नज़र सब कुछ जान जाती थी।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ६ —
तूने कभी शिकायत न की ज़िन्दगी से,
हर तकलीफ़ को मुस्कान में ढाला।
त्याग को तूने नाम नहीं दिया,
बस चुपचाप हर पल को सँभाला।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ७ —
तेरी झुर्रियाँ मेरी कहानी हैं माँ,
हर लकीर में मेरा बचपन छुपा है।
तेरे सफ़ेद बालों में देखता हूँ,
मेरे लिए जो तूने सब कुछ चुका है।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ८ —
देव मंदिरों में ढूँढा ईश्वर को,
पर वो तो घर में ही मिलता रहा।
माँ के चरणों की धूल जो है,
हर तीर्थ से वो पावन निकला।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— ९ —
दूर हूँ आज, पर दिल में है तू,
हर साँस में तेरी दुआ बसी है।
जहाँ भी जाऊँ, जो भी पाऊँ,
माँ, तेरी ममता मेरे साथ चली है।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— १० —
शब्द कम पड़ते हैं तुझे कहने को,
सागर भी कलम बने तो कम होगा।
माँ, बस इतना जान ले —
तेरे बिना यह जीवन सूना, अधूरा, धुंधला होगा।
माँ — तू जीवन की पहली कविता है मेरी।
— कवि
Vijay Sharma Erry
विजय शर्मा 'एरी'
Mother's Day — 2026 🌸