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કુદરત અને સેક્સ એડ્યુકેશન... આ એક અદ્ભુત વિષય છે... કુદરત તરફ થી દેહ પ્રાપ્ત થાય છે.. અને દેહ નો સ્વભાવિક ધર્મ છે વિકસિત થવું... આ વિકાસ માટે કુદરતે કોઈ પણ જીવ માં મૂળભૂત વૃતિઓ આપી છે.. (૧) નિદ્રા (૨) ભૂખ તરસ (૩) સક્રિયતા અને સુરક્ષા (૪) ભય - પીડા (૫) સેક્સ...

આ ૫ કુદરતી વૃત્તિઓ થી જ કોઈ પણ જીવ નો વિકાસ અને પોષણ સંભવ છે. નિદ્રા, ભોજન ,પાણી, સક્રિય શરીર, સુરક્ષિત વાતાવરણ ,ભય અને પીડા અંગે સભાનતા અને રક્ષા રોજે રોજ ના જીવન માં ખૂબ આવશ્યક છે... અને એટલી જ આવશ્યક છે સેક્સ ની લાગણી...

સેક્સની વૃત્તિઓ પ્રેમ, સુખની લાગણીઓ અને મનુષ્ય માં રહેલી રચનાત્મક સર્જન ક્ષમતાઓ સાથે જોડાયેલ છે.

yashibc123gmail.com135615

"એક નાનકડું છમકલું" માં આજે..
શીર્ષક:- લગ્નના ૨૫ વર્ષ પછી...

ચાલ, કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ...

કંઈક દૂર સુધી જો સાથ તારો મળે,
તો ચાલ કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

ભૂલભુલૈયા જેવા નીરસ જીવનમાંથી,
ખોવાયેલા પ્રેમને ફરી ઝંઝોળીએ.

જિંદગી વીતી ગઈ રોજના કામકાજમાં,
ચાલ પ્રિયે, કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

એકલદોકલ હાસ્યના ઝરણાંને,
અટહાસ્યની નદીમાં આજે ફેરવીએ.

દિવસ-રાતના કાળચક્રને,
આજે ઘડીક રોકી દઈએ.

સમય કાઢી પ્રેમ નામનું
ખાબોચિયું તો ફરી ગોતીએ.

કા... કા... કરતા કાગડાને ભૂલી,
કોયલનો કલરવ સાંભળીએ.

ચાલ પ્રિયે...
કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

સમુદ્રની ભીની રેતીમાં,
તારું-મારું નામ લખીએ.

પહાડોની મહેફિલમાં,
તારા-મારા નામના પડઘા સાંભળીએ.

શબ્દોના તીરથી,
એકબીજાનું હૃદય તો કોતરીએ.

ચાલ પ્રિયે...
કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

જીવનમાં આને, તેને, બધાને,
સમય તો ઘણો ફાળવ્યો.

હવે થોડો સમય,
પોતાને પણ આપીએ.

પ્રેમ નામના થીજી ગયેલા શબ્દમાં,
ફરી જીવનની અગ્નિ પ્રગટાવીએ.

ચહેરા પર ઓઢેલા
સાંસારિક મુખોટા તો ઉતારીએ.

પ્રણય નામના જૂના શબ્દોને,
આજે ફરી વાગોળીએ.

વર્ષો વીતી ગયા,
પલક ઝપકાવ્યા વિના તને જોતાં.

ચાલ આજે,
આંખોમાં આંખો પરોવી,
એકબીજાનું પ્રતિબિંબ તો જોઈએ.

ઢળતી જતી જિંદગીનો
હવે શું ભરોસો કરવો?

આજે પૃથ્વી પર સૂઈએ તો,
કાલે કદાચ વૈકુંઠમાં સવાર થાશે,

ચાલ...
ઘડીક એકાંતમાં જઈ,
યાદોના હિંડોળા ઝુલાવીએ.

છેલ્લો શ્વાસ આવે, તે પહેલાં...
એકવાર ફરી,
પ્રેમનો આસ્વાદ માણીએ.

કંઈક દૂર સુધી જો સાથ તારો મળે,
તો ચાલ...

કોઈ નવી દુનિયામાં જઈએ.

✍️ જિગર અશોક પંડ્યા

pandyajigar

“Ramayana हमें...” और “Mahabharata हमें...” वाला मुख्य Hindi हिस्सा जरूर रखें—इससे Byte पढ़ने वाले को तुरंत समझ आएगा कि आपका पूरा लेख किस विषय पर है।

🌺 रामायण और महाभारत — एक संदेश, अनेक भाषाएँ 🌺

रामायण और महाभारत भारतीय संस्कृति के दो महान ग्रंथ हैं। दोनों हमें केवल प्राचीन कथाएँ नहीं बताते, बल्कि जीवन को समझने की दिशा भी देते हैं।

रामायण हमें प्रेम, परिवार, भाईचारा, त्याग, मर्यादा, धैर्य और अच्छे चरित्र का महत्व समझाती है। महाभारत हमें धर्म और अधर्म के बीच अंतर समझने, अपने कर्म और कर्तव्य को पहचानने तथा कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देती है।

दोनों का मूल संदेश यही है—सत्य, धर्म, मानवता, अच्छे संस्कार और सही कर्म के मार्ग पर चलना।

తెలుగు | Telugu

రామాయణం మనకు ప్రేమ, కుటుంబ విలువలు, త్యాగం, మర్యాద మరియు సోదరభావాన్ని నేర్పుతుంది. మహాభారతం ధర్మం, కర్మ, కర్తవ్యం మరియు కష్టకాలంలో సరైన మార్గాన్ని ఎంచుకోవడం నేర్పుతుంది.

தமிழ் | Tamil

இராமாயணம் அன்பு, குடும்பம், தியாகம், மரியாதை மற்றும் சகோதரத்துவத்தை கற்றுத் தருகிறது. மகாபாரதம் தர்மம், கர்மம், கடமை மற்றும் கடினமான நேரத்தில் சரியான பாதையைத் தேர்ந்தெடுக்க கற்றுத் தருகிறது.

मराठी | Marathi

रामायण आपल्याला प्रेम, कुटुंब, त्याग, मर्यादा आणि बंधुभाव शिकवते. महाभारत आपल्याला धर्म, कर्म, कर्तव्य आणि कठीण परिस्थितीत योग्य मार्ग निवडण्याची शिकवण देते.

ગુજરાતી | Gujarati

રામાયણ આપણને પ્રેમ, પરિવાર, ત્યાગ, મર્યાદા અને ભાઈચારો શીખવે છે. મહાભારત આપણને ધર્મ, કર્મ, કર્તવ્ય અને મુશ્કેલ સમયમાં સાચો માર્ગ પસંદ કરવાની શીખ આપે છે.

മലയാളം | Malayalam

രാമായണം നമ്മെ സ്നേഹം, കുടുംബബന്ധം, ത്യാഗം, മര്യാദ, സഹോദരസ്നേഹം എന്നിവ പഠിപ്പിക്കുന്നു. മഹാഭാരതം ധർമ്മം, കർമ്മം, കടമ, പ്രതിസന്ധികളിൽ ശരിയായ വഴി തിരഞ്ഞെടുക്കൽ എന്നിവ പഠിപ്പിക്കുന്നു.

বাংলা | Bengali

রামায়ণ আমাদের ভালোবাসা, পরিবার, ত্যাগ, মর্যাদা ও ভ্রাতৃত্বের শিক্ষা দেয়। মহাভারত আমাদের ধর্ম, কর্ম, কর্তব্য এবং কঠিন পরিস্থিতিতে সঠিক পথ বেছে নেওয়ার শিক্ষা দেয়।

اردو | Urdu

رامائن ہمیں محبت، خاندان، قربانی، عزت اور بھائی چارے کی تعلیم دیتی ہے۔ مہابھارت ہمیں دھرم، کرم، فرض اور مشکل حالات میں صحیح راستہ اختیار کرنے کا درس دیتی ہے۔

ਪੰਜਾਬੀ | Punjabi

ਰਾਮਾਇਣ ਸਾਨੂੰ ਪਿਆਰ, ਪਰਿਵਾਰ, ਤਿਆਗ, ਮਰਿਆਦਾ ਅਤੇ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਮਹਾਭਾਰਤ ਸਾਨੂੰ ਧਰਮ, ਕਰਮ, ਫਰਜ਼ ਅਤੇ ਔਖੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸਹੀ ਰਸਤਾ ਚੁਣਨਾ ਸਿਖਾਉਂਦੀ ਹੈ।

🌸 एक अंतिम संदेश

भाषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता का संदेश एक है।

रामायण हमें सिखाती है कि जीवन में मर्यादा, प्रेम और अच्छे चरित्र के साथ कैसे जीना है।

महाभारत हमें सिखाता है कि जब जीवन कठिन हो जाए, तब धर्म, विवेक और सही कर्म का मार्ग कैसे चुनना है।

हम किसी भी भाषा में पढ़ें, किसी भी प्रदेश में रहें और हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति अलग क्यों न हो—सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, कर्तव्य और मानवता का मूल्य सबके लिए समान है।

आइए केवल इन महान ग्रंथों को पढ़ें नहीं, बल्कि इनके अच्छे संदेश को अपने जीवन में उतारें। 🌺

🙏 जय श्रीराम।
🙏 जय श्रीकृष्ण।
🌸 धर्म की जय हो, मानवता की विजय हो।

skptech

Jai shree Ram

skptech

એડજસ્ટ એવરીવ્હેર' આ વાક્ય તમારો સંસાર 'ટોપ' ઉપર લઈ જશે. વ્યવહારમાંય 'ટોપ' ઉપર ગયા સિવાય કોઈ મોક્ષે ગયેલો નહીં. વ્યવહાર તમને ના છોડે, ગૂંચવ ગૂંચવ કરે તો તમે શું કરો? માટે વ્યવહારનો ફટાફટ ઉકેલ લાવો. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

*काश हम रोक पाते*

काश हम रोक पाते
उम्र को बढ़ने से
जवानी को ढलने से
बुढ़ापे को चेहरे पे आने से

कितना मुश्किल होता है
स्वीकार करना बढ़ती उम्र को
चेहरे की झुर्रियों को
टूटते रिश्तों को,
दूर होते अपनों को

क्यों इतनी तेजी से बढ़ता समय
सबके चेहरे बेनकाब करता
आईना भी जब सवाल करता
है कौन मेरा अपना यहां
किसका हूं मैं इंतजार करता

बीतता समय जब डराने लगे
अपना चेहरा भी अनजाना लगे
आईना भी जब बेगाना लगे
दो शब्द प्रशंसा की चाह में
खोया ये सारा जमाना लगे

तब संभल जा ए दिल
सत्य को झुठला नहीं सकते
जिंदगी की सांसे भले कम हों
उन्हें रोकर यूं बिता नहीं सकते

प्रकृति से सीखो खिलना और मुरझाना
दो पल की जिंदगी, जग को महका जाना
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

📙 ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं ✍️

mamtagirishtrivedi740648

#गोडाधोडाचे_पदार्थ

भोपळ 🍈घारगे

🍈साहित्य
दोन वाटी लाल भोपळा किस
एक मोठा चमचा तूप
एक वाटी कणीक
अर्धी वाटी तांदुळ पीठी
एक वाटी गूळ
सुंठ पावडर अथवा वेलदोडे पावडर
खसखस

🍈कृती

🍈प्रथम भोपळा कीस तुपावर परतून घ्यावा
थोडा मऊ झल्यावर त्यात गूळ घालून शिजवून घ्यावे
गार झाल्यावर सुंठ पावडर अथवा वेलदोडे पावडर घालुन चांगले एकत्रित करावे

🍈या मिश्रणात कणीक व तांदूळ पिठी घालून मिसळून घ्यावे
चवीला थोडे मीठ घालावे

🍈हा भिजवलेला गोळा मऊसर असावा
लागल्यास थोडे दूध भिजवताना वापरावे
हा गोळा तीन ते चार तास झाकून ठेवावा

🍈घारगे करताना कढईत तेल चांगलें तापवून
नंतर आच मंद ठेवावी

🍈भिजवलेल्या पिठाचे लहान गोळे करून
हातावर अथवा पोळपाटावर थापावे
(अजिबात लाटू नये )
वरती खसखस लावून मंद आचेवर तळावे

🍈वरून चांगले टमटमित फुगलेले आणि आतून मऊ लुसलुशीत चवदार घारगे तयार होतात

🍈नुसते अथवा साजुक तुपासोबत छान लागतात 🙂

jayvrishaligmailcom

मित्र हो नमस्कार- ही चारोळी तुमच्यासाठी

arunvdeshpande

बात जब जब चीख कर करता हूँ मैं,
तब बहुत छोटा नजर आता हूँ मैं ।।

मूढ़ सा मगरूर सा मजबूर सा,
आप ही में तो बड़ा बनता हूँ मैं ।।

बेवजह यूँ ही समय के चौक पर,
बस अकड़कर के खड़ा मिलता हूँ मैं ।।

सोच पर चिपकी हजारों चकतियां,
सोचता हूँ मैं बहुत उम्दा हूँ मैं ।।

यूँ उफनती हैं “विजय” की हसरतें,
खास से भी गैर सा लड़ता हूँ मैं ।।

“मैं” अरे मैं तो अहम् का बीज हूँ,
हर कहीं हर दौर में उगता हूँ मैं ।।

@सर्वाधिकार सुरक्षित-डाॅ.विजय प्रताप शाही
गोरखपुर, 9935025901,6388236360

vijaypshahi

"…नहीं सुनती हो ना..."

सुनो...
इश्क बेपनाह है तुमसे
अपने होने का अहसास तक खो जाता हु
जब काले लहराते जंगल की गुत्थी सुलझाने
लग जाता हु

नहीं सुनती तुम
शर्मा के चेहरे पे हथेलियां रख देती हो
हाथों के उन मुलायम स्पर्श भरे तलुवु से
मुझे न जाने कितनी जलन महसूस होती है

सच में
रस्सी पर सूखते
पीले, लाल, गेरूए,
कपड़ो को,
या चूड़ियों की खनक को भी
मैं अपना रकीब समझ लेता हु
वे भी तो छू पाते है तुम्हें
जिसकी कल्पना में मैं डूब के पार हो जाता हु।

सुनती कहां हो तुम
मेरे रकीब न जाने कितने
देखो हंसों मत
कसम से कहता हु
उन रकीबी के नाम मैं सहता हु

ये बहती हवा
जो तुम्हें सुकून सा देती है
रकीब है मेरी,

आसपास फैली हरी घास
अपनी रकीबियत दिखाती हैं मुझे
क्या वे भी मुझसे उतनी ही ईर्ष्या करती होगी
जितनी मैं उससे करता हु,
जब मैं तुम्हारे केसों के वन में अपना रास्ता भूल जाता हु।

सुना न तुमने
अब छोड़ो मुझे ये बाल संवारने है
वही इश्क बेपनाह करते हुए
न जाने कितने जन्म आगे
लेने या अब मरने है

रात में बाल्कनी में आ जाना तुम
हिर की तरह न छोड़ जाना तुम
काजी क्या ही बिगाड़ लेगा
लेकिन एक दिन सबको पता चल ही जाएगा
की तुम सुनती नहीं हो
की मैं इश्क बेपनाह करता हु तुमसे
की इंतजार अब भी बाकी है
अब छोड़ो मुझे सवार दी है चोटी तुम्हारी
अपने हिस्से का उजास देकर
छिन लिया है इस जंगल का अंधकार

पक्का सुन लिया तुमने
और समझ भी गई तुम कि,
अब देर नहीं होगी
जाता हु मैं, बाल्कनी में राह तकना मेरी
जाना ही होगा मुझे
मेरा रकीब जो आता होगा।

anupgajare819691

आजकल का इश्क़ भी
बड़ा मॉर्डन हो चला है
प्यार करने वालों के सीने में
रबर का दिल मिला है
गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

🚂 THE LAST TRAIN TONIGHT 🌙

What if the last train wasn't meant for the living?

A quiet railway platform.
A forgotten station.
A train that should never have arrived.
And a story that refuses to be forgotten.
This is one of the first stories I'm sharing as I begin my writing journey.
Every page has been written with a love for eerie atmospheres, unsettling mysteries, and the kind of endings that linger long after you've finished reading.
If you enjoy slow-burning suspense, abandoned places, and stories that whisper instead of scream, I hope you'll step aboard.

📖 The Last Train Tonight is now available to read.

Thank you for supporting my journey as a writer.
— Pallavi Das
Writing as Noctis Whisper

pallavidas



प्रेम कभी नहीं मरता, वो बस छूट जाता हैं

anisroshan324329

"मालूम है ये मुझको कि... ख़्वाब झूठे हैं और ख़्वाहिशें अधूरी हैं...+

जानकर भी ये अनजान बन जाने में... झूठे को ही सही... हसरतें कुछ नई जगाने में...

मज़ा ही कुछ और है..."

ज़िंदगी का हर ख़्वाब हक़ीक़त नहीं बनता, लेकिन उम्मीदें हमें जीने की वजह ज़रूर दे जाती हैं। कभी-कभी अधूरे सपनों के साथ मुस्कुराना भी एक खूबसूरत सफ़र होता है।

अगर ये अल्फ़ाज़ आपके दिल को छू जाएँ, तो Comment करें, साझा करें। Like करें, Share करें और अपने दोस्तों के साथ ज़रूर

anisroshan324329

दिल का notification #05
माँ के हाथ का स्वाद... ❤️

भूख तो हर जगह मिट जाती है...

कभी होटल में,
कभी दोस्तों के साथ,
और कभी अकेले भी...

पर पता नहीं क्यों,
जब भी घर जाता हूँ,
रसोई से आती वो खुशबू
फिर से बच्चा बना देती है।

वो मेरी रोज़ की तय थाली,
वो माँ के हाथ की मेरी पसंदीदा सब्ज़ी...
हम्म्म...

माँ की थाली में
दाल, रोटी और सब्ज़ी ही तो होती है...
फिर भी,
उसमें एक स्वाद ऐसा होता है...

जो दुनिया के किसी खाने में नहीं मिलता।

बाहर खाकर
पेट तो हर जगह भर ही जाता है...

बस...
एक दिल है...

जो आज भी...
नहीं भरता।

धड़कते रहिए..❤️
✍️ जिगर अशोक पंड्या

-----------*---*****--------
अगर आपको भी माँ की याद आई होतो उन्हें फोन या मैसेज जरूर कीजिए गा।

{ 💌अगला नोटिफिकेशन:
"प्यारमे नाराजगी जायज़ है"}

pandyajigar

“मैं बड़ी कब हो गई?”
पता ही नहीं चला…
कब बचपन की वो छोटी-सी लड़की
सबकी नज़रों में “बड़ी” हो गई।
शायद उस दिन,
जब मैंने रोने से पहले ये सोचना सीख लिया
कि मेरे रोने से घर में किसी को परेशानी तो नहीं होगी।
शायद उस दिन,
जब अपनी पसंद से पहले
दूसरों की ज़रूरतें समझने लगी।
शायद उस दिन,
जब लोगों ने कहना शुरू किया—
“तुम तो समझदार हो, तुम संभाल लोगी।”
और मैं हर बार मुस्कुरा दी…
क्योंकि किसी ने पूछा ही नहीं
कि मैं संभालना चाहती भी हूँ या नहीं।
दूसरों की नज़रों में मैं कब बड़ी हुई,
ये आज तक समझ नहीं आया…
बस इतना पता है—
जिस उम्र में मुझे किसी का हाथ पकड़कर चलना था,
उस उम्र में मैंने खुद अपने कदम संभालना सीख लिया।
और शायद यही वजह है…
कि आज भी कभी-कभी
दिल करता है कोई प्यार से कहे—
“तुम बड़ी नहीं हुई हो…
आज भी हमारी छोटी-सी बच्ची हो।” 🥺❤️
#bydiksha

dikshaparashar.699046

Do you know that you should donate one-fifth of your earnings? Either offer it to God in the temple or use it for the welfare of people.

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dadabhagwan1150

शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं

एक उम्र पर आकर
शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं
अक्सर बहुत बोलने वाले
मौन क्यों हो जाते हैं

आसमां वही है, वही है धरती
मौसम के मायने बदल क्यों जाते हैं
जिसको पाने की जिद में उम्र गुजारी
उसको पाकर भी हाथ खाली रह जाते हैं

खुशी एक छलावा है क्षणिक पल भर का
वो पल बीतते ही भाव खुशी के
नीरस हो जाते हैं

जाने किस अंधी दौड़ में
दौड़ रही है दुनिया सारी
जब सब कुछ खो जाए
कुछ पाने के अर्थ व्यर्थ हो जाते हैं

कभी जिससे बात करने को
तरसता था मन सारे दिन
सामने पाकर उसे अपने
लब खामोश क्यों हो जाते हैं

चारों तरफ मेला है भीड़ का
फिर भी क्यों हम खुद को
भरे मेले में अकेला पाते हैं

गलत कहते हैं लोग अक्सर
अज्ञानता दुख का कारण है
मैंने तो देखा है अक्सर
सब जानकर रिश्ते टूट जाते हैं।

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

drvandnasharma8596

" એક જિદ્દ "

જિદ્દ બસ એમને પામવાની છે.
દિલના ધબકારાને થામવાની છે.

ટકી શકે છે દરેક સંબંધો પણ,
અપેક્ષાઓને જરા ડામવાની છે.

બહુ દિવસ થયા તને જોઈ નથી,
વાત મોસમને હવે જામવાની છે.

નજર ન લાગે જમાનાની ક્યાંક,
દુઆ ઈશ્વર સામે નામવાની છે.

આ સાદગી ખેંચે છે તારા તરફ,
વાત ક્યાં આભને આંબવાની છે.

મનની મનમાં રાખીને કરવુંય શું?
'વ્યોમ' જિંદગી તો માણવાની છે.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અજાર. મુ. રાપર.

omjay818